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Wednesday, April 8, 2026

हर विधानसभा में एक खेल परिसर का निर्माण हमारा लक्ष्य : मंत्री श्री सारंग

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने बुधवार, अप्रैल 8, 2026  को भोपाल के टीटी नगर स्टेडियम में विभाग की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने आगामी समर कैंप में नवाचार, खेल अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, खिलाड़ी कल्याण समिति को सशक्त बनाने और ओलम्पिक स्तर की सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए।


सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने बुधवार को टी.टी. नगर स्टेडियम, भोपाल स्थित मेजर ध्यानचंद हॉल में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विभागीय समीक्षा बैठक ली। मंत्री श्री सारंग ने विभागीय योजनाओं, वर्तमान कार्यों की प्रगति तथा आगामी कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मंत्री श्री सारंग ने निर्देश दिए कि प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा में एक आधुनिक खेल परिसर के निर्माण के लक्ष्य को प्राथमिकता के साथ शीघ्र पूर्ण करने की दिशा में विशेष ध्यान दें। इसके लिए पृथक एवं प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि खेल अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को निखारने का आधार बनेगा।


मंत्री श्री सारंग ने निर्देश दिए कि इस वर्ष समर कैंप को विशेष एवं नवाचारपूर्ण रूप दिया जाए। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में अधिक से अधिक नए बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए तथा उनके अभिभावकों को भी खेल गतिविधियों में शामिल करने की योजना बनाई जाए। इससे समाज में खेल के प्रति सकारात्मक वातावरण का निर्माण होगा तथा परिवार स्तर पर खेल संस्कृति को प्रोत्साहन मिलेगा।


मंत्री श्री सारंग ने प्रदेश में पूर्व से निर्मित खेल परिसरों के उन्नयन (अपग्रेडेशन) पर विशेष ध्यान देने के निर्देश देते हुए कहा कि इन परिसरों में युवा केंद्रित गतिविधियों को भी जोड़ा जाए जिससे अधिक से अधिक युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित हो सके और खेल के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास को भी बढ़ावा मिल सके।


मंत्री श्री सारंग ने खिलाड़ी प्रशिक्षण कल्याण समिति का पुनरावलोकन कर उसमें आवश्यक संशोधन करते हुए उसे और अधिक प्रभावी एवं सशक्त बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समिति की कार्यप्रणाली ऐसी होनी चाहिए जिससे खिलाड़ियों को अधिकतम लाभ मिल सके और उनके प्रशिक्षण एवं कल्याण से संबंधित आवश्यकताओं की समय पर पूर्ति सुनिश्चित हो सके।


बैठक के प्रमुख बिंदु:

  • समर कैंप और नई प्रतिभाएं: इस वर्ष समर कैंप को विशेष व नवाचारपूर्ण बनाने के निर्देश, ताकि अधिक से अधिक बच्चों और उनके अभिभावकों को खेल गतिविधियों से जोड़ा जा सके।
  • खेल अधोसंरचना का उन्नयन (Upgradation): प्रदेश के मौजूदा खेल परिसरों को अपग्रेड करने और उनमें युवा-केंद्रित गतिविधियां बढ़ाने पर जोर।
  • खिलाड़ी कल्याण: खिलाड़ी प्रशिक्षण कल्याण समिति की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और सशक्त बनाने के निर्देश।
  • भविष्य की योजना (ओलम्पिक फोकस): नाथू बरखेड़ा स्टेडियम के लिए 10 साल बाद की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, ओलम्पिक स्तर की सुविधाओं (वाटर ट्रीटमेंट, वाई-फाई, ईवी चार्जिंग आदि) के साथ मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश।
  • एशियन गेम्स की तैयारी: खिलाड़ियों के बेहतर प्रदर्शन के लिए विशेष प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश।


बैठक में खेल एवं युवा कल्याण के प्रमुख सचिव श्री मनीष सिंह, उप सचिव श्री अजय श्रीवास्तव, संचालक श्री अंशुमान यादव, संयुक्त संचालक श्री बी.एस. यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

Tuesday, April 7, 2026

महिला नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में बढ़ रहा भारत, प्रधानमंत्री ने साझा किया लेख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज, 7 अप्रैल 2026 को, केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी द्वारा लिखित एक लेख साझा किया है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला नेतृत्व वाली शासन व्यवस्था को लेकर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी द्वारा लिखित एक लेख साझा किया है। इस लेख में भारत में महिलाओं की भागीदारी को और सशक्त बनाने के लिए एक स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।


यह लेख भारत में महिला नेतृत्व वाली शासन व्यवस्था (Women-led Governance) को मजबूत करने के सरकार के दृष्टिकोण पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री ने इस लेख के माध्यम से निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं को रेखांकित किया: 


  • महिला नेतृत्व को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रतिनिधित्व को वास्तविक प्रभाव में बदलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने हमेशा नारी शक्ति को प्राथमिकता दी है और इसी सोच के तहत महिला-नेतृत्व वाली शासन व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम का जिक्र- प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत को महिला-नेतृत्व वाली शासन व्यवस्था की ओर ले जा रही है, जो विकसित भारत के निर्माण का एक प्रमुख स्तंभ बनेगी।
  • लेख में भविष्य की कार्ययोजना- केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी के इस लेख में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका मजबूत करने और शासन में उनकी प्रभावी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आगे की रणनीति का विस्तार से उल्लेख किया गया है।
  • महिला सशक्तिकरण पर बढ़ता फोकस- सरकार की ओर से महिला सशक्तिकरण को लेकर लगातार पहल की जा रही है, जिसमें शिक्षा, रोजगार, राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि महिला नेतृत्व को मजबूत करने से देश के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाने कलेक्टर आदेश जारी, वर्षभर होंगे आयोजन

सोमनाथ मंदिर पर 1026 ईस्वी में हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में, संस्कृति संचालनालय, भोपाल के निर्देशों के तहत 11 जनवरी 2026 से 11 जनवरी 2027 तक देशभर में "सोमनाथ स्वाभिमान पर्व - 1000 साल की अटूट आस्था" के तहत वर्षभर राष्ट्रीय स्मरणोत्सव मनाया जाएगा। इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए जिला स्तर पर नोडल अधिकारी (विदिशा में सहायक संचालक प्रियांश शर्मा) नियुक्त किए गए हैं, जो वर्षभर सांस्कृतिक, शैक्षणिक और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेंगे।


मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति संचालनालय, भोपाल के निर्देशानुसार सोमनाथ मंदिर पर हुए प्रथम अभिलिखित आक्रमण के 1000 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 11 जनवरी 2026 से 11 जनवरी 2027 तक “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” के रूप में वर्षभर राष्ट्रीय स्मरणोत्सव मनाने का निर्णय लिया गया है।


इसी क्रम में कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता द्वारा जिले में आदेश जारी कर उक्त अवधि में विभिन्न गतिविधियों एवं आयोजनों के सफल क्रियान्वयन हेतु शिक्षा विभाग के सहायक संचालक श्री प्रियांश शर्मा को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्हें कार्यक्रमों के समन्वय, संचालन एवं मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


जारी आदेश के अनुसार, वर्षभर जिले में विभिन्न शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं जागरूकता आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य ऐतिहासिक विरासत के प्रति जनमानस में जागरूकता एवं स्वाभिमान की भावना को सुदृढ़ करना है।


प्रशासन ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया है कि वे आपसी समन्वय के साथ निर्धारित गतिविधियों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें, ताकि यह राष्ट्रीय स्मरणोत्सव सार्थक रूप से संपन्न हो सके।


मुख्य बिंदु:

  • उद्देश्य: 1000 वर्षों के सभ्यतागत गौरव, अटूट आस्था और सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की कहानी को रेखांकित करना।
  • अवधि: यह आयोजन 11 जनवरी 2026 से शुरू होकर पूरे एक साल यानी 11 जनवरी 2027 तक चलेगा।
  • आयोजन: वर्षभर विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जागरूकता फैलाई जाएगी।
  • नोडल अधिकारी: स्थानीय प्रशासन द्वारा जिला स्तरीय नोडल अधिकारियों को इन कार्यक्रमों की सफलता और मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


यह पर्व सोमनाथ की जीवटता और सनातन संस्कृति के पुनर्उत्थान का स्मरणोत्सव है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जा रहा है।

अच्छा स्वास्थ्य ही मानव जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है - राजस्व मंत्री

राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने सीहोर जिले के इछावर सिविल अस्पताल में मानसरोवर मेडिकल कॉलेज द्वारा आयोजित निशुल्क स्वास्थ्य परामर्श शिविर का शुभारंभ किया। इस शिविर में विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा महिला रोग, हड्डी रोग, नेत्र और ईएनटी के मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें निःशुल्क दवाइयां बांटी गईं।


राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा ने इछावर सिविल हॉस्पिटल में मानसरोवर मेडिकल कॉलेज द्वारा आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श शिविर का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आमजन को शिविर का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। मंत्री वर्मा ने कहा कि स्वस्थ समाज के लिए नियमित जांच जरूरी है, और प्रदेश सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है।


इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अच्छा स्वास्थ्य ही मानव जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है और समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को सुलभ एवं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है।


शिविर में महिला रोग, हड्डी रोग, शिशु रोग, नेत्र, ईएनटी सहित विभिन्न विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा मरीजों का परीक्षण किया गया एवं परामर्श दिया गया। शिविर में कुल 384 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया गया। साथ ही ईसीजी, ब्लड प्रेशर एवं शुगर की जांच भी की गई। इस अवसर पर एसडीएम श्रीमती स्वाति मिश्रा, सीएमएचओ डॉ सुधीर डेहरिया, मानसरोवर ग्रुप के प्रो-चांसलर ईआर. गौरव तिवारी सहित जनप्रतिनिधि, एवं अन्य सदस्य उपस्थित थे।


शिविर की मुख्य विशेषताएं:

  • आयोजक: मानसरोवर मेडिकल कॉलेज (सिविल अस्पताल, इछावर के सहयोग से)।
  • विशेषज्ञ सेवाएं: महिला रोग, हड्डी रोग, शिशु रोग, नेत्र एवं ईएनटी (ENT) जांच।
  • परीक्षण: ईसीजी (ECG), ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच की गई।
  • कुल लाभार्थी: लगभग 384 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ।
  • उद्देश्य: सुलभ और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना।

Friday, April 3, 2026

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किए श्री बालाजी श्‍याम सरकार मंदिर में हनुमान जी, श्री खाटू श्‍याम जी के दर्शन

मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव का शुक्रवार को उज्‍जैन प्रवास के दौरान श्री बालाजी श्‍याम सरकार मंदिर में सम्मान किया गया। इस अवसर पर अनेक श्रद्धालु उपस्थित थे। बालाजी श्याम सरकार मंदिर में महंत श्री मनीष पारिख ने मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव का अंगवस्त्रम से सम्‍मान किया।


प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान हनुमान जी, श्री खाटू श्‍याम जी और देवी दुर्गा मां के दर्शन कर पूजा अर्चना की। इस अवसर पर मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश और देश के नागरिकों के कल्याण की कामना की।


उज्जैन के श्री बालाजी श्याम सरकार मंदिर एक प्रमुख धार्मिक स्थल है जो अपनी आध्यात्मिक जीवंतता और भव्य आयोजनों के लिए जाना जाता है। यह मंदिर उज्जैन के जवाहर नगर क्षेत्र में स्थित है।


मुख्य विवरण:

  • महत्व: यह मंदिर विशेष रूप से भगवान बालाजी (हनुमान जी) और बाबा श्याम (खाटू श्याम) की भक्ति के लिए समर्पित है। यहाँ नियमित रूप से संकीर्तन और भजन संध्याओं का आयोजन किया जाता है।
  • प्रमुख आयोजन: यहाँ श्री श्याम वार्षिक फाल्गुन महोत्सव जैसे बड़े उत्सव धूमधाम से मनाए जाते हैं, जिसमें भारी संख्या में भक्त शामिल होते हैं।
  • विशेषता: मंदिर में मासिक संकीर्तन और विशेष तिथियों पर दिव्य आरती का आयोजन होता है, जिससे यह स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण आस्था का केंद्र बना हुआ है।

विद्यार्थियों को उचित मूल्य पर पुस्तकें, स्टेशनरी एवं यूनिफार्म उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकासखंड स्तरीय पुस्तक मेलों का आयोजन

विकासखंड स्तरीय पुस्तक मेला (Block Level Book Fair) मुख्य रूप से ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में शिक्षा और साहित्य को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया जाने वाला एक स्थानीय कार्यक्रम है। मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में शासन के निर्देशानुसार, इन मेलों का प्राथमिक उद्देश्य शासकीय और निजी दोनों स्कूलों के विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक निगम की प्रामाणिक पुस्तकें और अन्य शैक्षणिक सामग्री रियायती दरों पर सुलभ कराना है।


विद्यार्थियों को उचित मूल्य पर पुस्तकें, स्टेशनरी एवं यूनिफार्म उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले के सभी विकासखंडों में  विकासखंड स्तरीय पुस्तक मेलों का आयोजन किया जाएगा।


प्रमुख विशेषताएं और उद्देश्य

  • सुलभता: विकासखंड (ब्लॉक) स्तर पर आयोजन होने से दूरदराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों और अभिभावकों को जिला मुख्यालय जाए बिना पुस्तकें उपलब्ध हो जाती हैं।
  • पारदर्शिता: इन मेलों का आयोजन पुस्तक विक्रय में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकों के बोझ से राहत देने के लिए किया जाता है।
  • शैक्षणिक सामग्री: पुस्तकों के साथ-साथ कॉपियां, स्कूल बैग, यूनिफॉर्म और अन्य स्टेशनरी भी अक्सर एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाती है।
  • सांस्कृतिक प्रोत्साहन: यह विद्यार्थियों में पठन-पाठन की संस्कृति विकसित करने और उन्हें ज्ञान के नए स्रोतों से जोड़ने का एक माध्यम है।


हालिया आयोजन (अप्रैल 2026)

वर्तमान समय में मध्य प्रदेश के विभिन्न विकासखंडों और जिलों में ये मेले आयोजित किए जा रहे हैं:

  • आमला (बैतूल): शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 31 मार्च से 2 अप्रैल 2026 तक तीन दिवसीय मेला आयोजित किया गया।
  • छिंदवाड़ा: यहाँ 4 से 6 अप्रैल 2026 तक जिला स्तरीय पुस्तक मेला प्रस्तावित है, जिसका उद्देश्य पुस्तक विक्रय में पारदर्शिता लाना है।
  • मंदसौर: संजय गांधी उद्यान में पाँच दिवसीय मेला (1 अप्रैल 2026 से शुरू) आयोजित किया गया है, जहाँ प्रतिदिन दोपहर 12 से रात 8 बजे तक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध है।
  • नर्मदापुरम: यहाँ भी 2 अप्रैल से 4 अप्रैल 2026 तक हाल ही में छात्रों को राहत देने के उद्देश्य से जिला स्तरीय मेले की शुरुआत हुई है।नर्मदापुरम संभाग के विभिन्न विकासखंडों में ये मेले स्थानीय शासकीय स्कूलों के परिसरों में आयोजित किए जा रहे हैं। नर्मदापुरम (मुख्यालय): शासकीय एस.एन.जी. (SNG) स्कूल, सिवनी मालवा: स्थानीय शासकीय स्कूल परिसर, इटारसी, पिपरिया, सोहागपुर और बनखेड़ी: इन तहसीलों में भी क्रमिक रूप से मेलों का आयोजन किया जा रहा है।
  • सीहोर के एमएलबी स्कूल, आष्टा के शासकीय संदीपनी स्कूल, इछावर के शासकीय संदीपनी स्कूल, बुधनी के शासकीय संदीपनी स्कूल और भैरूंदा के शासकीय संदीपनी स्कूल में 06 से 09 अप्रैल तक प्रात: 10 बजे से शाम 06 बजे पुस्तक मेले आयोजित किए जाएंगे।

Thursday, April 2, 2026

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना कार्यक्रम में सम्मिलित होने 18 अप्रैल तक जमा कर सकते हैं आवेदन

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना (आदिवासी समुदाय के लिए) के तहत वर्ष 2026-27 में जिला स्तरीय कार्यक्रम गोंड गुरूआ बाबा (तारानगर) न्यास ग्राम पंचायत धामधूसर तहसील गौहरगंज में 23 अप्रैल 2026 को अतिरिक्त तिथि निर्धारित की गई है। 


जिला पंचायत सीईओ श्री कमल सोलंकी द्वारा सामूहिक विवाह आयोजन हेतु आयोजक जनपद पंचायत सीईओ औबेदुल्लागंज और नोडल अधिकारी श्री मनोज बॉथम उप संचालक सामाजिक न्याय विभाग को बनाया गया है। सामूहिक विवाह में सम्मिलित होने वाले वर-वधु द्वारा आवेदन फार्म शासन द्वारा निर्धारित पात्रता मापदण्ड शर्तो के अधीन 02 अप्रैल से 18 अप्रैल 2026 तक जनपद पंचायत कार्यालय औबेदुल्लागंज में जमा किए जा सकते हैं।


निर्धारित तिथि उपरांत प्राप्त आवेदन मान्य योग्य नहीं होंगे। सामूहिक विवाह हेतु प्राप्त आवेदनों की संख्या शासन द्वारा निर्धारित अधिकतम संख्या 200 से अधिक होने की स्थिति में पहले आओ पहले पाओ के माध्यम से जोड़ो का चयन किया जाएगा। चयन प्रक्रिया उपरांत सामूहिक विवाह में सम्मिलित होने वाले वैवाहिक जोड़ों की सूची का प्रकाशन 20 अप्रैल 2026 तक किया जाएगा।  


आवश्यक दस्तावेज: आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, बीपीएल राशन कार्ड, कन्या का बैंक खाता विवरण और पासपोर्ट साइज फोटो।


आवेदन प्रक्रिया: आप आधिकारिक वेबसाइट (राज्य अनुसार) के माध्यम से ऑनलाइन या संबंधित विकासखंड कार्यालय में ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं।

Sunday, March 29, 2026

नई सीड प्रोसेसिंग यूनिट और किसानों के प्रशिक्षण पर दें विशेष ध्यान: मंत्री श्री सारंग

सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने राज्य सहकारी बीज एवं विपणन संघ मर्यादित, भोपाल (बीज संघ) के संचालक मंडल की बैठक में बीज उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा किसानों को किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि बीज संघ द्वारा मक्का, नॉन-जीएम कपास एवं सब्जियों के हाइब्रिड बीजों का उत्पादन एवं विपणन किया जाएगा। किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज बाजार मूल्य की तुलना में लगभग आधी कीमत पर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि इससे किसानों की लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलेगी।


मंत्री श्री सारंग ने बीज संघ के ‘चीता बीज’ को विश्व स्तरीय ब्रांड के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए बीजों की गुणवत्ता, पैकेजिंग एवं ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा सोशल मीडिया, कृषि मेलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।


बैठक में बताया गया कि बीज प्रसंस्करण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई सीड प्रोसेसिंग यूनिट एवं कलर सॉर्टेक्स मशीनें स्थापित की जाएंगी। प्रथम चरण में यह कार्य गुना एवं खरगोन में प्रारंभ किया जाएगा, जिसे पैक्स एवं सहकारी समितियों के माध्यम से प्रदेश के अन्य जिलों में विस्तारित किया जाएगा।


 मंत्री श्री सारंग ने निर्देश दिए कि किसानों को बीज उत्पादन के लिए प्रशिक्षित किया जाए। जिन किसानों ने बीज उत्पादन में अच्छा कार्य किया है, उनके माध्यम से अन्य किसानों को प्रशिक्षण दिया जाए तथा प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार बीज उत्पादन योजनाएं तैयार की जाएं। उन्होंने कहा कि बीज संघ आगामी समय में बीज उत्पादन, ब्रांडिंग, प्रसंस्करण एवं विपणन को मजबूत करते हुए किसानों को किफायती दरों पर उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने के लक्ष्य के साथ कार्य करे।


 बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्री अशोक वर्णवाल, आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक संस्थाएं श्रीमती शीला दाहिमा, राज्य विपणन संघ के प्रबंध संचालक श्री अभिजीत अग्रवाल, बीज निगम के प्रबंध संचालक श्री महेंद्र दीक्षित सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

साँची विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रोफेसर यज्नेश्वर एस. शास्त्री दर्शन रत्न से सम्मानित

साँची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, प्रख्यात विद्वान आचार्य प्रोफेसर यज्नेश्वर एस. शास्त्री को प्रतिष्ठित 'दर्शन रत्न' सम्मान से नवाजा गया है। यह सम्मान उन्हें इंटरनेशनल कांग्रेस ऑफ सोशल फिलॉसफी (ICSP) द्वारा दर्शन शास्त्र के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। मेघालय की नार्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी (NEHU), शिलॉन्ग में 25 मार्च को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में प्रोफेसर शास्त्री को इस उपाधि से विभूषित किया गया। इस अवसर पर देश-विदेश के दार्शनिकों और विद्वानों ने उनके द्वारा दर्शन जगत में किए गए कार्यों की सराहना की।


