Tuesday, March 10, 2026

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना के लिए ‘डिफेंस फोर्सेज विजन’ रोडमैप किया जारी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को साउथ ब्लॉक में भारतीय सेना के लिए ‘डिफेंस फोर्सेज विजन’ रोडमैप जारी किया। यह बड़ा ब्लूप्रिंट हेडक्वार्टर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ ने रक्षा बलों को आधुनिक, इंटीग्रेटेड और तकनीक से लैस सेना में बदलने के लिए तैयार किया है, जो 2047 तक भारत के विकसित देश बनने के सपने को पूरा करने में मदद कर सके। यह डॉक्यूमेंट भविष्य की युद्ध चुनौतियों के लिए ढलने वाली सेना बनाने के लिए इनोवेशन, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और मॉडर्न ट्रेनिंग फ्रेमवर्क के महत्व पर भी जोर देता है।


इस विजन डॉक्यूमेंट में सशस्त्र बलों में जरूरी सामरिक सुधारों के बारे में बताया गया है


इस विजन डॉक्यूमेंट में सशस्त्र बलों में जरूरी सामरिक सुधारों, क्षमता बढ़ाने और संगठनात्मक बदलावों के बारे में बताया गया है, ताकि बदलते भू-रणनीतिक, तकनीकी और सुरक्षा माहौल से अच्छे से निपटा जा सके। इसमें सेना को एक इंटीग्रेटेड, मल्टी-डोमेन और फुर्तीली फोर्स में बदलने की सोची गई है, जो दुश्मनों को रोकने, हर तरह के झगड़े में जवाब देने और तेजी से बदलते ग्लोबल और रीजनल हालात के बीच बढ़ते स्ट्रेटेजिक हितों की रक्षा करने में काबिल हो। इस विजन का एक मुख्य हिस्सा सेनाओं के बीच तालमेल और तालमेल पर जोर देना है, जिससे प्लानिंग, ऑपरेशन और क्षमता विकास में ज़्यादा तालमेल को बढ़ावा मिलेगा।

 

इस विजन में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित किया गया है


रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस विजन में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर ध्यान केन्द्रित किया गया है, जो देश की खास सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से स्वदेशी तकनीक और समाधान अपनाने को बढ़ावा देता है। घरेलू रक्षा विनिर्माण और प्रौद्योगिकी क्षमताओं को मजबूत करने से ऑपरेशनल तैयारी बढ़ने और देश की ग्रोथ में योगदान देने की उम्मीद है। विजन डॉक्यूमेंट में शॉर्ट-टर्म, मिड-टर्म और लॉन्ग-टर्म टाइमलाइन में साफ तौर पर प्राथमिकता वाले क्षमता लक्ष्यों के साथ एक कैलिब्रेटेड रोडमैप अपनाया गया है। यह विश्व स्तरीय डिफेंस फोर्स बनाने के लिए जरूरी सैन्य क्षमताओं, संस्थागत सुधारों और रणनीतिक साझेदारी के विकास में सहयोग करेगा।


यह विजन डॉक्यूमेंट पूरे देश के नजरिए की जरूरत पर देता है जोर 


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों की जटिलता को पहचानते हुए यह विजन डॉक्यूमेंट पूरे देश के नजरिए की जरूरत पर जोर देता है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा पक्की करने के लिए सैन्य ताकत को कूटनीतिक, तकनीकी और आर्थिक ताकत के साथ जोड़ा जाएगा। लगातार सुधारों, इनोवेशन और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के जरिए इसका मकसद यह पक्का करना है कि भारत की आजादी की सौवीं सालगिरह तक देश की सेना दुनिया भर में सम्मानित, टेक्नोलॉजिकली एडवांस्ड और लड़ाई के लिए तैयार मिलिट्री के तौर पर खड़ी हो, जो मजबूत विकसित भारत में योगदान दे।


इस मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, सेना उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

