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Wednesday, April 8, 2026

सलूम्बर में फैली अज्ञात बीमारी पर बड़ा एक्शन, घर-घर सर्वे शुरू

राजस्थान के सलूम्बर जिले के लसाड़िया ब्लॉक के घाटा और लालपुरा गांवों में फैली अज्ञात बीमारी के कारण अब तक 7 बच्चों की मौत हो चुकी है। इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने "हाई अलर्ट" मोड पर बड़े पैमाने पर एक्शन शुरू कर दिया है। राजस्थान के सलूम्बर जिले में बच्चों की मौत के मामलों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर स्वास्थ्य अभियान शुरू किया है। इस मामले में अज्ञात बीमारी की जांच के लिए तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं।


मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के निर्देश पर उदयपुर संभाग के सभी सात जिलों में निगरानी और रोकथाम अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर भी स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। सरकार ने विशेषज्ञ टीमों का गठन किया है, जो बीमारी के कारणों की जांच कर रही हैं। साथ ही RNT Medical College की टीम और राज्य स्तरीय दल ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर इलाज और जांच व्यवस्था का आकलन किया।


स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 3,690 टीमों ने घर-घर जाकर सर्वे किया है और 52,000 से अधिक घरों को कवर किया गया है। इस दौरान 275 लोगों में बीमारी के लक्षण पाए गए, जिनमें से 25 को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पतालों में भेजा गया। इसके अलावा 13,000 से अधिक स्थानों पर जागरूकता अभियान भी चलाया गया, ताकि लोग सावधानी बरत सकें। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सलूम्बर के सेमारी गांव में 4 साल के एक बच्चे की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं, 651 मरीजों को मौके पर ही इलाज दिया गया।


बीमारी को फैलने से रोकने के लिए मच्छरजनित रोगों के खिलाफ भी अभियान चलाया गया, जिसमें 2,557 स्थानों पर एंटी-लार्वा गतिविधियां की गईं। जांच के लिए 1,796 ब्लड स्लाइड तैयार किए गए और 94 सैंपल लैब में भेजे गए हैं। सरकार ने लोगों से अपील की है कि अगर किसी को बुखार या अन्य लक्षण दिखें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें और सभी स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का पालन करें।


स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन और घर-घर सर्वे:

  • 3,690 टीमें तैनात: सरकार ने पूरे संभाग में 3,600 से अधिक टीमें तैनात की हैं।
  • 52,000 घरों का सर्वे: इन टीमों ने अब तक 52,000 से अधिक घरों का दरवाजा खटखटाकर स्वास्थ्य जांच की है।
  • 275 संदिग्ध मरीज मिले: सर्वे के दौरान बीमारी के लक्षण वाले 275 लोगों की पहचान की गई, जिनमें से 25 को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पतालों में भेजा गया है।
  • विशेषज्ञों की निगरानी: मुख्यमंत्री के निर्देश पर जयपुर और उदयपुर के विशेष डॉक्टरों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में डेरा डाले हुए हैं। 


बीमारी के मुख्य लक्षण और वर्तमान स्थिति:

  • लक्षण: प्रभावित बच्चों में तेज बुखार, उल्टी, पेट दर्द, दस्त और शरीर में ऐंठन जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। बीमारी इतनी गंभीर है कि कुछ मामलों में 24 घंटे के भीतर ही बच्चे दम तोड़ रहे हैं।
  • प्रभावित आयु वर्ग: मरने वाले सभी बच्चों की उम्र मुख्य रूप से 2 से 4 वर्ष के बीच है।
  • जांच: शुरुआती सैंपल्स में कुछ सामान्य वायरस की रिपोर्ट नेगेटिव आई है, इसलिए बीमारी का सटीक कारण अभी भी "अज्ञात" बना हुआ है।
  • निवारक उपाय: प्रशासन द्वारा गांवों में फोगिंग, एंटी-लार्वा छिड़काव और लोगों को उबला हुआ पानी पीने की सलाह दी जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

Tuesday, April 7, 2026

योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, ग्रेटर नोएडा में ‘मेट्रो विश्वविद्यालय’ को मंजूरी

उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 7 अप्रैल 2026 को हुई बैठक में ग्रेटर नोएडा में एक नए निजी विश्वविद्यालय, ‘मेट्रो विश्वविद्यालय’ (Metro University), की स्थापना को मंजूरी दे दी है।


योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में उच्च शिक्षा से जुड़े अहम प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत ग्रेटर नोएडा में निजी क्षेत्र के अंतर्गत ‘मेट्रो विश्वविद्यालय’ की स्थापना को स्वीकृति दी गई है। इसे प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि यह निर्णय उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के तहत लिया गया है। इस अधिनियम के माध्यम से निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, विनियमन और संचालन की स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।


मंत्री ने बताया कि प्रायोजक संस्था सनहिल हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से आवंटित 26.1 एकड़ भूमि पर ‘मेट्रो विश्वविद्यालय’ स्थापित करने का प्रस्ताव दिया गया था। विधिक परीक्षण के बाद इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके लिए ‘उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ लागू करने और संस्था को संचालन प्राधिकार-पत्र जारी करने का भी निर्णय लिया गया है।


सरकार का मानना है कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना से प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा के नए अवसर सृजित होंगे। इससे युवाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास के बेहतर मौके मिलेंगे, जिससे उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी।


योगी सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने पर जोर दे रही है। नए विश्वविद्यालयों की स्थापना से न केवल शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।


इसके अलावा कैबिनेट ने शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में भी बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। शिक्षामित्रों का मानदेय 10,000 रुपए से बढ़ाकर 18,000 रुपए प्रतिमाह कर दिया गया है, जिससे प्रदेश के लाखों शिक्षा कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा।


इस परियोजना के मुख्य विवरण निम्नलिखित हैं:

  • क्षेत्रफल और स्थान: यह विश्वविद्यालय ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा आवंटित 26.1 एकड़ भूमि पर बनाया जाएगा।
  • प्रस्तावक संस्था: इस विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव सनहिल हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड (Sunhill Healthcare Pvt Ltd) द्वारा दिया गया था।
  • कानूनी ढांचा: इसकी स्थापना 'उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019' के प्रावधानों के तहत की जाएगी. इसके लिए जल्द ही एक अध्यादेश (Ordinance) लाया जाएगा।


मुख्य उद्देश्य:

  • राज्य में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना और छात्रों को आधुनिक शिक्षा प्रदान करना।
  • उद्योग की जरूरतों के अनुसार कौशल-आधारित और रोजगारपरक पाठ्यक्रम (Job-oriented courses) उपलब्ध कराना।
  • स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर और निवेश को प्रोत्साहित करना।


उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के अनुसार, यह कदम उत्तर प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने और युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय है।

Saturday, April 4, 2026

तमिलनाडु में जन्मी रिनी संपत बनीं वॉशिंगटन डीसी मेयर चुनाव में पहली दक्षिण एशियाई उम्मीदवार

भारत के तमिलनाडु (थेनी) में जन्मी रिनी संपत ने वॉशिंगटन डीसी के मेयर चुनाव के लिए मतपत्र (ballot) पर जगह बनाकर इतिहास रच दिया है। वह इस पद के लिए चुनाव लड़ने वाली पहली दक्षिण एशियाई उम्मीदवार बन गई हैं।


तमिलनाडु में जन्‍मी सुश्री रिनी संपत वॉशिंगटन डीसी के मेयर के पद के लिए चुनाव लड़ने वाली पहली दक्षिण एशियाई उम्‍मीदवार बन गई हैं। वह वॉशिंगटन के राजनीतिक इतिहास में मील का पत्‍थर साबित हुई हैं। भारत के थेनी में जन्‍मी संपत सात वर्ष के उम्र में अमरीका चली गईं थी।


उन्‍होंने कहा कि यह क्षण उनके लिए व्यक्तिगत और व्यापक सामुदायिक महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि डीसी मेयर पद के लिए चुनाव लड़ने वाली पहली दक्षिण एशियाई नागरिक होना उनके लिए बेहद मायने रखता है।


उनके अभियान ने इस बात की पुष्टि की कि चुनाव में शामिल होने के लिए चार हजार 500 से अधिक लोगों ने उनकी याचिका पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि उनकी उम्मीदवारी दूसरों को चुनाव लड़ने और अपने पड़ोसियों के लिए अच्छा करने के लिए प्रेरित करेगी।


अभियान में दी गई जानकारी के अनुसार 31 वर्षीय संपत सरकारी ठेकेदार हैं, जो करीब एक दशक से वॉशिंगटन में रह रही हैं। उन्होंने अपने अभियान को बुनियादी नागरिक सेवाओं और शासन सुधारों पर केंद्रित किया है।


रिनी संपत के बारे में मुख्य जानकारी:

  • मूल स्थान: उनका जन्म तमिलनाडु के थेनी में हुआ था और वह 7 साल की उम्र में अपने माता-पिता के साथ अमेरिका चली गई थीं।
  • शिक्षा और करियर: वह दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (USC) की पूर्व छात्र अध्यक्ष (Student Body President) रह चुकी हैं। वर्तमान में 31 वर्षीय रिनी एक सरकारी ठेकेदार के रूप में कार्यरत हैं।
  • चुनाव अभियान: वह डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से चुनाव लड़ रही हैं। उनके अभियान का मुख्य विषय 'Fix the Basics' (बुनियादी सुविधाओं को सुधारना) और 'A New DC' (एक नया डीसी) का विजन है।
  • मुद्दे: उनका ध्यान बुनियादी नागरिक सेवाओं में सुधार, सुरक्षा और सरकारी कार्यक्रमों को नागरिकों के लिए अधिक प्रभावी बनाने पर केंद्रित है।
  • समर्थन: मतपत्र पर अपनी जगह सुनिश्चित करने के लिए उनके अभियान को 4,500 से अधिक लोगों के हस्ताक्षरों का समर्थन प्राप्त हुआ। 


रिनी ने अपनी उम्मीदवारी पर कहा कि एक "बाहरी" (outsider) के रूप में वह किसी विशेष हित समूह की ऋणी नहीं हैं और उनका पूरा ध्यान शहर की बुनियादी सेवाओं को ठीक करने पर रहेगा।

राहुल गांधी ने आज इडुक्की और एर्नाकुलम जिलों में यूडीएफ की चुनावी सभाओं को किया संबोधित

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आज (4 अप्रैल, 2026) केरल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान इडुक्की और एर्नाकुलम जिलों में यूडीएफ (UDF) की चुनावी सभाओं को संबोधित किया।


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने आज अलाप्पुझा में कहा कि यूडीएफ केरलम में वास्तविक बदलाव लाने के लिए तैयार है। उन्होंने एलडीएफ और एनडीए दोनों की आलोचना करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद सत्ताधारी एलडीएफ अप्रासंगिक हो जाएगा। श्री राहुल गांधी ने आज इडुक्की और एर्नाकुलम जिलों में यूडीएफ की चुनावी सभाओं को भी संबोधित किया। 


सीपीआई-मार्क्‍सवादी के महासचिव एम. ए. बेबी और पोलित ब्यूरो सदस्य सुभाषिनी अली ने विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में एलडीएफ के लिए प्रचार किया। श्री बेबी ने कहा कि एलडीएफ ने केरल को कई क्षेत्रों में आगे बढ़ाया है और सीपीआई-एम तुष्टीकरण की राजनीति नहीं करती बल्कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए दृढ़ता से खड़ी है।


राज्‍य में चुनाव प्रचार मंगलवार को समाप्‍त हो रहा है। केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और प्रमुख प्रचारकों सहित कई प्रमुख नेता प्रचार में जी-जान से जुटे हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कल कोझिकोड, एर्नाकुलम और तिरुअनंतपुरम जिलों में एनडीए के लिए प्रचार करेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कल कोल्लम जिले में यूडीएफ के लिए प्रचार में शामिल होंगे।


अपने भाषणों के दौरान उन्होंने सत्ताधारी एलडीएफ (LDF) और भाजपा के बीच "गुप्त गठबंधन" होने का आरोप लगाया। आज के उनके दौरों की मुख्य बातें रही हैं:-

  • एलडीएफ-भाजपा पर हमला: उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के बीच एक "छिपी हुई साझेदारी" है, जिसका उद्देश्य यूडीएफ को हराना है। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा मुख्यमंत्री विजयन को निशाना क्यों नहीं बना रही है।
  • अल्पसंख्यकों का मुद्दा: गांधी ने मणिपुर और छत्तीसगढ़ में ईसाइयों और अन्य अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों का मुद्दा उठाया और दावा किया कि केरल के मुख्यमंत्री उन ताकतों के साथ खड़े हैं जो देश के अन्य हिस्सों में अल्पसंख्यकों पर हमले कर रही हैं।
  • स्थानीय मुद्दे और वादे:

  1. मानव-वन्यजीव संघर्ष: उन्होंने इडुक्की में मानव-वन्यजीव संघर्ष का स्थायी समाधान निकालने का वादा किया।
  2. किसानों की समस्याएं: उन्होंने किसानों के पट्टे (title deeds) से जुड़ी समस्याओं को हल करने की बात कही।
  • यूडीएफ की 5 गारंटियां: उन्होंने महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, कॉलेज जाने वाली लड़कियों को 1,000 रुपये मासिक सहायता, 3,000 रुपये सामाजिक पेंशन और परिवारों के लिए 25 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर देने का वादा दोहराया। 


केरल की 140 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल 2026 को मतदान होना है। इसके बाद राहुल गांधी 6 अप्रैल को त्रिशूर जिले में प्रचार करेंगे।

Saturday, March 28, 2026

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने मां महागौरी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की

वासंतिक चैत्र नवरात्री की अष्‍टमी ति‍थि‍ पर उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्‍वर योगी आदित्‍यनाथ ने कल गोरखनाथ मंदिर में स्थित शक्तिपीठ में मां महागौरी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। वैदिक मंत्रोच्‍चार के बीच मुख्‍यमंत्री ने राज्‍य के लोगों के कल्‍याण के लिए मां आदि शक्ति जगत जननी की प्रार्थना की तथा गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुसार आरती और हवन किया। 


गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर में वासंतिक नवरात्र की अष्टमी तिथि पर मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने शक्तिपीठ में मां महागौरी की विशेष पूजा-अर्चना की। उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन और आरती कर प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। मंदिर में इस अवसर पर कन्या पूजन का भी अनुष्ठान किया गया। 


अष्टमी पूजा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माता की आठवीं शक्ति महागौरी की विधि-विधान से पूजा की, जो पवित्रता और शांति का प्रतीक है।

अनुष्ठान: गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुसार माता की आरती और लोकमंगल के लिए हवन संपन्न हुआ।

महत्व: चैत्र नवरात्र के दौरान गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में विशेष धार्मिक अनुष्ठान और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है।

कन्‍या पूजन: अष्टमी के दिन ही, मुख्यमंत्री ने कन्याओं के पैर पखारकर और उन्हें भोजन कराकर कन्या पूजन की परंपरा को निभाया। 


गोरखनाथ मंदिर का शक्तिपीठ नाथ पंथ की परंपरा में आध्यात्मिक ऊर्जा का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है।

गोरखनाथ मंदिर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में स्थित नाथ संप्रदाय का सबसे प्रमुख और पवित्र केंद्र है। यह मंदिर महायोगी गुरु गोरखनाथ को समर्पित है, जिन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है। 52 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला यह मंदिर न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है, बल्कि गोरखपुर की सांस्कृतिक पहचान भी है।


मुख्य जानकारी और आकर्षण

अखंड ज्योति: मंदिर के गर्भगृह में एक 'दिव्य ज्योति' जलती रहती है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह गुरु गोरखनाथ के समय से ही निरंतर प्रज्वलित है।

खिचड़ी मेला: प्रतिवर्ष मकर संक्रांति (14 जनवरी) के अवसर पर यहाँ एक महीने तक चलने वाला भव्य 'खिचड़ी मेला' आयोजित होता है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने आते हैं।

भीम सरोवर और मंदिर: मंदिर परिसर में पांडव पुत्र भीम की एक विशाल प्रतिमा और एक सरोवर (भीम सरोवर) स्थित है, जहाँ श्रद्धालु नौका विहार (boating) का आनंद ले सकते हैं।

महंत: वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मंदिर और गोरखनाथ मठ के मुख्य महंत हैं।

गौशाला: परिसर में एक बड़ी गौशाला (Goshala) भी है, जहाँ विभिन्न नस्लों की गायों की सेवा की जाती है।


इतिहास और निर्माण

प्राचीनता: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु गोरखनाथ ने त्रेता युग में इसी स्थान पर तपस्या की थी।

पुनर्निर्माण: मध्यकाल में अलाउद्दीन खिलजी और औरंगजेब जैसे शासकों द्वारा मंदिर को क्षति पहुँचाई गई थी, लेकिन बाद में महंत दिग्विजय नाथ और महंत अवैद्यनाथ जी के प्रयासों से इसका भव्य आधुनिक स्वरूप तैयार हुआ।


दर्शन के लिए विवरण

समय: मंदिर दर्शन के लिए प्रतिदिन प्रातः 4:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक खुला रहता है।

प्रवेश शुल्क: मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है।

स्थान: यह गोरखपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 4 किमी की दूरी पर नेपाल रोड (सोनौली राजमार्ग) पर स्थित है।

अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने विदेश मंत्री जयशंकर और रुबियो से की मुलाकात

अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो G7 विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए फ्रांस पहुंचे। इस मौके पर रुबियो का साथ देने के लिए भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर भी फ्रांस पहुंचे। फ्रांस में उन्होंने रुबियो के साथ-साथ भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से मुलाकात की। इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी।