दर्शन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान

प्रोफेसर शास्त्री वर्तमान में साँची विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में मार्गदर्शन देने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्य कर रहे हैं:

  • शंकर साहित्य का सरलीकरण: वे आदि गुरु शंकराचार्य के गूढ़ साहित्य को जन-सामान्य के लिए सरल और सुबोध भाषा में तैयार करने के मिशन पर काम कर रहे हैं।
  • शोध को प्रोत्साहन: 'शंकर न्यास' के माध्यम से वे युवा शोधार्थियों का निरंतर मार्गदर्शन कर रहे हैं, ताकि भारतीय दर्शन की परंपरा आगे बढ़ सके।
  • अकादमिक नेतृत्व: साँची विश्वविद्यालय में कुलाधिपति के रूप में उनके नेतृत्व में भारतीय ज्ञान परंपरा और बौद्ध दर्शन पर विशेष शोध कार्य किए जा रहे हैं।


इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय परिवार और शिक्षा जगत के विभिन्न दिग्गजों ने प्रोफेसर शास्त्री को बधाई दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान न केवल प्रोफेसर शास्त्री का है, बल्कि यह भारतीय दर्शन की समृद्ध विरासत का भी सम्मान है।


आचार्य प्रो. डॉ. यज्ञेश्वर एस. शास्त्री

आचार्य प्रोफेसर डॉ. यज्ञेश्वर एस. शास्त्री भारतीय दर्शन, विशेषकर हिंदू, बौद्ध और जैन दर्शन के विश्वप्रसिद्ध विद्वान हैं। प्रोफेसर शास्त्री ने मुंबई विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट की उपाधियाँ प्राप्त की हैं। गुरुकुल में पूर्ण हुई उनकी संस्कृत शिक्षा के परिणामस्वरूप उन्होंने शास्त्री (स्नातक) और आचार्य (स्नातक) की पारंपरिक उपाधियाँ प्राप्त कीं। उनके डॉक्टरेट शोध का विषय विज्ञानवाद बौद्ध धर्म और उपनिषद दर्शन का तुलनात्मक अध्ययन था।


तीस वर्षों से अधिक समय से वे भारत और विदेशों में स्नातकोत्तर स्तर पर अनगिनत छात्रों को उपनिषद दर्शन, अद्वैत वेदांत, महायान बौद्ध धर्म और जैन धर्म में अपना ज्ञान प्रदान कर रहे हैं। 1993 से वे एक अंतरराष्ट्रीय विद्वान के रूप में कई विदेशी विश्वविद्यालयों में अतिथि प्रोफेसर रहे हैं।


अहमदाबाद स्थित गुजरात विश्वविद्यालय में प्रोफेसर शास्त्री ने एक दशक से अधिक समय तक मनोविज्ञान, शिक्षा और दर्शन विभाग के निदेशक के रूप में कार्य किया है। वे भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (आईसीपीआर) के राष्ट्रीय फेलो और भारत सरकार के भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मनोनीत सदस्य थे। उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में अध्यक्ष, मुख्य वक्ता और अध्यक्ष के रूप में कार्य किया है।


वर्तमान में, प्रो. शास्त्री निम्नलिखित पदों पर कार्यरत हैं: मध्य प्रदेश के संस्कृति मंत्रालय के आचार्य शंकर संस्कृतिक एकतन्यास के सलाहकार; गुजरात विश्व शांति फाउंडेशन के अध्यक्ष; नालंदा इंटरनेशनल, भारत के निदेशक; सोम-ललित अंतर्राष्ट्रीय विचार केंद्र, अहमदाबाद के निदेशक; सामाजिक दर्शन के अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस के मानद अध्यक्ष; एशियाई दर्शन कांग्रेस के उपाध्यक्ष; और भारत सरकार के भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के जर्नल के संपादकीय मंडल के सदस्य। वे दर्शनशास्त्र बोर्ड के विशेषज्ञ सदस्य और भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों में पीएचडी रेफरी भी हैं। उन्होंने 18 पीएचडी और 85 से अधिक एमफिल उम्मीदवारों का सफलतापूर्वक मार्गदर्शन किया है।


उन्होंने 18 से अधिक उल्लेखनीय दार्शनिक कृतियों का लेखन किया है, जिनमें शामिल हैं: हिंदू धर्म की नींव; ईशावास्योपनिषद - एक अध्ययन; भारतीय दर्शन और धर्म के अनछुए रास्तों पर भ्रमण; असंग का महायानसूत्रलंकार - विज्ञानवाद बौद्ध धर्म का अध्ययन; उमस्वती वाचक का प्रसमरातिप्रकरण (जैन धर्म पर); वेदांतिक आचार्य के दृष्टिकोण से जैन धर्म; वेदांत और ताओवाद; हिंदू संस्कृति की प्रमुख विशेषताएं; और बौद्ध धर्म और विश्व शांति। उन्होंने 150 से अधिक शोध पत्र भी प्रकाशित किए हैं।


प्रोफेसर शास्त्री कई पुस्तकों और पत्रिकाओं के मुख्य संपादक हैं। उनका एक प्रमुख योगदान ईशावास्योपनिषद पर 51 संस्कृत टीकाओं का संपादन है। उन्होंने ललितत्रिशति शंकरभाष्य का अंग्रेजी अनुवाद सहित संपादन भी किया है।


प्रोफेसर शास्त्री को कई सम्मानों से नवाजा गया है, जिनमें "भारत के प्रख्यात दार्शनिक", "महाहोपाध्याय", "दर्शन विशारद", "करुणाद (कर्नाटक) चेतना", "शांति दूत" और "भारत के प्रख्यात नागरिक" की उपाधियाँ शामिल हैं। उन्हें श्रीमंत नानासाहेब पेशवा पुरस्कार और राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं।


डॉ. शास्त्री संस्कृत, अंग्रेजी, हिंदी, कन्नड़, मराठी और गुजराती सहित कई भाषाओं में धाराप्रवाह हैं।


वर्तमान में वे अपने पुत्र डॉ. योगेश्वर शास्त्री के साथ क्राइस्टचर्च, न्यूजीलैंड में रहते हैं और हिंदू मंदिर और संस्कृति केंद्र में वेदों, वेदांत और संस्कृत का ज्ञान प्रदान करने के लिए सामुदायिक कार्यों में संलग्न हैं।

Saturday, March 28, 2026

अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने विदेश मंत्री जयशंकर और रुबियो से की मुलाकात

अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो G7 विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए फ्रांस पहुंचे। इस मौके पर रुबियो का साथ देने के लिए भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर भी फ्रांस पहुंचे। फ्रांस में उन्होंने रुबियो के साथ-साथ भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से मुलाकात की। इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी।


मुलाकात की तस्वीरें की साझा

मुलाकात की तस्वीरें साझा कर राजदूत गोर ने लिखा, “फ्रांस में G7 मंत्री स्तरीय मीटिंग के लिए के साथ जुड़कर खुशी हुई। हमारे सहयोगियों और साझेदारों के साथ अच्छी चर्चा हुई।” अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने G7 देशों के विदेश मंत्रियों के साथ इस बैठक में कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान समय-सीमा के अनुसार या उससे आगे चल रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इसके लक्ष्य महीनों नहीं, बल्कि कुछ हफ्तों में पूरे हो जाएंगे। हालांकि, ये बात अमेरिकी सरकार ने पहले भी कही है।


मिशन की शुरुआत से ही स्पष्ट रूपरेखा तय: रुबियो

रुबियो ने कहा कि इस मिशन की शुरुआत से ही स्पष्ट रूपरेखा तय की गई थी। उन्होंने कहा, “हम ईरान की नौसेना को नष्ट करेंगे, उनकी वायुसेना को नष्ट करेंगे। हम मूल रूप से उनकी मिसाइल और ड्रोन बनाने की क्षमता को उनकी फैक्ट्रियों में खत्म कर देंगे।” उन्होंने जोड़ा कि इस अभियान का उद्देश्य “मिसाइल लॉन्चरों की संख्या को काफी कम करना” है, ताकि ईरान “इनके पीछे छिपकर परमाणु हथियार बनाने और दुनिया को धमकाने” में सक्षम न रहे।


रुबियो ने कहा कि प्रगति लगातार हो रही है। “हम इस ऑपरेशन में समय-सीमा के अनुसार या उससे आगे हैं और उम्मीद है कि इसे उचित समय पर महीनों में नहीं, बल्कि कुछ हफ्तों में पूरा कर लिया जाएगा। प्रगति बहुत अच्छी है।”


लक्ष्यों को बिना किसी ग्राउंड टूप्स के हासिल किया: रुबियो

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जमीनी सैनिकों की जरूरत नहीं होगी। इन लक्ष्यों को बिना किसी ग्राउंड टूप्स के हासिल किया जा सकता है। रुबियो ने ऑपरेशन के बाद संभावित जोखिमों की भी चेतावनी दी, खासकर होर्मुज स्ट्रेट में, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। उन्होंने कहा कि ईरान वहां टोल प्रणाली लागू करने की कोशिश कर सकता है, जिसे उन्होंने “अवैध,” “अस्वीकार्य,” और “दुनिया के लिए खतरनाक” बताया।

अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव के लिए सतर्कता जरूरी: अपनाएं सरल उपाय, रहें सुरक्षित

जिला प्रशासन द्वारा अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव के लिए सतर्कता जरूरी पर बल देते हुए बचाव के उपायों पर आधारित सुझावों का पालन करने का आह्वान करते हुए अपनाएं सरल उपाय, रहें सुरक्षित को रेखांकित किया गया है।


सामान्यतः गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाओं में वृद्धि देखी जाती है, जिससे जन-धन की हानि का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव के लिए जागरूकता और सावधानी अत्यंत आवश्यक है। यदि कुछ सरल उपायों को अपनाया जाए तो आग लगने की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।


घर एवं दैनिक जीवन में सावधानियां:

घर में बिजली की खराब या पुरानी वायरिंग को समय-समय पर ठीक करवाना जरूरी है। गैस सिलेंडर को हमेशा सीधा रखें और किसी भी प्रकार का लीकेज होने पर तुरंत गैस बंद करें। खाना बनाते समय गैस या चूल्हे को बिना निगरानी के न छोड़ें और रसोई में आग जलती छोड़कर कहीं न जाएं।


घर में एक छोटा फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक यंत्र) अवश्य रखें और उसके उपयोग की जानकारी भी रखें। पेट्रोल, केरोसीन जैसे ज्वलनशील पदार्थों को सुरक्षित स्थान पर रखें। बच्चों को माचिस और लाइटर से दूर रखना भी अत्यंत आवश्यक है।


