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Monday, April 6, 2026

जेम ने रचा नया कीर्तिमान, 18.4 लाख करोड़ रुपये का जीएमवी पार

गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (जेम) ने सार्वजनिक खरीद के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए कुल 18.4 लाख करोड़ रुपये का सकल व्यापार मूल्य (जीएमवी) पार कर लिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में ही 5 लाख करोड़ रुपये का जीएमवी दर्ज किया गया, जो इसकी तेज़ी से बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। जेम एक पारदर्शी, कुशल और समावेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में उभरा है, जो सरकारी खरीद प्रक्रियाओं को सरल बनाते हुए विभिन्न उद्यमों को सरकारी मांग से जोड़ता है। यह सार्वजनिक व्यय में पारदर्शिता और आर्थिक समावेशन को बढ़ावा दे रहा है।


प्लेटफॉर्म पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसई) की भागीदारी उल्लेखनीय रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल ऑर्डरों का 68% एमएसई द्वारा पूरा किया गया, जो कुल जीएमवी का 47.1% है। जेम पर 2.1 लाख से अधिक महिला-नेतृत्व वाले एमएसई पंजीकृत हैं, जिन्हें 28,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर मिले हैं। वहीं, अनुसूचित जाति और जनजाति के उद्यमों को 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। स्टार्टअप उद्यमों ने भी इस प्लेटफॉर्म पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। वित्त वर्ष 2025-26 में इन्हें 19,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर मिले, जो 36% से अधिक की वृद्धि दर्शाते हैं। जेम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल) और उन्नत विश्लेषण का उपयोग किया जा रहा है। इससे खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है और अनियमितताओं की पहचान आसान हुई है। केंद्रीय मंत्रालयों और सार्वजनिक उपक्रमों के साथ-साथ अब राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी भी तेजी से बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में राज्यों द्वारा की गई खरीद में 38.3% की वृद्धि दर्ज की गई है। जेम के सीईओ मिहिर कुमार ने कहा कि 18.4 लाख करोड़ रुपये का जीएमवी पार करना इस प्लेटफॉर्म में खरीदारों और विक्रेताओं के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है।


गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (GeM) भारत सरकार का एक राष्ट्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल है, जिसे 9 अगस्त 2016 को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा लॉन्च किया गया था। इसे सरकारी विभागों, मंत्रालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) द्वारा वस्तुओं और सेवाओं की ऑनलाइन खरीद के लिए "वन-स्टॉप शॉप" के रूप में बनाया गया है।


GeM की मुख्य विशेषताएं और लाभ

  • पारदर्शिता और दक्षता: यह पूरी प्रक्रिया को पेपरलेस, संपर्क रहित और कैशलेस बनाता है, जिससे भ्रष्टाचार कम होता है।
  • समावेशिता: यह MSMEs (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों), स्टार्टअप्स और महिला उद्यमियों को सरकारी खरीद में भाग लेने का सीधा अवसर देता है।
  • अनिवार्य खरीद: जनरल फाइनेंशियल रूल्स (GFR) के नियम 149 के अनुसार, यदि कोई वस्तु GeM पर उपलब्ध है, तो सरकारी विभागों के लिए उसे वहीं से खरीदना अनिवार्य है।
  • व्यापक रेंज: पोर्टल पर 11,000 से अधिक उत्पाद श्रेणियां और 300 से अधिक सेवा श्रेणियां उपलब्ध हैं।


कौन उपयोग कर सकता है?

  • खरीदार (Buyers): केवल केंद्र और राज्य सरकार के विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयाँ, स्वायत्त निकाय और स्थानीय निकाय।
  • विक्रेता (Sellers): कोई भी व्यक्ति या फर्म (निर्माता, पुनर्विक्रेता या सेवा प्रदाता) जो सरकारी निविदाओं में भाग लेना चाहता है। विक्रेताओं के लिए GeM पंजीकरण पूर्णतः निःशुल्क है।


महत्वपूर्ण आंकड़े और नेतृत्व (अप्रैल 2026 के अनुसार)

Gross Merchandise Value (GMV): GeM ने अब तक कुल ₹18.4 लाख करोड़ का कारोबार पार कर लिया है। मुख्य नेतृत्व: गुजरात कैडर के IAS अधिकारी अजय भादू को GeM का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है (कार्यकाल 3 मार्च 2025 से प्रभावी)। 


खरीद के नियम (GFR 149)

खरीद की सीमा के आधार पर प्रक्रिया इस प्रकार है: 

  • ₹25,000 तक: सीधे किसी भी उपलब्ध विक्रेता से खरीद सकते हैं।
  • ₹25,001 से ₹5,00,000 तक: कम से कम तीन अलग-अलग निर्माताओं के बीच तुलना करके सबसे कम कीमत वाले (L1) विक्रेता से।
  • ₹5,00,000 से अधिक: ऑनलाइन बोली (Bidding) या रिवर्स ऑक्शन के माध्यम से अनिवार्य रूप से L1 विक्रेता से।


GeM पर विक्रेता (Seller) के रूप में पंजीकरण

GeM (Government e-Marketplace) पर विक्रेता के रूप में पंजीकरण के लिए, आधिकारिक वेबसाइट gem.gov.in पर जाएं, 'Sign Up' > 'Seller' चुनें, और आधार-लिंक मोबाइल नंबर का उपयोग करके साइन-अप करें। पैन, जीएसटी, उद्यम (MSME) और बैंक विवरण के साथ अपनी व्यावसायिक इकाई (Proprietorship/Company) को पंजीकृत करें, फिर नियम व शर्तें स्वीकार कर क्रेडेंशियल सत्यापित करें।


GeM विक्रेता पंजीकरण प्रक्रिया (चरण-दर-चरण):

  • वेबसाइट पर जाएं: GeM पोर्टल खोलें और 'Sign Up' बटन पर क्लिक करके 'Seller' (विक्रेता) चुनें।
  • प्राथमिक उपयोगकर्ता साइन-अप (Primary User Sign-up):
  • व्यवसाय इकाई का प्रकार चुनें (Proprietorship, Partnership, Private Limited, आदि)।
  • अपने आधार नंबर और आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर का उपयोग करके स्वयं को सत्यापित करें (यह व्यक्ति व्यवसाय का प्रमुख/अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता होना चाहिए)।
  • आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर प्राप्त OTP को दर्ज करें।


व्यापार विवरण (Business Details):

  • अपना PAN नंबर और संगठन का नाम दर्ज करें।
  • GSTIN (यदि लागू हो) और Udyam/MSME विवरण अपडेट करें।
  • लॉगिन क्रेडेंशियल बनाएं: एक वैध ईमेल आईडी और पासवर्ड बनाएं, फिर सेलर डेस्क में लॉग इन करें।


प्रोफाइल अपडेट करें:

  • कंपनी की जानकारी, पता, बैंक खाता विवरण और कर-सम्बन्धी विवरण भरें।
  • अपनी कैटेगरी (उत्पाद या सेवाएं) चुनें।
  • अनुपालन (Compliance): कुछ श्रेणियों के लिए, QCI विक्रेता मूल्यांकन (Vendor Assessment) या उत्पाद परीक्षण रिपोर्ट (Test Reports) की आवश्यकता हो सकती है। 


पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज:

  • आधार कार्ड (मोबाइल से लिंक)
  • PAN कार्ड (कंपनी/प्रोपराइटर का)
  • GSTIN (जीएसटी संख्या)
  • UDYAM/MSME प्रमाण पत्र (यदि हो)
  • बैंक खाता विवरण (कैंसिल्ड चेक के साथ)
  • ईमेल आईडी 


ध्यान दें: पंजीकरण प्रक्रिया को पूरा करने के लिए वेबसाइट के 'Sign Up' > 'Seller' के बाद 'Review Terms and Conditions' को ध्यान से पढ़ें और स्वीकार करें।

Saturday, April 4, 2026

जनजातीय क्षेत्रों में होम-स्टे बने आय का साधन, घर बैठे अच्छी कमाई कर रहे हैं होम-स्टे संचालक

