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Monday, April 27, 2026

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का हिमाचल दौरा: शिमला में छह दिनों का कार्यक्रम शुरू

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 27 अप्रैल 2026 को अपने छह दिवसीय (27 अप्रैल से 2 मई) हिमाचल प्रदेश दौरे के लिए शिमला पहुंच गई हैं। अपने इस प्रवास के दौरान वह शिमला के मशोबरा स्थित ऐतिहासिक 'द रिट्रीट' (Rashtrapati Niwas) में रुकेंगी।


राष्ट्रपति 29 अप्रैल को सामरिक रूप से महत्वपूर्ण अटल सुरंग (रोहतांग) का दौरा करेंगी। इस दौरान वह सीमा सड़क संगठन (BRO) के अधिकारियों से मिलेंगी और सुरंग की तकनीकी व सामरिक बारीकियों की जानकारी लेंगी। 30 अप्रैल को वह पालमपुर स्थित चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के 17वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। 30 अप्रैल को ही वह शिमला स्थित सेना प्रशिक्षण कमान (ARTRAC) का दौरा भी करेंगी। वह 28 अप्रैल को राज्यपाल द्वारा आयोजित राजकीय भोज में शिरकत करेंगी और 1 मई को 'एट होम' (At Home) स्वागत समारोह की मेजबानी करेंगी।


सुरक्षा के लिहाज से शिमला में लगभग 1,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है और शहर को तीन सेक्टरों में बांटा गया है।

Tuesday, April 7, 2026

महिला नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में बढ़ रहा भारत, प्रधानमंत्री ने साझा किया लेख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज, 7 अप्रैल 2026 को, केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी द्वारा लिखित एक लेख साझा किया है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला नेतृत्व वाली शासन व्यवस्था को लेकर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी द्वारा लिखित एक लेख साझा किया है। इस लेख में भारत में महिलाओं की भागीदारी को और सशक्त बनाने के लिए एक स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।


यह लेख भारत में महिला नेतृत्व वाली शासन व्यवस्था (Women-led Governance) को मजबूत करने के सरकार के दृष्टिकोण पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री ने इस लेख के माध्यम से निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं को रेखांकित किया: 


  • महिला नेतृत्व को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रतिनिधित्व को वास्तविक प्रभाव में बदलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने हमेशा नारी शक्ति को प्राथमिकता दी है और इसी सोच के तहत महिला-नेतृत्व वाली शासन व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम का जिक्र- प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत को महिला-नेतृत्व वाली शासन व्यवस्था की ओर ले जा रही है, जो विकसित भारत के निर्माण का एक प्रमुख स्तंभ बनेगी।
  • लेख में भविष्य की कार्ययोजना- केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी के इस लेख में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका मजबूत करने और शासन में उनकी प्रभावी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आगे की रणनीति का विस्तार से उल्लेख किया गया है।
  • महिला सशक्तिकरण पर बढ़ता फोकस- सरकार की ओर से महिला सशक्तिकरण को लेकर लगातार पहल की जा रही है, जिसमें शिक्षा, रोजगार, राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि महिला नेतृत्व को मजबूत करने से देश के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी।

Saturday, March 28, 2026

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन आज झारखंड का दौरा करेंगे, वर्चुअल रियलिटी केस रिपॉजिटरी का भी शुभारंभ करेंगे

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन आज झारखंड में भारतीय प्रबंधन संस्थान – आईआईएम, रांची के 15वें दीक्षांत समारोह में भाग लेंगे और वर्चुअल रियलिटी केस रिपॉजिटरी का भी शुभारंभ करेंगे।

 

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे।

 

उपराष्ट्रपति आज बिरसा मुंडा हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे और खूंटी के उलिहातु गांव जाएंगे, जो आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा का जन्मस्थान है। वहां वे उनके वंशजों से मिलेंगे और पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। श्री राधाकृष्णन रांची के बिरसा मुंडा परिसर और बिरसा चौक स्थित बिरसा मुंडा की प्रतिमाओं पर भी पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। बाद में, वे आई.आई.एम. रांची के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।


वर्चुअल रियलिटी (VR) केस रिपॉजिटरी से जुड़ी खास बातें

वर्चुअल रियलिटी (VR) केस रिपॉजिटरी एक डिजिटल डेटाबेस है, जो विभिन्न क्षेत्रों—जैसे शिक्षा, चिकित्सा (पुनर्वास), रक्षा, और फोरेंसिक (अपराध स्थल पुनर्निर्माण)—से संबंधित इमर्सिव 3D सिमुलेशन और मामलों का अध्ययन (case studies) संग्रहीत करता है। यह तकनीक उपयोगकर्ताओं को जटिल परिदृश्यों का यथार्थवादी अनुभव प्रदान करती है।

वर्चुअल रियलिटी केस रिपॉजिटरी के मुख्य अनुप्रयोग:

  • चिकित्सा और पुनर्वास (Medical & Rehabilitation): वीआर स्ट्रोक के मरीजों के लिए संज्ञानात्मक पुनर्वास (cognitive rehabilitation) और मोबिलिटी डिवाइस-मिक्स्ड रियलिटी (MD-MR) जैसे नैदानिक ​​परिणाम प्रदान करता है, जो निपुणता और पकड़ की ताकत में सुधार करते हैं।
  • न्यायिक और फोरेंसिक (Forensic & Legal): अपराध स्थल का पुनर्निर्माण (Crime scene reconstruction) करना, जहां 2D छवियों से वर्चुअल टूर बनाकर अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत किए जाते हैं।
  • शिक्षा और प्रशिक्षण (Education & Training): आईआईएम (IIM) जैसे संस्थानों में केस स्टडीज के लिए इस्तेमाल, साथ ही सेना में खतरनाक परिस्थितियों का सुरक्षित अभ्यास।
  • अनुसंधान और विकास (Research): यह एक बहुविषयक क्षेत्र है, जो वर्चुअल, ऑगमेंटेड (AR) और मिक्स्ड रियलिटी (MR) पर मौलिक शोध प्रकाशित करता है।