खेतों में अग्नि सुरक्षा के उपाय:

खेतों में आग से बचाव के लिए चारों ओर 8–10 फीट चौड़ी खाली पट्टी (फायर लाइन) बनाना अत्यंत जरूरी है, जिससे आग को फैलने से रोका जा सके। सूखी घास, पत्ते और कचरा खेत में इकट्ठा न होने दें।


पराली या फसल अवशेष जलाने से आग फैलने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए इसे न जलाएं। खेतों के पास बिजली के ढीले या टूटे तार न हों और उनसे उचित दूरी बनाए रखें। पास में पानी, मिट्टी या बाल्टी की व्यवस्था रखें ताकि आवश्यकता पड़ने पर तुरंत आग बुझाई जा सके। खेतों में जलती हुई बीड़ी या सिगरेट न फेंके।


आपात स्थिति में क्या करें:

यदि आग लग जाए तो तुरंत 101 (फायर ब्रिगेड) पर सूचना दें। गैस और बिजली के कनेक्शन तुरंत बंद करें। छोटी आग को पानी, मिट्टी या कंबल से बुझाने का प्रयास करें, जबकि बड़ी आग की स्थिति में सुरक्षित दूरी बनाए रखें और विशेषज्ञ सहायता का इंतजार करें।


बच्चों के लिए विशेष सावधानी:

बच्चों को माचिस और लाइटर से खेलने से रोकें और उन्हें आग के खतरों के प्रति जागरूक करें। घर में आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) सुनिश्चित करें और बाहर निकलने का रास्ता हमेशा साफ और खुला रखें।


अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा उपाय है। छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर हम स्वयं, अपने परिवार और अपनी फसलों को सुरक्षित रख सकते हैं।

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने भगवान भैरवनाथ एवं माँ बूढ़ी माता के दर्शन किए, जानें क्यों है खास?

उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने गत दिवस महा अष्टमी पर रीवा के गुढ़ के समीप भैरवनाथ मंदिर में भगवान के दर्शन किए। उन्होंने भैरवनाथ लोक में निर्मित कार्यों का निरीक्षण किया तथा प्रगतिरत कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त करते हुए उन्हें शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री ने बूढ़ी माता मंदिर में माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की।


भगवान भैरवनाथ और माँ बूढ़ी माता का गहरा आध्यात्मिक संबंध है, जो विशेष रूप से भारत के विभिन्न क्षेत्रीय लोक विश्वासों और मंदिर परंपराओं में देखने को मिलता है।


यहाँ उनसे संबंधित कुछ प्रमुख बिंदु दिए गए हैं:

1. माँ बूढ़ी माता और भगवान भैरवनाथ का संबंध 

आध्यात्मिक मिलन: कई क्षेत्रों में माँ बूढ़ी माता को शक्ति का स्वरूप और भगवान काल भैरव को उनका रक्षक या भाई माना जाता है। हिमाचल प्रदेश जैसे स्थानों पर देव काल भैरव अपनी बहन राजमाता बूढ़ी भैरवा (माँ बूढ़ी माता) से मिलने जाते हैं, जो एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा है।

माँ का स्वरूप: माँ बूढ़ी माता को अक्सर महाकाली का एक चमत्कारी अवतार माना जाता है, जिन्हें बंजारों की देवी के रूप में भी पूजा जाता है। उनकी आराधना अक्सर भगवान अघोर शिव या भैरव के साथ की जाती है। 


2. प्रमुख मंदिर और पूजा स्थल

रीवा (मध्य प्रदेश): रीवा में भगवान भैरवनाथ और माँ बूढ़ी माता का एक अत्यंत प्राचीन और सिद्ध मंदिर है। यहाँ के मंदिर परिसर में माँ बूढ़ी माता की दिव्य शक्ति के दर्शन हेतु भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

मंदिर की विशेषता: माँ बूढ़ी माता के मंदिर अक्सर नगर के बाहर या श्मशान भूमि के समीप स्थित होते हैं। भक्तों का मानना है कि यहाँ दर्शन मात्र से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है। 


3. धार्मिक महत्व

सुरक्षा और रक्षक: तंत्र शास्त्र में भैरवनाथ को क्षेत्रपाल (क्षेत्र के रक्षक) माना जाता है, जबकि माँ बूढ़ी माता को ममतामयी शक्ति का रूप दिया गया है जो अपने भक्तों के कष्टों को दूर करती हैं।

भक्ति परंपरा: इन दोनों देवताओं की पूजा अक्सर एक साथ या एक ही परिसर में की जाती है ताकि भक्त को शक्ति (माता) और सुरक्षा (भैरव) दोनों का आशीर्वाद मिल सके।

Friday, March 27, 2026

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत सामूहिक विवाह सम्मेलन रायसेन में 19 अप्रैल को आयोजित

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत वर्ष 2026-27 में जिले में अक्षय तृतीय 19 अप्रैल 2026 को सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। जिला मुख्यालय रायसेन में आयोजित होने वाले इस सामूहिक विवाह सम्मेलन हेतु आयोजक नगर पालिका रायसेन तथा नोडल अधिकारी उप संचालक सामाजिक न्याय श्री मनोज बाथम रहेंगे। सामूहिक विवाह सम्मेलन में सम्मिलित होने वाले वर-वधु द्वारा आवेदन फार्म शासन द्वारा निर्धारित पात्रता मापदण्ड शर्तो के अधीन दिनांक 01 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 तक सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण कार्यालय रायसेन में जमा किए जा सकते हैं। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए सामाजिक सुरक्षा अधिकारी रायसेन श्री अनुराग भदौरिया के मो.न. 9131805671 पर या सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण कार्यालय रायसेन में सम्पर्क किया जा सकता है।


मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना भारत के विभिन्न राज्यों (जैसे मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और बिहार) द्वारा संचालित एक कल्याणकारी योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों, विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं की बेटियों की शादी के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है।


राज्यवार प्रमुख विवरण (2026 अपडेट)

विभिन्न राज्यों में इस योजना के तहत मिलने वाली सहायता और नियम अलग-अलग हैं:

  • मध्य प्रदेश: राज्य सरकार नवविवाहित जोड़ों को Rs.55,000 की सहायता देती है। इसमें Rs.49,000 सीधे वधु के बैंक खाते में जमा किए जाते हैं और Rs.6,000 सामूहिक विवाह आयोजन के खर्च के लिए होते हैं। ताजा अपडेट के अनुसार, निवाड़ी जैसे जिलों में आवेदन की अवधि 20 मार्च 2026 से 05 अप्रैल 2026 तक निर्धारित की गई है।
  • छत्तीसगढ़: यहाँ भी सामूहिक विवाह कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। हाल ही में 10 फरवरी 2026 को प्रदेश भर में 6,412 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न हुआ।
  • उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत प्रति जोड़ा Rs.51,000 की सहायता दी जाती है (जिसमें Rs.35,000 नकद, Rs.10,000 का सामान और Rs.6,000 आयोजन खर्च शामिल है)। कुछ रिपोर्टों के अनुसार सहायता राशि को Rs.1 लाख तक बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।
  • बिहार: बिहार में बेटियों के विवाह के लिए आर्थिक मदद के साथ-साथ सरकार हर ग्राम पंचायत में आधुनिक विवाह मंडप का निर्माण कर रही है, जिसका लक्ष्य 2030 तक सभी 8,530 पंचायतों को कवर करना है।


योजना का लाभ लेने के लिए सामान्य शर्तें इस प्रकार हैं 

  • आयु: वधु की आयु कम से कम 18 वर्ष और वर की 21 वर्ष होनी चाहिए।
  • निवास: आवेदक संबंधित राज्य का स्थायी निवासी होना चाहिए।
  • आय: परिवार गरीबी रेखा (BPL) के नीचे होना चाहिए।

आवश्यक दस्तावेज

  • आधार कार्ड और समग्र आईडी (MP के लिए)।
  • निवास और आय प्रमाण पत्र।
  • आयु प्रमाण पत्र (मार्कशीट या जन्म प्रमाण पत्र)।
  • बैंक पासबुक की फोटोकॉपी।
  • वर-वधु की पासपोर्ट साइज फोटो। 

आवेदन कैसे करें?

  • ऑनलाइन: आप राज्य के आधिकारिक पोर्टल (जैसे MP के लिए socialjustice.mp.gov.in) पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं।
  • ऑफलाइन: ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत/जनपद पंचायत और शहरी क्षेत्रों में नगर निगम/नगर पालिका कार्यालय से फॉर्म प्राप्त कर और भरकर जमा किया जा सकता है।

रामनवमी पर विशेष: रामनवमी के बारे में जानें विस्तार से?

रामनवमी भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला एक अत्यंत पवित्र हिंदू त्योहार है। वर्ष 2026 में, रामनवमी का यह पावन पर्व मुख्य रूप से 27 मार्च को मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर प्रारंभ होगी और 27 मार्च को सुबह 10 बजकर 6 मिनट पर समाप्त होगी। यह पर्व उस आदर्श पुरुष की स्मृति को जीवंत करता है, जिसने अपने आचरण से सिद्ध किया कि मर्यादा का पालन करते हुए भी मनुष्य सर्वोच्च शिखरों को प्राप्त कर सकता है। श्रीराम का चरित्र धार्मिक आस्था से परे एक जीवंत दर्शन है, जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र तीनों के लिए मार्गदर्शक है। रामनवमी हमें केवल पूजा तक सीमित नहीं रखती, बल्कि सत्य, न्याय, त्याग और कर्तव्य जैसे मूल्यों को जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा देती है। यही कारण है कि यह पर्व त्रेतायुग से लेकर आज तक समान रूप से प्रासंगिक बना हुआ है।


महत्व और तिथि (2026)

  • तिथि: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है।
  • शुभ मुहूर्त (2026): पूजा का सबसे शुभ समय सुबह 11:13 से दोपहर 1:41 तक है।
  • धार्मिक महत्व: इस दिन भगवान विष्णु ने अधर्म का नाश करने के लिए राजा दशरथ और माता कौशल्या के घर सातवें अवतार 'राम' के रूप में जन्म लिया था।


पूजा विधि और उत्सव

  • पूजा: श्रद्धालु इस दिन भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
  • सूर्य तिलक (अयोध्या): अयोध्या के नवनिर्मित राम मंदिर में दोपहर के समय रामलला का 'सूर्य तिलक' एक प्रमुख आकर्षण होता है, जहाँ सूर्य की किरणें सीधे उनके माथे को सुशोभित करती हैं।
  • अनुष्ठान: भक्त व्रत रखते हैं, रामचरितमानस का पाठ करते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और कई स्थानों पर भव्य शोभायात्राएं निकाली जाती हैं।
  • कन्या पूजन: चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन होने के कारण, इस दिन कई घरों में कन्या पूजन करके व्रत का पारण किया जाता है।