मध्यप्रदेश की ग्रामीण संस्कृति के इन्द्रधनुषी रंगों को करीब से देखना और ज्यादा आनंददायी और रोमांचक हो गया है। बड़ी संख्या में बन रहे होम-स्टे में आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रदेश में हाई-वे और प्राकृतिक स्थानों के आस-पास के तथा जनजातीय क्षेत्रों में अब बड़ी संख्या में होम-स्टे नजर आ जाते हैं।


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्रामीण उदयमिता को बढ़ावा देते हुए ग्रामीण पर्यटन की असीम संभावनाओं का दोहन करने की नीति बनाई है। पिछले दो सालों में इससे ग्रामीण अंचलों में रोजगार के बड़े अवसर निर्मित हुए हैं। होम-स्टे से देशी-विदेशी पर्यटकों को ग्रामीण संस्कृति के दर्शन अब सहजता से सुलभ हो गया है।


प्रदेश में 98 चुने गांवों में 346 होम-स्टे ग्रामीणों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं, जबकि 642 होम-स्टे निर्माणाधीन हैं, जो जल्दी ही पर्यटकों के आतिथ्य के लिए तैयार हो जायेंगे। अब तक लगभग 34 हजार देशी-विदेशी पर्यटकों ने होम-स्टे कर ग्रामीण जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव लिया। सुखद आवास सुविधा, परम्परागत व्यंजनों का स्वाद, स्थानीय लोक-कला, नृत्य-संगीत, हस्त-कला, हस्त-शिल्प से होम-स्टे संचालक परिवारों को ₹6.76 करोड़ की आय प्राप्त हुई। उन्हें आय का एक गरिमापूर्ण साधन मिल गया। पर्यटकों को खुशियां देने के साथ उनके परिवारों में भी खुशियां आ गईं।


होम-स्टे योजना

पर्यटन विभाग अंतर्गत मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा संचालित ग्रामीण पर्यटन कार्यक्रम एक बहुआयामी योजना है। इसका उददेश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव लाना, गांवों में ही रोजगार के अवसरों का निर्माण करना और ग्रामीण संस्कृति बचाये रखना है। प्रदेश के सांस्कृतिक क्षेत्रों बुन्देलखण्ड, बघेलखण्ड, निमाड़, मालवा, महाकौशल एवं चम्बल की ग्रामीण सांस्कृतिक विरासतों का दर्शन करा रही है। होम-स्टे गांवों में रची-बसी संस्कृति, ग्रामीण आवास विन्यास, परम्परागत व्यंजन, नृत्य संगीत, लोक-कला, हस्त-शिल्प से पर्यटकों को सुखद अनुभव प्रदान करते हैं।


पर्यटन स्थलों से लगे ग्रामों के साथ ही प्राकृतिक, नैसर्गिक सुन्दरता से परिपूर्ण एवं जनजातीय सांस्कृतिक पहचान वाले गावों का चयन कर उन्हें गामीण पर्यटन से जोड़ा गया है। होम-स्टे शहरी पर्यटकों को कम बजट में गांव के शांत और सुरम्य वातावरण में सुखद स्मृतियों से सराबोर करने का काम कर रहे हैं।


मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा होम-स्टे एवं पर्यटन ग्रामों के समेकित विकास एवं विस्तार की दिशा में समय-समय पर हॉस्पिटैलिटी, साफ-सफाई एवं कौशल विकास के तकनीकी प्रशिक्षणों के माध्यम से ग्रामीणों के कौशल उन्नयन में सहयोग दिया जा रहा है। होम-स्टे के प्रचार-प्रसार में डिजिटल एवं आईटी, सोशल मीडिया के उपयोग की दिशा में भी समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाकर क्षमतावर्धन एवं सामुदायिक संगठन में नेतृत्व विकास का कार्य किया गया है। इसका परिणाम है कि पर्यटन ग्रामों के होम-स्टे को ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों से बुकिंग मिल रही है।


सीहोर का ग्राम खारी बना मॉडल पर्यटन ग्राम

भोपाल से लगे सीहोर जिले का ग्राम खारी ने मॉडल पर्यटन ग्राम के रूप में अपनी पहचान बनाई है। यहां लगभग 209 राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय सरकारी एवं गैर-सरकारी प्रतिनिधियों द्वारा समुदाय आधारित ग्रामीण अर्थव्यव्या में पर्यटन ग्रामों के योगदान का अध्ययन किया गया है।


बैतूल जिले के घोड़ा डोंगरी तहसील के "बाचा'' गांव में गणेश उइके एक-डेढ़ साल से ताप्ती विहार होम-स्टे चला रहे हैं। उन्हें ₹2 लाख रूपये का शुद्ध मुनाफा हुआ है। होम-स्टे चलाने का उन्हें अच्छा अनुभव हो गया है। देखते ही देखते "बाचा'' गांव में 8 होम-स्टे खुल गये हैं। सभी में स्थानीय पर्यटकों के अलावा विदेशी पर्यटक भी आने लगे हैं। ग्रामीण संस्कृति के दर्शन करते हुए आराम से रहना और देशी खाना पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण होता है। ज्वार-बाजरे की रोटियां, टमाटर की चटनी, भटे का भरता, देशी सब्जियों के व्यंजन, कोदो-कुटकी की खीर जैसा ग्रामीण खाना, भजन व नृत्य मंडलियों के साथ सहभागिता करना, गायों को चारा खिलाना, दूध दुहना, कुएं से पानी भरना, बैलगाड़ी हांकना जैसी ग्रामीण गतिविधियां पर्यटकों को बहुत लुभाती हैं और हमेशा के लिए सुखदायी स्मृतियां बन जाती हैं।


"बाचा'' के श्री गणेश उइके बताते हैं कि अब तक 500 से ज्यादा परिवार होम-स्टे के लिये आ चुके हैं। इनमें 5 दुबई से आये विदेशी मेहमान भी थे। "बाचा'' की आदर्श पर्यटक समिति के अध्यक्ष श्री अनिल धुर्वे ने बताया कि "बाचा'' गांव नागपुर हाइ-वे से लगा है। यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। हम चाहते हैं कि हमारा स्वागत सत्कार का व्यवसाय और आगे बढ़े।


मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सोच की तारीफ करते हुए श्री धुर्वे बताते हैं कि इससे हमारी रोजगार की समस्या हल हो रही है। आदर्श पर्यटक समिति के अन्य सदस्यों के भी अपने होम-स्टे हैं। जैसे श्री रामदास उइके शिवगंगा होम-स्टे, श्री अंकित का गुलमोहन होम-स्टे, श्री राजेश कुमरे का जयसेवा होम-स्टे, श्री सुधीर ठाकरे का सतपुड़ा होम-स्टे और सुश्री मीनाक्षी धुर्वे का आशीर्वाद होम-स्टे है। सभी में पर्यटकों का आगमन हो रहा है। एक ही गांव में इतने सारे होम-स्टे शायद "बाचा'' में ही हैं। भोपाल से नागपुर हाइ-वे पर होने से यहां पहुंचना आसान है। ऐतिहासिक देवगढ़ का किला है। यहां श्री कैलाश सरके 2023 होम-स्टे चला रहे हैं। अब तक करीब 100 परिवार आ चुके हैं। इनमें फ्रांस के पर्यटक भी शामिल हैं। होटल और बाचा बैतूल बस स्टेंड और रेल्वे स्टेशन से 25 किमी, और भोपाल से 165 किमी है। इसी प्रकार छिंदवाड़ा में नागपुर रोड में उमरानाला से 25 दूर गोंड राजाओं का होम-स्टे का फर्क समझाते हुए श्री कैलाश बताते हैं कि एकमात्र फर्क है वातावरण का। होटल की सुविधाओं का हम मुकाबला नहीं कर सकते लेकिन देशी खाना, व्यंजन, गांव का शांत माहौल, सूर्यादय, सूर्यास्त दर्शन, पक्षियों का कलरव होम-स्टे में मन को खुश करने वाला होती हैं। ऐसी योजना बनाने के लिए हम मुख्यमंत्री डॉ. यादव को धन्यवाद देते हैं। घर बैठे आमदनी का जरिया मिल गया है। होम-स्टे चलाने के लिए हम और भी काम करते हैं। अच्छी बागवानी कर रहे हैं, जिससे ताजा सब्जी मिलती रहे। खेतों को संवार रहे हैं। गांव को स्वच्छ रखने में कोई कसर नहीं छोड़ते। उन्होंने बताया कि हाल में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह जिले के दौरे पर थे और यहां हमारे गाँवों में भी आये थे। होम-स्टे पर रूके और इसके संचालन और प्रबंधन संबंधी जानकारी ली। उन्होने चाय पी और देवगढ़ का किला देखा। होम-स्टे चलाने की बधाई दी और किसी प्रकार की परेशानी होने पर बेझिझक बताने को भी कहा।