मुलाकात की तस्वीरें की साझा

मुलाकात की तस्वीरें साझा कर राजदूत गोर ने लिखा, “फ्रांस में G7 मंत्री स्तरीय मीटिंग के लिए के साथ जुड़कर खुशी हुई। हमारे सहयोगियों और साझेदारों के साथ अच्छी चर्चा हुई।” अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने G7 देशों के विदेश मंत्रियों के साथ इस बैठक में कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान समय-सीमा के अनुसार या उससे आगे चल रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इसके लक्ष्य महीनों नहीं, बल्कि कुछ हफ्तों में पूरे हो जाएंगे। हालांकि, ये बात अमेरिकी सरकार ने पहले भी कही है।


मिशन की शुरुआत से ही स्पष्ट रूपरेखा तय: रुबियो

रुबियो ने कहा कि इस मिशन की शुरुआत से ही स्पष्ट रूपरेखा तय की गई थी। उन्होंने कहा, “हम ईरान की नौसेना को नष्ट करेंगे, उनकी वायुसेना को नष्ट करेंगे। हम मूल रूप से उनकी मिसाइल और ड्रोन बनाने की क्षमता को उनकी फैक्ट्रियों में खत्म कर देंगे।” उन्होंने जोड़ा कि इस अभियान का उद्देश्य “मिसाइल लॉन्चरों की संख्या को काफी कम करना” है, ताकि ईरान “इनके पीछे छिपकर परमाणु हथियार बनाने और दुनिया को धमकाने” में सक्षम न रहे।


रुबियो ने कहा कि प्रगति लगातार हो रही है। “हम इस ऑपरेशन में समय-सीमा के अनुसार या उससे आगे हैं और उम्मीद है कि इसे उचित समय पर महीनों में नहीं, बल्कि कुछ हफ्तों में पूरा कर लिया जाएगा। प्रगति बहुत अच्छी है।”


लक्ष्यों को बिना किसी ग्राउंड टूप्स के हासिल किया: रुबियो

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जमीनी सैनिकों की जरूरत नहीं होगी। इन लक्ष्यों को बिना किसी ग्राउंड टूप्स के हासिल किया जा सकता है। रुबियो ने ऑपरेशन के बाद संभावित जोखिमों की भी चेतावनी दी, खासकर होर्मुज स्ट्रेट में, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। उन्होंने कहा कि ईरान वहां टोल प्रणाली लागू करने की कोशिश कर सकता है, जिसे उन्होंने “अवैध,” “अस्वीकार्य,” और “दुनिया के लिए खतरनाक” बताया।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन आज झारखंड का दौरा करेंगे, वर्चुअल रियलिटी केस रिपॉजिटरी का भी शुभारंभ करेंगे

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन आज झारखंड में भारतीय प्रबंधन संस्थान – आईआईएम, रांची के 15वें दीक्षांत समारोह में भाग लेंगे और वर्चुअल रियलिटी केस रिपॉजिटरी का भी शुभारंभ करेंगे।

 

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे।

 

उपराष्ट्रपति आज बिरसा मुंडा हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे और खूंटी के उलिहातु गांव जाएंगे, जो आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा का जन्मस्थान है। वहां वे उनके वंशजों से मिलेंगे और पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। श्री राधाकृष्णन रांची के बिरसा मुंडा परिसर और बिरसा चौक स्थित बिरसा मुंडा की प्रतिमाओं पर भी पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। बाद में, वे आई.आई.एम. रांची के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।


वर्चुअल रियलिटी (VR) केस रिपॉजिटरी से जुड़ी खास बातें

वर्चुअल रियलिटी (VR) केस रिपॉजिटरी एक डिजिटल डेटाबेस है, जो विभिन्न क्षेत्रों—जैसे शिक्षा, चिकित्सा (पुनर्वास), रक्षा, और फोरेंसिक (अपराध स्थल पुनर्निर्माण)—से संबंधित इमर्सिव 3D सिमुलेशन और मामलों का अध्ययन (case studies) संग्रहीत करता है। यह तकनीक उपयोगकर्ताओं को जटिल परिदृश्यों का यथार्थवादी अनुभव प्रदान करती है।

वर्चुअल रियलिटी केस रिपॉजिटरी के मुख्य अनुप्रयोग:

  • चिकित्सा और पुनर्वास (Medical & Rehabilitation): वीआर स्ट्रोक के मरीजों के लिए संज्ञानात्मक पुनर्वास (cognitive rehabilitation) और मोबिलिटी डिवाइस-मिक्स्ड रियलिटी (MD-MR) जैसे नैदानिक ​​परिणाम प्रदान करता है, जो निपुणता और पकड़ की ताकत में सुधार करते हैं।
  • न्यायिक और फोरेंसिक (Forensic & Legal): अपराध स्थल का पुनर्निर्माण (Crime scene reconstruction) करना, जहां 2D छवियों से वर्चुअल टूर बनाकर अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत किए जाते हैं।
  • शिक्षा और प्रशिक्षण (Education & Training): आईआईएम (IIM) जैसे संस्थानों में केस स्टडीज के लिए इस्तेमाल, साथ ही सेना में खतरनाक परिस्थितियों का सुरक्षित अभ्यास।
  • अनुसंधान और विकास (Research): यह एक बहुविषयक क्षेत्र है, जो वर्चुअल, ऑगमेंटेड (AR) और मिक्स्ड रियलिटी (MR) पर मौलिक शोध प्रकाशित करता है।


प्रमुख उपयोगकर्ता और लाभ:

  • शिक्षक और छात्र: जटिल विषयों को 3D में समझने के लिए।
  • चिकित्सक: मरीजों के पुनर्वास के लिए (गेमिफाइड वीआर)।
  • जांचकर्ता: अपराध दृश्यों के डिजिटल विश्लेषण के लिए।


सीमाएं:

यह एक महंगी तकनीक है, और इसके लंबे समय तक उपयोग से आंखों और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के जेवर में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पहले चरण का उद्घाटन किया। उन्होंने 40 एकड़ में फैले रखरखाव, मरम्मत और नवीनीकरण (एमआरओ) सुविधा केंद्र की आधारशिला भी रखी। 


इस अवसर पर बोलते हुए, श्री मोदी ने कहा कि यह विकसित यूपी, विकसित भारत अभियान का एक नया अध्याय है। उन्होंने कहा कि इस हवाई अड्डे से आगरा, मथुरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, इटावा और फरीदाबाद सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों को लाभ होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह हवाई अड्डा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों, लघु एवं मध्यम उद्योगों और युवाओं के लिए अनेक नए अवसर लेकर आएगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि जेवर हवाई अड्डा उत्तर प्रदेश की प्रगति और विकास का प्रतीक बनेगा।

 

नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देश की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा परियोजनाओं में से एक है। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पहले चरण को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत लगभग 11 हजार 200 करोड़ रुपये के कुल निवेश से विकसित किया गया है। प्रारंभिक चरण में इस हवाई अड्डे की यात्री संचालन क्षमता प्रति वर्ष एक करोड़ 20 लाख यात्रियों की होगी, और पूर्ण विकास होने पर इसे प्रति वर्ष 7 करोड़ यात्रियों तक बढ़ाया जा सकेगा।


नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बारे में मुख्य बातें

नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (जेवर एयरपोर्ट) उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले में स्थित एक प्रमुख हवाई अड्डा है, जिसका उद्घाटन  पीएम नरेंद्र मोदी ने किया। यह दिल्ली-NCR का दूसरा बड़ा एयरपोर्ट है, जो जेवर में 3,300 एकड़ से अधिक भूमि पर (पहले चरण में) 12 मिलियन यात्रियों की क्षमता के साथ विकसित किया गया है। यह एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनेगा, जो पूरी तरह चालू होने पर 2040 तक 70 मिलियन यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा।

  • स्थान: जेवर, गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश (दिल्ली से लगभग 75-80 किमी)।
  • उद्घाटन: 28 मार्च 2026 (पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा)।
  • संचालक: यह यूरिक एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी (ZIAG) की सहायक कंपनी YIAPL द्वारा विकसित किया जा रहा है।
  • क्षमता (चरण 1): पहले चरण में 1.2 करोड़ (12 मिलियन) यात्री प्रति वर्ष और 3,900 मीटर लंबा रनवे।
  • कुल क्षमता (अंतिम चरण): पूर्ण विकसित होने पर 7 करोड़ (70 मिलियन) से अधिक यात्री प्रति वर्ष।
  • कनेक्टिविटी: यह यमुना एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से सीधे जुड़ेगा।
  • विशेषता: यह एक कार्गो हब और कार्बन-न्यूट्रल हवाई अड्डा होगा।

Friday, March 27, 2026

Weather Update: 29 मार्च को लेकर मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में इन दिनों मौसम लगातार करवट ले रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में मौसम में और बदलाव देखने को मिलेगा। खासकर 29 मार्च को लेकर मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है, जिसमें तेज बारिश, गरज-चमक और आंधी-तूफान की संभावना जताई गई है।


मौसम विभाग के अनुसार, 27 मार्च को अधिकतम तापमान करीब 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री दर्ज किया गया। इस दिन सामान्यतः आसमान में बादल छाए रहने के साथ हल्की बारिश या बूंदाबांदी हुई। साथ ही 20-30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं।


28 मार्च को मौसम आंशिक रूप से साफ रहने का अनुमान है, जहां अधिकतम तापमान 32 डिग्री और न्यूनतम 18 डिग्री रहने की संभावना है। हालांकि, 29 मार्च को मौसम अचानक ज्यादा सक्रिय हो जाएगा। इस दिन अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 21 डिग्री के आसपास रहने का अनुमान है।


सुबह से लेकर शाम तक गरज के साथ बारिश, बिजली चमकने और 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। 30 मार्च को भी मौसम पूरी तरह सामान्य नहीं होगा। इस दिन अधिकतम तापमान 30 डिग्री और न्यूनतम 21 डिग्री रहने की संभावना है। दिनभर बादल छाए रहने के साथ हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक जारी रह सकती है। लगातार हो रही हल्की बारिश और बूंदाबांदी का असर वायु गुणवत्ता पर भी साफ दिखाई दे रहा है।

रामनवमी पर विशेष: रामनवमी के बारे में जानें विस्तार से?