प्रमुख उपयोगकर्ता और लाभ:

  • शिक्षक और छात्र: जटिल विषयों को 3D में समझने के लिए।
  • चिकित्सक: मरीजों के पुनर्वास के लिए (गेमिफाइड वीआर)।
  • जांचकर्ता: अपराध दृश्यों के डिजिटल विश्लेषण के लिए।


सीमाएं:

यह एक महंगी तकनीक है, और इसके लंबे समय तक उपयोग से आंखों और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। 

Friday, March 27, 2026

Weather Update: 29 मार्च को लेकर मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में इन दिनों मौसम लगातार करवट ले रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में मौसम में और बदलाव देखने को मिलेगा। खासकर 29 मार्च को लेकर मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है, जिसमें तेज बारिश, गरज-चमक और आंधी-तूफान की संभावना जताई गई है।


मौसम विभाग के अनुसार, 27 मार्च को अधिकतम तापमान करीब 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री दर्ज किया गया। इस दिन सामान्यतः आसमान में बादल छाए रहने के साथ हल्की बारिश या बूंदाबांदी हुई। साथ ही 20-30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं।


28 मार्च को मौसम आंशिक रूप से साफ रहने का अनुमान है, जहां अधिकतम तापमान 32 डिग्री और न्यूनतम 18 डिग्री रहने की संभावना है। हालांकि, 29 मार्च को मौसम अचानक ज्यादा सक्रिय हो जाएगा। इस दिन अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 21 डिग्री के आसपास रहने का अनुमान है।


सुबह से लेकर शाम तक गरज के साथ बारिश, बिजली चमकने और 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। 30 मार्च को भी मौसम पूरी तरह सामान्य नहीं होगा। इस दिन अधिकतम तापमान 30 डिग्री और न्यूनतम 21 डिग्री रहने की संभावना है। दिनभर बादल छाए रहने के साथ हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक जारी रह सकती है। लगातार हो रही हल्की बारिश और बूंदाबांदी का असर वायु गुणवत्ता पर भी साफ दिखाई दे रहा है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत सामूहिक विवाह सम्मेलन रायसेन में 19 अप्रैल को आयोजित

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत वर्ष 2026-27 में जिले में अक्षय तृतीय 19 अप्रैल 2026 को सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। जिला मुख्यालय रायसेन में आयोजित होने वाले इस सामूहिक विवाह सम्मेलन हेतु आयोजक नगर पालिका रायसेन तथा नोडल अधिकारी उप संचालक सामाजिक न्याय श्री मनोज बाथम रहेंगे। सामूहिक विवाह सम्मेलन में सम्मिलित होने वाले वर-वधु द्वारा आवेदन फार्म शासन द्वारा निर्धारित पात्रता मापदण्ड शर्तो के अधीन दिनांक 01 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 तक सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण कार्यालय रायसेन में जमा किए जा सकते हैं। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए सामाजिक सुरक्षा अधिकारी रायसेन श्री अनुराग भदौरिया के मो.न. 9131805671 पर या सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण कार्यालय रायसेन में सम्पर्क किया जा सकता है।


मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना भारत के विभिन्न राज्यों (जैसे मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और बिहार) द्वारा संचालित एक कल्याणकारी योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों, विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं की बेटियों की शादी के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है।


राज्यवार प्रमुख विवरण (2026 अपडेट)

विभिन्न राज्यों में इस योजना के तहत मिलने वाली सहायता और नियम अलग-अलग हैं:

  • मध्य प्रदेश: राज्य सरकार नवविवाहित जोड़ों को Rs.55,000 की सहायता देती है। इसमें Rs.49,000 सीधे वधु के बैंक खाते में जमा किए जाते हैं और Rs.6,000 सामूहिक विवाह आयोजन के खर्च के लिए होते हैं। ताजा अपडेट के अनुसार, निवाड़ी जैसे जिलों में आवेदन की अवधि 20 मार्च 2026 से 05 अप्रैल 2026 तक निर्धारित की गई है।
  • छत्तीसगढ़: यहाँ भी सामूहिक विवाह कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। हाल ही में 10 फरवरी 2026 को प्रदेश भर में 6,412 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न हुआ।
  • उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत प्रति जोड़ा Rs.51,000 की सहायता दी जाती है (जिसमें Rs.35,000 नकद, Rs.10,000 का सामान और Rs.6,000 आयोजन खर्च शामिल है)। कुछ रिपोर्टों के अनुसार सहायता राशि को Rs.1 लाख तक बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।
  • बिहार: बिहार में बेटियों के विवाह के लिए आर्थिक मदद के साथ-साथ सरकार हर ग्राम पंचायत में आधुनिक विवाह मंडप का निर्माण कर रही है, जिसका लक्ष्य 2030 तक सभी 8,530 पंचायतों को कवर करना है।


योजना का लाभ लेने के लिए सामान्य शर्तें इस प्रकार हैं 

  • आयु: वधु की आयु कम से कम 18 वर्ष और वर की 21 वर्ष होनी चाहिए।
  • निवास: आवेदक संबंधित राज्य का स्थायी निवासी होना चाहिए।
  • आय: परिवार गरीबी रेखा (BPL) के नीचे होना चाहिए।

आवश्यक दस्तावेज

  • आधार कार्ड और समग्र आईडी (MP के लिए)।
  • निवास और आय प्रमाण पत्र।
  • आयु प्रमाण पत्र (मार्कशीट या जन्म प्रमाण पत्र)।
  • बैंक पासबुक की फोटोकॉपी।
  • वर-वधु की पासपोर्ट साइज फोटो। 

आवेदन कैसे करें?

  • ऑनलाइन: आप राज्य के आधिकारिक पोर्टल (जैसे MP के लिए socialjustice.mp.gov.in) पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं।
  • ऑफलाइन: ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत/जनपद पंचायत और शहरी क्षेत्रों में नगर निगम/नगर पालिका कार्यालय से फॉर्म प्राप्त कर और भरकर जमा किया जा सकता है।

रामनवमी पर विशेष: रामनवमी के बारे में जानें विस्तार से?