छिन्दवाड़ा जिले में ही तामिया में मनोहारी पातालकोट के पास चिमटीपुर में श्री रूपलाल पंदाराम आंवला होम-स्टे चला रहे हैं। उनके 2 भाई भी दूधीमाता और बाबामड होम-स्टे चला रहे हैं। श्री पंदाराम बताते हैं कि 2 साल पहले वर्ष 2024 से अब तक 100 से ज्यादा पर्यटक यहां आ चुके हैं। इनमें से कुछ पर्यटक कनाडा से भी आये थे। होम-स्टे के पास पातालकोट में बहने वाली दूधी नदी का उदगम और यहां मिलने वाली दुर्लभ जड़ी बूटियों के दर्शन रोमांचकारी अनुभव देते हैं। अब तक करीब ₹3 लाख तक की शुद्ध आय हो चुकी है। इसके अतिरिक्त स्थानीय जनजातीय नर्तक दलों के कलाकारों की भी कमाई हो जाती है। वे गैंडी और सैताम नृत्य करते हैं। खाने में महुआ खीर, महुआ लडडू, कोदो खीर और मक्का और स्थानीय सब्जियां पसंद करते हैं। पर्यटकों की बुकिंग "मेक माय ट्रिप'' के माध्यम से हो जाती है।


इसी प्रकार खरगौन के कसरावद के नावड़ा टौड़ी गांव में नर्मदा तट से लगे कीर्ति केवट होम-स्टे की विशेषता है कि यहां से नर्मदा मैया के दर्शन हो जाते हैं। होम-स्टे की संचालक श्रीमती चंदा बाई केवट बताती हैं कि हर महीने 15 से 20 बुकिंग हो जाती है। अब तक 150 पर्यटक आ चुके हैं जबकि अभी शुरूआत की है। करीब ₹2.50 लाख तक शुद्ध आय हो चुकी है।


होमस्टे पंजीकरण – प्रक्रिया, दस्तावेज़, शुल्क

होम-स्टे (Homestay) योजना भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा शुरू की गई एक पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय समुदायों को रोजगार देना और पर्यटकों को सस्ती व पारिवारिक आवास सुविधा उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत मकान मालिक अपने घर के अतिरिक्त कमरों को पर्यटकों को किराए पर दे सकते हैं, जिससे उन्हें आय का एक अतिरिक्त स्रोत मिलता है।


प्रमुख सरकारी पहल और श्रेणियां

पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार अपनी 'इन्क्रेडिबल इंडिया होम-स्टे' योजना के तहत आवास इकाइयों को दो श्रेणियों में वर्गीकृत करता है:

  • सिल्वर (Silver): बुनियादी सुविधाओं वाली मानक श्रेणी।
  • गोल्ड (Gold): उच्च गुणवत्ता वाली सुविधाओं और बेहतर सेवाओं वाली श्रेणी। 


राज्यों की प्रमुख योजनाएं

विभिन्न राज्यों ने अपनी भौगोलिक और सांस्कृतिक विशिष्टताओं के आधार पर विशिष्ट योजनाएं शुरू की हैं:

  • उत्तराखंड: यहाँ दीनदयाल उपाध्याय होम-स्टे योजना काफी लोकप्रिय है। इस योजना के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में नए होम-स्टे बनाने या पुराने घरों के नवीनीकरण के लिए 50% तक की सब्सिडी (अधिकतम ₹15 लाख) और ऋण पर ब्याज अनुदान दिया जाता है। अधिक जानकारी के लिए यहां जाएं-https://homestay.uttarakhandtourism.gov.in/homestay-policy
  • मध्य प्रदेश: "द रियल इंडिया होम स्टे" योजना के माध्यम से पर्यटकों को ग्रामीण संस्कृति से जोड़ने पर जोर दिया जाता है। यहाँ मकान मालिकों को पंजीकरण के बाद आतिथ्य सत्कार के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाता है। अधिक जानकारी के लिए यहां जाएं- www.mptourism.com
  • हिमाचल प्रदेश: राज्य सरकार ने पंजीकरण के लिए नई वेबसाइट homestay.hp.gov.in लॉन्च की है ताकि प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाया जा सके।
  • उत्तर प्रदेश: हाल ही में 'गंगा ग्रामीण होमस्टे योजना' शुरू की गई है, जो गंगा के किनारे बसे गांवों में पर्यटन को बढ़ावा देती है। यूपी पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट up-tourismportal.in पर ऑनलाइन आवेदन करें।


योजना के मुख्य लाभ

  • आर्थिक लाभ: मकान मालिकों को अपने खाली कमरों से नियमित आय होती है।
  • सब्सिडी और ऋण: कई राज्यों में निर्माण और नवीनीकरण के लिए वित्तीय सहायता और मुद्रा लोन (Mudra Loans) की सुविधा दी जाती है।
  • करों में छूट: कुछ राज्यों (जैसे दिल्ली और गोवा) में होम-स्टे को आवासीय श्रेणी में रखा जाता है, जिससे बिजली, पानी और संपत्ति कर व्यावसायिक दरों के बजाय घरेलू दरों पर देना होता है।
  • सांस्कृतिक विनिमय: यह योजना पर्यटकों को स्थानीय भोजन, परंपराओं और जीवनशैली का प्रत्यक्ष अनुभव लेने का मौका देती है।


पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज (सामान्य सूची)

पंजीकरण प्रक्रिया अब अधिकांश राज्यों में NIDHI+ पोर्टल या संबंधित राज्य पर्यटन की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन होती है। सामान्य तौर पर निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:

  • आधार कार्ड / पैन कार्ड।
  • घर/भूमि के स्वामित्व के कागजात (खतौनी/रजिस्ट्री)।
  • घर के कमरों, रसोई और शौचालय की तस्वीरें।
  • चरित्र प्रमाण पत्र।
  • अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) या अग्निशामक यंत्र का बिल।

Monday, March 30, 2026

इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग इकोसिस्टम को बढ़ावा देने ‘लीफ’ लॉन्च

केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के चार्जिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। भारी उद्योग मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने सोमवार को ‘लीफ’ यानी ‘लाइट इलेक्ट्रिक-व्हीकल एक्सेलेरेशन फोरम (एलईएएफ)’ लॉन्च किया, जो एक इंडस्ट्री-नेतृत्व वाला मंच है। 


यह फोरम एक निष्पक्ष प्लेटफॉर्म

यह फोरम एक निष्पक्ष प्लेटफॉर्म के रूप में बनाया गया है, जहां लाइट इलेक्ट्रिक वाहन (एलईवी) सेक्टर से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स, जैसे वाहन निर्माता (ओईएम), चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेटर, कंपोनेंट निर्माता और टेक्नोलॉजी प्रदाता, एक साथ काम कर सकें।


देश में इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों को अपनाने में लाएगा तेजी 

यह फोरम सरकार, रेगुलेटरी संस्थाओं और इंडस्ट्री संगठनों के साथ मिलकर ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को बढ़ावा देगा और देश में इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों को अपनाने में तेजी लाएगा।


यह पहल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विकास को करेगी तेज 

मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि यह पहल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विकास को तेज करेगी और बेहतर इंटरऑपरेबिलिटी, भरोसेमंद सिस्टम और विस्तृत चार्जिंग नेटवर्क के जरिए ईवी इकोसिस्टम को मजबूत बनाएगी।


यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन के अनुरूप

उन्होंने कहा कि यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन के अनुरूप है और इससे सतत (सस्टेनेबल) मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद मिलेगी। कुमारस्वामी ने यह भी कहा कि एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी ईवी इकोसिस्टम बनाने के लिए सरकार और उद्योग के बीच बेहतर सहयोग बेहद जरूरी है।


इस पहल का मकसद 

इस पहल का मकसद चार्जिंग नेटवर्क के बीच बेहतर तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी) बनाना, सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ाना और यूजर्स को एक समान अनुभव देना है, साथ ही सार्वजनिक चार्जिंग सुविधाओं का विस्तार करना भी है।


यह सिस्टम यूनिफाइड कनेक्टर के जरिए स्लो और फास्ट दोनों तरह की चार्जिंग को करेगा सपोर्ट 

इसके तहत ‘लाइट इलेक्ट्रिक कंबाइंड चार्जिंग सिस्टम (एलईसीसीएस)’ जैसे कदम उठाए जा रहे हैं, जिसे भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने मंजूरी दी है। यह सिस्टम एक यूनिफाइड कनेक्टर के जरिए स्लो और फास्ट दोनों तरह की चार्जिंग को सपोर्ट करेगा।


ईवी सेक्टर की 20 से ज्यादा कंपनियों को जोड़ चुका है यह फोरम

यह फोरम अब तक ईवी सेक्टर की 20 से ज्यादा कंपनियों को जोड़ चुका है, जिनमें वाहन निर्माता, चार्जिंग ऑपरेटर, सप्लायर्स और सॉफ्टवेयर कंपनियां शामिल हैं। आने वाले समय में इसमें और संगठनों के जुड़ने की उम्मीद है।


इंडस्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि देश में ईवी अपनाने की रफ्तार बढ़ रही है, ऐसे में चार्जिंग नेटवर्क की असमानता और यूजर अनुभव में अंतर जैसी चुनौतियों को दूर करना जरूरी होगा। उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर इंटरऑपरेबिलिटी और मजबूत सार्वजनिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर ही देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।

Saturday, March 14, 2026

AFFILIATE MARKETING: जानिए क्या होती है एफलिएट मार्केटिंग, कैसे करें प्रोडक्ट की डिटेलिंग

डिजिटल युग में एफलिएट मार्केटिंग से इंफ्लुएंसर तगड़ी कमाई कर रहे हैं। लेकिन कई ऐसे भी हैं, जिनके प्रोडक्ट यूजर्स तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। एक्सपर्ट्स कहते हैं, ऐसे मामलों में प्रोडक्ट की डिटेल जानकारी न होना भी बड़ी वजह हो सकती है। इसलिए प्रोडक्ट की डिटेलिंग करते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखें।


क्या होती है एफिलिएट मार्केटिंग?

एफिलिएट मार्केटिंग एक डिजिटल मार्केटिंग प्रक्रिया है जिसमें आप किसी कंपनी के उत्पादों या सेवाओं को ऑनलाइन प्रमोट करते हैं और प्रत्येक बिक्री पर कमीशन कमाते हैं। यह एक परफॉर्मेंस-आधारित तरीका है, जहां आप बिना उत्पाद बनाए, केवल एफिलिएट लिंक साझा करके अच्छी कमाई कर सकते हैं।


एफिलिएट मार्केटिंग कैसे काम करती है?

  • जॉइन: आप Amazon, Flipkart या CJ Affiliate जैसे कार्यक्रमों में शामिल होते हैं।
  • प्रमोट: आपको एक विशिष्ट एफिलिएट लिंक मिलता है, जिसे आप अपने ब्लॉग, वेबसाइट, YouTube, या सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं।
  • कमीशन: जब कोई उस लिंक पर क्लिक करके खरीदारी करता है, तो आपको कमीशन मिलता है।


एफिलिएट मार्केटिंग का उदाहरण क्या है?

शायद सफल एफिलिएट मार्केटिंग का सबसे बड़ा उदाहरण, अमेज़न एसोसिएट्स प्रोग्राम एक दशक से अधिक समय से नए और अनुभवी एफिलिएट मार्केटर्स के लिए पसंदीदा विकल्प रहा है। उनकी सफलता का राज क्या है? बेहतरीन ग्राहक सेवा और शानदार अनुभव।


प्रोडक्ट की डिटेल कैसी हो?

एक्सपर्ट्स कहते हैं प्रोडक्ट की डिटेल ऐसी होनी चाहिए जिससे कंज्यूमर को सभी बेसिक जानकारी मिल सके। जैसे- प्रोडक्ट क्या है, कैसे काम करता है, वारंटी क्या है, उसे इस्तेमाल कैसे करें और कौन सी गलतियां उसे खराब कर सकती हैं। इसके अलावा उसके साइज और खूबियों की जानकारी देना जरूरी है।


एसइओ का ध्यान रखें

प्रोडक्ट का कंटेंट बनाते वक्त ध्यान रखें कि इसमें ऐसे शब्दों का चयन हो जो गूगल सर्च में आ सकें। बजट फ्रेंडली प्रोडक्ट, अंडर 500 रुपीज प्रोडक्ट आदि ये कीवर्ड सबसे आम हैं। लोग इन्हें ही सर्च करते हैं और प्रोडक्ट तक पहुंचते हैं। प्रोडक्ट को लेकर जो भी सवाल मन में आता है कंज्यूमर से उसे पूछने के लिए कहें। इस तरह कंज्यूमर का आप पर विश्वास बढ़ता है।


भाषा कैसी हो ?

प्रोडक्ट की डिटेल लिखने में बहुत फैंसी भाषा का इस्तेमाल न करें। इसे बिल्कुल सामान्य रखें। यह ऐसी होनी चाहिए जो प्रोडक्ट के बारे में आसानी से अपनी बात समझा सके।

Tuesday, March 10, 2026

मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2025: नवीन इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीयन शुल्क (Registration Fee) एवं मोटरयान कर (Road Tax) में विशेष छूट

नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा प्रदेश में स्वच्छ, सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल परिवहन तंत्र को सुदृढ़ करने और कार्बन उत्सर्जन के न्यूनीकरण के उद्देश्य से "मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2025" का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। यह दूरदर्शी नीति 27 मार्च 2025 से संपूर्ण प्रदेश में प्रभावशील हो चुकी है, जिसमें पर्यावरण संवर्धन के लिये इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के क्रय एवं उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए नागरिकों को व्यापक स्तर पर विभिन्न वित्तीय रियायतें एवं विशिष्ट प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। शासन की इस पहल का मुख्य ध्येय पारंपरिक ईंधन आधारित वाहनों के स्थान पर आधुनिक एवं प्रदूषण मुक्त आवागमन के साधनों को जन-सामान्य के लिए सुलभ बनाना है।


राज्य शासन की इस अभिनव नीति में नवीन इलेक्ट्रिक वाहनों के क्रय पर उपभोक्ताओं को पंजीयन शुल्क (Registration Fee) एवं मोटरयान कर (Road Tax) में विशेष छूट प्रदान की जा रही है। यह निर्णय न केवल नागरिकों को आर्थिक संबल प्रदान कर रहा है, अपितु उन्हें भविष्योन्मुखी परिवहन व्यवस्था से जुड़ने के लिये प्रेरित भी कर रहा है। इसके अतिरिक्त, धारणीय विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये पेट्रोल, डीजल एवं सीएनजी संचालित पारंपरिक वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित (रेट्रोफिट) करने की तकनीक को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके लिए नियमानुसार समुचित वित्तीय सहायता सुलभ कराई जा रही है।


चार्जिंग अधोसंरचना विकास के लिये 30 प्रतिशत तक का अनुदान


अधोसंरचना विकास की दिशा में प्रदेश को 'इलेक्ट्रिक व्हीकल हब' के रूप में स्थापित करने के लिये राज्य सरकार द्वारा सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन अथवा चार्जरों की स्थापना पर लगभग 30 प्रतिशत तक के अनुदान (सब्सिडी) का प्रावधान किया गया है। इस दूरगामी कदम से प्रदेश भर में चार्जिंग स्टेशनों के व्यापक तंत्र का विस्तार होगा, जिससे नागरिकों को वाहन को सुगम एवं निर्बाध यात्रा का अनुभव प्राप्त हो सकेगा।