मुख्य परंपराएं

  • अयोध्या: भगवान राम की जन्मस्थली होने के कारण यहाँ उत्सव की भव्यता देखते ही बनती है。
  • भजन और कीर्तन: मंदिरों में विशेष रूप से "भय प्रगट कृपाला दीनदयाला" जैसे स्तुति गान किए जाते हैं।
  • आदर्श: यह पर्व हमें श्री राम के आदर्शों—सत्य, मर्यादा, त्याग और धैर्य—को अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है।


रामकथा की कालजयी परंपरा

रामनवमी की आधारशिला उस महान कथा में निहित है, जिसे रामायण के रूप में जाना जाता है। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित यह ग्रंथ भारतीय सभ्यता की आधार-रचना है, जबकि गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस ने इसे जन-जन तक पहुंचाया। रामकथा केवल एक राजकुमार के जीवन का वृत्तांत नहीं, बल्कि धर्म और अधर्म, न्याय और अन्याय, त्याग और स्वार्थ के बीच संघर्ष की महागाथा है। इसकी विशेषता यह है कि इसमें मानवीय भावनाओं का अत्यंत सजीव और सार्वकालिक चित्रण मिलता है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में रामलीला, कथा-वाचन और भक्ति-परंपराओं के माध्यम से इसका सतत प्रवाह यह सिद्ध करता है कि श्रीराम भारतीय संस्कृति के जीवंत प्रतीक हैं। रामनवमी इस परंपरा का उत्कर्ष बिंदु है, जहां इतिहास, आस्था और लोकजीवन एकाकार हो जाते हैं।


‘राम’ का अर्थ है,जिसमें साधक रमण करे

‘राम’ केवल एक व्यक्तिवाचक संज्ञा नहीं, बल्कि एक गहन दार्शनिक अवधारणा है। संस्कृत की ‘रम्’ धातु से निर्मित ‘राम’ का अर्थ है,जिसमें साधक रमण करे। इस दृष्टि से राम कोई बाहरी सत्ता नहीं, बल्कि वह चेतना हैं, जो प्रत्येक मनुष्य के भीतर विद्यमान है। जब व्यक्ति अपने भीतर सत्य, करुणा और न्याय के तत्वों को जागृत करता है, तभी ‘रामत्व’ प्रकट होता है। अतः रामनवमी का वास्तविक अर्थ बाहरी उत्सव से अधिक आंतरिक जागरण है अहंकार, क्रोध और मोह का परित्याग कर मर्यादा और सत्य के मार्ग पर अग्रसर होने का।


अवतार का दिव्य उद्देश्य

धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रीराम भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं, जिनका अवतरण धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए हुआ। यह केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि जीवन का शाश्वत सिद्धांत है कि अन्याय के विरुद्ध सत्य की विजय निश्चित होती है। रामनवमी इस विश्वास को सुदृढ़ करती है कि जब-जब समाज में अनाचार बढ़ता है, तब-तब धर्म के आदर्श पुनः प्रकट होकर मानवता को दिशा देते हैं।


त्याग और कर्तव्य आदर्श जीवन की आधारशिला

श्रीराम के जीवन का सबसे उज्ज्वल पक्ष उनका त्याग और कर्तव्यनिष्ठा है। जहां इतिहास में सत्ता के लिए संघर्ष सामान्य रहा है, वहीं श्रीराम ने पिता के वचन की रक्षा हेतु राज्य, वैभव और सुख-सुविधाओं का त्याग कर वनवास स्वीकार किया। “रघुकुल रीति सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाए” यह केवल एक उक्ति नहीं, बल्कि उनके जीवन का सार है। आज के स्वार्थ प्रधान युग में यह आदर्श हमें सिखाता है कि सच्ची महानता व्यक्तिगत लाभ में नहीं, बल्कि कर्तव्य और समर्पण में निहित होती है।


सामाजिक समरसता का व्यावहारिक स्वरूप

श्रीराम का जीवन सामाजिक समावेशिता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है। उन्होंने अपने आचरण से यह सिद्ध किया कि समाज में किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। केवट को सखा मानना, शबरी के प्रेम को स्वीकार करना और वानर-भालू समाज को साथ लेकर चलना ये सभी प्रसंग सामाजिक समानता के जीवंत प्रतीक हैं। रामनवमी हमें यह संदेश देती है कि सशक्त समाज वही है, जहां सभी वर्गों को समान सम्मान और अवसर प्राप्त हों।


करुणा और संवेदना मानवता का मूल तत्व

श्रीराम केवल वीरता और नीति के प्रतीक नहीं, बल्कि करुणा और संवेदनशीलता के भी आदर्श हैं। निषादराज, शबरी और विभीषण के प्रति उनका व्यवहार यह दर्शाता है कि उनके लिए प्रेम और सहानुभूति ही सर्वोच्च धर्म थे। यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि समाज का वास्तविक विकास शक्ति से नहीं, बल्कि संवेदना और मानवता से संभव है।


रामराज्य यानी आदर्श शासन की संकल्पना

भारतीय चिंतन में ‘रामराज्य’ आदर्श शासन-व्यवस्था का प्रतीक है, जहां न्याय, समानता और लोक कल्याण सर्वोपरि होते हैं। यह केवल एक कल्पना नहीं, बल्कि सुशासन का व्यावहारिक मॉडल है। “दैहिक दैविक भौतिक तापा, राम राज नहिं काहुहि व्यापा” यह पंक्ति उस व्यवस्था को दर्शाती है, जहां भय, शोषण और असमानता का अभाव होता है। आधुनिक लोकतंत्र में भी यह अवधारणा उतनी ही प्रासंगिक है, क्योंकि यह सत्ता को सेवा का माध्यम मानने की प्रेरणा देती है।


धर्म और शौर्य का संतुलन

श्रीराम का जीवन यह भी सिखाता है कि करुणा के साथ-साथ अन्याय के विरुद्ध साहस भी आवश्यक है। रावण का वध केवल एक युद्ध नहीं, बल्कि अहंकार और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। यह संतुलन हमें बताता है कि सच्चा धर्म वही है, जो अन्याय के विरुद्ध दृढ़ता से खड़ा हो सके।


समकालीन संदर्भ में राम का संदेश

आज के युग में जब समाज नैतिक संकट, असमानता और अशांति से जूझ रहा है, तब श्रीराम के आदर्श और अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है नेतृत्व में संयम और दूरदर्शिता, प्रकृति के साथ संतुलित सह-अस्तित्व, विविधताओं में एकता और सामाजिक सद्भाव। रामनवमी हमें यह स्मरण कराती है कि वास्तविक प्रगति केवल भौतिक उन्नति में नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक विकास में निहित है।


रामराज्य’ की भावना को व्यवहारिक जीवन में उतारने का प्रयास

प्रभु श्रीराम का चरित्र सुशासन, लोक कल्याण और न्यायपूर्ण व्यवस्था का जीवंत आदर्श है, जो युगों-युगों तक मानवता का मार्गदर्शन करता रहेगा। रामनवमी का वास्तविक संदेश केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि उन मूल्यों को अपने जीवन में उतारना है, जिनका श्रीराम ने पालन किया। जब प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर सत्य, करुणा और मर्यादा को जागृत करता है, तभी ‘रामत्व’ का उदय होता है। यही वह पथ है, जो समाज को समरसता, राष्ट्र को सुदृढ़ता और मानवता को शांति प्रदान करता है। अतः इस पावन अवसर पर हमारा संकल्प होना चाहिए कि हम सत्य और न्याय के मार्ग पर चलें, समाज में प्रेम और समानता को बढ़ावा दें और ‘रामराज्य’ की भावना को व्यवहारिक जीवन में उतारने का प्रयास करें। यही रामनवमी का सार है।


रामनवमी की पूजा विधि या व्रत कथा के बारे 

विभिन्न व्रतों (जैसे जीवित्पुत्रिका, गुरुवार) की पूजा विधि में सुबह स्नान, चौकी पर स्थापित भगवान को पीले वस्त्र/पुष्प, दीप, नैवेद्य (भोग) अर्पित करना और कथा सुनना मुख्य है। गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा और जितिया/नवरात्रि में कलश स्थापना व विशेष भोग (गुजिया, फल) आवश्यक हैं।


प्रमुख व्रत पूजा विधि और कथा (विस्तार):

जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत (संतान की दीर्घायु):

विधि: भगवान जीमूतवाहन की कुशा (घास) से बनी मूर्ति की पूजा, 7 प्रकार के अनाज, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

कथा: चील और सियारन की कथा प्रचलित है। सियारन ने व्रत के नियम तोड़े, जबकि चील ने व्रत पूर्ण किया। फलतः चील की संतानें दीर्घायु हुईं।


बृहस्पतिवार (गुरुवार) व्रत (सुख-समृद्धि):

विधि: पीले वस्त्र पहनें, विष्णु जी की प्रतिमा स्थापित करें। पीले फूल, चने की दाल, गुड़, मुनक्का और हल्दी अर्पित करें। केले के पेड़ की पूजा और कथा के बाद परिक्रमा करें।

कथा: एक व्यापारी की पुत्री द्वारा व्रत करने और राजा द्वारा उसका आधा राज्य वापस करने की कथा सुनी जाती है।


बुधवार व्रत (सुख-शांति):

विधि: गणेश जी की पूजा, दूर्वा (21 गांठ) और हरी वस्तुओं का प्रयोग करें।

कथा: अनलासुर दैत्य को गणेश जी द्वारा निगलने के बाद कश्यप ऋषि द्वारा दूर्वा से उनके पेट की जलन शांत करने की कथा है।

सामान्य पूजा नियम:

  • व्रत कथा सुनना/पढ़ना अनिवार्य है।
  • अंत में भगवान की आरती करें।


ध्यान दें: व्रत का पूरा फल पाने के लिए कथा श्रवण और पूजा के अंत में क्षमा याचना (अपनी भूलों के लिए) जरूर करें।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सपत्नीक श्री अंगारेश्वर महादेव का पूजन-दर्शन कर अभिषेक किया

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरूवार 26-03-2026 को उज्जैन स्थित अंगारेश्वर महादेव मंदिर में सपत्नीक पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री अंगारेश्वर महादेव का पंचामृत से अभिषेक कर प्रदेश की जनता की सुख-समृद्धि की कामना की।


श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन (Shree Angareshwar Mahadev Mandir Ujjain) के बारे में प्रमुख बातें

