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Wednesday, April 8, 2026

सलूम्बर में फैली अज्ञात बीमारी पर बड़ा एक्शन, घर-घर सर्वे शुरू

राजस्थान के सलूम्बर जिले के लसाड़िया ब्लॉक के घाटा और लालपुरा गांवों में फैली अज्ञात बीमारी के कारण अब तक 7 बच्चों की मौत हो चुकी है। इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने "हाई अलर्ट" मोड पर बड़े पैमाने पर एक्शन शुरू कर दिया है। राजस्थान के सलूम्बर जिले में बच्चों की मौत के मामलों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर स्वास्थ्य अभियान शुरू किया है। इस मामले में अज्ञात बीमारी की जांच के लिए तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं।


मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के निर्देश पर उदयपुर संभाग के सभी सात जिलों में निगरानी और रोकथाम अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर भी स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। सरकार ने विशेषज्ञ टीमों का गठन किया है, जो बीमारी के कारणों की जांच कर रही हैं। साथ ही RNT Medical College की टीम और राज्य स्तरीय दल ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर इलाज और जांच व्यवस्था का आकलन किया।


स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 3,690 टीमों ने घर-घर जाकर सर्वे किया है और 52,000 से अधिक घरों को कवर किया गया है। इस दौरान 275 लोगों में बीमारी के लक्षण पाए गए, जिनमें से 25 को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पतालों में भेजा गया। इसके अलावा 13,000 से अधिक स्थानों पर जागरूकता अभियान भी चलाया गया, ताकि लोग सावधानी बरत सकें। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सलूम्बर के सेमारी गांव में 4 साल के एक बच्चे की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं, 651 मरीजों को मौके पर ही इलाज दिया गया।


बीमारी को फैलने से रोकने के लिए मच्छरजनित रोगों के खिलाफ भी अभियान चलाया गया, जिसमें 2,557 स्थानों पर एंटी-लार्वा गतिविधियां की गईं। जांच के लिए 1,796 ब्लड स्लाइड तैयार किए गए और 94 सैंपल लैब में भेजे गए हैं। सरकार ने लोगों से अपील की है कि अगर किसी को बुखार या अन्य लक्षण दिखें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें और सभी स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का पालन करें।


स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन और घर-घर सर्वे:

  • 3,690 टीमें तैनात: सरकार ने पूरे संभाग में 3,600 से अधिक टीमें तैनात की हैं।
  • 52,000 घरों का सर्वे: इन टीमों ने अब तक 52,000 से अधिक घरों का दरवाजा खटखटाकर स्वास्थ्य जांच की है।
  • 275 संदिग्ध मरीज मिले: सर्वे के दौरान बीमारी के लक्षण वाले 275 लोगों की पहचान की गई, जिनमें से 25 को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पतालों में भेजा गया है।
  • विशेषज्ञों की निगरानी: मुख्यमंत्री के निर्देश पर जयपुर और उदयपुर के विशेष डॉक्टरों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में डेरा डाले हुए हैं। 


बीमारी के मुख्य लक्षण और वर्तमान स्थिति:

  • लक्षण: प्रभावित बच्चों में तेज बुखार, उल्टी, पेट दर्द, दस्त और शरीर में ऐंठन जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। बीमारी इतनी गंभीर है कि कुछ मामलों में 24 घंटे के भीतर ही बच्चे दम तोड़ रहे हैं।
  • प्रभावित आयु वर्ग: मरने वाले सभी बच्चों की उम्र मुख्य रूप से 2 से 4 वर्ष के बीच है।
  • जांच: शुरुआती सैंपल्स में कुछ सामान्य वायरस की रिपोर्ट नेगेटिव आई है, इसलिए बीमारी का सटीक कारण अभी भी "अज्ञात" बना हुआ है।
  • निवारक उपाय: प्रशासन द्वारा गांवों में फोगिंग, एंटी-लार्वा छिड़काव और लोगों को उबला हुआ पानी पीने की सलाह दी जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

Tuesday, April 7, 2026

योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, ग्रेटर नोएडा में ‘मेट्रो विश्वविद्यालय’ को मंजूरी

उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 7 अप्रैल 2026 को हुई बैठक में ग्रेटर नोएडा में एक नए निजी विश्वविद्यालय, ‘मेट्रो विश्वविद्यालय’ (Metro University), की स्थापना को मंजूरी दे दी है।


योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में उच्च शिक्षा से जुड़े अहम प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत ग्रेटर नोएडा में निजी क्षेत्र के अंतर्गत ‘मेट्रो विश्वविद्यालय’ की स्थापना को स्वीकृति दी गई है। इसे प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि यह निर्णय उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के तहत लिया गया है। इस अधिनियम के माध्यम से निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, विनियमन और संचालन की स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।


मंत्री ने बताया कि प्रायोजक संस्था सनहिल हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से आवंटित 26.1 एकड़ भूमि पर ‘मेट्रो विश्वविद्यालय’ स्थापित करने का प्रस्ताव दिया गया था। विधिक परीक्षण के बाद इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके लिए ‘उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ लागू करने और संस्था को संचालन प्राधिकार-पत्र जारी करने का भी निर्णय लिया गया है।


सरकार का मानना है कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना से प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा के नए अवसर सृजित होंगे। इससे युवाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास के बेहतर मौके मिलेंगे, जिससे उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी।


योगी सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने पर जोर दे रही है। नए विश्वविद्यालयों की स्थापना से न केवल शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।


इसके अलावा कैबिनेट ने शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में भी बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। शिक्षामित्रों का मानदेय 10,000 रुपए से बढ़ाकर 18,000 रुपए प्रतिमाह कर दिया गया है, जिससे प्रदेश के लाखों शिक्षा कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा।


इस परियोजना के मुख्य विवरण निम्नलिखित हैं:

  • क्षेत्रफल और स्थान: यह विश्वविद्यालय ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा आवंटित 26.1 एकड़ भूमि पर बनाया जाएगा।
  • प्रस्तावक संस्था: इस विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव सनहिल हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड (Sunhill Healthcare Pvt Ltd) द्वारा दिया गया था।
  • कानूनी ढांचा: इसकी स्थापना 'उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019' के प्रावधानों के तहत की जाएगी. इसके लिए जल्द ही एक अध्यादेश (Ordinance) लाया जाएगा।


मुख्य उद्देश्य:

  • राज्य में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना और छात्रों को आधुनिक शिक्षा प्रदान करना।
  • उद्योग की जरूरतों के अनुसार कौशल-आधारित और रोजगारपरक पाठ्यक्रम (Job-oriented courses) उपलब्ध कराना।
  • स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर और निवेश को प्रोत्साहित करना।


उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के अनुसार, यह कदम उत्तर प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने और युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय है।

Thursday, April 2, 2026

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना कार्यक्रम में सम्मिलित होने 18 अप्रैल तक जमा कर सकते हैं आवेदन

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना (आदिवासी समुदाय के लिए) के तहत वर्ष 2026-27 में जिला स्तरीय कार्यक्रम गोंड गुरूआ बाबा (तारानगर) न्यास ग्राम पंचायत धामधूसर तहसील गौहरगंज में 23 अप्रैल 2026 को अतिरिक्त तिथि निर्धारित की गई है। 


जिला पंचायत सीईओ श्री कमल सोलंकी द्वारा सामूहिक विवाह आयोजन हेतु आयोजक जनपद पंचायत सीईओ औबेदुल्लागंज और नोडल अधिकारी श्री मनोज बॉथम उप संचालक सामाजिक न्याय विभाग को बनाया गया है। सामूहिक विवाह में सम्मिलित होने वाले वर-वधु द्वारा आवेदन फार्म शासन द्वारा निर्धारित पात्रता मापदण्ड शर्तो के अधीन 02 अप्रैल से 18 अप्रैल 2026 तक जनपद पंचायत कार्यालय औबेदुल्लागंज में जमा किए जा सकते हैं।


निर्धारित तिथि उपरांत प्राप्त आवेदन मान्य योग्य नहीं होंगे। सामूहिक विवाह हेतु प्राप्त आवेदनों की संख्या शासन द्वारा निर्धारित अधिकतम संख्या 200 से अधिक होने की स्थिति में पहले आओ पहले पाओ के माध्यम से जोड़ो का चयन किया जाएगा। चयन प्रक्रिया उपरांत सामूहिक विवाह में सम्मिलित होने वाले वैवाहिक जोड़ों की सूची का प्रकाशन 20 अप्रैल 2026 तक किया जाएगा।  


आवश्यक दस्तावेज: आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, बीपीएल राशन कार्ड, कन्या का बैंक खाता विवरण और पासपोर्ट साइज फोटो।


आवेदन प्रक्रिया: आप आधिकारिक वेबसाइट (राज्य अनुसार) के माध्यम से ऑनलाइन या संबंधित विकासखंड कार्यालय में ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं।

Saturday, March 28, 2026

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने मां महागौरी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की

वासंतिक चैत्र नवरात्री की अष्‍टमी ति‍थि‍ पर उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्‍वर योगी आदित्‍यनाथ ने कल गोरखनाथ मंदिर में स्थित शक्तिपीठ में मां महागौरी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। वैदिक मंत्रोच्‍चार के बीच मुख्‍यमंत्री ने राज्‍य के लोगों के कल्‍याण के लिए मां आदि शक्ति जगत जननी की प्रार्थना की तथा गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुसार आरती और हवन किया। 


गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर में वासंतिक नवरात्र की अष्टमी तिथि पर मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने शक्तिपीठ में मां महागौरी की विशेष पूजा-अर्चना की। उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन और आरती कर प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। मंदिर में इस अवसर पर कन्या पूजन का भी अनुष्ठान किया गया। 


अष्टमी पूजा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माता की आठवीं शक्ति महागौरी की विधि-विधान से पूजा की, जो पवित्रता और शांति का प्रतीक है।

अनुष्ठान: गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुसार माता की आरती और लोकमंगल के लिए हवन संपन्न हुआ।

महत्व: चैत्र नवरात्र के दौरान गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में विशेष धार्मिक अनुष्ठान और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है।

कन्‍या पूजन: अष्टमी के दिन ही, मुख्यमंत्री ने कन्याओं के पैर पखारकर और उन्हें भोजन कराकर कन्या पूजन की परंपरा को निभाया। 


गोरखनाथ मंदिर का शक्तिपीठ नाथ पंथ की परंपरा में आध्यात्मिक ऊर्जा का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है।

गोरखनाथ मंदिर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में स्थित नाथ संप्रदाय का सबसे प्रमुख और पवित्र केंद्र है। यह मंदिर महायोगी गुरु गोरखनाथ को समर्पित है, जिन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है। 52 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला यह मंदिर न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है, बल्कि गोरखपुर की सांस्कृतिक पहचान भी है।


मुख्य जानकारी और आकर्षण

अखंड ज्योति: मंदिर के गर्भगृह में एक 'दिव्य ज्योति' जलती रहती है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह गुरु गोरखनाथ के समय से ही निरंतर प्रज्वलित है।

खिचड़ी मेला: प्रतिवर्ष मकर संक्रांति (14 जनवरी) के अवसर पर यहाँ एक महीने तक चलने वाला भव्य 'खिचड़ी मेला' आयोजित होता है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने आते हैं।

भीम सरोवर और मंदिर: मंदिर परिसर में पांडव पुत्र भीम की एक विशाल प्रतिमा और एक सरोवर (भीम सरोवर) स्थित है, जहाँ श्रद्धालु नौका विहार (boating) का आनंद ले सकते हैं।

महंत: वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मंदिर और गोरखनाथ मठ के मुख्य महंत हैं।

गौशाला: परिसर में एक बड़ी गौशाला (Goshala) भी है, जहाँ विभिन्न नस्लों की गायों की सेवा की जाती है।


इतिहास और निर्माण

प्राचीनता: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु गोरखनाथ ने त्रेता युग में इसी स्थान पर तपस्या की थी।

पुनर्निर्माण: मध्यकाल में अलाउद्दीन खिलजी और औरंगजेब जैसे शासकों द्वारा मंदिर को क्षति पहुँचाई गई थी, लेकिन बाद में महंत दिग्विजय नाथ और महंत अवैद्यनाथ जी के प्रयासों से इसका भव्य आधुनिक स्वरूप तैयार हुआ।


दर्शन के लिए विवरण

समय: मंदिर दर्शन के लिए प्रतिदिन प्रातः 4:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक खुला रहता है।

प्रवेश शुल्क: मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है।

स्थान: यह गोरखपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 4 किमी की दूरी पर नेपाल रोड (सोनौली राजमार्ग) पर स्थित है।

जनगणना 2027 हेतु फिल्ड ट्रेनर प्रशिक्षण का हुआ शुभारंभ

कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा जनगणना 2027 हेतु फिल्ड ट्रेनर प्रशिक्षण का शुभारंभ गत दिवस किया गया। यह प्रशिक्षण 31 मार्च, 2026 में मध्य जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान राजगढ में प्रातः 9.30 से सांय 5.30 तक संचालित होगा। इसमें जनगणना प्रथम चरण जिसमें मकान सूचीकरण, नजरी नक्शा तैयार कर एवं जनगणना एप पर कार्य करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह फिल्ड ट्रेनर चार्ज स्तर पर 01 अप्रैल, 2026 से 22 अप्रैल, 2026 के मध्य प्रगणक एवं सुपरवाईजर को प्रशिक्षण प्रदान करेगें। तदउपरांत प्रगणक, सुपरवाईजर 01 मई, 2026 से 30 मई, 2026 तक प्रथम चरण पर मकान सूचीकरण का कार्य संपन्न करेगें।


प्रशिक्षण में जिला जनगणना अधिकारी श्रीमती ज्योति बगवैया, सहायक जनगणना अधिकारी श्री के.के. राज, श्री शीतल कोसरवाल, श्री असद नजीर एवं स्टॉफ सम्मिलित रहेगे। प्रशिक्षण का संचालन श्री डी.के. साहू एवं श्री देवेन्द्र दुबर्ग द्वारा किया जाएगा।


फील्ड ट्रेनर (Field Trainer)

एक ऐसा पेशेवर होता है जो कर्मचारियों या प्रशिक्षुओं को उनके कार्यस्थल (ऑन-फील्ड) पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करता है। इनका मुख्य काम किताबी ज्ञान को वास्तविक काम में बदलना होता है। वर्तमान में (मार्च 2026), भारत में जनगणना (Census) के संदर्भ में फील्ड ट्रेनर्स की भूमिका काफी चर्चा में है।


फील्ड ट्रेनर की मुख्य भूमिकाएँ और जिम्मेदारियाँ

व्यावहारिक प्रशिक्षण: ये प्रशिक्षुओं को सीधे कार्यस्थल पर ले जाते हैं और उन्हें काम करने का सही तरीका सिखाते हैं।

जनगणना में भूमिका: जनगणना के दौरान, फील्ड ट्रेनर्स सुपरवाइजर और एन्युमरेटर (गणनाकारों) को मोबाइल ऐप के जरिए डेटा दर्ज करने और गणना की बारीकियां सिखाने के लिए जिम्मेदार होते हैं。

सॉफ्ट स्किल्स और सेल्स: कॉर्पोरेट क्षेत्र में, ये सेल्स टीम को ग्राहकों से बात करने की कला, नेतृत्व क्षमता और रिटेल स्टोर प्रबंधन के गुर सिखाते हैं।

फीडबैक और मूल्यांकन: ये लगातार प्रशिक्षुओं के प्रदर्शन पर नजर रखते हैं और सुधार के लिए तुरंत सुझाव देते हैं।

विशिष्ट विभागों में: पुलिस, रेलवे या स्वास्थ्य सेवाओं में ये नए अधिकारियों को ऑन-ड्यूटी प्रोटोकॉल और सुरक्षा नियमों का अभ्यास कराते हैं। 


फील्ड ट्रेनर के प्रमुख कार्यक्षेत्र

सरकारी योजनाएं: जैसे जनगणना-2027 का प्रशिक्षण कार्यक्रम जो वर्तमान में विभिन्न जिलों (जैसे राजगढ़, छपरा, नालंदा) में चल रहा है।

रिटेल और कॉर्पोरेट: कर्मचारियों को उत्पाद की जानकारी और बिक्री तकनीक सिखाना।

सुरक्षा और पुलिस: नए रंगरूटों को जमीनी स्तर पर गश्त और कानून व्यवस्था संभालने का प्रशिक्षण देना।

रेलवे: ट्रेन मैनेजर्स और लोको पायलटों को सेक्शन लर्निंग और टेक्निकल कपलिंग जैसे कार्य सिखाना।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन आज झारखंड का दौरा करेंगे, वर्चुअल रियलिटी केस रिपॉजिटरी का भी शुभारंभ करेंगे

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन आज झारखंड में भारतीय प्रबंधन संस्थान – आईआईएम, रांची के 15वें दीक्षांत समारोह में भाग लेंगे और वर्चुअल रियलिटी केस रिपॉजिटरी का भी शुभारंभ करेंगे।

 

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे।

 

उपराष्ट्रपति आज बिरसा मुंडा हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे और खूंटी के उलिहातु गांव जाएंगे, जो आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा का जन्मस्थान है। वहां वे उनके वंशजों से मिलेंगे और पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। श्री राधाकृष्णन रांची के बिरसा मुंडा परिसर और बिरसा चौक स्थित बिरसा मुंडा की प्रतिमाओं पर भी पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। बाद में, वे आई.आई.एम. रांची के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।


वर्चुअल रियलिटी (VR) केस रिपॉजिटरी से जुड़ी खास बातें

वर्चुअल रियलिटी (VR) केस रिपॉजिटरी एक डिजिटल डेटाबेस है, जो विभिन्न क्षेत्रों—जैसे शिक्षा, चिकित्सा (पुनर्वास), रक्षा, और फोरेंसिक (अपराध स्थल पुनर्निर्माण)—से संबंधित इमर्सिव 3D सिमुलेशन और मामलों का अध्ययन (case studies) संग्रहीत करता है। यह तकनीक उपयोगकर्ताओं को जटिल परिदृश्यों का यथार्थवादी अनुभव प्रदान करती है।

वर्चुअल रियलिटी केस रिपॉजिटरी के मुख्य अनुप्रयोग:

  • चिकित्सा और पुनर्वास (Medical & Rehabilitation): वीआर स्ट्रोक के मरीजों के लिए संज्ञानात्मक पुनर्वास (cognitive rehabilitation) और मोबिलिटी डिवाइस-मिक्स्ड रियलिटी (MD-MR) जैसे नैदानिक ​​परिणाम प्रदान करता है, जो निपुणता और पकड़ की ताकत में सुधार करते हैं।
  • न्यायिक और फोरेंसिक (Forensic & Legal): अपराध स्थल का पुनर्निर्माण (Crime scene reconstruction) करना, जहां 2D छवियों से वर्चुअल टूर बनाकर अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत किए जाते हैं।
  • शिक्षा और प्रशिक्षण (Education & Training): आईआईएम (IIM) जैसे संस्थानों में केस स्टडीज के लिए इस्तेमाल, साथ ही सेना में खतरनाक परिस्थितियों का सुरक्षित अभ्यास।
  • अनुसंधान और विकास (Research): यह एक बहुविषयक क्षेत्र है, जो वर्चुअल, ऑगमेंटेड (AR) और मिक्स्ड रियलिटी (MR) पर मौलिक शोध प्रकाशित करता है।


प्रमुख उपयोगकर्ता और लाभ:

  • शिक्षक और छात्र: जटिल विषयों को 3D में समझने के लिए।
  • चिकित्सक: मरीजों के पुनर्वास के लिए (गेमिफाइड वीआर)।
  • जांचकर्ता: अपराध दृश्यों के डिजिटल विश्लेषण के लिए।


सीमाएं:

यह एक महंगी तकनीक है, और इसके लंबे समय तक उपयोग से आंखों और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। 

Friday, March 27, 2026

Weather Update: 29 मार्च को लेकर मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में इन दिनों मौसम लगातार करवट ले रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में मौसम में और बदलाव देखने को मिलेगा। खासकर 29 मार्च को लेकर मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है, जिसमें तेज बारिश, गरज-चमक और आंधी-तूफान की संभावना जताई गई है।


मौसम विभाग के अनुसार, 27 मार्च को अधिकतम तापमान करीब 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री दर्ज किया गया। इस दिन सामान्यतः आसमान में बादल छाए रहने के साथ हल्की बारिश या बूंदाबांदी हुई। साथ ही 20-30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं।


28 मार्च को मौसम आंशिक रूप से साफ रहने का अनुमान है, जहां अधिकतम तापमान 32 डिग्री और न्यूनतम 18 डिग्री रहने की संभावना है। हालांकि, 29 मार्च को मौसम अचानक ज्यादा सक्रिय हो जाएगा। इस दिन अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 21 डिग्री के आसपास रहने का अनुमान है।


सुबह से लेकर शाम तक गरज के साथ बारिश, बिजली चमकने और 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। 30 मार्च को भी मौसम पूरी तरह सामान्य नहीं होगा। इस दिन अधिकतम तापमान 30 डिग्री और न्यूनतम 21 डिग्री रहने की संभावना है। दिनभर बादल छाए रहने के साथ हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक जारी रह सकती है। लगातार हो रही हल्की बारिश और बूंदाबांदी का असर वायु गुणवत्ता पर भी साफ दिखाई दे रहा है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत सामूहिक विवाह सम्मेलन रायसेन में 19 अप्रैल को आयोजित

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत वर्ष 2026-27 में जिले में अक्षय तृतीय 19 अप्रैल 2026 को सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। जिला मुख्यालय रायसेन में आयोजित होने वाले इस सामूहिक विवाह सम्मेलन हेतु आयोजक नगर पालिका रायसेन तथा नोडल अधिकारी उप संचालक सामाजिक न्याय श्री मनोज बाथम रहेंगे। सामूहिक विवाह सम्मेलन में सम्मिलित होने वाले वर-वधु द्वारा आवेदन फार्म शासन द्वारा निर्धारित पात्रता मापदण्ड शर्तो के अधीन दिनांक 01 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 तक सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण कार्यालय रायसेन में जमा किए जा सकते हैं। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए सामाजिक सुरक्षा अधिकारी रायसेन श्री अनुराग भदौरिया के मो.न. 9131805671 पर या सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण कार्यालय रायसेन में सम्पर्क किया जा सकता है।


मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना भारत के विभिन्न राज्यों (जैसे मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और बिहार) द्वारा संचालित एक कल्याणकारी योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों, विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं की बेटियों की शादी के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है।


राज्यवार प्रमुख विवरण (2026 अपडेट)

विभिन्न राज्यों में इस योजना के तहत मिलने वाली सहायता और नियम अलग-अलग हैं:

  • मध्य प्रदेश: राज्य सरकार नवविवाहित जोड़ों को Rs.55,000 की सहायता देती है। इसमें Rs.49,000 सीधे वधु के बैंक खाते में जमा किए जाते हैं और Rs.6,000 सामूहिक विवाह आयोजन के खर्च के लिए होते हैं। ताजा अपडेट के अनुसार, निवाड़ी जैसे जिलों में आवेदन की अवधि 20 मार्च 2026 से 05 अप्रैल 2026 तक निर्धारित की गई है।
  • छत्तीसगढ़: यहाँ भी सामूहिक विवाह कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। हाल ही में 10 फरवरी 2026 को प्रदेश भर में 6,412 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न हुआ।
  • उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत प्रति जोड़ा Rs.51,000 की सहायता दी जाती है (जिसमें Rs.35,000 नकद, Rs.10,000 का सामान और Rs.6,000 आयोजन खर्च शामिल है)। कुछ रिपोर्टों के अनुसार सहायता राशि को Rs.1 लाख तक बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।
  • बिहार: बिहार में बेटियों के विवाह के लिए आर्थिक मदद के साथ-साथ सरकार हर ग्राम पंचायत में आधुनिक विवाह मंडप का निर्माण कर रही है, जिसका लक्ष्य 2030 तक सभी 8,530 पंचायतों को कवर करना है।


योजना का लाभ लेने के लिए सामान्य शर्तें इस प्रकार हैं 

  • आयु: वधु की आयु कम से कम 18 वर्ष और वर की 21 वर्ष होनी चाहिए।
  • निवास: आवेदक संबंधित राज्य का स्थायी निवासी होना चाहिए।
  • आय: परिवार गरीबी रेखा (BPL) के नीचे होना चाहिए।

आवश्यक दस्तावेज

  • आधार कार्ड और समग्र आईडी (MP के लिए)।
  • निवास और आय प्रमाण पत्र।
  • आयु प्रमाण पत्र (मार्कशीट या जन्म प्रमाण पत्र)।
  • बैंक पासबुक की फोटोकॉपी।
  • वर-वधु की पासपोर्ट साइज फोटो। 

आवेदन कैसे करें?

  • ऑनलाइन: आप राज्य के आधिकारिक पोर्टल (जैसे MP के लिए socialjustice.mp.gov.in) पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं।
  • ऑफलाइन: ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत/जनपद पंचायत और शहरी क्षेत्रों में नगर निगम/नगर पालिका कार्यालय से फॉर्म प्राप्त कर और भरकर जमा किया जा सकता है।

रामनवमी पर विशेष: रामनवमी के बारे में जानें विस्तार से?

रामनवमी भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला एक अत्यंत पवित्र हिंदू त्योहार है। वर्ष 2026 में, रामनवमी का यह पावन पर्व मुख्य रूप से 27 मार्च को मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर प्रारंभ होगी और 27 मार्च को सुबह 10 बजकर 6 मिनट पर समाप्त होगी। यह पर्व उस आदर्श पुरुष की स्मृति को जीवंत करता है, जिसने अपने आचरण से सिद्ध किया कि मर्यादा का पालन करते हुए भी मनुष्य सर्वोच्च शिखरों को प्राप्त कर सकता है। श्रीराम का चरित्र धार्मिक आस्था से परे एक जीवंत दर्शन है, जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र तीनों के लिए मार्गदर्शक है। रामनवमी हमें केवल पूजा तक सीमित नहीं रखती, बल्कि सत्य, न्याय, त्याग और कर्तव्य जैसे मूल्यों को जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा देती है। यही कारण है कि यह पर्व त्रेतायुग से लेकर आज तक समान रूप से प्रासंगिक बना हुआ है।


महत्व और तिथि (2026)

  • तिथि: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है।
  • शुभ मुहूर्त (2026): पूजा का सबसे शुभ समय सुबह 11:13 से दोपहर 1:41 तक है।
  • धार्मिक महत्व: इस दिन भगवान विष्णु ने अधर्म का नाश करने के लिए राजा दशरथ और माता कौशल्या के घर सातवें अवतार 'राम' के रूप में जन्म लिया था।


पूजा विधि और उत्सव

  • पूजा: श्रद्धालु इस दिन भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
  • सूर्य तिलक (अयोध्या): अयोध्या के नवनिर्मित राम मंदिर में दोपहर के समय रामलला का 'सूर्य तिलक' एक प्रमुख आकर्षण होता है, जहाँ सूर्य की किरणें सीधे उनके माथे को सुशोभित करती हैं।
  • अनुष्ठान: भक्त व्रत रखते हैं, रामचरितमानस का पाठ करते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और कई स्थानों पर भव्य शोभायात्राएं निकाली जाती हैं।
  • कन्या पूजन: चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन होने के कारण, इस दिन कई घरों में कन्या पूजन करके व्रत का पारण किया जाता है।


मुख्य परंपराएं

  • अयोध्या: भगवान राम की जन्मस्थली होने के कारण यहाँ उत्सव की भव्यता देखते ही बनती है。
  • भजन और कीर्तन: मंदिरों में विशेष रूप से "भय प्रगट कृपाला दीनदयाला" जैसे स्तुति गान किए जाते हैं।
  • आदर्श: यह पर्व हमें श्री राम के आदर्शों—सत्य, मर्यादा, त्याग और धैर्य—को अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है।