"ईव्ही तरंग पोर्टल" के माध्यम से योजनाओं का सुगम लाभ


EV वाहनों पर प्रोत्साहनों के लाभ वितरण की प्रक्रिया को अत्यंत सरल, पारदर्शी एवं तकनीक-आधारित बनाने के उद्देश्य से शासन द्वारा "ईव्ही तरंग पोर्टल" का संचालन किया जा रहा है। इस डिजिटल अधिष्ठान के माध्यम से पात्र हितग्राही विभिन्न सब्सिडी एवं अन्य लाभों के लिए घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। राज्य शासन ने समस्त प्रदेशवासियों से आह्वान किया है कि वे इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देकर 'स्वच्छ एवं हरित मध्यप्रदेश' के संकल्प को साकार करने में अपनी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें।

Thursday, February 12, 2026

6 महीने की टीबी दवा पद्धति अधिक किफायती और प्रभावी: ICMR स्टडी

इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित एक आर्थिक मूल्यांकन से पता चला है कि भारत में बहु-दवा प्रतिरोधी और रिफैम्पिसिन-प्रतिरोधी तपेदिक (एमडीआर/आरआर-टीबी) के लिए छह महीने की पूरी तरह मौखिक उपचार पद्धति न केवल कम लागत वाली है, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य परिणाम भी देती है। यह अध्ययन आईसीएमआर-राष्ट्रीय तपेदिक अनुसंधान संस्थान (आईसीएमआर-एनआईआरटी) द्वारा किया गया है।


अध्ययन में राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत इस्तेमाल हो रहे बेडाक्विलाइन युक्त मौजूदा उपचार रेजिमेन कम अवधि (9–11 महीने) और लंबी अवधि (18–20 महीने) की तुलना बीपीएएल (बेडाक्विलाइन, प्रेटोमैनिड और लाइनज़ोलिड) तथा बीपीएएलएम (मोक्सीफ्लोक्सासिन सहित) रेजिमेन से की गई।


विश्लेषण में पाया गया कि बीपीएएल उपचार पद्धति अधिक प्रभावी और लागत-बचत करने वाली है। प्रत्येक अतिरिक्त गुणवत्ता-समायोजित जीवन वर्ष (क्यूएएलवाई) के लिए, मानक उपचार की तुलना में स्वास्थ्य प्रणाली को प्रति रोगी 379 रुपये कम खर्च करना पड़ता है। वहीं, बीपीएएलएम उपचार पद्धति भी अत्यधिक लागत-प्रभावी साबित हुई, जिसमें प्रति अतिरिक्त क्यूएएलवाई प्राप्त करने पर प्रति रोगी केवल 37 रुपये का अतिरिक्त व्यय होता है।


अध्ययन के अनुसार दोनों नई उपचार पद्धतियों में दवाओं, अस्पताल यात्राओं और अनुवर्ती देखभाल सहित कुल स्वास्थ्य खर्च या तो कम है या मौजूदा उपचार के बराबर है।


विशेषज्ञों के मुताबिक, एमडीआर/आरआर-टीबी के इलाज में लंबी अवधि, दुष्प्रभाव और अधिक लागत जैसी बड़ी चुनौतियां रहती हैं। छह महीने की मौखिक दवाओं से उपचार की अवधि घटने के साथ मरीजों की उपचार-प्रतिबद्धता बढ़ सकती है, बीमारी से जुड़ी जटिलताएं कम हो सकती हैं और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकते हैं। इससे स्वास्थ्य प्रणाली पर बोझ भी कम होने की संभावना है।


अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि बीपीएएल-आधारित उपचार पद्धतियां लागत-बचत करने वाली या अत्यधिक लागत-प्रभावी हो सकती हैं। ऐसे में भारत में दवा-प्रतिरोधी तपेदिक से निपटने के लिए इन्हें एनटीईपी के तहत कार्यक्रमगत रूप से अपनाने पर विचार किया जा सकता है। यह कदम उपचार की अवधि को 9–18 महीने या उससे अधिक से घटाकर छह महीने करने में मदद कर सकता है और तपेदिक उन्मूलन की दिशा में राष्ट्रीय प्रयासों को गति दे सकता है।

Tuesday, February 10, 2026

नए इनकम टैक्स ड्राफ्ट में पैन नंबर नियमों में बड़ा बदलाव, 1 अप्रैल 2026 से लागू

सरकार की ओर से इनकम टैक्स नियमों का ड्राफ्ट जारी कर दिया गया है, इसमें नए इनकम टैक्स नियम 2026 में कई बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। इन नए नियमों में बैंक में जमा और निकासी, वाहनों की खरीद, होटल बिल और प्रॉपर्टी खरीदने पर पैन नंबर देने से संबंधित नियमों में बदलाव किया गया है।


नए ड्राफ्ट इनकम टैक्स नियमों के मुताबिक, एक साल में किसी व्यक्ति को एक या एक से अधिक खातों में 10 लाख रुपए तक की जमा एवं निकासी करने पर पैन नंबर नहीं देना होगा। मौजूदा समय में किसी भी बैंक में एक दिन में 50,000 रुपए या उससे अधिक की राशि जमा करने पर पैन देना आवश्यक है।


ड्राफ्ट में वाहन खरीदने से जुड़े नियम में भी बदलाव हुआ है और 5 लाख रुपए से ऊपर का वाहन (दोपहिया वाहन को मिलाकर) खरीदने पर पैन नंबर देने को अनिवार्य करना प्रस्तावित किया गया है। मौजूदा समय में किसी भी मूल्य के दोपहिया वाहन के लिए पैन नंबर देना आवश्यक नहीं है, जबकि अन्य कोई भी वाहन खरीदने पर पैन नंबर देना आवश्यक है।


नए इनकम टैक्स नियमों के ड्राफ्ट में हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए भी बड़ा बदलाव हुआ है। इसमें होटल और रेस्तरां या फिर बैंकेट हॉल में एक लाख के भुगतान पर पैन नंबर जरूरी नहीं हैं। मौजूदा समय में 50,000 रुपए या उससे अधिक के भुगतान पर पैन नंबर देना आवश्यक है।


इस ड्राफ्ट में प्रॉपर्टी से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। प्रस्तावित नियमों में 20 लाख रुपए तक की प्रॉपर्टी खरीदने पर पैन नंबर नहीं देना होगा, जबकि मौजूदा समय में यह सीमा 10 लाख रुपए है। नए इनकम टैक्स नियमों के तहत, बीमा कंपनी के साथ खाता खोलने के लिए पैन कार्ड अनिवार्य होगा। वर्तमान में, जीवन बीमा प्रीमियम सहित, एक वित्तीय वर्ष में 50,000 रुपए से अधिक के कुल भुगतान के लिए पैन कार्ड आवश्यक है।


नए इनकम टैक्स नियमों को अंतिम रूप दिए जाने के बाद, नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025, 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी अधिसूचना अगले महीने आ सकती है।

Saturday, January 31, 2026

ODOP जरी-ज़र्दोज़ी हेतु विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न

BHOPAL: भोपाल जिले के प्रमुख ODOP उत्पाद जरी-ज़र्दोज़ी को निर्यात एवं बाजार विस्तार की दिशा में सशक्त बनाने हेतु बुधवार को ODOP जरी-ज़र्दोज़ी केंद्र, गोलखेड़ी, भोपाल में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण, हाल ही में सम्पन्न ODOP एवं Export Awareness Workshop के अगले चरण के रूप में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य जरी-ज़र्दोज़ी कारीगरों एवं उद्यमियों को व्यावहारिक रूप से उद्योग-तैयार बनाना तथा उन्हें आधुनिक व्यापार एवं बाजार आवश्यकताओं से जोड़ना था।