रामनवमी भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला एक अत्यंत पवित्र हिंदू त्योहार है। वर्ष 2026 में, रामनवमी का यह पावन पर्व मुख्य रूप से 27 मार्च को मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर प्रारंभ होगी और 27 मार्च को सुबह 10 बजकर 6 मिनट पर समाप्त होगी। यह पर्व उस आदर्श पुरुष की स्मृति को जीवंत करता है, जिसने अपने आचरण से सिद्ध किया कि मर्यादा का पालन करते हुए भी मनुष्य सर्वोच्च शिखरों को प्राप्त कर सकता है। श्रीराम का चरित्र धार्मिक आस्था से परे एक जीवंत दर्शन है, जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र तीनों के लिए मार्गदर्शक है। रामनवमी हमें केवल पूजा तक सीमित नहीं रखती, बल्कि सत्य, न्याय, त्याग और कर्तव्य जैसे मूल्यों को जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा देती है। यही कारण है कि यह पर्व त्रेतायुग से लेकर आज तक समान रूप से प्रासंगिक बना हुआ है।


महत्व और तिथि (2026)

  • तिथि: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है।
  • शुभ मुहूर्त (2026): पूजा का सबसे शुभ समय सुबह 11:13 से दोपहर 1:41 तक है।
  • धार्मिक महत्व: इस दिन भगवान विष्णु ने अधर्म का नाश करने के लिए राजा दशरथ और माता कौशल्या के घर सातवें अवतार 'राम' के रूप में जन्म लिया था।


पूजा विधि और उत्सव

  • पूजा: श्रद्धालु इस दिन भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
  • सूर्य तिलक (अयोध्या): अयोध्या के नवनिर्मित राम मंदिर में दोपहर के समय रामलला का 'सूर्य तिलक' एक प्रमुख आकर्षण होता है, जहाँ सूर्य की किरणें सीधे उनके माथे को सुशोभित करती हैं।
  • अनुष्ठान: भक्त व्रत रखते हैं, रामचरितमानस का पाठ करते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और कई स्थानों पर भव्य शोभायात्राएं निकाली जाती हैं।
  • कन्या पूजन: चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन होने के कारण, इस दिन कई घरों में कन्या पूजन करके व्रत का पारण किया जाता है।


मुख्य परंपराएं

  • अयोध्या: भगवान राम की जन्मस्थली होने के कारण यहाँ उत्सव की भव्यता देखते ही बनती है。
  • भजन और कीर्तन: मंदिरों में विशेष रूप से "भय प्रगट कृपाला दीनदयाला" जैसे स्तुति गान किए जाते हैं।
  • आदर्श: यह पर्व हमें श्री राम के आदर्शों—सत्य, मर्यादा, त्याग और धैर्य—को अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है।


रामकथा की कालजयी परंपरा

रामनवमी की आधारशिला उस महान कथा में निहित है, जिसे रामायण के रूप में जाना जाता है। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित यह ग्रंथ भारतीय सभ्यता की आधार-रचना है, जबकि गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस ने इसे जन-जन तक पहुंचाया। रामकथा केवल एक राजकुमार के जीवन का वृत्तांत नहीं, बल्कि धर्म और अधर्म, न्याय और अन्याय, त्याग और स्वार्थ के बीच संघर्ष की महागाथा है। इसकी विशेषता यह है कि इसमें मानवीय भावनाओं का अत्यंत सजीव और सार्वकालिक चित्रण मिलता है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में रामलीला, कथा-वाचन और भक्ति-परंपराओं के माध्यम से इसका सतत प्रवाह यह सिद्ध करता है कि श्रीराम भारतीय संस्कृति के जीवंत प्रतीक हैं। रामनवमी इस परंपरा का उत्कर्ष बिंदु है, जहां इतिहास, आस्था और लोकजीवन एकाकार हो जाते हैं।


‘राम’ का अर्थ है,जिसमें साधक रमण करे

‘राम’ केवल एक व्यक्तिवाचक संज्ञा नहीं, बल्कि एक गहन दार्शनिक अवधारणा है। संस्कृत की ‘रम्’ धातु से निर्मित ‘राम’ का अर्थ है,जिसमें साधक रमण करे। इस दृष्टि से राम कोई बाहरी सत्ता नहीं, बल्कि वह चेतना हैं, जो प्रत्येक मनुष्य के भीतर विद्यमान है। जब व्यक्ति अपने भीतर सत्य, करुणा और न्याय के तत्वों को जागृत करता है, तभी ‘रामत्व’ प्रकट होता है। अतः रामनवमी का वास्तविक अर्थ बाहरी उत्सव से अधिक आंतरिक जागरण है अहंकार, क्रोध और मोह का परित्याग कर मर्यादा और सत्य के मार्ग पर अग्रसर होने का।


अवतार का दिव्य उद्देश्य

धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रीराम भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं, जिनका अवतरण धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए हुआ। यह केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि जीवन का शाश्वत सिद्धांत है कि अन्याय के विरुद्ध सत्य की विजय निश्चित होती है। रामनवमी इस विश्वास को सुदृढ़ करती है कि जब-जब समाज में अनाचार बढ़ता है, तब-तब धर्म के आदर्श पुनः प्रकट होकर मानवता को दिशा देते हैं।


त्याग और कर्तव्य आदर्श जीवन की आधारशिला

श्रीराम के जीवन का सबसे उज्ज्वल पक्ष उनका त्याग और कर्तव्यनिष्ठा है। जहां इतिहास में सत्ता के लिए संघर्ष सामान्य रहा है, वहीं श्रीराम ने पिता के वचन की रक्षा हेतु राज्य, वैभव और सुख-सुविधाओं का त्याग कर वनवास स्वीकार किया। “रघुकुल रीति सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाए” यह केवल एक उक्ति नहीं, बल्कि उनके जीवन का सार है। आज के स्वार्थ प्रधान युग में यह आदर्श हमें सिखाता है कि सच्ची महानता व्यक्तिगत लाभ में नहीं, बल्कि कर्तव्य और समर्पण में निहित होती है।


सामाजिक समरसता का व्यावहारिक स्वरूप

श्रीराम का जीवन सामाजिक समावेशिता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है। उन्होंने अपने आचरण से यह सिद्ध किया कि समाज में किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। केवट को सखा मानना, शबरी के प्रेम को स्वीकार करना और वानर-भालू समाज को साथ लेकर चलना ये सभी प्रसंग सामाजिक समानता के जीवंत प्रतीक हैं। रामनवमी हमें यह संदेश देती है कि सशक्त समाज वही है, जहां सभी वर्गों को समान सम्मान और अवसर प्राप्त हों।


करुणा और संवेदना मानवता का मूल तत्व

श्रीराम केवल वीरता और नीति के प्रतीक नहीं, बल्कि करुणा और संवेदनशीलता के भी आदर्श हैं। निषादराज, शबरी और विभीषण के प्रति उनका व्यवहार यह दर्शाता है कि उनके लिए प्रेम और सहानुभूति ही सर्वोच्च धर्म थे। यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि समाज का वास्तविक विकास शक्ति से नहीं, बल्कि संवेदना और मानवता से संभव है।


रामराज्य यानी आदर्श शासन की संकल्पना

भारतीय चिंतन में ‘रामराज्य’ आदर्श शासन-व्यवस्था का प्रतीक है, जहां न्याय, समानता और लोक कल्याण सर्वोपरि होते हैं। यह केवल एक कल्पना नहीं, बल्कि सुशासन का व्यावहारिक मॉडल है। “दैहिक दैविक भौतिक तापा, राम राज नहिं काहुहि व्यापा” यह पंक्ति उस व्यवस्था को दर्शाती है, जहां भय, शोषण और असमानता का अभाव होता है। आधुनिक लोकतंत्र में भी यह अवधारणा उतनी ही प्रासंगिक है, क्योंकि यह सत्ता को सेवा का माध्यम मानने की प्रेरणा देती है।


धर्म और शौर्य का संतुलन

श्रीराम का जीवन यह भी सिखाता है कि करुणा के साथ-साथ अन्याय के विरुद्ध साहस भी आवश्यक है। रावण का वध केवल एक युद्ध नहीं, बल्कि अहंकार और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। यह संतुलन हमें बताता है कि सच्चा धर्म वही है, जो अन्याय के विरुद्ध दृढ़ता से खड़ा हो सके।