रामकथा की कालजयी परंपरा

रामनवमी की आधारशिला उस महान कथा में निहित है, जिसे रामायण के रूप में जाना जाता है। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित यह ग्रंथ भारतीय सभ्यता की आधार-रचना है, जबकि गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस ने इसे जन-जन तक पहुंचाया। रामकथा केवल एक राजकुमार के जीवन का वृत्तांत नहीं, बल्कि धर्म और अधर्म, न्याय और अन्याय, त्याग और स्वार्थ के बीच संघर्ष की महागाथा है। इसकी विशेषता यह है कि इसमें मानवीय भावनाओं का अत्यंत सजीव और सार्वकालिक चित्रण मिलता है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में रामलीला, कथा-वाचन और भक्ति-परंपराओं के माध्यम से इसका सतत प्रवाह यह सिद्ध करता है कि श्रीराम भारतीय संस्कृति के जीवंत प्रतीक हैं। रामनवमी इस परंपरा का उत्कर्ष बिंदु है, जहां इतिहास, आस्था और लोकजीवन एकाकार हो जाते हैं।


‘राम’ का अर्थ है,जिसमें साधक रमण करे

‘राम’ केवल एक व्यक्तिवाचक संज्ञा नहीं, बल्कि एक गहन दार्शनिक अवधारणा है। संस्कृत की ‘रम्’ धातु से निर्मित ‘राम’ का अर्थ है,जिसमें साधक रमण करे। इस दृष्टि से राम कोई बाहरी सत्ता नहीं, बल्कि वह चेतना हैं, जो प्रत्येक मनुष्य के भीतर विद्यमान है। जब व्यक्ति अपने भीतर सत्य, करुणा और न्याय के तत्वों को जागृत करता है, तभी ‘रामत्व’ प्रकट होता है। अतः रामनवमी का वास्तविक अर्थ बाहरी उत्सव से अधिक आंतरिक जागरण है अहंकार, क्रोध और मोह का परित्याग कर मर्यादा और सत्य के मार्ग पर अग्रसर होने का।


अवतार का दिव्य उद्देश्य

धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रीराम भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं, जिनका अवतरण धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए हुआ। यह केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि जीवन का शाश्वत सिद्धांत है कि अन्याय के विरुद्ध सत्य की विजय निश्चित होती है। रामनवमी इस विश्वास को सुदृढ़ करती है कि जब-जब समाज में अनाचार बढ़ता है, तब-तब धर्म के आदर्श पुनः प्रकट होकर मानवता को दिशा देते हैं।


त्याग और कर्तव्य आदर्श जीवन की आधारशिला

श्रीराम के जीवन का सबसे उज्ज्वल पक्ष उनका त्याग और कर्तव्यनिष्ठा है। जहां इतिहास में सत्ता के लिए संघर्ष सामान्य रहा है, वहीं श्रीराम ने पिता के वचन की रक्षा हेतु राज्य, वैभव और सुख-सुविधाओं का त्याग कर वनवास स्वीकार किया। “रघुकुल रीति सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाए” यह केवल एक उक्ति नहीं, बल्कि उनके जीवन का सार है। आज के स्वार्थ प्रधान युग में यह आदर्श हमें सिखाता है कि सच्ची महानता व्यक्तिगत लाभ में नहीं, बल्कि कर्तव्य और समर्पण में निहित होती है।


सामाजिक समरसता का व्यावहारिक स्वरूप

श्रीराम का जीवन सामाजिक समावेशिता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है। उन्होंने अपने आचरण से यह सिद्ध किया कि समाज में किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। केवट को सखा मानना, शबरी के प्रेम को स्वीकार करना और वानर-भालू समाज को साथ लेकर चलना ये सभी प्रसंग सामाजिक समानता के जीवंत प्रतीक हैं। रामनवमी हमें यह संदेश देती है कि सशक्त समाज वही है, जहां सभी वर्गों को समान सम्मान और अवसर प्राप्त हों।


करुणा और संवेदना मानवता का मूल तत्व

श्रीराम केवल वीरता और नीति के प्रतीक नहीं, बल्कि करुणा और संवेदनशीलता के भी आदर्श हैं। निषादराज, शबरी और विभीषण के प्रति उनका व्यवहार यह दर्शाता है कि उनके लिए प्रेम और सहानुभूति ही सर्वोच्च धर्म थे। यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि समाज का वास्तविक विकास शक्ति से नहीं, बल्कि संवेदना और मानवता से संभव है।


रामराज्य यानी आदर्श शासन की संकल्पना

भारतीय चिंतन में ‘रामराज्य’ आदर्श शासन-व्यवस्था का प्रतीक है, जहां न्याय, समानता और लोक कल्याण सर्वोपरि होते हैं। यह केवल एक कल्पना नहीं, बल्कि सुशासन का व्यावहारिक मॉडल है। “दैहिक दैविक भौतिक तापा, राम राज नहिं काहुहि व्यापा” यह पंक्ति उस व्यवस्था को दर्शाती है, जहां भय, शोषण और असमानता का अभाव होता है। आधुनिक लोकतंत्र में भी यह अवधारणा उतनी ही प्रासंगिक है, क्योंकि यह सत्ता को सेवा का माध्यम मानने की प्रेरणा देती है।


धर्म और शौर्य का संतुलन

श्रीराम का जीवन यह भी सिखाता है कि करुणा के साथ-साथ अन्याय के विरुद्ध साहस भी आवश्यक है। रावण का वध केवल एक युद्ध नहीं, बल्कि अहंकार और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। यह संतुलन हमें बताता है कि सच्चा धर्म वही है, जो अन्याय के विरुद्ध दृढ़ता से खड़ा हो सके।


समकालीन संदर्भ में राम का संदेश

आज के युग में जब समाज नैतिक संकट, असमानता और अशांति से जूझ रहा है, तब श्रीराम के आदर्श और अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है नेतृत्व में संयम और दूरदर्शिता, प्रकृति के साथ संतुलित सह-अस्तित्व, विविधताओं में एकता और सामाजिक सद्भाव। रामनवमी हमें यह स्मरण कराती है कि वास्तविक प्रगति केवल भौतिक उन्नति में नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक विकास में निहित है।


रामराज्य’ की भावना को व्यवहारिक जीवन में उतारने का प्रयास

प्रभु श्रीराम का चरित्र सुशासन, लोक कल्याण और न्यायपूर्ण व्यवस्था का जीवंत आदर्श है, जो युगों-युगों तक मानवता का मार्गदर्शन करता रहेगा। रामनवमी का वास्तविक संदेश केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि उन मूल्यों को अपने जीवन में उतारना है, जिनका श्रीराम ने पालन किया। जब प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर सत्य, करुणा और मर्यादा को जागृत करता है, तभी ‘रामत्व’ का उदय होता है। यही वह पथ है, जो समाज को समरसता, राष्ट्र को सुदृढ़ता और मानवता को शांति प्रदान करता है। अतः इस पावन अवसर पर हमारा संकल्प होना चाहिए कि हम सत्य और न्याय के मार्ग पर चलें, समाज में प्रेम और समानता को बढ़ावा दें और ‘रामराज्य’ की भावना को व्यवहारिक जीवन में उतारने का प्रयास करें। यही रामनवमी का सार है।


रामनवमी की पूजा विधि या व्रत कथा के बारे 

विभिन्न व्रतों (जैसे जीवित्पुत्रिका, गुरुवार) की पूजा विधि में सुबह स्नान, चौकी पर स्थापित भगवान को पीले वस्त्र/पुष्प, दीप, नैवेद्य (भोग) अर्पित करना और कथा सुनना मुख्य है। गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा और जितिया/नवरात्रि में कलश स्थापना व विशेष भोग (गुजिया, फल) आवश्यक हैं।


प्रमुख व्रत पूजा विधि और कथा (विस्तार):

जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत (संतान की दीर्घायु):

विधि: भगवान जीमूतवाहन की कुशा (घास) से बनी मूर्ति की पूजा, 7 प्रकार के अनाज, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

कथा: चील और सियारन की कथा प्रचलित है। सियारन ने व्रत के नियम तोड़े, जबकि चील ने व्रत पूर्ण किया। फलतः चील की संतानें दीर्घायु हुईं।


बृहस्पतिवार (गुरुवार) व्रत (सुख-समृद्धि):

विधि: पीले वस्त्र पहनें, विष्णु जी की प्रतिमा स्थापित करें। पीले फूल, चने की दाल, गुड़, मुनक्का और हल्दी अर्पित करें। केले के पेड़ की पूजा और कथा के बाद परिक्रमा करें।

कथा: एक व्यापारी की पुत्री द्वारा व्रत करने और राजा द्वारा उसका आधा राज्य वापस करने की कथा सुनी जाती है।


बुधवार व्रत (सुख-शांति):

विधि: गणेश जी की पूजा, दूर्वा (21 गांठ) और हरी वस्तुओं का प्रयोग करें।

कथा: अनलासुर दैत्य को गणेश जी द्वारा निगलने के बाद कश्यप ऋषि द्वारा दूर्वा से उनके पेट की जलन शांत करने की कथा है।

सामान्य पूजा नियम:

  • व्रत कथा सुनना/पढ़ना अनिवार्य है।
  • अंत में भगवान की आरती करें।


ध्यान दें: व्रत का पूरा फल पाने के लिए कथा श्रवण और पूजा के अंत में क्षमा याचना (अपनी भूलों के लिए) जरूर करें।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सपत्नीक श्री अंगारेश्वर महादेव का पूजन-दर्शन कर अभिषेक किया

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरूवार 26-03-2026 को उज्जैन स्थित अंगारेश्वर महादेव मंदिर में सपत्नीक पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री अंगारेश्वर महादेव का पंचामृत से अभिषेक कर प्रदेश की जनता की सुख-समृद्धि की कामना की।


श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन (Shree Angareshwar Mahadev Mandir Ujjain) के बारे में प्रमुख बातें

भारत के मध्य प्रदेश राज्य के उज्जैन में शिप्रा नदी के तट पर स्थित श्री अंगारेश्वर महादेव (43वें महादेव) मंगल ग्रह के जन्मस्थान के रूप में प्रसिद्ध एक प्राचीन मंदिर है, जहाँ भात पूजा द्वारा मंगल दोष का निवारण किया जाता है। यह मंदिर 84 महादेवों में से एक है और यहां दर्शन-पूजन से संतान, भूमि और संपत्ति सुख की प्राप्ति मानी जाती है। 


श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर की मुख्य विशेषताएं

  • पौराणिक महत्व: मान्यता के अनुसार, अंधकासुर के वध के समय भगवान शिव के पसीने की बूंदें पृथ्वी पर गिरने से मंगल ग्रह का जन्म हुआ, इसलिए यह मंगल ग्रह का उत्पत्ति स्थान माना जाता है।
  • भात पूजा (Bhaat Puja): यहाँ चावल (भात) से भगवान शिव की पूजा की जाती है, जो मंगल दोष, कुंडली में मांगलिक दोष और भूमि संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
  • विशेष दिन: मंगलवार का दिन यहाँ पूजा के लिए विशेष महत्व रखता है, खासकर मंगलवार की चतुर्थी को।
  • स्थान: यह मंदिर उज्जैन, मध्य प्रदेश में शिप्रा नदी के किनारे स्थित है।
  • अन्य मान्यताएँ: इस मंदिर में दर्शन से वास्तु दोष दूर होते हैं और न्यायालयीन कार्यों में विजय प्राप्त होती है। 


क्यों इतने महत्वपूर्ण है ये देव, क्यों इनके दर्शन इतने फलदायी हैं?

पुराणों में मंगल ग्रह का जन्म स्थान उज्जैन में माना गया है। इसलिए मंगल ग्रह की शांति के लिए यथा संभव अंगारेश्वर महादेव में विशेष पूजा फलदायी मानी गई है। धार्मिक मान्यता है कि इस पूजा से मंगल ग्रह दोष की शांति होती है और विवाह योग्य युवक-युवतियों के विवाह में मांगलिक दोषों के कारण आ रही समस्याएं हल हो जाती है।


श्री अंगारेश्वर महादेव (उज्जैन) ही भूमि पुत्र मंगल हैं अवंतिका कि प्राचीन 84 महादेवों में स्थित 43वे महादेव श्री अंगारेश्वर महादेव जो कि सिद्ध्वट (वट्व्रक्ष) के सामने शिप्रा के उस पर स्थित हैं, जिन्हें मंगल देव (गृह) भी कहा जाता हैं। माना जाता है कि जो व्यक्ति प्रतिदिन इस महालिंग श्री अंगारेश्वर का दर्शन करेगा उनका फिर जन्म नही होगा। जो इस लिंग का पूजन मंगलवार को करेगा वह इस युग में कृतार्थ हो जाएगा, इसमे कोइ संशय नही हैं। जो मंगलवार कि चतुर्थी के दिन अंगारेश्वर का दर्शन-व्रत-पूजन करेंगे वह संतान, धन, भूमि, सम्पत्ति, यश को प्राप्त करेगा। मनाान जाता है कि इनके दर्शन-पूजन से वास्तुदोष, भुमिदोष का भी निवारण होता हैं। न्यायालय में विजय प्राप्त होती हैं। इस लिंग पर भात पूजन करने से मंगल दोष, भूमि दोष का भी निवारण होता पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नवग्रहों में विशेष स्थान रखने वाले मंगल ग्रह का जन्म स्थान उज्जैन यानि प्राचीन नगरी अवन्तिका को माना गया है। देश के सभी स्थानों से मंगल पीड़ा निवारण और अनुग्रह प्राप्त करने के लिए लोग यहां आते हैं। जनमान्यताओं के अनुसार मंगल की जन्म स्थली पर भात पूजा कराने से मंगलजन्य कष्ट से व्यक्ति को शांति मिलती है। मंगल को नवग्रहों में सेनापति के पद से शुशोभित किया गया है। जन्म कुंडली में मंगल की प्रधानता जहां मंगल दोष उत्पन्न करती है, वहीं व्यक्ति को सेना, पुलिस या पराक्रमी पदो पर शुशोभित कर यश और कीर्ति भी दिलाती है। 


भगवान शिव के पसीने की बूंदों से उत्पन्न हुए मंगल ग्रह

ब्रह्मवर्त पुराण के अनुसार मंगल पृथ्वी से अलग हुआ एक ग्रह है। इसीलिए इसे भूमि पुत्र माना गया है। इसे विष्णु पुत्र भी कहते हैं। स्कंध पुराण के अनुसार अवन्तिका में दैत्य अंधकासुर ने भगवान शिव की तपस्या कर यह वरदान प्राप्त किया था कि उसके शरीर से जितनी भी रक्त की बूंदे गिरेंगी वहां उतने ही राक्षस पैदा हो जाएंगे। वरदान के अनुसार तपस्या के बल पर अंधकासुर ने अपार शक्ति प्राप्त कर ली और पृथ्वी पर वह अनियंत्रित उत्पाद मचाने लगा। उसके उत्पादों से बचने के लिए व इंद्रादि देवताओं की रक्षा के लिए स्वयं भगवान शिव को उससे लडऩा पड़ा था। लड़ते-लड़ते जब शिव थक गए तो उनके ललाट से पसीने की बूंदें गिरी। इससे एक भारी विस्फोट हुआ और एक बालक अंगारक की उत्पत्ति हुई। इसी बालक ने दैत्य के रक्त को भस्म कर दिया और अंधकासुर का अंत हुआ।


एक अन्य कथा के अनुसार देवाधिदेव भगवान शंकर से एक समय पार्वती जी का वार्तालाप हो रहा था। इसी चर्चा के दौरान पार्वती जी ने भगवान शंकर से पूछा की उन्हें मंगलकारी अंगारक के जन्म के बारे में जानने की बहुत इच्छा हैं। तब देवाधिदेव भगवान शंकर ने पार्वती जी से कहा की हे पर्वत की कन्या उज्जैन में तिरालीसवां ज्योतिर्लिंग अंगारेश्वर का हैं जिनके दर्शन मात्र से सर्व सम्पदा प्राप्त होती हैं।


पूर्व समय में लाल शरीर की शोभवाला और टेड़े शरीर वाला क्रोध से युक्त यह बालक मेरे द्वारा ही उत्पन्न हुआ में ने उसे पृथ्वी पर रख दिया इसलिए उसका नाम भूमि पुत्र हुआ। पैदा होते ही स्थूल शरीर वाला वह बालक भय देने लगा। उसके कोप से पृथ्वी कम्पित होने लगी। मनुष्य और देवतादि सब दुखी हो गए। समुद्रों में तूफान आने लगी। पर्वत हिलने लगे। उसी के प्रभाव स्वरूप देवता मनुष्य आदि परेशान होने लगे।


अंत में परेशान होकर सभी ऋषि देवता इंद्रा सभी देवगुरु वृहस्पति के पास गए और उनसे चर्चा कर उन्हें अपने साथ लेकर ब्रह्मलोक गए। और पितामह ब्रह्मा जी को सारा वृतांत सुनाया की किस प्रकार भगवान शंकर के शरीर से बालक का जन्म हुआ और उत्पन्न होने के कुछ ही समय में उसने तीनो लोकों का भ्रमण कर डाला। अनेकों का भक्षण कर लिया और सभी को परेशान कर दिया।


सभी की बातें सुनकर प्रजापिता ब्रह्मा जी ने मुझसे कैलाश पर्वत पर आकर मिलाने का निर्णय किया। मेरे पास आकर सभी ने भय पूरक मेरे शरीर से उत्पन्न उस बालक के क्रिया कलापों का वर्णन किया की किस प्रकार उस बालक ने सभी को डरा दिया और अनेकों का भक्षण कर लिया।


यह सुनकर मेने उस बालक को बुलाया और उससे पूछा की ऐसा क्यों कर रहे हो। तब उस बालक ने कहा की प्रभु में कौन सा काम करूं। मेने उसे समझाया की जगत को त्रास मत दो। ऐसा कहकर मेने उसे बार-बार समझाया। मेने उसे कहा की मेरे शरीर की राजस प्रकृति से तुम्हारा जन्म हुआ हैं। इसीलिए तुम्हारा नाम अंगारक हुआ हैं तुम लोगो का मंगल करो,उन्हें प्रसन्न और आनंदित रखो यही तुम्हारा कर्म हैं। इस समय तुमसे भूलवश वक्री कार्य हुए हैं इसलिए विद्वान लोग तुम्हें वक्र नाम से पुकारेंगे।