कार्यक्रम मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) के International Trade & Investment Facilitation Cell (ITIFC) तथा भोपाल जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कारीगरों, SHGs, MSME इकाइयों एवं स्थानीय उद्यमियों ने ऑफलाइन सहभागिता दर्ज कराई। जो प्रतिभागी किसी कारणवश उपस्थित नहीं हो पाए, उन्होंने इस प्रशिक्षण को ऑनलाइन माध्यम से भी सक्रिय रूप से जॉइन किया, जिससे कार्यक्रम की पहुँच और प्रभाव दोनों व्यापक हुए। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण किया कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि यह रही कि सभी प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूर्ण किया।


प्रशिक्षण के दौरान जरी-ज़र्दोज़ी कारीगरों एवं उद्यमियों को डिजिटल व्यापार प्रणाली, ऑनलाइन मार्केटिंग एवं आधुनिक बाजार आवश्यकताओं की व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। साथ ही सत्र के दौरान लाइव रूप से कई प्रतिभागियों को डिजिटल मार्केट प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड भी किया गया, जिससे वे अपने उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुँचाने तथा "Local to Global" की दिशा में आगे बढ़ने के लिए सक्षम हो सकें।


कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों द्वारा यह विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि भोपाल की जरी-ज़र्दोज़ी कला एक विशिष्ट पारंपरिक हस्तशिल्प है, जिसमें डिजिटल बाजार के माध्यम से व्यापक संभावनाएँ निहित हैं।


प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को विशेष रूप से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपने उत्पादों को प्रस्तुत करने, ऑनलाइन बाजार से जुड़ने तथा आधुनिक मार्केटिंग प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। साथ ही कई कारीगरों एवं उद्यमियों को प्रशिक्षण सत्र के दौरान डिजिटल मार्केटप्लेस पर लाइव ऑनबोर्ड भी किया गया, जिससे वे अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुँचाने की दिशा में आगे बढ़ सकें।


कार्यक्रम के अंत में संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित हुआ, जिसमें कारीगरों ने डिजिटल बिक्री, लागत, पैकेजिंग एवं वित्तीय प्रक्रियाओं से जुड़े प्रश्न पूछे तथा विशेषज्ञों द्वारा सभी प्रश्नों के व्यवहारिक समाधान प्रस्तुत किए गए। जिला प्रशासन एवं MPIDC ने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम जरी-ज़र्दोज़ी कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाकर "Local to Global" की दिशा में सशक्त आधार प्रदान करेंगे तथा उन्हें नए बाजार और नए अवसरों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।

Saturday, January 24, 2026

एमपी ई-सेवा पोर्टल www.eseva.mp.gov.in और मोबाइल एप के माध्यम से ली जा सकती हैं नागरिक सेवाएं

विभिन्न शासकीय विभागों के माध्यम से संचालित नागरिक केन्द्रित सेवाएं अब एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। राज्य शासन द्वारा आम जन के लिये सरल, पारदर्शी व त्वरित ऑनलाइन सेवा शुरू की गई है। यह सेवायें एमपी ई-सेवा पोर्टल www.eseva.mp.gov.in एवं मोबाइल एप के माध्यम से प्राप्त की जा सकती हैं। मोबाइल एप गूगल प्ले स्टोर और एप स्टोर से आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है।


पोर्टल तथा एप पर सुविधा सेवायें, प्रमाण-पत्र, लायसेंस व कर, राजस्व कृषि एवं ग्रामीण विकास सेवायें, पेंशन, अन्य हितलाभ, सामाजिक कल्याण व सशक्तिकरण, शिक्षा, शहरी आवास और पर्यावरण, ऊर्जा, परिवहन, अधोसंरचना, व्यवसाय, निवेश व प्रमोशन, स्वास्थ्य व कल्याण, न्याय, कानून और शिकायत, यात्रा, संस्कृति, विरासत व पर्यटन, युवा, खेल एवं रोजगार उद्यमिता व कौशल इत्यादि से संबंधित सेवायें एमपी ई-सेवा पोर्टल पर उपलब्ध हैं।


एमपी ई-सेवा पोर्टल व मोबाइल एप पर शासकीय योजनाओं की पात्रता की जाँच, ऑनलाइन आवेदन, रियल टाइम आवेदन ट्रेकिंग, डिजिटल प्रमाण-पत्र डाउनलोड, समग्र इंटीग्रेशन, समग्र प्रोफाइल के आधार पर पूर्व में भरा हुआ आवेदन फॉर्म, सिंगल साइन ऑन (एसएसओ) सुविधा, इंटीग्रेटेड पेमेंट गेटवे सुविधा, महत्वपूर्ण हेल्पलाइन एवं एंड्रॉयड और आईओएस से संबंधित सुविधायें भी उपलब्ध हैं।

Tuesday, January 20, 2026

टाइगर रिज़र्व में सफारी MPOnline.gov.in से ही करें टिकटों की बुकिंग

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के टाइगर रिजर्व में सफारी टिकटों की बुकिंग केवलMPOnline के माध्यम से ही अधिकृत है। इसके अलावा किसी भी निजी वेबसाइट, मोबाइल ऐप या डिजिटल प्लेटफॉर्म को सफारी बुकिंग की अनुमति नहीं दी गई है। ऐसे किसी भी प्लेटफॉर्म के माध्यम से की जा रही बुकिंग अवैध है। विभाग ने पर्यटकों से अपील की है कि वे अत्यंत सतर्क रहें और केवल अधिकृत MPOnline पोर्टल के माध्यम से ही सफारी बुकिंग करें।


विभाग की अपील है कि यदि किसी पर्यटक ने इन अनधिकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सफारी बुक कराई है और वह धोखाधड़ी का शिकार हुआ है, इससे किसी प्रकार का नुकसान हुआ है अथवा बुकिंग संबंधी कोई अन्य शिकायत है, तो वह तत्काल संबंधित कार्यालय को इसकी सूचना दे। शिकायतों को आवश्यक कानूनी कार्रवाई के लिये राज्य साइबर पुलिस सेल को भेजा जाएगा। विभाग इस प्रकार की अनियमित और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाये जाने के लिए तत्पर है।


मध्यप्रदेश के टाइगर रिज़र्व में सफारी बुकिंग के लिये कुछ वेबसाइट और डिजिटल प्लेटफॉर्म मिलते जुलते भ्रामक नामों से सेवाएं देने का दावा कर रहे हैं। मध्यप्रदेश वन विभाग ने चेतावनी दी है कि ये वेबसाइट्स अनधिकृत हैं। इनसे बुकिंग कराने पर पर्यटकों को धोखाधड़ी और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। विभाग ने कहा है कि पर्यटकों के हितों की सुरक्षा और पारदर्शी, सुरक्षित एवं वैधानिक सफारी बुकिंग व्यवस्था सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

Monday, January 19, 2026

निंजा की कीमत कम, केटीएम में फीचर ज्यादा, यामाहा आर3 सबसे महंगी

कावासाकी निंजा 300 की कीमत कम- कावासाकी निंजा 300 को 2026 के लिए नए रंगों के साथ अपडेट किया है। यह फिलहाल भारत में बिकने वाली सबसे किफायती ट्विन-सिलेंडर स्पोर्ट बाइक है। इसका मुकाबला यामाहा वायजेडएफ आर3 और केटीएम आरसी 390 से है।


निंजा 300 (296 सीसी, 39 एचपी) और यामाहा आर3 (321 सीसी, 42 एचपी) दोनों में ट्विन-सिलेंडर इंजन मिलता है। इनका पावर आउटपुट ज्यादा रेव्स पर आता है, यानी बाइक का मजा लेने के लिए थोड़ा घुमाना पड़ता है। दूसरी तरफ केटीएम आरसी 390 मैं सिंगल-सिलेंडर इंजन (373 सीसी) है, लेकिन फिर भी इसकी पावर (43.5 एचपी) सबसे ज्यादा है। हालांकि ट्विन-सिलेंडर इंजन होने की वजह से कावासाकी और यामाहा ज्यादा स्मूद चलती हैं और उनकी आवाज भी ज्यादा सॉफ्ट और प्रीमियम लगती है।