रामनवमी भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला एक अत्यंत पवित्र हिंदू त्योहार है। वर्ष 2026 में, रामनवमी का यह पावन पर्व मुख्य रूप से 27 मार्च को मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर प्रारंभ होगी और 27 मार्च को सुबह 10 बजकर 6 मिनट पर समाप्त होगी। यह पर्व उस आदर्श पुरुष की स्मृति को जीवंत करता है, जिसने अपने आचरण से सिद्ध किया कि मर्यादा का पालन करते हुए भी मनुष्य सर्वोच्च शिखरों को प्राप्त कर सकता है। श्रीराम का चरित्र धार्मिक आस्था से परे एक जीवंत दर्शन है, जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र तीनों के लिए मार्गदर्शक है। रामनवमी हमें केवल पूजा तक सीमित नहीं रखती, बल्कि सत्य, न्याय, त्याग और कर्तव्य जैसे मूल्यों को जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा देती है। यही कारण है कि यह पर्व त्रेतायुग से लेकर आज तक समान रूप से प्रासंगिक बना हुआ है।


महत्व और तिथि (2026)

  • तिथि: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है।
  • शुभ मुहूर्त (2026): पूजा का सबसे शुभ समय सुबह 11:13 से दोपहर 1:41 तक है।
  • धार्मिक महत्व: इस दिन भगवान विष्णु ने अधर्म का नाश करने के लिए राजा दशरथ और माता कौशल्या के घर सातवें अवतार 'राम' के रूप में जन्म लिया था।


पूजा विधि और उत्सव

  • पूजा: श्रद्धालु इस दिन भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
  • सूर्य तिलक (अयोध्या): अयोध्या के नवनिर्मित राम मंदिर में दोपहर के समय रामलला का 'सूर्य तिलक' एक प्रमुख आकर्षण होता है, जहाँ सूर्य की किरणें सीधे उनके माथे को सुशोभित करती हैं।
  • अनुष्ठान: भक्त व्रत रखते हैं, रामचरितमानस का पाठ करते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और कई स्थानों पर भव्य शोभायात्राएं निकाली जाती हैं।
  • कन्या पूजन: चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन होने के कारण, इस दिन कई घरों में कन्या पूजन करके व्रत का पारण किया जाता है।


मुख्य परंपराएं

  • अयोध्या: भगवान राम की जन्मस्थली होने के कारण यहाँ उत्सव की भव्यता देखते ही बनती है。
  • भजन और कीर्तन: मंदिरों में विशेष रूप से "भय प्रगट कृपाला दीनदयाला" जैसे स्तुति गान किए जाते हैं।
  • आदर्श: यह पर्व हमें श्री राम के आदर्शों—सत्य, मर्यादा, त्याग और धैर्य—को अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है।


रामकथा की कालजयी परंपरा

रामनवमी की आधारशिला उस महान कथा में निहित है, जिसे रामायण के रूप में जाना जाता है। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित यह ग्रंथ भारतीय सभ्यता की आधार-रचना है, जबकि गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस ने इसे जन-जन तक पहुंचाया। रामकथा केवल एक राजकुमार के जीवन का वृत्तांत नहीं, बल्कि धर्म और अधर्म, न्याय और अन्याय, त्याग और स्वार्थ के बीच संघर्ष की महागाथा है। इसकी विशेषता यह है कि इसमें मानवीय भावनाओं का अत्यंत सजीव और सार्वकालिक चित्रण मिलता है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में रामलीला, कथा-वाचन और भक्ति-परंपराओं के माध्यम से इसका सतत प्रवाह यह सिद्ध करता है कि श्रीराम भारतीय संस्कृति के जीवंत प्रतीक हैं। रामनवमी इस परंपरा का उत्कर्ष बिंदु है, जहां इतिहास, आस्था और लोकजीवन एकाकार हो जाते हैं।


‘राम’ का अर्थ है,जिसमें साधक रमण करे

‘राम’ केवल एक व्यक्तिवाचक संज्ञा नहीं, बल्कि एक गहन दार्शनिक अवधारणा है। संस्कृत की ‘रम्’ धातु से निर्मित ‘राम’ का अर्थ है,जिसमें साधक रमण करे। इस दृष्टि से राम कोई बाहरी सत्ता नहीं, बल्कि वह चेतना हैं, जो प्रत्येक मनुष्य के भीतर विद्यमान है। जब व्यक्ति अपने भीतर सत्य, करुणा और न्याय के तत्वों को जागृत करता है, तभी ‘रामत्व’ प्रकट होता है। अतः रामनवमी का वास्तविक अर्थ बाहरी उत्सव से अधिक आंतरिक जागरण है अहंकार, क्रोध और मोह का परित्याग कर मर्यादा और सत्य के मार्ग पर अग्रसर होने का।


अवतार का दिव्य उद्देश्य

धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रीराम भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं, जिनका अवतरण धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए हुआ। यह केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि जीवन का शाश्वत सिद्धांत है कि अन्याय के विरुद्ध सत्य की विजय निश्चित होती है। रामनवमी इस विश्वास को सुदृढ़ करती है कि जब-जब समाज में अनाचार बढ़ता है, तब-तब धर्म के आदर्श पुनः प्रकट होकर मानवता को दिशा देते हैं।


त्याग और कर्तव्य आदर्श जीवन की आधारशिला

श्रीराम के जीवन का सबसे उज्ज्वल पक्ष उनका त्याग और कर्तव्यनिष्ठा है। जहां इतिहास में सत्ता के लिए संघर्ष सामान्य रहा है, वहीं श्रीराम ने पिता के वचन की रक्षा हेतु राज्य, वैभव और सुख-सुविधाओं का त्याग कर वनवास स्वीकार किया। “रघुकुल रीति सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाए” यह केवल एक उक्ति नहीं, बल्कि उनके जीवन का सार है। आज के स्वार्थ प्रधान युग में यह आदर्श हमें सिखाता है कि सच्ची महानता व्यक्तिगत लाभ में नहीं, बल्कि कर्तव्य और समर्पण में निहित होती है।