इस प्रकार मेरे समझाने पर उस बालक ने पूछा की बिना आहार के मेरी तृप्ति कैसे होगी। उसने कहा की हे देवाधिदेव आप मुझे अच्छा स्थान दो,स्वामित्व दो,शक्ति दो और आहार भी जल्दी से दे दो। उस पुत्र के ऐसे वचन सुनकर मेने सोचा की यह बालक हैं और प्रिय भी हैं ऐसा विचार कर उत्तम स्थान अक्षय देना चाहिए यह सोचकर मेने उसे अपनी गोद में बिठा लिया और प्रेम से कहा की हे पुत्र मेने तुझे महाकाल वन (उज्जैन नगरी) में गंगेश्वर से पूर्व में स्थान दिया हैं। उस स्थान पर शिप्र और खगर्ता का शुभ संगम हुआ हैं। जब मेने गंगा को मस्तक पर धारण किया था उस समय वह गुस्से से चन्द्र मंडल से नीचे गिरी थी तब वह महाकाल वन क्षेत्र में गिरी थी उस समय गंगा आकाश से नीचे आई थी इसीलिए उसका नाम खगर्ता हुआ और इसीलिए मेने वहां पर अवतार लिया में यहां पर लिंग (महादेव) के रूप में निवास करता हूं। और सभी देवतादिक मेरी पूजा करते हैं। यह स्थान देवतों को भी दुर्लभ हैं अत: हैं प्रिय पुत्र तुम शीघ्र वहां के लिए प्रस्थान करो और उस संगम पर मेरी पूजा करो वह संगम का स्थल तुम्हारे नाम से जग में प्रसिद्द होगा और ग्रहों के बीच में तेरा आधिपत्य होगा। तुझे मैं ने तीसरा स्थान दिया हैं। वहां तुम्हें तृप्ति प्राप्त होगी। ग्रहों के बीच तुम्हारी पूजा होगी और तिथियों में मैं ने तुम्हें चतुर्थी तिथि प्रदान की हैं, इस चतुर्थी को जो भी तुम्हारी प्रसन्नता के लिए व्रत, शांति दक्षिणा सहित पूजन करेंगे उससे तुम्हें तृप्ति होगी, भोजन मिलेगा और मैं ने तुम्हें वार मंगलवार दिया हैं जिससे सभी को मंगल की प्राप्ति होगी। जो भी मनुष्य मंगलवार को विद्यारम्भ करेगा, नए वस्त्राभूषण धारण करेगा या फिर शरीर पर तेल लगाएगा उसे इस सभी कर्मो का फल नहीं मिलेगा।


मेरी कही बातें सुनकर उस वक्रांग मंगल पुत्र ने स्वीकार कर ली और उसका नाम अंगारकेश्वर हो गया और इस प्रकार मेरे वचन अनुसार वह अवंतिकापुरी (वर्तमान उज्जैन,मध्यप्रदेश) में अवस्थित हो गया। उस वक्रांग मंगल पुत्र ने जब शिप्रा जी के पावन तट पर रमणीय खगर्ता नदी के संगम पर मुझे लिंग रूप में देखा तो तो वह परम शांति को प्राप्त हो गया और मेने उसे देखकर आलिंगन किया, उसे आशीर्वाद दिया की हैं पुत्र तेरे सभी वांछित कार्य पूर्ण होंगे। हैं मंगल में तुझ से प्रसन्न हुं। आज से तेरा नाम अंगारकेश्वर तीनो लोकों में प्रसिद्द होगा इसमें कोई संशय नहीं हैं जो कोई भी मेरे दर्शन प्रतिदिन इस संमेश्वर के पास करेगा उसका इस पृथ्वी पर पुन: जन्म नहीं होगा जो मेरा पूजन मंगलवार के दिन इस अंगारकेश्वर पर करेंगे वह इस कलियुग में कृतार्थ हो जायेगा इसमें कोई संशय नहीं हैं जो लोग मंगलवार की चतुर्थी को मेरा व्रत, पूजन और दर्शन करेंगे वह इस घोर दुखों युक्त संसार में पुन: जन्म नहीं लेंगे।


तुम मनुष्य मात्र की कुंडलियों में योग कारक रहोगे। योग की अनुकूलता के लिए जो व्यक्ति यहां आकर तुम्हारी पूजा करेगा, उसका मंगल होगा। तभी से लोग मंगल की पूजा के लिए उज्जैन में आते हैं और अपनी श्रद्धा अनुसार अंगारेश्वर महादेव मंदिर में पूजा करके मंगल की अनुकूलता प्राप्त करते हैं।


जब मंगलवार को अमावस्या हो तब खगर्ता संगम पर देवता पूजित हैं उस दिन यहां दर्शन और पूजा-स्नान से वाराणसी,प्रयाग, गयाजी और करुक्षेत्र में एवं पुष्कर में स्नान-पूजन का जो पुण्य मिलता हैं उससे भी अधिक पुण्य फल यहां पूजन और दर्शन से प्राप्त होगा।

Tuesday, March 17, 2026

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की तिथियां घोषित, जानें ऑनलाइन पंजीयन की पूरी प्रक्रिया

गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए आयोजित किए जाने वाले मुख्यमंत्री कन्या विवाह/ निकाह योजना के लिए तिथियों का निर्धारण किया गया है। इनमें अक्षय तृतीया 19 अप्रैल 2026, देवउठनी ग्यारस (तुलसी विवाह) 20 नवंबर 2026, बसंत पंचमी 11 फरवरी 2027 तथा एक अन्य तिथि स्थानीय मांग और कलेक्टर के निर्णय अनुसार निर्धारित की जा सकती है। वर्ष 2026-27 में पक्ष 44 हजार से अधिक विवाह करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पर राज्य सरकार 242 करोड़ से अधिक राशि व्यय करेगी।


प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाय योजना के प्रभावी व्यवस्थि और गरिमापूर्ण ढंग से आयोजन के लिए विभाग द्वारा सामूहिक विवाह समारोह में भाग लेने वाले जोड़ों की न्यूनतम संख्या 11 और अधिकतम संख्या 200 निर्धारित की गई है। प्रदेश के 55 जिलों में इन अवसरों पर 800 जोड़े यानिकी 44 हजार जोड़ों का विवाह संभव हो सकेगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 51 हजार 899 मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना तथा 28 हजार 362 मुख्यमंत्री निकाह कराए गए हैं। इन हितग्राहियों से 321 करोड़ 41 लाख 58 हजार की सहायता प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना में भाग लेने के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीयन कराया जा सकता है।


मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना के लिए आधिकारिक पोर्टल vivahportal.mp.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। इसमें आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए ₹49,000 की वित्तीय सहायता व अन्य सामग्री प्रदान की जाती है। आवेदन विवाह की तारीख से 15 दिन पहले किया जाना चाहिए।


मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना के लिए ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया:

  • आधिकारिक वेबसाइट: सबसे पहले विवाह पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट https://vivahportal.mp.gov.in/ पर जाएं।
  • लॉगिन/पंजीयन: पोर्टल पर दी गई प्रक्रिया के अनुसार वर-वधू की जानकारी दर्ज करें।
  • दस्तावेज़ अपलोड: आवश्यक दस्तावेज़ जैसे आधार कार्ड, समग्र आईडी, बैंक पासबुक, आय प्रमाण पत्र, और निवास प्रमाण पत्र अपलोड करें।
  • आवेदन जमा करें: फॉर्म भरने के बाद उसे सबमिट करें और प्रिंट आउट ले लें।
  • सत्यापन: भरे हुए फॉर्म का प्रिंट आउट और सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ स्थानीय निकाय (नगर निगम/नगर पालिका/पंचायत) में संपर्क कर सत्यापन करवाएं।


पात्रता और महत्वपूर्ण विवरण:

  • मूल निवासी: कन्या मध्यप्रदेश की मूल निवासी होनी चाहिए।
  • आयु सीमा: कन्या की आयु 18 वर्ष और वर की आयु 21 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।
  • लाभार्थी: जरूरतमंद, निराश्रित, निर्धन या मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान के तहत पात्र परिवार।
  • सहायता राशि: सामूहिक विवाह कार्यक्रम के माध्यम से 49,000 रुपये का चेक और 6,000 रुपये आयोजन व्यय के लिए दिए जाते हैं।


ध्यान दें: यह लाभ केवल सामूहिक विवाह समारोहों में ही उपलब्ध होता है। अधिक जानकारी के लिए, आप सामाजिक न्याय एवं निःशक्तजन कल्याण विभाग, मध्य प्रदेश के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

Monday, March 16, 2026

राहुल गांधी के आरोपों पर दिल्ली विश्वविद्यालय का पलटवार

Delhi: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के इंटरव्यू में जाति के आधार पर छात्रों को फेल करने का गंभीर आरोप लगाया है। लखनऊ में एक 'संविधान सम्मेलन' में उन्होंने कहा, 'मैं दिल्ली विश्वविद्यालय गया। इंटरव्यू छात्रों को बाहर करने का तरीका है। वे पूछते हैं कि आपकी जाति क्या है, और फिर आप इंटरव्यू में फेल हो जाते हैं।' राहुल का आरोप है कि इंटरव्यू प्रक्रिया का इस्तेमाल दलितों और पिछड़े वर्ग के छात्रों को बाहर करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी निशाना साधते हुए कहा, उनके संगठनों की सूची निकाल लें, वहां आपको एक भी ओबीसी, दलित या आदिवासी नहीं मिलेगा। जाति जनगणना को राष्ट्रीय आवश्यकता बताते हुए राहुल ने कहा कि यह देश की सच्चाई को स्वीकार न करने जैसा है।


