वासंतिक चैत्र नवरात्री की अष्टमी तिथि पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कल गोरखनाथ मंदिर में स्थित शक्तिपीठ में मां महागौरी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मुख्यमंत्री ने राज्य के लोगों के कल्याण के लिए मां आदि शक्ति जगत जननी की प्रार्थना की तथा गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुसार आरती और हवन किया।
गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर में वासंतिक नवरात्र की अष्टमी तिथि पर मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने शक्तिपीठ में मां महागौरी की विशेष पूजा-अर्चना की। उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन और आरती कर प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। मंदिर में इस अवसर पर कन्या पूजन का भी अनुष्ठान किया गया।
अष्टमी पूजा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माता की आठवीं शक्ति महागौरी की विधि-विधान से पूजा की, जो पवित्रता और शांति का प्रतीक है।
अनुष्ठान: गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुसार माता की आरती और लोकमंगल के लिए हवन संपन्न हुआ।
महत्व: चैत्र नवरात्र के दौरान गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में विशेष धार्मिक अनुष्ठान और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है।
कन्या पूजन: अष्टमी के दिन ही, मुख्यमंत्री ने कन्याओं के पैर पखारकर और उन्हें भोजन कराकर कन्या पूजन की परंपरा को निभाया।
गोरखनाथ मंदिर का शक्तिपीठ नाथ पंथ की परंपरा में आध्यात्मिक ऊर्जा का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है।
गोरखनाथ मंदिर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में स्थित नाथ संप्रदाय का सबसे प्रमुख और पवित्र केंद्र है। यह मंदिर महायोगी गुरु गोरखनाथ को समर्पित है, जिन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है। 52 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला यह मंदिर न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है, बल्कि गोरखपुर की सांस्कृतिक पहचान भी है।
मुख्य जानकारी और आकर्षण
अखंड ज्योति: मंदिर के गर्भगृह में एक 'दिव्य ज्योति' जलती रहती है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह गुरु गोरखनाथ के समय से ही निरंतर प्रज्वलित है।
खिचड़ी मेला: प्रतिवर्ष मकर संक्रांति (14 जनवरी) के अवसर पर यहाँ एक महीने तक चलने वाला भव्य 'खिचड़ी मेला' आयोजित होता है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने आते हैं।
भीम सरोवर और मंदिर: मंदिर परिसर में पांडव पुत्र भीम की एक विशाल प्रतिमा और एक सरोवर (भीम सरोवर) स्थित है, जहाँ श्रद्धालु नौका विहार (boating) का आनंद ले सकते हैं।
महंत: वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मंदिर और गोरखनाथ मठ के मुख्य महंत हैं।
गौशाला: परिसर में एक बड़ी गौशाला (Goshala) भी है, जहाँ विभिन्न नस्लों की गायों की सेवा की जाती है।
इतिहास और निर्माण
प्राचीनता: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु गोरखनाथ ने त्रेता युग में इसी स्थान पर तपस्या की थी।
पुनर्निर्माण: मध्यकाल में अलाउद्दीन खिलजी और औरंगजेब जैसे शासकों द्वारा मंदिर को क्षति पहुँचाई गई थी, लेकिन बाद में महंत दिग्विजय नाथ और महंत अवैद्यनाथ जी के प्रयासों से इसका भव्य आधुनिक स्वरूप तैयार हुआ।
दर्शन के लिए विवरण
समय: मंदिर दर्शन के लिए प्रतिदिन प्रातः 4:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक खुला रहता है।
प्रवेश शुल्क: मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है।
स्थान: यह गोरखपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 4 किमी की दूरी पर नेपाल रोड (सोनौली राजमार्ग) पर स्थित है।