सामाजिक समरसता का व्यावहारिक स्वरूप

श्रीराम का जीवन सामाजिक समावेशिता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है। उन्होंने अपने आचरण से यह सिद्ध किया कि समाज में किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। केवट को सखा मानना, शबरी के प्रेम को स्वीकार करना और वानर-भालू समाज को साथ लेकर चलना ये सभी प्रसंग सामाजिक समानता के जीवंत प्रतीक हैं। रामनवमी हमें यह संदेश देती है कि सशक्त समाज वही है, जहां सभी वर्गों को समान सम्मान और अवसर प्राप्त हों।


करुणा और संवेदना मानवता का मूल तत्व

श्रीराम केवल वीरता और नीति के प्रतीक नहीं, बल्कि करुणा और संवेदनशीलता के भी आदर्श हैं। निषादराज, शबरी और विभीषण के प्रति उनका व्यवहार यह दर्शाता है कि उनके लिए प्रेम और सहानुभूति ही सर्वोच्च धर्म थे। यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि समाज का वास्तविक विकास शक्ति से नहीं, बल्कि संवेदना और मानवता से संभव है।


रामराज्य यानी आदर्श शासन की संकल्पना

भारतीय चिंतन में ‘रामराज्य’ आदर्श शासन-व्यवस्था का प्रतीक है, जहां न्याय, समानता और लोक कल्याण सर्वोपरि होते हैं। यह केवल एक कल्पना नहीं, बल्कि सुशासन का व्यावहारिक मॉडल है। “दैहिक दैविक भौतिक तापा, राम राज नहिं काहुहि व्यापा” यह पंक्ति उस व्यवस्था को दर्शाती है, जहां भय, शोषण और असमानता का अभाव होता है। आधुनिक लोकतंत्र में भी यह अवधारणा उतनी ही प्रासंगिक है, क्योंकि यह सत्ता को सेवा का माध्यम मानने की प्रेरणा देती है।


धर्म और शौर्य का संतुलन

श्रीराम का जीवन यह भी सिखाता है कि करुणा के साथ-साथ अन्याय के विरुद्ध साहस भी आवश्यक है। रावण का वध केवल एक युद्ध नहीं, बल्कि अहंकार और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। यह संतुलन हमें बताता है कि सच्चा धर्म वही है, जो अन्याय के विरुद्ध दृढ़ता से खड़ा हो सके।


समकालीन संदर्भ में राम का संदेश

आज के युग में जब समाज नैतिक संकट, असमानता और अशांति से जूझ रहा है, तब श्रीराम के आदर्श और अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है नेतृत्व में संयम और दूरदर्शिता, प्रकृति के साथ संतुलित सह-अस्तित्व, विविधताओं में एकता और सामाजिक सद्भाव। रामनवमी हमें यह स्मरण कराती है कि वास्तविक प्रगति केवल भौतिक उन्नति में नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक विकास में निहित है।


रामराज्य’ की भावना को व्यवहारिक जीवन में उतारने का प्रयास

प्रभु श्रीराम का चरित्र सुशासन, लोक कल्याण और न्यायपूर्ण व्यवस्था का जीवंत आदर्श है, जो युगों-युगों तक मानवता का मार्गदर्शन करता रहेगा। रामनवमी का वास्तविक संदेश केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि उन मूल्यों को अपने जीवन में उतारना है, जिनका श्रीराम ने पालन किया। जब प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर सत्य, करुणा और मर्यादा को जागृत करता है, तभी ‘रामत्व’ का उदय होता है। यही वह पथ है, जो समाज को समरसता, राष्ट्र को सुदृढ़ता और मानवता को शांति प्रदान करता है। अतः इस पावन अवसर पर हमारा संकल्प होना चाहिए कि हम सत्य और न्याय के मार्ग पर चलें, समाज में प्रेम और समानता को बढ़ावा दें और ‘रामराज्य’ की भावना को व्यवहारिक जीवन में उतारने का प्रयास करें। यही रामनवमी का सार है।


रामनवमी की पूजा विधि या व्रत कथा के बारे 

विभिन्न व्रतों (जैसे जीवित्पुत्रिका, गुरुवार) की पूजा विधि में सुबह स्नान, चौकी पर स्थापित भगवान को पीले वस्त्र/पुष्प, दीप, नैवेद्य (भोग) अर्पित करना और कथा सुनना मुख्य है। गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा और जितिया/नवरात्रि में कलश स्थापना व विशेष भोग (गुजिया, फल) आवश्यक हैं।


प्रमुख व्रत पूजा विधि और कथा (विस्तार):

जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत (संतान की दीर्घायु):

विधि: भगवान जीमूतवाहन की कुशा (घास) से बनी मूर्ति की पूजा, 7 प्रकार के अनाज, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

कथा: चील और सियारन की कथा प्रचलित है। सियारन ने व्रत के नियम तोड़े, जबकि चील ने व्रत पूर्ण किया। फलतः चील की संतानें दीर्घायु हुईं।


बृहस्पतिवार (गुरुवार) व्रत (सुख-समृद्धि):

विधि: पीले वस्त्र पहनें, विष्णु जी की प्रतिमा स्थापित करें। पीले फूल, चने की दाल, गुड़, मुनक्का और हल्दी अर्पित करें। केले के पेड़ की पूजा और कथा के बाद परिक्रमा करें।

कथा: एक व्यापारी की पुत्री द्वारा व्रत करने और राजा द्वारा उसका आधा राज्य वापस करने की कथा सुनी जाती है।


बुधवार व्रत (सुख-शांति):

विधि: गणेश जी की पूजा, दूर्वा (21 गांठ) और हरी वस्तुओं का प्रयोग करें।

कथा: अनलासुर दैत्य को गणेश जी द्वारा निगलने के बाद कश्यप ऋषि द्वारा दूर्वा से उनके पेट की जलन शांत करने की कथा है।

सामान्य पूजा नियम:

  • व्रत कथा सुनना/पढ़ना अनिवार्य है।
  • अंत में भगवान की आरती करें।


ध्यान दें: व्रत का पूरा फल पाने के लिए कथा श्रवण और पूजा के अंत में क्षमा याचना (अपनी भूलों के लिए) जरूर करें।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सपत्नीक श्री अंगारेश्वर महादेव का पूजन-दर्शन कर अभिषेक किया

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरूवार 26-03-2026 को उज्जैन स्थित अंगारेश्वर महादेव मंदिर में सपत्नीक पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री अंगारेश्वर महादेव का पंचामृत से अभिषेक कर प्रदेश की जनता की सुख-समृद्धि की कामना की।


श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन (Shree Angareshwar Mahadev Mandir Ujjain) के बारे में प्रमुख बातें

भारत के मध्य प्रदेश राज्य के उज्जैन में शिप्रा नदी के तट पर स्थित श्री अंगारेश्वर महादेव (43वें महादेव) मंगल ग्रह के जन्मस्थान के रूप में प्रसिद्ध एक प्राचीन मंदिर है, जहाँ भात पूजा द्वारा मंगल दोष का निवारण किया जाता है। यह मंदिर 84 महादेवों में से एक है और यहां दर्शन-पूजन से संतान, भूमि और संपत्ति सुख की प्राप्ति मानी जाती है। 


श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर की मुख्य विशेषताएं

  • पौराणिक महत्व: मान्यता के अनुसार, अंधकासुर के वध के समय भगवान शिव के पसीने की बूंदें पृथ्वी पर गिरने से मंगल ग्रह का जन्म हुआ, इसलिए यह मंगल ग्रह का उत्पत्ति स्थान माना जाता है।
  • भात पूजा (Bhaat Puja): यहाँ चावल (भात) से भगवान शिव की पूजा की जाती है, जो मंगल दोष, कुंडली में मांगलिक दोष और भूमि संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
  • विशेष दिन: मंगलवार का दिन यहाँ पूजा के लिए विशेष महत्व रखता है, खासकर मंगलवार की चतुर्थी को।
  • स्थान: यह मंदिर उज्जैन, मध्य प्रदेश में शिप्रा नदी के किनारे स्थित है।
  • अन्य मान्यताएँ: इस मंदिर में दर्शन से वास्तु दोष दूर होते हैं और न्यायालयीन कार्यों में विजय प्राप्त होती है। 


क्यों इतने महत्वपूर्ण है ये देव, क्यों इनके दर्शन इतने फलदायी हैं?

पुराणों में मंगल ग्रह का जन्म स्थान उज्जैन में माना गया है। इसलिए मंगल ग्रह की शांति के लिए यथा संभव अंगारेश्वर महादेव में विशेष पूजा फलदायी मानी गई है। धार्मिक मान्यता है कि इस पूजा से मंगल ग्रह दोष की शांति होती है और विवाह योग्य युवक-युवतियों के विवाह में मांगलिक दोषों के कारण आ रही समस्याएं हल हो जाती है।


श्री अंगारेश्वर महादेव (उज्जैन) ही भूमि पुत्र मंगल हैं अवंतिका कि प्राचीन 84 महादेवों में स्थित 43वे महादेव श्री अंगारेश्वर महादेव जो कि सिद्ध्वट (वट्व्रक्ष) के सामने शिप्रा के उस पर स्थित हैं, जिन्हें मंगल देव (गृह) भी कहा जाता हैं। माना जाता है कि जो व्यक्ति प्रतिदिन इस महालिंग श्री अंगारेश्वर का दर्शन करेगा उनका फिर जन्म नही होगा। जो इस लिंग का पूजन मंगलवार को करेगा वह इस युग में कृतार्थ हो जाएगा, इसमे कोइ संशय नही हैं। जो मंगलवार कि चतुर्थी के दिन अंगारेश्वर का दर्शन-व्रत-पूजन करेंगे वह संतान, धन, भूमि, सम्पत्ति, यश को प्राप्त करेगा। मनाान जाता है कि इनके दर्शन-पूजन से वास्तुदोष, भुमिदोष का भी निवारण होता हैं। न्यायालय में विजय प्राप्त होती हैं। इस लिंग पर भात पूजन करने से मंगल दोष, भूमि दोष का भी निवारण होता पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नवग्रहों में विशेष स्थान रखने वाले मंगल ग्रह का जन्म स्थान उज्जैन यानि प्राचीन नगरी अवन्तिका को माना गया है। देश के सभी स्थानों से मंगल पीड़ा निवारण और अनुग्रह प्राप्त करने के लिए लोग यहां आते हैं। जनमान्यताओं के अनुसार मंगल की जन्म स्थली पर भात पूजा कराने से मंगलजन्य कष्ट से व्यक्ति को शांति मिलती है। मंगल को नवग्रहों में सेनापति के पद से शुशोभित किया गया है। जन्म कुंडली में मंगल की प्रधानता जहां मंगल दोष उत्पन्न करती है, वहीं व्यक्ति को सेना, पुलिस या पराक्रमी पदो पर शुशोभित कर यश और कीर्ति भी दिलाती है। 


भगवान शिव के पसीने की बूंदों से उत्पन्न हुए मंगल ग्रह

ब्रह्मवर्त पुराण के अनुसार मंगल पृथ्वी से अलग हुआ एक ग्रह है। इसीलिए इसे भूमि पुत्र माना गया है। इसे विष्णु पुत्र भी कहते हैं। स्कंध पुराण के अनुसार अवन्तिका में दैत्य अंधकासुर ने भगवान शिव की तपस्या कर यह वरदान प्राप्त किया था कि उसके शरीर से जितनी भी रक्त की बूंदे गिरेंगी वहां उतने ही राक्षस पैदा हो जाएंगे। वरदान के अनुसार तपस्या के बल पर अंधकासुर ने अपार शक्ति प्राप्त कर ली और पृथ्वी पर वह अनियंत्रित उत्पाद मचाने लगा। उसके उत्पादों से बचने के लिए व इंद्रादि देवताओं की रक्षा के लिए स्वयं भगवान शिव को उससे लडऩा पड़ा था। लड़ते-लड़ते जब शिव थक गए तो उनके ललाट से पसीने की बूंदें गिरी। इससे एक भारी विस्फोट हुआ और एक बालक अंगारक की उत्पत्ति हुई। इसी बालक ने दैत्य के रक्त को भस्म कर दिया और अंधकासुर का अंत हुआ।