फीचर्स में केटीएम आरसी 390 सबसे आगे- केटीएम आरसी 390 फीचर्स के मामले में काफी आगे है। इसमें बाय-डायरेक्शनल क्विकशिफ्टर, कलर टीएफटी डिस्प्ले और स्विचेबल एबीएस मिलता है। यामाहा में स्लिपर क्लच तक नहीं मिलता। निंजा में प्रोजेक्टर हेडलाइट पिछले साल जोड़ी गई।


यामाहा आर3 सबसे महंगी- तीनों में निंजा 300 (3.17 लाख) सबसे सस्ती है। फीचर्स और परफॉर्मेंस के हिसाब से केटीएम आरसी 390 (3.23 लाख रुपए) पैसा वसूल है। यामाहा आर3 का कीमत 3.39 लाख रुपए है।

Monday, January 5, 2026

इलेक्ट्रिक दोपहिया और कार टैक्स खरीदने पर 1.5 लाख तक की छूट

इलेक्ट्रिक वाहन (EV) खरीदने पर ₹1.5 लाख तक की छूट मुख्य रूप से आयकर अधिनियम की धारा 80EEB के तहत इलेक्ट्रिक वाहन ऋण के ब्याज पर मिलती है, जो व्यक्तियों को मिलता है, साथ ही कुछ राज्य सरकारें रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क में भी छूट देती हैं, जिससे EV खरीदना और भी किफायती हो जाता है, लेकिन यह लाभ केवल पुरानी कर प्रणाली (Old Tax Regime) अपनाने वालों को मिलता है। 

आयकर छूट (Income Tax Benefit):

  • धारा 80EEB: आप इलेक्ट्रिक वाहन (दोपहिया या कार) खरीदने के लिए लिए गए ऋण के ब्याज पर ₹1.5 लाख तक की कटौती का दावा कर सकते हैं।
  • पात्रता: यह लाभ केवल व्यक्तिगत करदाताओं (Individual Taxpayers) के लिए है, कंपनियों के लिए नहीं।
  • ऋण: यह ऋण किसी बैंक या NBFC (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी) से लिया जाना चाहिए और ऋण स्वीकृति 1 जनवरी 2019 और 31 मार्च 2023 के बीच होनी चाहिए (यह अवधि बढ़ाई जा सकती है, लेकिन यह समय-सीमा महत्वपूर्ण है)।
  • उपयोग: वाहन का उपयोग व्यक्तिगत या व्यावसायिक दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। 

अन्य लाभ (Other Benefits):

  • कम GST: पेट्रोल/डीजल वाहनों पर 12% की तुलना में EV पर केवल 5% GST लगता है।
  • रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क में छूट: कई राज्य (जैसे दिल्ली, महाराष्ट्र, तेलंगाना) EV पर पंजीकरण शुल्क और मोटर वाहन कर (Road Tax) में 100% तक छूट देते हैं।
  • ग्रीन टैक्स से छूट: EV को 15 साल बाद नवीनीकरण पर ग्रीन टैक्स से छूट मिलती है।

कैसे क्लेम करें (How to Claim):

  • आपको ऋण स्वीकृति पत्र, ब्याज भुगतान प्रमाणपत्र और वाहन के दस्तावेज़ रखने होंगे।
  • यह कटौती केवल पुरानी कर प्रणाली (Old Tax Regime) के तहत ही उपलब्ध है, नई वैकल्पिक कर प्रणाली (New Alternative Tax Regime) में नहीं।

फोरेंसिक लैब्स नेटवर्क पर 30 हजार करोड़ निवेश करेगी सरकार

नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने अगले पांच वर्षों में देशभर में फोरेंसिक लैब्स के नेटवर्क की स्थापना के लिए 30 हजार करोड़ रुपये का निवेश करने का निर्णय लिया है। 2029 तक हर राज्य में कम से कम एक फोरेंसिक विश्वविद्यालय या केंद्रीय फोरेंसिक लैब स्थापित की जाएगी। 


केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के श्री विजयपुरम में गृह मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह घोषणा की। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की गई। अपराध से लड़ने के लिए नवीनतम तकनीकों का उपयोग करने, केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) और राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) जैसे अत्याधुनिक केंद्रों की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। 


गृह मंत्री ने कहा, भारत सरकार और राज्य सरकारें अगले पांच वर्षों में देशभर में फोरेंसिक प्रयोगशालाओं के नेटवर्क के निर्माण के लिए 30 हजार करोड़ रुपये का निवेश करने जा रही हैं। वर्तमान में देश में सात सीएफएसएल हैं, जबकि आठ नए सीएफएसएल स्थापित किए जा रहे हैं।

Thursday, January 1, 2026

मर्सिडीज-बीएमडब्ल्यू भारत में बनाएंगे ब्रांडेड रेजीडेंसी

लग्जरी कार बनाने वाली मर्सिडीज बेंज और बीएमडब्ल्यू की नजरें अब भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र पर टिकी हुई हैं। ये कंपनियां बड़े शहरों में लग्जरी हाउसिंग सेगमेंट के लिए कई डेवलपरों के साथ बातचीत कर रही हैं। उद्योग सूत्रों ने कहा कि लैम्बोर्गिनी परिवार की भारतीय रियल एस्टेट बाजार में दिलचस्पी के बाद से यह रुझान बढ़ा है। संकेत मिलता है कि 2026 में इस तरह के सौदों में तेजी दिख सकती है। टोनिनो लैम्बोर्गिनी स्पा की मुंबई और चेन्नई में दो रियल एस्टेट डेवलपरों के साथ बातचीत अंतिम चरण में है। मर्सिडीज बेंज गुरुग्राम में एक लक्जरी ब्रांडेड रिहायशी परियोजना के लिए डेवलपरों से बातचीत कर रही है। मर्सिडीज की ऐसी दो परियोजनाएं दुबई में और दूसरी फ्लोरिडा के मियामी में है।


दुनिया में छठे स्थान पर- ब्रांडेड रिहायशी परियोजनाओं की संख्या के लिहाज से भारत फिलहाल दुनिया में छठे स्थान पर है। कुल वैश्विक आपूर्ति में भारत का योगदान करीब एक चौथाई है और वह वैश्विक संभावित परियोजनाओं के लिहाज से दसवें पायदान पर है। भारत में इस क्षेत्र में मौजूद प्रमुख कंपनियों में फोर सीजन्स, द रिट्ज कार्लटन, मैरियट, अरमानी कासा, वर्साचे होम, ट्रंप परिवार, हयात, पुलमैन, आईटीसी और हिल्टन शामिल हैं।


ये शहर हॉटस्पॉट नोएसिस कैपिटल- एडवाइजर्स की रिपोर्ट के अनुसार देश में मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलूरु, हैदराबाद और चेन्नई जैसे बाजारों में लग्जरी डेवलपर अपनी रफ्तार बढ़ा रहे हैं। भुवनेश्वर, चंडीगढ़, जयपुर, अहमदाबाद, इंदौर, गोवा और सूरत जैसे शहरों और महानगरों से 2 घंटे की ड्राइव वाली जगह ब्रांडेड रेजीडेंसी के लिए लोकप्रिय हो रही हैं।

Monday, December 29, 2025

नए साल 2026 पर शहर की हर बड़ी होटल रेस्टोरेंट और ढाबों में स्पेशल पैकेज

BHOPAL: हर साल की तरह इस बार भी पुराने साल की विदाई एवं वर्ष 2026 की अगवानी के लिए राजधानी के अन्य इलाकों की तरह ही संत हिरदाराम नगर, लालघाटी, गांधीनगर, नरसिंहगढ़ रोड एवं सीहोर मार्ग पर 200 से अधिक आलीशान होटल एवं ढाबों पर जबरदस्त तैयारियां की गई हैं। इन होटलों एवं ढाबों को दीपावली की तरह रोशनी से सजाया जा रहा है। अनेक होटलों एवं ढाबों में नए साल की अगवानी के लिए फर्नीचर भी नया बुलाया गया है। एक अनुमान के अनुसार अकेले 31 दिसम्बर की रात को लगभग 5 करोड़ का कारोबार किया जाएगा। 