भारत के मध्य प्रदेश राज्य के उज्जैन में शिप्रा नदी के तट पर स्थित श्री अंगारेश्वर महादेव (43वें महादेव) मंगल ग्रह के जन्मस्थान के रूप में प्रसिद्ध एक प्राचीन मंदिर है, जहाँ भात पूजा द्वारा मंगल दोष का निवारण किया जाता है। यह मंदिर 84 महादेवों में से एक है और यहां दर्शन-पूजन से संतान, भूमि और संपत्ति सुख की प्राप्ति मानी जाती है। 


श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर की मुख्य विशेषताएं

  • पौराणिक महत्व: मान्यता के अनुसार, अंधकासुर के वध के समय भगवान शिव के पसीने की बूंदें पृथ्वी पर गिरने से मंगल ग्रह का जन्म हुआ, इसलिए यह मंगल ग्रह का उत्पत्ति स्थान माना जाता है।
  • भात पूजा (Bhaat Puja): यहाँ चावल (भात) से भगवान शिव की पूजा की जाती है, जो मंगल दोष, कुंडली में मांगलिक दोष और भूमि संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
  • विशेष दिन: मंगलवार का दिन यहाँ पूजा के लिए विशेष महत्व रखता है, खासकर मंगलवार की चतुर्थी को।
  • स्थान: यह मंदिर उज्जैन, मध्य प्रदेश में शिप्रा नदी के किनारे स्थित है।
  • अन्य मान्यताएँ: इस मंदिर में दर्शन से वास्तु दोष दूर होते हैं और न्यायालयीन कार्यों में विजय प्राप्त होती है। 


क्यों इतने महत्वपूर्ण है ये देव, क्यों इनके दर्शन इतने फलदायी हैं?

पुराणों में मंगल ग्रह का जन्म स्थान उज्जैन में माना गया है। इसलिए मंगल ग्रह की शांति के लिए यथा संभव अंगारेश्वर महादेव में विशेष पूजा फलदायी मानी गई है। धार्मिक मान्यता है कि इस पूजा से मंगल ग्रह दोष की शांति होती है और विवाह योग्य युवक-युवतियों के विवाह में मांगलिक दोषों के कारण आ रही समस्याएं हल हो जाती है।


श्री अंगारेश्वर महादेव (उज्जैन) ही भूमि पुत्र मंगल हैं अवंतिका कि प्राचीन 84 महादेवों में स्थित 43वे महादेव श्री अंगारेश्वर महादेव जो कि सिद्ध्वट (वट्व्रक्ष) के सामने शिप्रा के उस पर स्थित हैं, जिन्हें मंगल देव (गृह) भी कहा जाता हैं। माना जाता है कि जो व्यक्ति प्रतिदिन इस महालिंग श्री अंगारेश्वर का दर्शन करेगा उनका फिर जन्म नही होगा। जो इस लिंग का पूजन मंगलवार को करेगा वह इस युग में कृतार्थ हो जाएगा, इसमे कोइ संशय नही हैं। जो मंगलवार कि चतुर्थी के दिन अंगारेश्वर का दर्शन-व्रत-पूजन करेंगे वह संतान, धन, भूमि, सम्पत्ति, यश को प्राप्त करेगा। मनाान जाता है कि इनके दर्शन-पूजन से वास्तुदोष, भुमिदोष का भी निवारण होता हैं। न्यायालय में विजय प्राप्त होती हैं। इस लिंग पर भात पूजन करने से मंगल दोष, भूमि दोष का भी निवारण होता पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नवग्रहों में विशेष स्थान रखने वाले मंगल ग्रह का जन्म स्थान उज्जैन यानि प्राचीन नगरी अवन्तिका को माना गया है। देश के सभी स्थानों से मंगल पीड़ा निवारण और अनुग्रह प्राप्त करने के लिए लोग यहां आते हैं। जनमान्यताओं के अनुसार मंगल की जन्म स्थली पर भात पूजा कराने से मंगलजन्य कष्ट से व्यक्ति को शांति मिलती है। मंगल को नवग्रहों में सेनापति के पद से शुशोभित किया गया है। जन्म कुंडली में मंगल की प्रधानता जहां मंगल दोष उत्पन्न करती है, वहीं व्यक्ति को सेना, पुलिस या पराक्रमी पदो पर शुशोभित कर यश और कीर्ति भी दिलाती है। 


भगवान शिव के पसीने की बूंदों से उत्पन्न हुए मंगल ग्रह

ब्रह्मवर्त पुराण के अनुसार मंगल पृथ्वी से अलग हुआ एक ग्रह है। इसीलिए इसे भूमि पुत्र माना गया है। इसे विष्णु पुत्र भी कहते हैं। स्कंध पुराण के अनुसार अवन्तिका में दैत्य अंधकासुर ने भगवान शिव की तपस्या कर यह वरदान प्राप्त किया था कि उसके शरीर से जितनी भी रक्त की बूंदे गिरेंगी वहां उतने ही राक्षस पैदा हो जाएंगे। वरदान के अनुसार तपस्या के बल पर अंधकासुर ने अपार शक्ति प्राप्त कर ली और पृथ्वी पर वह अनियंत्रित उत्पाद मचाने लगा। उसके उत्पादों से बचने के लिए व इंद्रादि देवताओं की रक्षा के लिए स्वयं भगवान शिव को उससे लडऩा पड़ा था। लड़ते-लड़ते जब शिव थक गए तो उनके ललाट से पसीने की बूंदें गिरी। इससे एक भारी विस्फोट हुआ और एक बालक अंगारक की उत्पत्ति हुई। इसी बालक ने दैत्य के रक्त को भस्म कर दिया और अंधकासुर का अंत हुआ।


एक अन्य कथा के अनुसार देवाधिदेव भगवान शंकर से एक समय पार्वती जी का वार्तालाप हो रहा था। इसी चर्चा के दौरान पार्वती जी ने भगवान शंकर से पूछा की उन्हें मंगलकारी अंगारक के जन्म के बारे में जानने की बहुत इच्छा हैं। तब देवाधिदेव भगवान शंकर ने पार्वती जी से कहा की हे पर्वत की कन्या उज्जैन में तिरालीसवां ज्योतिर्लिंग अंगारेश्वर का हैं जिनके दर्शन मात्र से सर्व सम्पदा प्राप्त होती हैं।


पूर्व समय में लाल शरीर की शोभवाला और टेड़े शरीर वाला क्रोध से युक्त यह बालक मेरे द्वारा ही उत्पन्न हुआ में ने उसे पृथ्वी पर रख दिया इसलिए उसका नाम भूमि पुत्र हुआ। पैदा होते ही स्थूल शरीर वाला वह बालक भय देने लगा। उसके कोप से पृथ्वी कम्पित होने लगी। मनुष्य और देवतादि सब दुखी हो गए। समुद्रों में तूफान आने लगी। पर्वत हिलने लगे। उसी के प्रभाव स्वरूप देवता मनुष्य आदि परेशान होने लगे।


अंत में परेशान होकर सभी ऋषि देवता इंद्रा सभी देवगुरु वृहस्पति के पास गए और उनसे चर्चा कर उन्हें अपने साथ लेकर ब्रह्मलोक गए। और पितामह ब्रह्मा जी को सारा वृतांत सुनाया की किस प्रकार भगवान शंकर के शरीर से बालक का जन्म हुआ और उत्पन्न होने के कुछ ही समय में उसने तीनो लोकों का भ्रमण कर डाला। अनेकों का भक्षण कर लिया और सभी को परेशान कर दिया।


सभी की बातें सुनकर प्रजापिता ब्रह्मा जी ने मुझसे कैलाश पर्वत पर आकर मिलाने का निर्णय किया। मेरे पास आकर सभी ने भय पूरक मेरे शरीर से उत्पन्न उस बालक के क्रिया कलापों का वर्णन किया की किस प्रकार उस बालक ने सभी को डरा दिया और अनेकों का भक्षण कर लिया।


यह सुनकर मेने उस बालक को बुलाया और उससे पूछा की ऐसा क्यों कर रहे हो। तब उस बालक ने कहा की प्रभु में कौन सा काम करूं। मेने उसे समझाया की जगत को त्रास मत दो। ऐसा कहकर मेने उसे बार-बार समझाया। मेने उसे कहा की मेरे शरीर की राजस प्रकृति से तुम्हारा जन्म हुआ हैं। इसीलिए तुम्हारा नाम अंगारक हुआ हैं तुम लोगो का मंगल करो,उन्हें प्रसन्न और आनंदित रखो यही तुम्हारा कर्म हैं। इस समय तुमसे भूलवश वक्री कार्य हुए हैं इसलिए विद्वान लोग तुम्हें वक्र नाम से पुकारेंगे।


इस प्रकार मेरे समझाने पर उस बालक ने पूछा की बिना आहार के मेरी तृप्ति कैसे होगी। उसने कहा की हे देवाधिदेव आप मुझे अच्छा स्थान दो,स्वामित्व दो,शक्ति दो और आहार भी जल्दी से दे दो। उस पुत्र के ऐसे वचन सुनकर मेने सोचा की यह बालक हैं और प्रिय भी हैं ऐसा विचार कर उत्तम स्थान अक्षय देना चाहिए यह सोचकर मेने उसे अपनी गोद में बिठा लिया और प्रेम से कहा की हे पुत्र मेने तुझे महाकाल वन (उज्जैन नगरी) में गंगेश्वर से पूर्व में स्थान दिया हैं। उस स्थान पर शिप्र और खगर्ता का शुभ संगम हुआ हैं। जब मेने गंगा को मस्तक पर धारण किया था उस समय वह गुस्से से चन्द्र मंडल से नीचे गिरी थी तब वह महाकाल वन क्षेत्र में गिरी थी उस समय गंगा आकाश से नीचे आई थी इसीलिए उसका नाम खगर्ता हुआ और इसीलिए मेने वहां पर अवतार लिया में यहां पर लिंग (महादेव) के रूप में निवास करता हूं। और सभी देवतादिक मेरी पूजा करते हैं। यह स्थान देवतों को भी दुर्लभ हैं अत: हैं प्रिय पुत्र तुम शीघ्र वहां के लिए प्रस्थान करो और उस संगम पर मेरी पूजा करो वह संगम का स्थल तुम्हारे नाम से जग में प्रसिद्द होगा और ग्रहों के बीच में तेरा आधिपत्य होगा। तुझे मैं ने तीसरा स्थान दिया हैं। वहां तुम्हें तृप्ति प्राप्त होगी। ग्रहों के बीच तुम्हारी पूजा होगी और तिथियों में मैं ने तुम्हें चतुर्थी तिथि प्रदान की हैं, इस चतुर्थी को जो भी तुम्हारी प्रसन्नता के लिए व्रत, शांति दक्षिणा सहित पूजन करेंगे उससे तुम्हें तृप्ति होगी, भोजन मिलेगा और मैं ने तुम्हें वार मंगलवार दिया हैं जिससे सभी को मंगल की प्राप्ति होगी। जो भी मनुष्य मंगलवार को विद्यारम्भ करेगा, नए वस्त्राभूषण धारण करेगा या फिर शरीर पर तेल लगाएगा उसे इस सभी कर्मो का फल नहीं मिलेगा।