एक अन्य कथा के अनुसार देवाधिदेव भगवान शंकर से एक समय पार्वती जी का वार्तालाप हो रहा था। इसी चर्चा के दौरान पार्वती जी ने भगवान शंकर से पूछा की उन्हें मंगलकारी अंगारक के जन्म के बारे में जानने की बहुत इच्छा हैं। तब देवाधिदेव भगवान शंकर ने पार्वती जी से कहा की हे पर्वत की कन्या उज्जैन में तिरालीसवां ज्योतिर्लिंग अंगारेश्वर का हैं जिनके दर्शन मात्र से सर्व सम्पदा प्राप्त होती हैं।


पूर्व समय में लाल शरीर की शोभवाला और टेड़े शरीर वाला क्रोध से युक्त यह बालक मेरे द्वारा ही उत्पन्न हुआ में ने उसे पृथ्वी पर रख दिया इसलिए उसका नाम भूमि पुत्र हुआ। पैदा होते ही स्थूल शरीर वाला वह बालक भय देने लगा। उसके कोप से पृथ्वी कम्पित होने लगी। मनुष्य और देवतादि सब दुखी हो गए। समुद्रों में तूफान आने लगी। पर्वत हिलने लगे। उसी के प्रभाव स्वरूप देवता मनुष्य आदि परेशान होने लगे।


अंत में परेशान होकर सभी ऋषि देवता इंद्रा सभी देवगुरु वृहस्पति के पास गए और उनसे चर्चा कर उन्हें अपने साथ लेकर ब्रह्मलोक गए। और पितामह ब्रह्मा जी को सारा वृतांत सुनाया की किस प्रकार भगवान शंकर के शरीर से बालक का जन्म हुआ और उत्पन्न होने के कुछ ही समय में उसने तीनो लोकों का भ्रमण कर डाला। अनेकों का भक्षण कर लिया और सभी को परेशान कर दिया।


सभी की बातें सुनकर प्रजापिता ब्रह्मा जी ने मुझसे कैलाश पर्वत पर आकर मिलाने का निर्णय किया। मेरे पास आकर सभी ने भय पूरक मेरे शरीर से उत्पन्न उस बालक के क्रिया कलापों का वर्णन किया की किस प्रकार उस बालक ने सभी को डरा दिया और अनेकों का भक्षण कर लिया।


यह सुनकर मेने उस बालक को बुलाया और उससे पूछा की ऐसा क्यों कर रहे हो। तब उस बालक ने कहा की प्रभु में कौन सा काम करूं। मेने उसे समझाया की जगत को त्रास मत दो। ऐसा कहकर मेने उसे बार-बार समझाया। मेने उसे कहा की मेरे शरीर की राजस प्रकृति से तुम्हारा जन्म हुआ हैं। इसीलिए तुम्हारा नाम अंगारक हुआ हैं तुम लोगो का मंगल करो,उन्हें प्रसन्न और आनंदित रखो यही तुम्हारा कर्म हैं। इस समय तुमसे भूलवश वक्री कार्य हुए हैं इसलिए विद्वान लोग तुम्हें वक्र नाम से पुकारेंगे।


इस प्रकार मेरे समझाने पर उस बालक ने पूछा की बिना आहार के मेरी तृप्ति कैसे होगी। उसने कहा की हे देवाधिदेव आप मुझे अच्छा स्थान दो,स्वामित्व दो,शक्ति दो और आहार भी जल्दी से दे दो। उस पुत्र के ऐसे वचन सुनकर मेने सोचा की यह बालक हैं और प्रिय भी हैं ऐसा विचार कर उत्तम स्थान अक्षय देना चाहिए यह सोचकर मेने उसे अपनी गोद में बिठा लिया और प्रेम से कहा की हे पुत्र मेने तुझे महाकाल वन (उज्जैन नगरी) में गंगेश्वर से पूर्व में स्थान दिया हैं। उस स्थान पर शिप्र और खगर्ता का शुभ संगम हुआ हैं। जब मेने गंगा को मस्तक पर धारण किया था उस समय वह गुस्से से चन्द्र मंडल से नीचे गिरी थी तब वह महाकाल वन क्षेत्र में गिरी थी उस समय गंगा आकाश से नीचे आई थी इसीलिए उसका नाम खगर्ता हुआ और इसीलिए मेने वहां पर अवतार लिया में यहां पर लिंग (महादेव) के रूप में निवास करता हूं। और सभी देवतादिक मेरी पूजा करते हैं। यह स्थान देवतों को भी दुर्लभ हैं अत: हैं प्रिय पुत्र तुम शीघ्र वहां के लिए प्रस्थान करो और उस संगम पर मेरी पूजा करो वह संगम का स्थल तुम्हारे नाम से जग में प्रसिद्द होगा और ग्रहों के बीच में तेरा आधिपत्य होगा। तुझे मैं ने तीसरा स्थान दिया हैं। वहां तुम्हें तृप्ति प्राप्त होगी। ग्रहों के बीच तुम्हारी पूजा होगी और तिथियों में मैं ने तुम्हें चतुर्थी तिथि प्रदान की हैं, इस चतुर्थी को जो भी तुम्हारी प्रसन्नता के लिए व्रत, शांति दक्षिणा सहित पूजन करेंगे उससे तुम्हें तृप्ति होगी, भोजन मिलेगा और मैं ने तुम्हें वार मंगलवार दिया हैं जिससे सभी को मंगल की प्राप्ति होगी। जो भी मनुष्य मंगलवार को विद्यारम्भ करेगा, नए वस्त्राभूषण धारण करेगा या फिर शरीर पर तेल लगाएगा उसे इस सभी कर्मो का फल नहीं मिलेगा।