संक्रमण और थकान हो सकते हैं Aplastic Anemia के संकेत

एप्लास्टिक एनीमिया एक दुर्लभ और गंभीर ब्लड डिसऑर्डर है, जिसमें बोन मैरो पर्याप्त मात्रा में रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स का निर्माण नहीं कर पाता। भारत में हर साल कई लोगों की मृत्यु एप्लास्टिक एनीमिया के कारण होती है। कई मरीजों में इसका सही कारण पता नहीं चल पाता, लेकिन यह स्थिति ऑटोइम्यून डिसऑर्डर्स, वायरल इंफेक्शन्स और कुछ टॉक्सिक सब्सटेंसेस, केमिकल्स और रेडिएशन के कॉन्टैक्ट से जुड़ी हो सकती है।


कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक हीमेटो-ऑन्कोलॉजी एवं बीएमटी, के अनुसार बोन मैरो शरीर का ब्लड सेल बनाने वाला मुख्य केंद्र होता है। जब यह केंद्र धीमा पड़ जाता है या काम करना बंद कर देता है, तो इसके परिणाम जानलेवा हो सकते हैं। मरीज बार-बार इंफेक्शन, अत्यधिक थकान और अनकंट्रोल्ड ब्लीडिंग के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं। हालांकि एप्लास्टिक एनीमिया एक गंभीर डिसऑर्डर है, लेकिन इसके प्रभावी इलाज उपलब्ध हैं। कई योग्य मरीजों के लिए ब्लड स्टेम सेल ट्रांसप्लांट एक संभावित इलाज और जीवन का दूसरा अवसर दे सकता है।


भारतीय आंकड़े बताते हैं कि बोन मैरो फेल्योर सिंड्रोम में एप्लास्टिक एनीमिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कई मरीज डॉक्टर के पास तब पहुंचते हैं जब लैबोरेटरी रिपोर्ट में पैनसाइटोपेनिया पाया जाता है, यानी शरीर में रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स की कमी। इंडियन जर्नल ऑफ हेमेटोलॉजी एंड ब्लड ट्रांसफ्यूजन में प्रकाशित शोध में बताया गया है कि भारत में बोन मैरो फेल्योर के मामलों का बड़ा हिस्सा एप्लास्टिक एनीमिया के कारण होता है।


रिकॉर्ड के अनुसार, भारत में मरीज पश्चिमी देशों की तुलना में कम उम्र में ही बीमारी के लक्षण दिखाने लगते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जागरूकता और समय पर पहचान कितनी आवश्यक है।


एप्लास्टिक एनीमिया में क्या होता है?


एक सामान्य शरीर में बोन मैरो लगातार रेड ब्लड सेल्स बनाता है, जो शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाते हैं; व्हाइट ब्लड सेल्स, जो इंफेक्शन्स से लड़ते हैं; और प्लेटलेट्स, जो ब्लीडिंग रोकते हैं। एप्लास्टिक एनीमिया में यह निर्माण प्रक्रिया रुक जाती है। अधिकतर मामलों में इम्यून सिस्टम ब्लड बनाने वाली स्टेम सेल्स पर हमला कर उन्हें नष्ट कर देता है, जो रक्त के सभी कंपोनेंट्स के निर्माण के लिए जिम्मेदार होती हैं।


जैसे-जैसे ब्लड सेल्स की संख्या घटती है, लक्षण दिखाई देने लगते हैं। हीमोग्लोबिन कम होने से लगातार थकान, कमजोरी, हल्का काम करने पर भी सांस फूलना और पीलापन दिखाई देता है। व्हाइट ब्लड सेल्स की कमी से मरीज बार-बार या गंभीर इंफेक्शन के शिकार हो जाते हैं। प्लेटलेट्स कम होने से आसानी से चोट लगना, मसूड़ों या नाक से ब्लीडिंग होना, छोटे कट पर भी देर तक ब्लीडिंग रहना और त्वचा पर नीले निशान पड़ना जैसे लक्षण दिखते हैं।


डॉक्टर हीमोग्लोबिन, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स की कमी की इस स्थिति को पैनसाइटोपेनिया कहते हैं। समय पर कम्प्लीट ब्लड काउंट और आवश्यकता होने पर बोन मैरो जांच कर सही डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट शुरू करना बहुत जरूरी है।


क्या इसका उपचार संभव है?