मेरी कही बातें सुनकर उस वक्रांग मंगल पुत्र ने स्वीकार कर ली और उसका नाम अंगारकेश्वर हो गया और इस प्रकार मेरे वचन अनुसार वह अवंतिकापुरी (वर्तमान उज्जैन,मध्यप्रदेश) में अवस्थित हो गया। उस वक्रांग मंगल पुत्र ने जब शिप्रा जी के पावन तट पर रमणीय खगर्ता नदी के संगम पर मुझे लिंग रूप में देखा तो तो वह परम शांति को प्राप्त हो गया और मेने उसे देखकर आलिंगन किया, उसे आशीर्वाद दिया की हैं पुत्र तेरे सभी वांछित कार्य पूर्ण होंगे। हैं मंगल में तुझ से प्रसन्न हुं। आज से तेरा नाम अंगारकेश्वर तीनो लोकों में प्रसिद्द होगा इसमें कोई संशय नहीं हैं जो कोई भी मेरे दर्शन प्रतिदिन इस संमेश्वर के पास करेगा उसका इस पृथ्वी पर पुन: जन्म नहीं होगा जो मेरा पूजन मंगलवार के दिन इस अंगारकेश्वर पर करेंगे वह इस कलियुग में कृतार्थ हो जायेगा इसमें कोई संशय नहीं हैं जो लोग मंगलवार की चतुर्थी को मेरा व्रत, पूजन और दर्शन करेंगे वह इस घोर दुखों युक्त संसार में पुन: जन्म नहीं लेंगे।


तुम मनुष्य मात्र की कुंडलियों में योग कारक रहोगे। योग की अनुकूलता के लिए जो व्यक्ति यहां आकर तुम्हारी पूजा करेगा, उसका मंगल होगा। तभी से लोग मंगल की पूजा के लिए उज्जैन में आते हैं और अपनी श्रद्धा अनुसार अंगारेश्वर महादेव मंदिर में पूजा करके मंगल की अनुकूलता प्राप्त करते हैं।


जब मंगलवार को अमावस्या हो तब खगर्ता संगम पर देवता पूजित हैं उस दिन यहां दर्शन और पूजा-स्नान से वाराणसी,प्रयाग, गयाजी और करुक्षेत्र में एवं पुष्कर में स्नान-पूजन का जो पुण्य मिलता हैं उससे भी अधिक पुण्य फल यहां पूजन और दर्शन से प्राप्त होगा।

Tuesday, March 17, 2026

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की तिथियां घोषित, जानें ऑनलाइन पंजीयन की पूरी प्रक्रिया

गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए आयोजित किए जाने वाले मुख्यमंत्री कन्या विवाह/ निकाह योजना के लिए तिथियों का निर्धारण किया गया है। इनमें अक्षय तृतीया 19 अप्रैल 2026, देवउठनी ग्यारस (तुलसी विवाह) 20 नवंबर 2026, बसंत पंचमी 11 फरवरी 2027 तथा एक अन्य तिथि स्थानीय मांग और कलेक्टर के निर्णय अनुसार निर्धारित की जा सकती है। वर्ष 2026-27 में पक्ष 44 हजार से अधिक विवाह करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पर राज्य सरकार 242 करोड़ से अधिक राशि व्यय करेगी।


प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाय योजना के प्रभावी व्यवस्थि और गरिमापूर्ण ढंग से आयोजन के लिए विभाग द्वारा सामूहिक विवाह समारोह में भाग लेने वाले जोड़ों की न्यूनतम संख्या 11 और अधिकतम संख्या 200 निर्धारित की गई है। प्रदेश के 55 जिलों में इन अवसरों पर 800 जोड़े यानिकी 44 हजार जोड़ों का विवाह संभव हो सकेगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 51 हजार 899 मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना तथा 28 हजार 362 मुख्यमंत्री निकाह कराए गए हैं। इन हितग्राहियों से 321 करोड़ 41 लाख 58 हजार की सहायता प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना में भाग लेने के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीयन कराया जा सकता है।


मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना के लिए आधिकारिक पोर्टल vivahportal.mp.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। इसमें आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए ₹49,000 की वित्तीय सहायता व अन्य सामग्री प्रदान की जाती है। आवेदन विवाह की तारीख से 15 दिन पहले किया जाना चाहिए।


मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना के लिए ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया:

  • आधिकारिक वेबसाइट: सबसे पहले विवाह पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट https://vivahportal.mp.gov.in/ पर जाएं।
  • लॉगिन/पंजीयन: पोर्टल पर दी गई प्रक्रिया के अनुसार वर-वधू की जानकारी दर्ज करें।
  • दस्तावेज़ अपलोड: आवश्यक दस्तावेज़ जैसे आधार कार्ड, समग्र आईडी, बैंक पासबुक, आय प्रमाण पत्र, और निवास प्रमाण पत्र अपलोड करें।
  • आवेदन जमा करें: फॉर्म भरने के बाद उसे सबमिट करें और प्रिंट आउट ले लें।
  • सत्यापन: भरे हुए फॉर्म का प्रिंट आउट और सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ स्थानीय निकाय (नगर निगम/नगर पालिका/पंचायत) में संपर्क कर सत्यापन करवाएं।


पात्रता और महत्वपूर्ण विवरण:

  • मूल निवासी: कन्या मध्यप्रदेश की मूल निवासी होनी चाहिए।
  • आयु सीमा: कन्या की आयु 18 वर्ष और वर की आयु 21 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।
  • लाभार्थी: जरूरतमंद, निराश्रित, निर्धन या मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान के तहत पात्र परिवार।
  • सहायता राशि: सामूहिक विवाह कार्यक्रम के माध्यम से 49,000 रुपये का चेक और 6,000 रुपये आयोजन व्यय के लिए दिए जाते हैं।


ध्यान दें: यह लाभ केवल सामूहिक विवाह समारोहों में ही उपलब्ध होता है। अधिक जानकारी के लिए, आप सामाजिक न्याय एवं निःशक्तजन कल्याण विभाग, मध्य प्रदेश के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

Monday, March 16, 2026

राहुल गांधी के आरोपों पर दिल्ली विश्वविद्यालय का पलटवार

Delhi: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के इंटरव्यू में जाति के आधार पर छात्रों को फेल करने का गंभीर आरोप लगाया है। लखनऊ में एक 'संविधान सम्मेलन' में उन्होंने कहा, 'मैं दिल्ली विश्वविद्यालय गया। इंटरव्यू छात्रों को बाहर करने का तरीका है। वे पूछते हैं कि आपकी जाति क्या है, और फिर आप इंटरव्यू में फेल हो जाते हैं।' राहुल का आरोप है कि इंटरव्यू प्रक्रिया का इस्तेमाल दलितों और पिछड़े वर्ग के छात्रों को बाहर करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी निशाना साधते हुए कहा, उनके संगठनों की सूची निकाल लें, वहां आपको एक भी ओबीसी, दलित या आदिवासी नहीं मिलेगा। जाति जनगणना को राष्ट्रीय आवश्यकता बताते हुए राहुल ने कहा कि यह देश की सच्चाई को स्वीकार न करने जैसा है।


राहुल गांधी के आरोपों पर दिल्ली विश्वविद्यालय ने कड़ी आपत्ति जताई है और उन्हें 'तथ्यों की पुष्टि करने' को कहा है। विश्वविद्यालय ने कहा, अधिकांश यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों में दाखिले पारदर्शी तरीके से सीयूईटी के अंकों के आधार पर होते हैं, न कि इंटरव्यू के आधार पर। विश्वविद्यालय ने इंटरव्यू के जरिए जातिगत भेदभाव के दावों को 'भ्रामक' और 'तथ्यों से रहित' बताया है।

Saturday, March 14, 2026

PM Modi Bengal Rally: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित विशाल जनसभा को किया संबोधित

Bengal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल की मौजूदा तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला और राज्य में बदलाव का आह्वान किया।


जनसभा में भारी उत्साह और जोश

रैली में उपस्थित भारी भीड़ को देखकर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लोगों का उत्साह और जोश साफ बता रहा है कि बंगाल के लोग किस तरह के बदलाव की मांग कर रहे हैं। ब्रिगेड परेड ग्राउंड का इतिहास गवाह है कि जब भी बंगाल ने देश को दिशा दी है, तब यह मैदान बंगाल की आवाज बनकर सामने आया। उन्होंने कहा, “इस मैदान से अंग्रेजों के खिलाफ उठी आवाज पूरे हिंदुस्तान में क्रांति बन गई थी। आज एक बार फिर इसी मैदान से नए बंगाल की क्रांति का बिगुल बज गया है।”


टीएमसी पर निशाना और बदलाव का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने बंगाल की मौजूदा सरकार पर आरोप लगाया कि रैली को रोकने के लिए हरसंभव कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि टीएमसी ने रैली में आने वाले लोगों को चोर कहकर अपमानित किया, लेकिन जनता जानती है कि असली चोर कौन हैं। मोदी ने बताया कि पुल बंद करवा दिए गए, गाड़ियां रोकी गईं, ट्रैफिक जाम कराया गया और भाजपा के झंडे-पोस्टर हटवाए गए, फिर भी जनता ने विशाल जनसैलाब के रूप में रैली में भाग लिया।


महाजंगलराज का काउंटडाउन और कानून का राज

प्रधानमंत्री ने कहा कि बंगाल में ‘महाजंगलराज’ लाने वालों का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। राज्य में कानून का राज लौटने वाला है और जो भी कानून तोड़ेगा या अत्याचार करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा, “चुन-चुनकर सभी जुल्मों का हिसाब लिया जाएगा। राज्य सरकार चाहे कितनी भी कोशिश कर ले, बदलाव की आंधी को कोई नहीं रोक सकता। मां दुर्गा का आशीर्वाद भाजपा और एनडीए के साथ है और यही शक्ति बंगाल में परिवर्तन लाएगी।” 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बरही के कृषि महोत्सव में विकास कार्यों की दी सौगात