मेरी कही बातें सुनकर उस वक्रांग मंगल पुत्र ने स्वीकार कर ली और उसका नाम अंगारकेश्वर हो गया और इस प्रकार मेरे वचन अनुसार वह अवंतिकापुरी (वर्तमान उज्जैन,मध्यप्रदेश) में अवस्थित हो गया। उस वक्रांग मंगल पुत्र ने जब शिप्रा जी के पावन तट पर रमणीय खगर्ता नदी के संगम पर मुझे लिंग रूप में देखा तो तो वह परम शांति को प्राप्त हो गया और मेने उसे देखकर आलिंगन किया, उसे आशीर्वाद दिया की हैं पुत्र तेरे सभी वांछित कार्य पूर्ण होंगे। हैं मंगल में तुझ से प्रसन्न हुं। आज से तेरा नाम अंगारकेश्वर तीनो लोकों में प्रसिद्द होगा इसमें कोई संशय नहीं हैं जो कोई भी मेरे दर्शन प्रतिदिन इस संमेश्वर के पास करेगा उसका इस पृथ्वी पर पुन: जन्म नहीं होगा जो मेरा पूजन मंगलवार के दिन इस अंगारकेश्वर पर करेंगे वह इस कलियुग में कृतार्थ हो जायेगा इसमें कोई संशय नहीं हैं जो लोग मंगलवार की चतुर्थी को मेरा व्रत, पूजन और दर्शन करेंगे वह इस घोर दुखों युक्त संसार में पुन: जन्म नहीं लेंगे।


तुम मनुष्य मात्र की कुंडलियों में योग कारक रहोगे। योग की अनुकूलता के लिए जो व्यक्ति यहां आकर तुम्हारी पूजा करेगा, उसका मंगल होगा। तभी से लोग मंगल की पूजा के लिए उज्जैन में आते हैं और अपनी श्रद्धा अनुसार अंगारेश्वर महादेव मंदिर में पूजा करके मंगल की अनुकूलता प्राप्त करते हैं।


जब मंगलवार को अमावस्या हो तब खगर्ता संगम पर देवता पूजित हैं उस दिन यहां दर्शन और पूजा-स्नान से वाराणसी,प्रयाग, गयाजी और करुक्षेत्र में एवं पुष्कर में स्नान-पूजन का जो पुण्य मिलता हैं उससे भी अधिक पुण्य फल यहां पूजन और दर्शन से प्राप्त होगा।

Tuesday, March 17, 2026

19 मार्च को आयोजित होगा सूर्य उपासना कार्यक्रम

शासन के निर्देशानुसार भारत के नववर्ष विक्रम सम्वत्, गुडी पड़वा गुरूवार, 19 मार्च को जिला मुख्यालयों पर सुबह 10 बजे विक्रमोत्सव 2026 अंतर्गत सूर्य उपासना कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस क्रम में श्री जुगल किशोर मंदिर प्रांगण पन्ना में भी सूर्य उपासना कार्यक्रम होगा। इस अवसर पर सम्राट विक्रमादित्य केन्द्रित नाट्य प्रस्तुति का मंचन किया जाएगा। नाट्य दल निर्देशक अनिरूद्ध मिस्त्री के निर्देशन में अंगना फाउंडेशन पन्ना के कलाकारों द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी। सूर्य उपासना कार्यक्रम पर भारत का नववर्ष विक्रम सम्वत् पुस्तिका का वितरण भी होगा। 


संस्कृति विभाग द्वारा सृष्टि आरंभ दिवस, वर्ष प्रतिपदा एवं विक्रम संवत् 2083 के शुभारंभ अवसर पर 19 मार्च को प्रात: 10 बजे सीहोर के पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में सूर्य उपासना कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। सूर्य उपासना कार्यक्रम में 19 मार्च को प्रात: 10 बजे कलाकारों के दल द्वारा सम्राट विक्रमादित्य की नाट्य प्रस्तुति का मंचन किया जाएगा। साथ ही भारत का नव वर्ष विक्रम संवत पुस्तिका के प्रचार प्रसार सहित जिले के प्रमुख मंदिर और स्थानों पर ब्रम्हध्वज भी स्थापित किए जाएंगे।


जिला पंचायत सीईओ श्रीमती सर्जना यादव द्वारा कार्यक्रम की तैयारियों के लिए सहायक संचालक श्री आकाश गोयल को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही अन्य विभागों के अधिकारियों को भी आवश्यक दायित्व सौंपे गए हैं।

Monday, March 16, 2026

राहुल गांधी के आरोपों पर दिल्ली विश्वविद्यालय का पलटवार

Delhi: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के इंटरव्यू में जाति के आधार पर छात्रों को फेल करने का गंभीर आरोप लगाया है। लखनऊ में एक 'संविधान सम्मेलन' में उन्होंने कहा, 'मैं दिल्ली विश्वविद्यालय गया। इंटरव्यू छात्रों को बाहर करने का तरीका है। वे पूछते हैं कि आपकी जाति क्या है, और फिर आप इंटरव्यू में फेल हो जाते हैं।' राहुल का आरोप है कि इंटरव्यू प्रक्रिया का इस्तेमाल दलितों और पिछड़े वर्ग के छात्रों को बाहर करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी निशाना साधते हुए कहा, उनके संगठनों की सूची निकाल लें, वहां आपको एक भी ओबीसी, दलित या आदिवासी नहीं मिलेगा। जाति जनगणना को राष्ट्रीय आवश्यकता बताते हुए राहुल ने कहा कि यह देश की सच्चाई को स्वीकार न करने जैसा है।


राहुल गांधी के आरोपों पर दिल्ली विश्वविद्यालय ने कड़ी आपत्ति जताई है और उन्हें 'तथ्यों की पुष्टि करने' को कहा है। विश्वविद्यालय ने कहा, अधिकांश यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों में दाखिले पारदर्शी तरीके से सीयूईटी के अंकों के आधार पर होते हैं, न कि इंटरव्यू के आधार पर। विश्वविद्यालय ने इंटरव्यू के जरिए जातिगत भेदभाव के दावों को 'भ्रामक' और 'तथ्यों से रहित' बताया है।