समकालीन संदर्भ में राम का संदेश

आज के युग में जब समाज नैतिक संकट, असमानता और अशांति से जूझ रहा है, तब श्रीराम के आदर्श और अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है नेतृत्व में संयम और दूरदर्शिता, प्रकृति के साथ संतुलित सह-अस्तित्व, विविधताओं में एकता और सामाजिक सद्भाव। रामनवमी हमें यह स्मरण कराती है कि वास्तविक प्रगति केवल भौतिक उन्नति में नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक विकास में निहित है।


रामराज्य’ की भावना को व्यवहारिक जीवन में उतारने का प्रयास

प्रभु श्रीराम का चरित्र सुशासन, लोक कल्याण और न्यायपूर्ण व्यवस्था का जीवंत आदर्श है, जो युगों-युगों तक मानवता का मार्गदर्शन करता रहेगा। रामनवमी का वास्तविक संदेश केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि उन मूल्यों को अपने जीवन में उतारना है, जिनका श्रीराम ने पालन किया। जब प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर सत्य, करुणा और मर्यादा को जागृत करता है, तभी ‘रामत्व’ का उदय होता है। यही वह पथ है, जो समाज को समरसता, राष्ट्र को सुदृढ़ता और मानवता को शांति प्रदान करता है। अतः इस पावन अवसर पर हमारा संकल्प होना चाहिए कि हम सत्य और न्याय के मार्ग पर चलें, समाज में प्रेम और समानता को बढ़ावा दें और ‘रामराज्य’ की भावना को व्यवहारिक जीवन में उतारने का प्रयास करें। यही रामनवमी का सार है।


रामनवमी की पूजा विधि या व्रत कथा के बारे 

विभिन्न व्रतों (जैसे जीवित्पुत्रिका, गुरुवार) की पूजा विधि में सुबह स्नान, चौकी पर स्थापित भगवान को पीले वस्त्र/पुष्प, दीप, नैवेद्य (भोग) अर्पित करना और कथा सुनना मुख्य है। गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा और जितिया/नवरात्रि में कलश स्थापना व विशेष भोग (गुजिया, फल) आवश्यक हैं।


प्रमुख व्रत पूजा विधि और कथा (विस्तार):

जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत (संतान की दीर्घायु):

विधि: भगवान जीमूतवाहन की कुशा (घास) से बनी मूर्ति की पूजा, 7 प्रकार के अनाज, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

कथा: चील और सियारन की कथा प्रचलित है। सियारन ने व्रत के नियम तोड़े, जबकि चील ने व्रत पूर्ण किया। फलतः चील की संतानें दीर्घायु हुईं।


बृहस्पतिवार (गुरुवार) व्रत (सुख-समृद्धि):

विधि: पीले वस्त्र पहनें, विष्णु जी की प्रतिमा स्थापित करें। पीले फूल, चने की दाल, गुड़, मुनक्का और हल्दी अर्पित करें। केले के पेड़ की पूजा और कथा के बाद परिक्रमा करें।

कथा: एक व्यापारी की पुत्री द्वारा व्रत करने और राजा द्वारा उसका आधा राज्य वापस करने की कथा सुनी जाती है।


बुधवार व्रत (सुख-शांति):

विधि: गणेश जी की पूजा, दूर्वा (21 गांठ) और हरी वस्तुओं का प्रयोग करें।

कथा: अनलासुर दैत्य को गणेश जी द्वारा निगलने के बाद कश्यप ऋषि द्वारा दूर्वा से उनके पेट की जलन शांत करने की कथा है।

सामान्य पूजा नियम:

  • व्रत कथा सुनना/पढ़ना अनिवार्य है।
  • अंत में भगवान की आरती करें।


ध्यान दें: व्रत का पूरा फल पाने के लिए कथा श्रवण और पूजा के अंत में क्षमा याचना (अपनी भूलों के लिए) जरूर करें।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सपत्नीक श्री अंगारेश्वर महादेव का पूजन-दर्शन कर अभिषेक किया

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरूवार 26-03-2026 को उज्जैन स्थित अंगारेश्वर महादेव मंदिर में सपत्नीक पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री अंगारेश्वर महादेव का पंचामृत से अभिषेक कर प्रदेश की जनता की सुख-समृद्धि की कामना की।


श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन (Shree Angareshwar Mahadev Mandir Ujjain) के बारे में प्रमुख बातें

भारत के मध्य प्रदेश राज्य के उज्जैन में शिप्रा नदी के तट पर स्थित श्री अंगारेश्वर महादेव (43वें महादेव) मंगल ग्रह के जन्मस्थान के रूप में प्रसिद्ध एक प्राचीन मंदिर है, जहाँ भात पूजा द्वारा मंगल दोष का निवारण किया जाता है। यह मंदिर 84 महादेवों में से एक है और यहां दर्शन-पूजन से संतान, भूमि और संपत्ति सुख की प्राप्ति मानी जाती है। 


श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर की मुख्य विशेषताएं

  • पौराणिक महत्व: मान्यता के अनुसार, अंधकासुर के वध के समय भगवान शिव के पसीने की बूंदें पृथ्वी पर गिरने से मंगल ग्रह का जन्म हुआ, इसलिए यह मंगल ग्रह का उत्पत्ति स्थान माना जाता है।
  • भात पूजा (Bhaat Puja): यहाँ चावल (भात) से भगवान शिव की पूजा की जाती है, जो मंगल दोष, कुंडली में मांगलिक दोष और भूमि संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
  • विशेष दिन: मंगलवार का दिन यहाँ पूजा के लिए विशेष महत्व रखता है, खासकर मंगलवार की चतुर्थी को।
  • स्थान: यह मंदिर उज्जैन, मध्य प्रदेश में शिप्रा नदी के किनारे स्थित है।
  • अन्य मान्यताएँ: इस मंदिर में दर्शन से वास्तु दोष दूर होते हैं और न्यायालयीन कार्यों में विजय प्राप्त होती है। 


क्यों इतने महत्वपूर्ण है ये देव, क्यों इनके दर्शन इतने फलदायी हैं?

पुराणों में मंगल ग्रह का जन्म स्थान उज्जैन में माना गया है। इसलिए मंगल ग्रह की शांति के लिए यथा संभव अंगारेश्वर महादेव में विशेष पूजा फलदायी मानी गई है। धार्मिक मान्यता है कि इस पूजा से मंगल ग्रह दोष की शांति होती है और विवाह योग्य युवक-युवतियों के विवाह में मांगलिक दोषों के कारण आ रही समस्याएं हल हो जाती है।


श्री अंगारेश्वर महादेव (उज्जैन) ही भूमि पुत्र मंगल हैं अवंतिका कि प्राचीन 84 महादेवों में स्थित 43वे महादेव श्री अंगारेश्वर महादेव जो कि सिद्ध्वट (वट्व्रक्ष) के सामने शिप्रा के उस पर स्थित हैं, जिन्हें मंगल देव (गृह) भी कहा जाता हैं। माना जाता है कि जो व्यक्ति प्रतिदिन इस महालिंग श्री अंगारेश्वर का दर्शन करेगा उनका फिर जन्म नही होगा। जो इस लिंग का पूजन मंगलवार को करेगा वह इस युग में कृतार्थ हो जाएगा, इसमे कोइ संशय नही हैं। जो मंगलवार कि चतुर्थी के दिन अंगारेश्वर का दर्शन-व्रत-पूजन करेंगे वह संतान, धन, भूमि, सम्पत्ति, यश को प्राप्त करेगा। मनाान जाता है कि इनके दर्शन-पूजन से वास्तुदोष, भुमिदोष का भी निवारण होता हैं। न्यायालय में विजय प्राप्त होती हैं। इस लिंग पर भात पूजन करने से मंगल दोष, भूमि दोष का भी निवारण होता पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नवग्रहों में विशेष स्थान रखने वाले मंगल ग्रह का जन्म स्थान उज्जैन यानि प्राचीन नगरी अवन्तिका को माना गया है। देश के सभी स्थानों से मंगल पीड़ा निवारण और अनुग्रह प्राप्त करने के लिए लोग यहां आते हैं। जनमान्यताओं के अनुसार मंगल की जन्म स्थली पर भात पूजा कराने से मंगलजन्य कष्ट से व्यक्ति को शांति मिलती है। मंगल को नवग्रहों में सेनापति के पद से शुशोभित किया गया है। जन्म कुंडली में मंगल की प्रधानता जहां मंगल दोष उत्पन्न करती है, वहीं व्यक्ति को सेना, पुलिस या पराक्रमी पदो पर शुशोभित कर यश और कीर्ति भी दिलाती है। 