राहुल गांधी के आरोपों पर दिल्ली विश्वविद्यालय ने कड़ी आपत्ति जताई है और उन्हें 'तथ्यों की पुष्टि करने' को कहा है। विश्वविद्यालय ने कहा, अधिकांश यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों में दाखिले पारदर्शी तरीके से सीयूईटी के अंकों के आधार पर होते हैं, न कि इंटरव्यू के आधार पर। विश्वविद्यालय ने इंटरव्यू के जरिए जातिगत भेदभाव के दावों को 'भ्रामक' और 'तथ्यों से रहित' बताया है।

वन्य जीव संस्थान देहरादून द्वारा ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क कंज़र्वेशन एरिया , साईरोपा कुल्लू में 2 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

वन्य जीव संस्थान देहरादून द्वारा ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क कंज़र्वेशन एरिया (जीएचएनपीसीए), साईरोपा कुल्लू (हिमाचल प्रदेश) में 2 दिवसीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन 15–16 मार्च को किया गया। कार्यशाला में मध्यप्रदेश टाइगर फाउंडेशन बोर्ड (एमपीटीबी) द्वारा वित्त पोषित परियोजना के अंतर्गत सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के लिए तैयार किए जा रहे नामांकन डोजियर की समीक्षा की गई। डोजियर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए तैयार किया जा रहा है। यह पहल सतपुड़ा क्षेत्र की वैश्विक स्तर पर पहचान स्थापित करने के साथ-साथ इसके संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सतत पर्यटन को भी नई दिशा प्रदान करेगी।


कार्यशाला में नामांकन डोजियर की प्रगति, आवश्यक दस्तावेज़ीकरण तथा अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयारियों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसमें वन्य जीव वैज्ञानिकों, विषय-विशेषज्ञों और संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।


सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को वर्ष 2021 में यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया गया था। इसे प्राकृतिक मानदंड (vii), (ix) और (x) के अंतर्गत विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने के लिए प्रस्तावित किया गया है। इन मानदंडों के अंतर्गत क्षेत्र की अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता, पारिस्थितिकी तंत्र, जैव-विकास प्रक्रियाओं का संरक्षण एवं समृद्ध जैव-विविधता और वन्य जीव आवासों का महत्व प्रमुख हैं।

Saturday, March 14, 2026

PM Modi Bengal Rally: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित विशाल जनसभा को किया संबोधित

Bengal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल की मौजूदा तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला और राज्य में बदलाव का आह्वान किया।


जनसभा में भारी उत्साह और जोश

रैली में उपस्थित भारी भीड़ को देखकर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लोगों का उत्साह और जोश साफ बता रहा है कि बंगाल के लोग किस तरह के बदलाव की मांग कर रहे हैं। ब्रिगेड परेड ग्राउंड का इतिहास गवाह है कि जब भी बंगाल ने देश को दिशा दी है, तब यह मैदान बंगाल की आवाज बनकर सामने आया। उन्होंने कहा, “इस मैदान से अंग्रेजों के खिलाफ उठी आवाज पूरे हिंदुस्तान में क्रांति बन गई थी। आज एक बार फिर इसी मैदान से नए बंगाल की क्रांति का बिगुल बज गया है।”


टीएमसी पर निशाना और बदलाव का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने बंगाल की मौजूदा सरकार पर आरोप लगाया कि रैली को रोकने के लिए हरसंभव कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि टीएमसी ने रैली में आने वाले लोगों को चोर कहकर अपमानित किया, लेकिन जनता जानती है कि असली चोर कौन हैं। मोदी ने बताया कि पुल बंद करवा दिए गए, गाड़ियां रोकी गईं, ट्रैफिक जाम कराया गया और भाजपा के झंडे-पोस्टर हटवाए गए, फिर भी जनता ने विशाल जनसैलाब के रूप में रैली में भाग लिया।


महाजंगलराज का काउंटडाउन और कानून का राज

प्रधानमंत्री ने कहा कि बंगाल में ‘महाजंगलराज’ लाने वालों का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। राज्य में कानून का राज लौटने वाला है और जो भी कानून तोड़ेगा या अत्याचार करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा, “चुन-चुनकर सभी जुल्मों का हिसाब लिया जाएगा। राज्य सरकार चाहे कितनी भी कोशिश कर ले, बदलाव की आंधी को कोई नहीं रोक सकता। मां दुर्गा का आशीर्वाद भाजपा और एनडीए के साथ है और यही शक्ति बंगाल में परिवर्तन लाएगी।” 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बरही के कृषि महोत्सव में विकास कार्यों की दी सौगात

Katni: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार धरती पुत्र किसान की खुशहाली और विकास के लिए कृत संकल्पित है। राज्य सरकार किसानों और लाड़ली बहनों सहित हर वर्ग के कल्याण के लिए कार्य कर रही है। सरकार ने गांव-गांव तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने का संकल्प लिया है। किसानों को सिंचाई के लिए अब दिन में भी बिजली मिलेगी। किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार हर कदम पर किसानों के साथ खड़ी है। जरूरतमंदों के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले, इसके लिए प्रदेश में भव्य सांदीपनि विद्यालयों की स्थापना की जा रही है। उन्होंने कहा कि कटनी में शीघ्र ही मेडिकल कॉलेज खोला जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को कटनी जिले के बरही में आयोजित किसान सम्मेलन कृषि महोत्सव को संबोधित कर रहे थे।


मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषक कल्याण वर्ष 2026 में कटनी को 1000 करोड़ की सौगात दी एवं जिले के लिए 243 करोड़ रूपये की लागत के 97 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। इसमें नवर्निमित पुल, महाविद्यालय और सांदीपनि विद्यालय भी शामिल हैं। किसानों की समृद्धि पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। विजयराघवगढ़ के नागरिकों ने भव्य रोड-शो में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी अभिवादन कर स्वागत के लिये जनता का आभार माना।


मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत बड़े तालाब के सौंदर्यीकरण की सौगात दी एवं उन्होंने विभिन्न योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री विजयनाथ धाम की नगरी बरही में आयोजित किसान सम्मेलन में किसान कल्याण को समर्पित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। किसान सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रतीक स्वरूप हल और स्मृति-चिन्ह के तौर पर लड्डू गोपाल की मूर्ति भेंट किया गया।


मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 9 लाख करोड़ की नई रोजगार आधारित औद्योगिक इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। मध्यप्रदेश, देश में सबसे तेज गति से विकास करने वाला राज्य बना है। प्रदेश में बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से भी कम है। राज्य सरकार सभी वर्गों के कल्याण और रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिले में जलाशयों और नहरों के जीर्णोद्धार के साथ ही सड़क निर्माण एवं पुलिया के उन्नयन के कार्य भी किये जायेंगे। बरही में वॉलीबॉल का इंडोर स्टेडियम बनायेंगे। साथ ही महानदी और उमड़ार नदी के संगम पर सिंचाई परियोजना की सौगात दी जायेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में युवाओं के लिये खेल स्टेडियम का निर्माण भी किया जा रहा है।


मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली बहनों के लिए सरकारी खजाने में कोई कमी नहीं है। प्रदेश सरकार को बहनों का आशीर्वाद मिल रहा है। प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 27 हजार लाड़ली बहनों को साढ़े 1800 करोड़ से अधिक की राशि प्रदान की है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के 3 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं और सभी पात्र हितग्राहियों को हर माह 1500 रुपए की सौगात मिल रही है। ग्रामीणों के सिर पर पक्के मकान की छत मिले, इसके लिए बहुत जल्द सर्वे शुरू किया जाएगा। सड़क हादसों में घायलों की मदद के लिए सरकार ने 'राहवीर योजना' की शुरुआत की है। घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले को सरकार 25 हजार की प्रोत्साहन राशि दी है। पीएम राहत योजना के तहत अस्पताल में घायल के लिए डेढ़ लाख रुपए तक के नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था है। नागरिकों की जान बचाने के लिए एयर एम्बुलेंस का नवाचार प्रारंभ किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की समृद्धि के लिए राज्य सरकार सिंचाई के लिए पर्याप्त जल, बिजली और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। प्रदेश में वर्ष 2004 से अब तक गेहूं के मूल्य में 2000 रुपए प्रति क्विंटल से अधिक की वृद्धि हुई है। किसानों को बोनस का लाभ देकर इस वर्ष 2625 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदा जा रहा है। प्रदेश में पिछले 2 वर्ष में सिंचाई का रकबा बढ़कर 55 लाख हैक्टेयर हो गया है, जिसे आगामी वर्षों में 100 लाख हैक्टेयर करने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों को सालभर में 12 हजार रुपए की सम्मान निधि का लाभ दिया जा रहा है।


मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दूध-दही हजारों साल से भारत की पहचान है। राज्य सरकार ने प्रदेश में दूध का उत्पादन 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। बच्चों को स्वस्थ बनाने के लिए माता यशोदा योजना में स्कूलों में बच्चों को नि:शुल्क दूध के पैकेट वितरित किये जाएंगे। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अब ड्रॉप आउट 6 प्रतिशत से शून्य पर आ गया है। मध्यप्रदेश इस मामले में राष्ट्रीय औसत से आगे निकल चुका है। राज्य सरकार स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा सहित सभी क्षेत्रों में युवाओं को मौके दिए जा रहे हैं। प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत होने वाली है।


मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देश के हितों को सर्वोपरि रखा है। अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के बीच हमारे जहाज तिरंगा लगाकर शान से स्वदेश लौट रहे हैं। वर्तमान परिस्थितियों में खाड़ी के देशों में जारी संकट के बीच नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान शर्मनाक हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने हर बार की तरह अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करते हुए युद्ध में फंसे विद्यार्थियों और नागरिकों को सुरक्षित निकाला है।


सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 1000 करोड़ की सौगातें दी हैं। बाणसागर डैम से 161 करोड़ की सिंचाई योजना से किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। क्षेत्र में नए पुल निर्माण के लिए 95 करोड़ की राशि दी गई है। कटनी क्षेत्र में कृषि को नए आयाम देने के लिए एग्रीकल्चर विलेज की स्थापना की जा सकती है। विधायक श्री संजय पाठक ने कहा कि कृषि कल्याण वर्ष में कटनी को अनेक सौगातें मिली हैं।


स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री और जिले के प्रभारी श्री उदय प्रताप सिंह, विधायक श्री संदीप जायसवाल, विधायक श्री धीरेंद्र बहादुर सिंह, विधायक श्री प्रणय प्रभात पांडे, विधायक मैहर श्री श्रीकांत चतुर्वेदी सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, बड़ी संख्या में किसान बंधु और स्थानीय लोग उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री ने बड़े तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कटनी जिले के बरही भ्रमण के दौरान बड़ा तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य का शुभारंभ किया। जल गंगा संवर्धन अभियान में बड़ा तालाब बरही का 50 लाख रुपये की लागत से कायाकल्प किया जा रहा है। इसमें तालाब के चारों ओर घाट निर्माण, फव्वारे का निर्माण के साथ ही अन्य सौंदर्यीकरण कार्य शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बरही के श्री विजयनाथ धाम मंदिर में भगवान शंकर का दर्शन-पूजन कर समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि व आरोग्यमय जीवन की प्रार्थना की।


मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार रैली में हुआ आत्मीय स्वागत

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को कटनी जिले के बरही में आभार रैली में शामिल हुए। आभार रैली मुख्य बाजार मार्ग से होते हुए कार्यक्रम स्थल पर पहुंची। रैली के मार्ग पर बरहीवासियों ने पुष्प वर्षा कर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आत्मीय स्वागत किया।


मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी जनता का अभिवादन किया। किसानों, व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों सामाजिक संगठनों और प्रबुद्धजनों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पुष्प वर्षा कर स्वागत और अभिनन्दन किया। आभार रैली में विभिन्न स्थानों पर स्टॉल लगाकर नागरिकों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत किया। इनमें मेडिकल व्यापारी संघ, किराना व्यापारी संघ, सराफा व्यापारी संघ, कपड़ा व्यापारी संघ, वॉलीबॉल स्पोर्ट क्लब, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार, हार्डवेयर संघ, कसोधन गुप्ता समाज, अधिवक्ता संघ, सेल यूनियन परिवार, पार्षद एवं बड़ी संख्या में नागरिक शामिल रहे।


बरही सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई परियोजना के लिये माना आभार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र के 27 ग्रामों के करीब 11 हजार किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने की महत्वाकांक्षी बरही सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई परियोजना के लिये किसानों ने आभार रैली में शामिल होकर स्वागत किया गया। राज्य मंत्रि-परिषद से मिली परियोजना की स्वीकृति पर कृतज्ञता और आभार व्यक्त किया गया। बरही सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई परियोजना की लागत 566.92 करोड़ रूपए है। इसके पूर्ण होने के बाद बरही एवं विजयराघवगढ़ तहसील के 27 गांवों की करीब 20 हजार हैक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इससे लगभग 11 हजार किसानों के खेतों तक फसलों की सिंचाई के लिए पानी पहुंचेगा।

मंत्री श्री विश्वास सारंग ने किया फिट इंडिया कार्निवाल का शुभारंभ

Bhopal: सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने शनिवार को टीटी नगर स्टेडियम, भोपाल में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के भोपाल शाखा द्वारा आयोजित दो दिवसीय फिट इंडिया कार्निवाल का शुभारंभ किया। शुभारंभ में पारंपरिक खेल मलखंभ और सांस्कृतिक नृत्यों की भव्य प्रस्तुति दी गई। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन ही किसी व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं। जब नागरिक स्वस्थ और सक्रिय रहते हैं, तब देश विकास और प्रगति के नए शिखरों को स्पर्श करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रारंभ किया गया फिट इंडिया मूवमेंट आज पूरे देश में जन आंदोलन का रूप ले चुका है। एक घंटा, खेल के मैदान में ऐसे अभियानों के माध्यम से समाज के हर आयु वर्ग के लोग फिटनेस को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि यह कार्निवाल भी उसी संकल्प का सशक्त उदाहरण है जहाँ विभिन्न खेल एवं फिटनेस गतिविधियों के माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।


खेल विभाग के सतत प्रयास- मंत्री श्री सारंग ने बताया कि प्रदेश में खेल और फिटनेस संस्कृति को मजबूत करने के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें खेलो एमपी यूथ गेम्स, हर विधानसभा में खेल परिसर, पार्थ योजना, फिट इंडिया क्लब, मध्यप्रदेश युवा प्रेरक अभियान और युवा उत्सव जैसी योजनाएँ शामिल हैं, जिनके माध्यम से युवाओं को खेलों से जोड़ते हुए स्वस्थ और अनुशासित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।


खुद फिट रहें और परिवार को भी करें प्रेरित- मंत्री श्री सारंग ने सभी नागरिकों से आह्वान किया है कि फिटनेस को केवल व्यक्तिगत आदत न बनाकर पारिवारिक संस्कृति बनाएं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को नियमित व्यायाम, योग और खेल गतिविधियों से जोड़ें जिससे समाज में स्वस्थ और सकारात्मक वातावरण का निर्माण हो सके।


युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति- मंत्री श्री सारंग ने कहा कि जब देश का युवा स्वस्थ, अनुशासित और ऊर्जावान होता है, तब राष्ट्र प्रगति के नए कीर्तिमान स्थापित करता है। फिट और जागरूक युवा ही विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत बनेंगे।

Tuesday, March 10, 2026

मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2025: नवीन इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीयन शुल्क (Registration Fee) एवं मोटरयान कर (Road Tax) में विशेष छूट

नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा प्रदेश में स्वच्छ, सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल परिवहन तंत्र को सुदृढ़ करने और कार्बन उत्सर्जन के न्यूनीकरण के उद्देश्य से "मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2025" का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। यह दूरदर्शी नीति 27 मार्च 2025 से संपूर्ण प्रदेश में प्रभावशील हो चुकी है, जिसमें पर्यावरण संवर्धन के लिये इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के क्रय एवं उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए नागरिकों को व्यापक स्तर पर विभिन्न वित्तीय रियायतें एवं विशिष्ट प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। शासन की इस पहल का मुख्य ध्येय पारंपरिक ईंधन आधारित वाहनों के स्थान पर आधुनिक एवं प्रदूषण मुक्त आवागमन के साधनों को जन-सामान्य के लिए सुलभ बनाना है।


राज्य शासन की इस अभिनव नीति में नवीन इलेक्ट्रिक वाहनों के क्रय पर उपभोक्ताओं को पंजीयन शुल्क (Registration Fee) एवं मोटरयान कर (Road Tax) में विशेष छूट प्रदान की जा रही है। यह निर्णय न केवल नागरिकों को आर्थिक संबल प्रदान कर रहा है, अपितु उन्हें भविष्योन्मुखी परिवहन व्यवस्था से जुड़ने के लिये प्रेरित भी कर रहा है। इसके अतिरिक्त, धारणीय विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये पेट्रोल, डीजल एवं सीएनजी संचालित पारंपरिक वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित (रेट्रोफिट) करने की तकनीक को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके लिए नियमानुसार समुचित वित्तीय सहायता सुलभ कराई जा रही है।


चार्जिंग अधोसंरचना विकास के लिये 30 प्रतिशत तक का अनुदान


अधोसंरचना विकास की दिशा में प्रदेश को 'इलेक्ट्रिक व्हीकल हब' के रूप में स्थापित करने के लिये राज्य सरकार द्वारा सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन अथवा चार्जरों की स्थापना पर लगभग 30 प्रतिशत तक के अनुदान (सब्सिडी) का प्रावधान किया गया है। इस दूरगामी कदम से प्रदेश भर में चार्जिंग स्टेशनों के व्यापक तंत्र का विस्तार होगा, जिससे नागरिकों को वाहन को सुगम एवं निर्बाध यात्रा का अनुभव प्राप्त हो सकेगा।


"ईव्ही तरंग पोर्टल" के माध्यम से योजनाओं का सुगम लाभ


EV वाहनों पर प्रोत्साहनों के लाभ वितरण की प्रक्रिया को अत्यंत सरल, पारदर्शी एवं तकनीक-आधारित बनाने के उद्देश्य से शासन द्वारा "ईव्ही तरंग पोर्टल" का संचालन किया जा रहा है। इस डिजिटल अधिष्ठान के माध्यम से पात्र हितग्राही विभिन्न सब्सिडी एवं अन्य लाभों के लिए घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। राज्य शासन ने समस्त प्रदेशवासियों से आह्वान किया है कि वे इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देकर 'स्वच्छ एवं हरित मध्यप्रदेश' के संकल्प को साकार करने में अपनी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें।

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