Saturday, March 14, 2026

PM Modi Bengal Rally: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित विशाल जनसभा को किया संबोधित

Bengal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल की मौजूदा तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला और राज्य में बदलाव का आह्वान किया।


जनसभा में भारी उत्साह और जोश

रैली में उपस्थित भारी भीड़ को देखकर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लोगों का उत्साह और जोश साफ बता रहा है कि बंगाल के लोग किस तरह के बदलाव की मांग कर रहे हैं। ब्रिगेड परेड ग्राउंड का इतिहास गवाह है कि जब भी बंगाल ने देश को दिशा दी है, तब यह मैदान बंगाल की आवाज बनकर सामने आया। उन्होंने कहा, “इस मैदान से अंग्रेजों के खिलाफ उठी आवाज पूरे हिंदुस्तान में क्रांति बन गई थी। आज एक बार फिर इसी मैदान से नए बंगाल की क्रांति का बिगुल बज गया है।”


टीएमसी पर निशाना और बदलाव का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने बंगाल की मौजूदा सरकार पर आरोप लगाया कि रैली को रोकने के लिए हरसंभव कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि टीएमसी ने रैली में आने वाले लोगों को चोर कहकर अपमानित किया, लेकिन जनता जानती है कि असली चोर कौन हैं। मोदी ने बताया कि पुल बंद करवा दिए गए, गाड़ियां रोकी गईं, ट्रैफिक जाम कराया गया और भाजपा के झंडे-पोस्टर हटवाए गए, फिर भी जनता ने विशाल जनसैलाब के रूप में रैली में भाग लिया।


महाजंगलराज का काउंटडाउन और कानून का राज

प्रधानमंत्री ने कहा कि बंगाल में ‘महाजंगलराज’ लाने वालों का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। राज्य में कानून का राज लौटने वाला है और जो भी कानून तोड़ेगा या अत्याचार करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा, “चुन-चुनकर सभी जुल्मों का हिसाब लिया जाएगा। राज्य सरकार चाहे कितनी भी कोशिश कर ले, बदलाव की आंधी को कोई नहीं रोक सकता। मां दुर्गा का आशीर्वाद भाजपा और एनडीए के साथ है और यही शक्ति बंगाल में परिवर्तन लाएगी।” 

Tuesday, March 10, 2026

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना के लिए ‘डिफेंस फोर्सेज विजन’ रोडमैप किया जारी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को साउथ ब्लॉक में भारतीय सेना के लिए ‘डिफेंस फोर्सेज विजन’ रोडमैप जारी किया। यह बड़ा ब्लूप्रिंट हेडक्वार्टर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ ने रक्षा बलों को आधुनिक, इंटीग्रेटेड और तकनीक से लैस सेना में बदलने के लिए तैयार किया है, जो 2047 तक भारत के विकसित देश बनने के सपने को पूरा करने में मदद कर सके। यह डॉक्यूमेंट भविष्य की युद्ध चुनौतियों के लिए ढलने वाली सेना बनाने के लिए इनोवेशन, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और मॉडर्न ट्रेनिंग फ्रेमवर्क के महत्व पर भी जोर देता है।


इस विजन डॉक्यूमेंट में सशस्त्र बलों में जरूरी सामरिक सुधारों के बारे में बताया गया है


इस विजन डॉक्यूमेंट में सशस्त्र बलों में जरूरी सामरिक सुधारों, क्षमता बढ़ाने और संगठनात्मक बदलावों के बारे में बताया गया है, ताकि बदलते भू-रणनीतिक, तकनीकी और सुरक्षा माहौल से अच्छे से निपटा जा सके। इसमें सेना को एक इंटीग्रेटेड, मल्टी-डोमेन और फुर्तीली फोर्स में बदलने की सोची गई है, जो दुश्मनों को रोकने, हर तरह के झगड़े में जवाब देने और तेजी से बदलते ग्लोबल और रीजनल हालात के बीच बढ़ते स्ट्रेटेजिक हितों की रक्षा करने में काबिल हो। इस विजन का एक मुख्य हिस्सा सेनाओं के बीच तालमेल और तालमेल पर जोर देना है, जिससे प्लानिंग, ऑपरेशन और क्षमता विकास में ज़्यादा तालमेल को बढ़ावा मिलेगा।

 

इस विजन में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित किया गया है


रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस विजन में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर ध्यान केन्द्रित किया गया है, जो देश की खास सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से स्वदेशी तकनीक और समाधान अपनाने को बढ़ावा देता है। घरेलू रक्षा विनिर्माण और प्रौद्योगिकी क्षमताओं को मजबूत करने से ऑपरेशनल तैयारी बढ़ने और देश की ग्रोथ में योगदान देने की उम्मीद है। विजन डॉक्यूमेंट में शॉर्ट-टर्म, मिड-टर्म और लॉन्ग-टर्म टाइमलाइन में साफ तौर पर प्राथमिकता वाले क्षमता लक्ष्यों के साथ एक कैलिब्रेटेड रोडमैप अपनाया गया है। यह विश्व स्तरीय डिफेंस फोर्स बनाने के लिए जरूरी सैन्य क्षमताओं, संस्थागत सुधारों और रणनीतिक साझेदारी के विकास में सहयोग करेगा।


यह विजन डॉक्यूमेंट पूरे देश के नजरिए की जरूरत पर देता है जोर 


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों की जटिलता को पहचानते हुए यह विजन डॉक्यूमेंट पूरे देश के नजरिए की जरूरत पर जोर देता है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा पक्की करने के लिए सैन्य ताकत को कूटनीतिक, तकनीकी और आर्थिक ताकत के साथ जोड़ा जाएगा। लगातार सुधारों, इनोवेशन और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के जरिए इसका मकसद यह पक्का करना है कि भारत की आजादी की सौवीं सालगिरह तक देश की सेना दुनिया भर में सम्मानित, टेक्नोलॉजिकली एडवांस्ड और लड़ाई के लिए तैयार मिलिट्री के तौर पर खड़ी हो, जो मजबूत विकसित भारत में योगदान दे।


इस मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, सेना उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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