भगवान शिव के पसीने की बूंदों से उत्पन्न हुए मंगल ग्रह

ब्रह्मवर्त पुराण के अनुसार मंगल पृथ्वी से अलग हुआ एक ग्रह है। इसीलिए इसे भूमि पुत्र माना गया है। इसे विष्णु पुत्र भी कहते हैं। स्कंध पुराण के अनुसार अवन्तिका में दैत्य अंधकासुर ने भगवान शिव की तपस्या कर यह वरदान प्राप्त किया था कि उसके शरीर से जितनी भी रक्त की बूंदे गिरेंगी वहां उतने ही राक्षस पैदा हो जाएंगे। वरदान के अनुसार तपस्या के बल पर अंधकासुर ने अपार शक्ति प्राप्त कर ली और पृथ्वी पर वह अनियंत्रित उत्पाद मचाने लगा। उसके उत्पादों से बचने के लिए व इंद्रादि देवताओं की रक्षा के लिए स्वयं भगवान शिव को उससे लडऩा पड़ा था। लड़ते-लड़ते जब शिव थक गए तो उनके ललाट से पसीने की बूंदें गिरी। इससे एक भारी विस्फोट हुआ और एक बालक अंगारक की उत्पत्ति हुई। इसी बालक ने दैत्य के रक्त को भस्म कर दिया और अंधकासुर का अंत हुआ।


एक अन्य कथा के अनुसार देवाधिदेव भगवान शंकर से एक समय पार्वती जी का वार्तालाप हो रहा था। इसी चर्चा के दौरान पार्वती जी ने भगवान शंकर से पूछा की उन्हें मंगलकारी अंगारक के जन्म के बारे में जानने की बहुत इच्छा हैं। तब देवाधिदेव भगवान शंकर ने पार्वती जी से कहा की हे पर्वत की कन्या उज्जैन में तिरालीसवां ज्योतिर्लिंग अंगारेश्वर का हैं जिनके दर्शन मात्र से सर्व सम्पदा प्राप्त होती हैं।


पूर्व समय में लाल शरीर की शोभवाला और टेड़े शरीर वाला क्रोध से युक्त यह बालक मेरे द्वारा ही उत्पन्न हुआ में ने उसे पृथ्वी पर रख दिया इसलिए उसका नाम भूमि पुत्र हुआ। पैदा होते ही स्थूल शरीर वाला वह बालक भय देने लगा। उसके कोप से पृथ्वी कम्पित होने लगी। मनुष्य और देवतादि सब दुखी हो गए। समुद्रों में तूफान आने लगी। पर्वत हिलने लगे। उसी के प्रभाव स्वरूप देवता मनुष्य आदि परेशान होने लगे।


अंत में परेशान होकर सभी ऋषि देवता इंद्रा सभी देवगुरु वृहस्पति के पास गए और उनसे चर्चा कर उन्हें अपने साथ लेकर ब्रह्मलोक गए। और पितामह ब्रह्मा जी को सारा वृतांत सुनाया की किस प्रकार भगवान शंकर के शरीर से बालक का जन्म हुआ और उत्पन्न होने के कुछ ही समय में उसने तीनो लोकों का भ्रमण कर डाला। अनेकों का भक्षण कर लिया और सभी को परेशान कर दिया।


सभी की बातें सुनकर प्रजापिता ब्रह्मा जी ने मुझसे कैलाश पर्वत पर आकर मिलाने का निर्णय किया। मेरे पास आकर सभी ने भय पूरक मेरे शरीर से उत्पन्न उस बालक के क्रिया कलापों का वर्णन किया की किस प्रकार उस बालक ने सभी को डरा दिया और अनेकों का भक्षण कर लिया।


यह सुनकर मेने उस बालक को बुलाया और उससे पूछा की ऐसा क्यों कर रहे हो। तब उस बालक ने कहा की प्रभु में कौन सा काम करूं। मेने उसे समझाया की जगत को त्रास मत दो। ऐसा कहकर मेने उसे बार-बार समझाया। मेने उसे कहा की मेरे शरीर की राजस प्रकृति से तुम्हारा जन्म हुआ हैं। इसीलिए तुम्हारा नाम अंगारक हुआ हैं तुम लोगो का मंगल करो,उन्हें प्रसन्न और आनंदित रखो यही तुम्हारा कर्म हैं। इस समय तुमसे भूलवश वक्री कार्य हुए हैं इसलिए विद्वान लोग तुम्हें वक्र नाम से पुकारेंगे।


इस प्रकार मेरे समझाने पर उस बालक ने पूछा की बिना आहार के मेरी तृप्ति कैसे होगी। उसने कहा की हे देवाधिदेव आप मुझे अच्छा स्थान दो,स्वामित्व दो,शक्ति दो और आहार भी जल्दी से दे दो। उस पुत्र के ऐसे वचन सुनकर मेने सोचा की यह बालक हैं और प्रिय भी हैं ऐसा विचार कर उत्तम स्थान अक्षय देना चाहिए यह सोचकर मेने उसे अपनी गोद में बिठा लिया और प्रेम से कहा की हे पुत्र मेने तुझे महाकाल वन (उज्जैन नगरी) में गंगेश्वर से पूर्व में स्थान दिया हैं। उस स्थान पर शिप्र और खगर्ता का शुभ संगम हुआ हैं। जब मेने गंगा को मस्तक पर धारण किया था उस समय वह गुस्से से चन्द्र मंडल से नीचे गिरी थी तब वह महाकाल वन क्षेत्र में गिरी थी उस समय गंगा आकाश से नीचे आई थी इसीलिए उसका नाम खगर्ता हुआ और इसीलिए मेने वहां पर अवतार लिया में यहां पर लिंग (महादेव) के रूप में निवास करता हूं। और सभी देवतादिक मेरी पूजा करते हैं। यह स्थान देवतों को भी दुर्लभ हैं अत: हैं प्रिय पुत्र तुम शीघ्र वहां के लिए प्रस्थान करो और उस संगम पर मेरी पूजा करो वह संगम का स्थल तुम्हारे नाम से जग में प्रसिद्द होगा और ग्रहों के बीच में तेरा आधिपत्य होगा। तुझे मैं ने तीसरा स्थान दिया हैं। वहां तुम्हें तृप्ति प्राप्त होगी। ग्रहों के बीच तुम्हारी पूजा होगी और तिथियों में मैं ने तुम्हें चतुर्थी तिथि प्रदान की हैं, इस चतुर्थी को जो भी तुम्हारी प्रसन्नता के लिए व्रत, शांति दक्षिणा सहित पूजन करेंगे उससे तुम्हें तृप्ति होगी, भोजन मिलेगा और मैं ने तुम्हें वार मंगलवार दिया हैं जिससे सभी को मंगल की प्राप्ति होगी। जो भी मनुष्य मंगलवार को विद्यारम्भ करेगा, नए वस्त्राभूषण धारण करेगा या फिर शरीर पर तेल लगाएगा उसे इस सभी कर्मो का फल नहीं मिलेगा।


मेरी कही बातें सुनकर उस वक्रांग मंगल पुत्र ने स्वीकार कर ली और उसका नाम अंगारकेश्वर हो गया और इस प्रकार मेरे वचन अनुसार वह अवंतिकापुरी (वर्तमान उज्जैन,मध्यप्रदेश) में अवस्थित हो गया। उस वक्रांग मंगल पुत्र ने जब शिप्रा जी के पावन तट पर रमणीय खगर्ता नदी के संगम पर मुझे लिंग रूप में देखा तो तो वह परम शांति को प्राप्त हो गया और मेने उसे देखकर आलिंगन किया, उसे आशीर्वाद दिया की हैं पुत्र तेरे सभी वांछित कार्य पूर्ण होंगे। हैं मंगल में तुझ से प्रसन्न हुं। आज से तेरा नाम अंगारकेश्वर तीनो लोकों में प्रसिद्द होगा इसमें कोई संशय नहीं हैं जो कोई भी मेरे दर्शन प्रतिदिन इस संमेश्वर के पास करेगा उसका इस पृथ्वी पर पुन: जन्म नहीं होगा जो मेरा पूजन मंगलवार के दिन इस अंगारकेश्वर पर करेंगे वह इस कलियुग में कृतार्थ हो जायेगा इसमें कोई संशय नहीं हैं जो लोग मंगलवार की चतुर्थी को मेरा व्रत, पूजन और दर्शन करेंगे वह इस घोर दुखों युक्त संसार में पुन: जन्म नहीं लेंगे।


तुम मनुष्य मात्र की कुंडलियों में योग कारक रहोगे। योग की अनुकूलता के लिए जो व्यक्ति यहां आकर तुम्हारी पूजा करेगा, उसका मंगल होगा। तभी से लोग मंगल की पूजा के लिए उज्जैन में आते हैं और अपनी श्रद्धा अनुसार अंगारेश्वर महादेव मंदिर में पूजा करके मंगल की अनुकूलता प्राप्त करते हैं।


जब मंगलवार को अमावस्या हो तब खगर्ता संगम पर देवता पूजित हैं उस दिन यहां दर्शन और पूजा-स्नान से वाराणसी,प्रयाग, गयाजी और करुक्षेत्र में एवं पुष्कर में स्नान-पूजन का जो पुण्य मिलता हैं उससे भी अधिक पुण्य फल यहां पूजन और दर्शन से प्राप्त होगा।