इन सभी जगहों पर रात 8 बजे से लेकर रात 12.30 बजे तक म्यूजिक, डांस, स्वीमिंग पूल में जश्न के अलावा वेज और नानवेज तथा शराब की भी पूरी व्यवस्था की गई है। चूंकि इस बार 31 दिसम्बर को बुधवार है, और माना जाता है कि बुधवार खाने-पीने का दिन है, ऐसे में साल के अंतिम दिन न केवल नानवेज बल्कि शराब की भी खूब महफिलें जमेंगी। 

Sunday, December 28, 2025

2026 में इन कारों को मिल सकता है Facelift

नए साल 2026 में हुंडई वरना, होंडा सिटी, स्कोडा स्लाविया, सेडान और फॉक्सवैगन वर्टुस, इन गाड़ियों को फेसलिफ्ट (Facelift) मिलने वाला है। जानिए इन कारों में कौन से संभावित बदलाव देखने को मिल सकते हैं।


  • होंडा सिटी फेसलिफ्ट(Honda City Facelift)- एक्सटीरियर में मामूली बदलाव किए जाएंगे, जो इसके सिविक सेडान के करीब लाने की कोशिश होंगे। इंटीरियर लेआउट पहले जैसा ही रहेगा, लेकिन नए ट्रिम्स और अपहोल्स्ट्री मिल सकती है। फीचर्स में बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं, वैसे 360 डिग्री कैमरा जोड़ा जा सकता है। 
  • हुंडई वरना फेसलिफ्ट(Hyundai Verna Facelift)- एक्सटीरियल में नई अलॉय व्हील डिजाइन मिल सकती है। इंटीरियर में वेन्यू जैसा ड्यूल 12.3 इंजन स्क्रीन और थ्री-स्पोक स्टीयरिंग व्हील मिलने की उम्मीद है। नए कलर ऑप्शन और ट्रिम्स जोड़े जा सकते हैं। इंजन विकल्प वही रहेंगे। दोनों के साथ 6- स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स मिलेगा।
  • स्कोडा स्लाविया फेसलिफ्ट(Skoda slavia facelift)- हेडलाइट्स, ग्रिल, अलॉय व्हील और बंपर में छोटे बदलाव दिखाई दे सकते हैं। केबिन में नए ट्रिम्स और कलर थीम मिलने की उम्मीद है। 360-डिग्री कैमरा, अपडेटेड इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और इंफोटेनमेंट स्क्रीन के साथ लेवल-2 एडास फीचर जोड़ा जा सकता है। इंजन वही रहेंगा।
  • फॉक्सवैगन वर्टुस फेसलिफ्ट(Volkswagen Virtus Facelift)- फ्रंट और रियर डिजाइन में हल्के बदलाव, साथ ही नए अलॉय व्हील शामिल होंगे। वर्टुस, फेसलिफ्ट स्लाविया जैसी होगी और इसमें भी एडास जैसे सेफ्टी फीचर्स जुड़ सकते हैं। इंजन ऑप्शन लगभग वहीं रहेंगा और 8-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स दिए जाने की उम्मीद है।   

Saturday, December 27, 2025

डिमांड ज्यादा, होटल किराये में 6 फीसदी तक बढ़ोत्तरी की उम्मीद

देश में घरेलू पर्यटन, कॉरपोरेट यात्राओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसके चलते होटल और हॉस्पिटैलिटी उद्योग में मांग बढ़ रही है जबकि उसकी तुलना में आपूर्ति कम है। यही वजह है कि होटल के कमरों की दरों में 2026 तक 6% तक की वृद्धि होने की उम्मीद है। 


होटल इंडस्ट्री पर नजर रखने वाली रिसर्च फर्म कंपनी के मुताबिक अगले साल ब्रांडेड होटलों का औसत किराया 9,400 से 9,700  के बीच रहने की उम्मीद है। कंपनी के मुताबिक, देश का होटल और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है। यह वृद्धि घरेलू यात्रा की निरंतर मांग, प्रमुख महानगरों में कार्यालय स्थान की मांग में वृद्धि, अंतरराष्ट्रीय आगमन में सुधार के कारण होगी। 


कंपनी के मुताबिक, रूपए के हिसाब से देखें तो ब्रांडेड होटलों के कमरे के किराए अब तक के उच्चतम स्तर पर हैं। धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन बढ़ने से भी अगले साल होटलों के औसत किराए में 5 से 6 फीसदी की बढ़ोत्तरी हो सकती है। 


होटल उद्योग के सूत्रों के मुताबिक, 2026 में प्रस्तावित आपूर्ति में मिडस्केल और अपर-मेडस्केल होटलों का हिस्सा सबसे बड़ा होगा। ये कुल संभावित आपूर्ति के 50 प्रतिशत से अधिक होगा। इसके अलावा, कैलेंडर वर्ष 2026 में छोटी दूरी की अवकाश यात्राओं में वृद्धि होने की संभावना है। 

Friday, December 19, 2025

ब्रूट फोर्स अटैक क्या है, इसे कैसे पहचानें?

क्या होता है ब्रूट फोर्स अटैक?

यह एक ऐसा साइबर हमला है, जिसमें हैकर बार-बार अलग-अलग पासवर्ड डालकर अकाउंट खोलने की कोशिश करता है। इसमें वेबसाइट या सर्वर अचानक धीमा हो जाता है। 


ब्रूट फोर्स अटैक को कैसे पहचानें?

आपके आइपी ऐड्रेस पर अकाउंट लॉगिन रिक्वेस्ट आ रही है या किसी अकाउंट को खोलने के लिए बार-बार गलत पासवर्ड यूज किए जा रह है तो सावधान रहें, यह ब्रूट फोर्स अटैक का संकेत हो सकता है। 


कई बार हैकर आपका अकाउंट एड्रेस चुराकर उसे ओपन करने के लिए सिस्टम में प्रयोग कर पासवर्ड लॉक तोड़ देते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत अकाउंट का पासवर्ड बदलें और मजबूत सिक्योरिटी सिस्टम बनाएं।  

Wednesday, December 17, 2025

मस्क ने एक दिन में कमाए 167 अरब डॉलर

टेस्ला के सीईओ एलन मस्क की दौलत में एतिहासिक उछाल आया है। दरअसल, मस्क ने एक ही दिन में अपनी संपत्ति में इतनी बढ़ोतरी कर ली है जितनी वॉरेन बफेट पूरी जिंदगी में नहीं जुटा सके। 16 दिसंबर को मस्क की कुल संपत्ति बढ़कर 638 अरब डॉलर पहुंच गई। 


वर्तमान में एलन मस्क की दौलत 638 बिलियन डॉलर है। एक दिन पहले के मुकाबले एलन मस्क की दौलत में 167 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है। एक ही दिन के एतिहासिक उछाल के साथ ही एलन मस्क ने दिग्गज निवेशक वॉरेन बफेट को बहुत पीछे छोड़ दिया है। वॉरेन बफेट की कुल संपत्ति करीब 152 अरब डॉलर आंकी गई है। 

Saturday, December 13, 2025

एसबीआई ने कर्ज पर ब्याज 25 आधार अंक घटाया

आरबीआइ की ओर से रेपो रेट में कटौती के अनुरूप देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआइ ने अपनी बाह्म बेंचमार्क से जुड़ी ब्याज दरों (ईबीएलआर) में 25 आधार अंक की कटौती की है। इस कटौती के बाद ईबीएलआर घटकर 7.90 प्रतिशत हो गई है। यह कटौती 15 दिसंबर से प्रभावी होगी। 


इसके अलावा बैंक ने सभी अवधि के लिए मार्जिनल कास्ट आफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) को पांच आधार अंक घटाया है। 


इस कटौती के बाद एक वर्ष की परिपक्वता के लिए एमसीएलआर अब 8.70 प्रतिशत होगा। साथ ही बैंक ने आधार दरको 10 प्रतिशत से घटाकर 9.90 प्रतिशत कर दिया है। इसके अतिरिक्त वाली स्थायी जमा दर को 6.40 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। इंडियन ओवरसीज बैंक ने भी ईबीएलआर को 25 आधार अंक घटाकर 8.10 प्रतिशत कर दिया है। 

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