Katni: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार धरती पुत्र किसान की खुशहाली और विकास के लिए कृत संकल्पित है। राज्य सरकार किसानों और लाड़ली बहनों सहित हर वर्ग के कल्याण के लिए कार्य कर रही है। सरकार ने गांव-गांव तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने का संकल्प लिया है। किसानों को सिंचाई के लिए अब दिन में भी बिजली मिलेगी। किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार हर कदम पर किसानों के साथ खड़ी है। जरूरतमंदों के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले, इसके लिए प्रदेश में भव्य सांदीपनि विद्यालयों की स्थापना की जा रही है। उन्होंने कहा कि कटनी में शीघ्र ही मेडिकल कॉलेज खोला जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को कटनी जिले के बरही में आयोजित किसान सम्मेलन कृषि महोत्सव को संबोधित कर रहे थे।


मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषक कल्याण वर्ष 2026 में कटनी को 1000 करोड़ की सौगात दी एवं जिले के लिए 243 करोड़ रूपये की लागत के 97 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। इसमें नवर्निमित पुल, महाविद्यालय और सांदीपनि विद्यालय भी शामिल हैं। किसानों की समृद्धि पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। विजयराघवगढ़ के नागरिकों ने भव्य रोड-शो में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी अभिवादन कर स्वागत के लिये जनता का आभार माना।


मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत बड़े तालाब के सौंदर्यीकरण की सौगात दी एवं उन्होंने विभिन्न योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री विजयनाथ धाम की नगरी बरही में आयोजित किसान सम्मेलन में किसान कल्याण को समर्पित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। किसान सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रतीक स्वरूप हल और स्मृति-चिन्ह के तौर पर लड्डू गोपाल की मूर्ति भेंट किया गया।


मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 9 लाख करोड़ की नई रोजगार आधारित औद्योगिक इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। मध्यप्रदेश, देश में सबसे तेज गति से विकास करने वाला राज्य बना है। प्रदेश में बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से भी कम है। राज्य सरकार सभी वर्गों के कल्याण और रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिले में जलाशयों और नहरों के जीर्णोद्धार के साथ ही सड़क निर्माण एवं पुलिया के उन्नयन के कार्य भी किये जायेंगे। बरही में वॉलीबॉल का इंडोर स्टेडियम बनायेंगे। साथ ही महानदी और उमड़ार नदी के संगम पर सिंचाई परियोजना की सौगात दी जायेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में युवाओं के लिये खेल स्टेडियम का निर्माण भी किया जा रहा है।


मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली बहनों के लिए सरकारी खजाने में कोई कमी नहीं है। प्रदेश सरकार को बहनों का आशीर्वाद मिल रहा है। प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 27 हजार लाड़ली बहनों को साढ़े 1800 करोड़ से अधिक की राशि प्रदान की है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के 3 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं और सभी पात्र हितग्राहियों को हर माह 1500 रुपए की सौगात मिल रही है। ग्रामीणों के सिर पर पक्के मकान की छत मिले, इसके लिए बहुत जल्द सर्वे शुरू किया जाएगा। सड़क हादसों में घायलों की मदद के लिए सरकार ने 'राहवीर योजना' की शुरुआत की है। घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले को सरकार 25 हजार की प्रोत्साहन राशि दी है। पीएम राहत योजना के तहत अस्पताल में घायल के लिए डेढ़ लाख रुपए तक के नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था है। नागरिकों की जान बचाने के लिए एयर एम्बुलेंस का नवाचार प्रारंभ किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की समृद्धि के लिए राज्य सरकार सिंचाई के लिए पर्याप्त जल, बिजली और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। प्रदेश में वर्ष 2004 से अब तक गेहूं के मूल्य में 2000 रुपए प्रति क्विंटल से अधिक की वृद्धि हुई है। किसानों को बोनस का लाभ देकर इस वर्ष 2625 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदा जा रहा है। प्रदेश में पिछले 2 वर्ष में सिंचाई का रकबा बढ़कर 55 लाख हैक्टेयर हो गया है, जिसे आगामी वर्षों में 100 लाख हैक्टेयर करने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों को सालभर में 12 हजार रुपए की सम्मान निधि का लाभ दिया जा रहा है।


मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दूध-दही हजारों साल से भारत की पहचान है। राज्य सरकार ने प्रदेश में दूध का उत्पादन 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। बच्चों को स्वस्थ बनाने के लिए माता यशोदा योजना में स्कूलों में बच्चों को नि:शुल्क दूध के पैकेट वितरित किये जाएंगे। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अब ड्रॉप आउट 6 प्रतिशत से शून्य पर आ गया है। मध्यप्रदेश इस मामले में राष्ट्रीय औसत से आगे निकल चुका है। राज्य सरकार स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा सहित सभी क्षेत्रों में युवाओं को मौके दिए जा रहे हैं। प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत होने वाली है।


मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देश के हितों को सर्वोपरि रखा है। अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के बीच हमारे जहाज तिरंगा लगाकर शान से स्वदेश लौट रहे हैं। वर्तमान परिस्थितियों में खाड़ी के देशों में जारी संकट के बीच नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान शर्मनाक हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने हर बार की तरह अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करते हुए युद्ध में फंसे विद्यार्थियों और नागरिकों को सुरक्षित निकाला है।


सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 1000 करोड़ की सौगातें दी हैं। बाणसागर डैम से 161 करोड़ की सिंचाई योजना से किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। क्षेत्र में नए पुल निर्माण के लिए 95 करोड़ की राशि दी गई है। कटनी क्षेत्र में कृषि को नए आयाम देने के लिए एग्रीकल्चर विलेज की स्थापना की जा सकती है। विधायक श्री संजय पाठक ने कहा कि कृषि कल्याण वर्ष में कटनी को अनेक सौगातें मिली हैं।


स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री और जिले के प्रभारी श्री उदय प्रताप सिंह, विधायक श्री संदीप जायसवाल, विधायक श्री धीरेंद्र बहादुर सिंह, विधायक श्री प्रणय प्रभात पांडे, विधायक मैहर श्री श्रीकांत चतुर्वेदी सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, बड़ी संख्या में किसान बंधु और स्थानीय लोग उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री ने बड़े तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कटनी जिले के बरही भ्रमण के दौरान बड़ा तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य का शुभारंभ किया। जल गंगा संवर्धन अभियान में बड़ा तालाब बरही का 50 लाख रुपये की लागत से कायाकल्प किया जा रहा है। इसमें तालाब के चारों ओर घाट निर्माण, फव्वारे का निर्माण के साथ ही अन्य सौंदर्यीकरण कार्य शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बरही के श्री विजयनाथ धाम मंदिर में भगवान शंकर का दर्शन-पूजन कर समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि व आरोग्यमय जीवन की प्रार्थना की।


मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार रैली में हुआ आत्मीय स्वागत

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को कटनी जिले के बरही में आभार रैली में शामिल हुए। आभार रैली मुख्य बाजार मार्ग से होते हुए कार्यक्रम स्थल पर पहुंची। रैली के मार्ग पर बरहीवासियों ने पुष्प वर्षा कर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आत्मीय स्वागत किया।


मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी जनता का अभिवादन किया। किसानों, व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों सामाजिक संगठनों और प्रबुद्धजनों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पुष्प वर्षा कर स्वागत और अभिनन्दन किया। आभार रैली में विभिन्न स्थानों पर स्टॉल लगाकर नागरिकों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत किया। इनमें मेडिकल व्यापारी संघ, किराना व्यापारी संघ, सराफा व्यापारी संघ, कपड़ा व्यापारी संघ, वॉलीबॉल स्पोर्ट क्लब, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार, हार्डवेयर संघ, कसोधन गुप्ता समाज, अधिवक्ता संघ, सेल यूनियन परिवार, पार्षद एवं बड़ी संख्या में नागरिक शामिल रहे।


बरही सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई परियोजना के लिये माना आभार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र के 27 ग्रामों के करीब 11 हजार किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने की महत्वाकांक्षी बरही सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई परियोजना के लिये किसानों ने आभार रैली में शामिल होकर स्वागत किया गया। राज्य मंत्रि-परिषद से मिली परियोजना की स्वीकृति पर कृतज्ञता और आभार व्यक्त किया गया। बरही सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई परियोजना की लागत 566.92 करोड़ रूपए है। इसके पूर्ण होने के बाद बरही एवं विजयराघवगढ़ तहसील के 27 गांवों की करीब 20 हजार हैक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इससे लगभग 11 हजार किसानों के खेतों तक फसलों की सिंचाई के लिए पानी पहुंचेगा।

मंत्री श्री विश्वास सारंग ने किया फिट इंडिया कार्निवाल का शुभारंभ

Bhopal: सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने शनिवार को टीटी नगर स्टेडियम, भोपाल में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के भोपाल शाखा द्वारा आयोजित दो दिवसीय फिट इंडिया कार्निवाल का शुभारंभ किया। शुभारंभ में पारंपरिक खेल मलखंभ और सांस्कृतिक नृत्यों की भव्य प्रस्तुति दी गई। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन ही किसी व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं। जब नागरिक स्वस्थ और सक्रिय रहते हैं, तब देश विकास और प्रगति के नए शिखरों को स्पर्श करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रारंभ किया गया फिट इंडिया मूवमेंट आज पूरे देश में जन आंदोलन का रूप ले चुका है। एक घंटा, खेल के मैदान में ऐसे अभियानों के माध्यम से समाज के हर आयु वर्ग के लोग फिटनेस को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि यह कार्निवाल भी उसी संकल्प का सशक्त उदाहरण है जहाँ विभिन्न खेल एवं फिटनेस गतिविधियों के माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।


खेल विभाग के सतत प्रयास- मंत्री श्री सारंग ने बताया कि प्रदेश में खेल और फिटनेस संस्कृति को मजबूत करने के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें खेलो एमपी यूथ गेम्स, हर विधानसभा में खेल परिसर, पार्थ योजना, फिट इंडिया क्लब, मध्यप्रदेश युवा प्रेरक अभियान और युवा उत्सव जैसी योजनाएँ शामिल हैं, जिनके माध्यम से युवाओं को खेलों से जोड़ते हुए स्वस्थ और अनुशासित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।


खुद फिट रहें और परिवार को भी करें प्रेरित- मंत्री श्री सारंग ने सभी नागरिकों से आह्वान किया है कि फिटनेस को केवल व्यक्तिगत आदत न बनाकर पारिवारिक संस्कृति बनाएं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को नियमित व्यायाम, योग और खेल गतिविधियों से जोड़ें जिससे समाज में स्वस्थ और सकारात्मक वातावरण का निर्माण हो सके।


युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति- मंत्री श्री सारंग ने कहा कि जब देश का युवा स्वस्थ, अनुशासित और ऊर्जावान होता है, तब राष्ट्र प्रगति के नए कीर्तिमान स्थापित करता है। फिट और जागरूक युवा ही विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत बनेंगे।

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