Tuesday, March 17, 2026

19 मार्च को आयोजित होगा सूर्य उपासना कार्यक्रम

शासन के निर्देशानुसार भारत के नववर्ष विक्रम सम्वत्, गुडी पड़वा गुरूवार, 19 मार्च को जिला मुख्यालयों पर सुबह 10 बजे विक्रमोत्सव 2026 अंतर्गत सूर्य उपासना कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस क्रम में श्री जुगल किशोर मंदिर प्रांगण पन्ना में भी सूर्य उपासना कार्यक्रम होगा। इस अवसर पर सम्राट विक्रमादित्य केन्द्रित नाट्य प्रस्तुति का मंचन किया जाएगा। नाट्य दल निर्देशक अनिरूद्ध मिस्त्री के निर्देशन में अंगना फाउंडेशन पन्ना के कलाकारों द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी। सूर्य उपासना कार्यक्रम पर भारत का नववर्ष विक्रम सम्वत् पुस्तिका का वितरण भी होगा। 


संस्कृति विभाग द्वारा सृष्टि आरंभ दिवस, वर्ष प्रतिपदा एवं विक्रम संवत् 2083 के शुभारंभ अवसर पर 19 मार्च को प्रात: 10 बजे सीहोर के पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में सूर्य उपासना कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। सूर्य उपासना कार्यक्रम में 19 मार्च को प्रात: 10 बजे कलाकारों के दल द्वारा सम्राट विक्रमादित्य की नाट्य प्रस्तुति का मंचन किया जाएगा। साथ ही भारत का नव वर्ष विक्रम संवत पुस्तिका के प्रचार प्रसार सहित जिले के प्रमुख मंदिर और स्थानों पर ब्रम्हध्वज भी स्थापित किए जाएंगे।


जिला पंचायत सीईओ श्रीमती सर्जना यादव द्वारा कार्यक्रम की तैयारियों के लिए सहायक संचालक श्री आकाश गोयल को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही अन्य विभागों के अधिकारियों को भी आवश्यक दायित्व सौंपे गए हैं।

Monday, March 16, 2026

वन्य जीव संस्थान देहरादून द्वारा ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क कंज़र्वेशन एरिया , साईरोपा कुल्लू में 2 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

वन्य जीव संस्थान देहरादून द्वारा ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क कंज़र्वेशन एरिया (जीएचएनपीसीए), साईरोपा कुल्लू (हिमाचल प्रदेश) में 2 दिवसीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन 15–16 मार्च को किया गया। कार्यशाला में मध्यप्रदेश टाइगर फाउंडेशन बोर्ड (एमपीटीबी) द्वारा वित्त पोषित परियोजना के अंतर्गत सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के लिए तैयार किए जा रहे नामांकन डोजियर की समीक्षा की गई। डोजियर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए तैयार किया जा रहा है। यह पहल सतपुड़ा क्षेत्र की वैश्विक स्तर पर पहचान स्थापित करने के साथ-साथ इसके संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सतत पर्यटन को भी नई दिशा प्रदान करेगी।


कार्यशाला में नामांकन डोजियर की प्रगति, आवश्यक दस्तावेज़ीकरण तथा अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयारियों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसमें वन्य जीव वैज्ञानिकों, विषय-विशेषज्ञों और संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।


सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को वर्ष 2021 में यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया गया था। इसे प्राकृतिक मानदंड (vii), (ix) और (x) के अंतर्गत विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने के लिए प्रस्तावित किया गया है। इन मानदंडों के अंतर्गत क्षेत्र की अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता, पारिस्थितिकी तंत्र, जैव-विकास प्रक्रियाओं का संरक्षण एवं समृद्ध जैव-विविधता और वन्य जीव आवासों का महत्व प्रमुख हैं।

Wednesday, March 11, 2026

खाड़ी देशों से अधिक उड़ानें संचालित करेंगी Indian Airlines

भारतीय एयरलाइंस बुधवार को युद्ध प्रभावित खाड़ी क्षेत्र से और अधिक उड़ानें संचालित करने के लिए तैयार हैं। केंद्र सरकार पश्चिम एशिया क्षेत्र में चल रहे घटनाक्रम और इसके भारत व उस क्षेत्र के बीच हवाई यात्रा पर संभावित प्रभाव पर करीबी नजर बनाए हुए है। एयरलाइनों की परिचालन योजनाओं के अनुसार, एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस 12 मार्च से रियाद के लिए उड़ानें संचालित करेंगी जबकि इंडिगो उसी तिथि से मुंबई-रियाद-मुंबई सेवाएं शुरू करेगी।


नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने जारी बयान में कहा, “स्पाइसजेट को क्षेत्र में सतत परिचालन सुरक्षा और लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक हवाईअड्डा अनुमोदन प्राप्त करने में सुविधा दी गई है। आकासा एयर को सलाह दी गई है कि वह मुंबई-रियाद-मुंबई सेवाओं की अपनी योजनाबद्ध शुरुआत को प्रचलित परिचालन परिस्थितियों के अनुरूप समायोजित करे, जिसे 12 मार्च से संचालन शुरू करने के लिए निर्धारित किया गया है।”


एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस 11 मार्च को पश्चिम एशिया क्षेत्र के लिए और वहां से कुल 58 निर्धारित व अनिर्धारित उड़ानें संचालित करेंगी। एयरलाइन के अनुसार, दोनों एयरलाइंस 11 मार्च को जेद्दा और मस्कट के लिए और वहां से अपनी निर्धारित सेवाओं को जारी रखेंगी। जेद्दा के लिए कुल 8 उड़ानें संचालित करेंगी और एयर इंडिया एक्सप्रेस मस्कट के लिए 14 निर्धारित उड़ानें संचालित करेगी।


9 मार्च के परिचालन डेटा के अनुसार, भारतीय वाहकों द्वारा संचालित 45 आगमन उड़ानें पश्चिम एशिया से भारत पहुंचीं, जिनमें 7,407 यात्री सवार थे।


नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं और तेज व समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित हितधारकों के साथ सीधे जुड़ाव बनाए हुए हैं। मंत्रालय ने कहा, “एयरलाइंस विकसित हो रही स्थिति के अनुसार उचित परिचालन प्रबंध कर रही हैं, जिसमें यात्री सुरक्षा और सेवाओं की निरंतरता प्राथमिक विचार बने हुए हैं।”


डीजीसीए ने अतिरिक्त आगमन और प्रस्थान स्लॉट की सुविधा देने और मस्कट अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे का उपयोग दुबई, अबू धाबी, शारजाह, रास अल खैमाह, अल-अलन, फुजैरा, शारजाह, जेद्दा और मदीना सहित गंतव्यों के लिए मार्गगत वैकल्पिक हवाईअड्डे के रूप में करने की अनुमति देने के लिए संबंधित प्राधिकरणों के साथ समन्वय किया है।


मंत्रालय ने कहा कि वह एयरलाइनों और अन्य संबंधित हितधारकों के साथ नियमित समन्वय बनाए रख रहा है ताकि यात्रियों का आवागमन सुव्यवस्थित रूप से जारी रहे। टिकट दरों की भी बारीकी से निगरानी की जा रही है ताकि टिकट कीमतें उचित बनी रहें और इस अवधि के दौरान कोई अनुचित वृद्धि न हो।


यात्री अपने उड़ान समय और यात्रा प्रबंधों के नवीनतम अपडेट के लिए अपनी-अपनी एयरलाइन से संपर्क बनाए रखें। मंत्रालय स्थिति की समीक्षा करता रहेगा और आवश्यकतानुसार आगे जानकारी प्रदान करेगा।

Tuesday, March 10, 2026

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना के लिए ‘डिफेंस फोर्सेज विजन’ रोडमैप किया जारी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को साउथ ब्लॉक में भारतीय सेना के लिए ‘डिफेंस फोर्सेज विजन’ रोडमैप जारी किया। यह बड़ा ब्लूप्रिंट हेडक्वार्टर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ ने रक्षा बलों को आधुनिक, इंटीग्रेटेड और तकनीक से लैस सेना में बदलने के लिए तैयार किया है, जो 2047 तक भारत के विकसित देश बनने के सपने को पूरा करने में मदद कर सके। यह डॉक्यूमेंट भविष्य की युद्ध चुनौतियों के लिए ढलने वाली सेना बनाने के लिए इनोवेशन, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और मॉडर्न ट्रेनिंग फ्रेमवर्क के महत्व पर भी जोर देता है।


इस विजन डॉक्यूमेंट में सशस्त्र बलों में जरूरी सामरिक सुधारों के बारे में बताया गया है


इस विजन डॉक्यूमेंट में सशस्त्र बलों में जरूरी सामरिक सुधारों, क्षमता बढ़ाने और संगठनात्मक बदलावों के बारे में बताया गया है, ताकि बदलते भू-रणनीतिक, तकनीकी और सुरक्षा माहौल से अच्छे से निपटा जा सके। इसमें सेना को एक इंटीग्रेटेड, मल्टी-डोमेन और फुर्तीली फोर्स में बदलने की सोची गई है, जो दुश्मनों को रोकने, हर तरह के झगड़े में जवाब देने और तेजी से बदलते ग्लोबल और रीजनल हालात के बीच बढ़ते स्ट्रेटेजिक हितों की रक्षा करने में काबिल हो। इस विजन का एक मुख्य हिस्सा सेनाओं के बीच तालमेल और तालमेल पर जोर देना है, जिससे प्लानिंग, ऑपरेशन और क्षमता विकास में ज़्यादा तालमेल को बढ़ावा मिलेगा।

 

इस विजन में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित किया गया है


रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस विजन में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर ध्यान केन्द्रित किया गया है, जो देश की खास सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से स्वदेशी तकनीक और समाधान अपनाने को बढ़ावा देता है। घरेलू रक्षा विनिर्माण और प्रौद्योगिकी क्षमताओं को मजबूत करने से ऑपरेशनल तैयारी बढ़ने और देश की ग्रोथ में योगदान देने की उम्मीद है। विजन डॉक्यूमेंट में शॉर्ट-टर्म, मिड-टर्म और लॉन्ग-टर्म टाइमलाइन में साफ तौर पर प्राथमिकता वाले क्षमता लक्ष्यों के साथ एक कैलिब्रेटेड रोडमैप अपनाया गया है। यह विश्व स्तरीय डिफेंस फोर्स बनाने के लिए जरूरी सैन्य क्षमताओं, संस्थागत सुधारों और रणनीतिक साझेदारी के विकास में सहयोग करेगा।


यह विजन डॉक्यूमेंट पूरे देश के नजरिए की जरूरत पर देता है जोर 


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों की जटिलता को पहचानते हुए यह विजन डॉक्यूमेंट पूरे देश के नजरिए की जरूरत पर जोर देता है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा पक्की करने के लिए सैन्य ताकत को कूटनीतिक, तकनीकी और आर्थिक ताकत के साथ जोड़ा जाएगा। लगातार सुधारों, इनोवेशन और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के जरिए इसका मकसद यह पक्का करना है कि भारत की आजादी की सौवीं सालगिरह तक देश की सेना दुनिया भर में सम्मानित, टेक्नोलॉजिकली एडवांस्ड और लड़ाई के लिए तैयार मिलिट्री के तौर पर खड़ी हो, जो मजबूत विकसित भारत में योगदान दे।


इस मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, सेना उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

कैसा हो एआई युग का रेज्यूमे ? ऐसे प्रोजेक्ट्स चुनें जिन्हें मशीन रिप्लेस न कर सके

New York | एआई की वजह से नौकरियां जाने का डर अभी सभी को सता रहा है, खास तौर पर युवा वर्ग ज्यादा परेशान नजर आ रहा है। लेकिन प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर फर्म  के CEO  कहते हैं कि घबराने की जरूरत नहीं, बस रणनीति बदलनी होगी। जो कई बड़ी  दिग्गज कंपनियों में काम कर चुके हैं। उनका कहना है कि सिलिकॉन वैली में नौकरी पाना पहले भी आसान नहीं था। 


खुद इंग्लैंड के छोटे शहर से निकले जो ने कभी सीधे किसी बड़ी कंपनी में एंट्री नहीं ली। उनकी सलाह यह है कि ऐसा रेज्यूमे बनाएं जिसे नजरअंदाज करना नामुमकिन हो। किसी स्टंट से नहीं, बल्कि ऐसे प्रोजेक्ट और टेक्निकल स्किल से जो एआई आसानी से नहीं कर सकता। छोटी कंपनी, अलग शहर या थोड़े अलग क्षेत्र में काम करना कमजोरी नहीं, बल्कि आपकी सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।

Sunday, March 1, 2026

दुनिया की खास खबरें- ख़ामेनेई की बेटी, दामाद और नाती हमलों में मारे गए


ईरान- इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर से जुड़ी फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की बेटी, दामाद और नाती इन हमलों में मारे गए हैं


फ़ार्स ने यह भी बताया है, "कहा जा रहा है कि इन हमलों में ख़ामेनेई की एक बहू की भी मौत हो गई है"

पहले कुछ ख़बरें आई थीं कि उनकी बहू और दामाद की मौत हो गई है, लेकिन बाद में इसे ख़ारिज कर दिया गया था।

ईरानी अधिकारियों ने अभी तक आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत से जुड़े दावे की पुष्टि नहीं की है।

Tuesday, February 17, 2026

फ्रांस के साथ भारत का रिश्ता इनोवेशन ही नहीं, भरोसे का भी: नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने मुंबई में आयोजित इंडिया-फ्रांस इनोवेशन फोरम-2026 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस जैसे दो बड़े इनोवेशन हब का एक साथ आना वैश्विक सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और दोनों देशों का संबंध नवाचार के साथ-साथ भरोसे और साझा मूल्यों पर आधारित है।


प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस ने वर्ष 2026 को ‘इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने इसे केवल उत्सव नहीं, बल्कि साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।


नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत ने अपनी हजारों वर्षों की यात्रा में गणित, चिकित्सा, धातु विज्ञान और वास्तुकला जैसे क्षेत्रों में मानव कल्याण के लिए निरंतर नवाचार किया है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में भी भारत के युवा ‘इनोवेशन फॉर ग्लोबल गुड’ के लक्ष्य के साथ तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।


उन्होंने कहा कि देश का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हुआ है। स्टार्टअप इंडिया पहल के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। वर्ष 2014 में जहां देश में केवल चार यूनिकॉर्न कंपनियां थीं, वहीं अब उनकी संख्या 120 से अधिक हो गई है।


प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-फ्रांस संबंध अद्वितीय हैं और फ्रांस भारत के सबसे पुराने रणनीतिक साझेदारों में से एक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मैक्रॉन के नेतृत्व में दोनों देशों की साझेदारी को अभूतपूर्व गहराई और गतिशीलता मिली है और अब यह विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंच रही है।


नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस मिलकर ऐसा हेलीकॉप्टर बनाएंगे जो माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम होगा। इसका निर्माण भारत में किया जाएगा और इसे वैश्विक बाजार में निर्यात किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सहयोग वैश्विक स्थिरता और प्रगति के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

Thursday, February 12, 2026

PM Modi दिल्ली में शुक्रवार को सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन का करेंगे उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दिल्ली में सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1 और 2 का उद्घाटन करेंगे। वे शाम करीब 6 बजे सेवा तीर्थ में कार्यक्रम को संबोधित भी करेंगे।


प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने आज गुरुवार को यह जानकारी दी है। जिसके अनुसार, पीएम मोदी कल शुक्रवार को दोपहर करीब 1:30 बजे सेवा तीर्थ बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स का नामकरण करेंगे। इसके बाद वे सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1 और 2 का औपचारिक उद्घाटन करेंगे।


यह उद्घाटन भारत के प्रशासनिक शासन संरचना में एक बड़ा बदलाव लाने वाला मील का पत्थर है और यह प्रधानमंत्री के एक मॉडर्न, कुशल, सुलभ और नागरिक-केंद्रित गवर्नेंस इकोसिस्टम बनाने के कमिटमेंट को दिखाता है।


दशकों से कई जरूरी सरकारी ऑफिस और मंत्रालय सेंट्रल विस्टा एरिया में अलग-अलग जगहों पर बने हुए थे और पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर से काम करते थे। इससे ऑपरेशनल खामियां, कोऑर्डिनेशन की चुनौतियां, बढ़ते मेंटेनेंस खर्च और काम न कर पाने लायक स्थिति बनी हुई थी। नए बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स, मॉडर्न और भविष्य के लिए तैयार सुविधाओं के अंदर प्रशासनिक कार्यों को एक साथ करके इन समस्याओं का समाधान करते हैं।


सेवा तीर्थ में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय बने हुए हैं, जो पहले अलग-अलग जगहों पर थे।


कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 में वित्त मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, विधि एवं न्याय मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय और जनजातीय कार्य मंत्रालय सहित कई प्रमुख मंत्रालय स्थित हैं।


दोनों भवन परिसरों में डिजिटल रूप से एकीकृत कार्यालय, सुव्यवस्थित सार्वजनिक संपर्क क्षेत्र और केंद्रीकृत स्वागत सुविधाएं मौजूद हैं।


ये सुविधाएं सहयोग, दक्षता, सुचारू संचालन, नागरिकों की बेहतर भागीदारी और कर्मचारियों के कल्याण को बढ़ावा देंगी। 4-स्टार जीआरआईएचए मानकों के अनुसार डिज़ाइन किए गए इन परिसरों में नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियां, जल संरक्षण उपाय, अपशिष्ट प्रबंधन समाधान और उच्च-प्रदर्शन वाली भवन संरचनाएं शामिल हैं।

Tuesday, February 10, 2026

देश में 29,000 से अधिक सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित

देश में कुल 29 हजार से अधिक सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। भारी उद्योग राज्य मंत्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। 


उन्होंने बताया कि सरकार ने देश भर में पर्याप्त सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग अवसंरचना स्थापित करने के लिए फेम-2 योजना के तहत 912 करोड़ रुपये से अधिक और पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत 2 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। 


फेम-2 योजना का मुख्य उद्देश्य खरीद पर अग्रिम प्रोत्साहन देकर इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्‍यम से मंत्रालय ने पिछले वर्ष सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए परिचालन दिशानिर्देश जारी किए थे।

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