हाँ। इलाज का चुनाव बीमारी की गंभीरता, मरीज की उम्र और उसकी हेल्थ कंडीशन पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में इम्यूनोसप्रेसिव दवाओं से बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे ब्लड सेल्स की संख्या बढ़ सकती है। लेकिन कई मरीजों, खासकर गंभीर रूप से प्रभावित युवाओं के लिए, ब्लड स्टेम सेल ट्रांसप्लांट सबसे प्रभावी और आशाजनक ट्रीटमेंट हो सकता है।


ट्रांसप्लांट की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि डोनर का एचएलए प्रोफाइल मरीज से कितना मैच करता है। डॉक्टर 10/10 एचएलए मैच की तलाश करते हैं, जिससे कॉम्प्लिकेशन्स कम हों और रिजल्ट बेहतर मिलें। दुर्भाग्य से, परिवार में उपयुक्त मैच केवल लगभग 30 प्रतिशत मरीजों को ही मिल पाता है। बाकी 70 प्रतिशत मरीज नेशनल या इंटरनेशनल रजिस्ट्रियों में दर्ज अनरिलेटेड डोनर्स पर निर्भर रहते हैं।


भारत में रजिस्टर्ड ब्लड स्टेम सेल डोनर्स की संख्या अभी कम है जिसके कारण मरीजों के लिए ट्रांसप्लांट तक पहुंच काफी सीमित हो जाती है।


गलत जानकारी डोनर रजिस्ट्रेशन में बड़ी बाधा है। दर्द, लंबे समय तक हेल्थ पर असर या फर्टिलिटी पर प्रभाव जैसी गलत धारणाएं लोगों को हतोत्साहित करती हैं। वास्तव में, ब्लड स्टेम सेल डोनेशन एक सुरक्षित और वॉलंटरी प्रक्रिया है और ज्यादातर मामलों में प्लेटलेट्स डोनेशन के समान होती है।


एप्लास्टिक एनीमिया के मैनेजमेंट के लिए सरकारी सपोर्ट, डोनर रजिस्ट्रेशन कैंपेन और डोनर पूल बढ़ाने की आवश्यकता है। बार-बार इंफेक्शन, अत्यधिक थकान, बिना कारण ब्लीडिंग और नीले निशान जैसे लक्षणों की समय पर पहचान से जल्दी डायग्नोसिस और रेफरल संभव है। साथ ही, डोनर बेस मजबूत करने से पूरे भारत में हजारों मरीजों को जीवनदान दिया जा सकता है।

मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2025: नवीन इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीयन शुल्क (Registration Fee) एवं मोटरयान कर (Road Tax) में विशेष छूट

नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा प्रदेश में स्वच्छ, सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल परिवहन तंत्र को सुदृढ़ करने और कार्बन उत्सर्जन के न्यूनीकरण के उद्देश्य से "मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2025" का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। यह दूरदर्शी नीति 27 मार्च 2025 से संपूर्ण प्रदेश में प्रभावशील हो चुकी है, जिसमें पर्यावरण संवर्धन के लिये इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के क्रय एवं उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए नागरिकों को व्यापक स्तर पर विभिन्न वित्तीय रियायतें एवं विशिष्ट प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। शासन की इस पहल का मुख्य ध्येय पारंपरिक ईंधन आधारित वाहनों के स्थान पर आधुनिक एवं प्रदूषण मुक्त आवागमन के साधनों को जन-सामान्य के लिए सुलभ बनाना है।


राज्य शासन की इस अभिनव नीति में नवीन इलेक्ट्रिक वाहनों के क्रय पर उपभोक्ताओं को पंजीयन शुल्क (Registration Fee) एवं मोटरयान कर (Road Tax) में विशेष छूट प्रदान की जा रही है। यह निर्णय न केवल नागरिकों को आर्थिक संबल प्रदान कर रहा है, अपितु उन्हें भविष्योन्मुखी परिवहन व्यवस्था से जुड़ने के लिये प्रेरित भी कर रहा है। इसके अतिरिक्त, धारणीय विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये पेट्रोल, डीजल एवं सीएनजी संचालित पारंपरिक वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित (रेट्रोफिट) करने की तकनीक को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके लिए नियमानुसार समुचित वित्तीय सहायता सुलभ कराई जा रही है।


चार्जिंग अधोसंरचना विकास के लिये 30 प्रतिशत तक का अनुदान


अधोसंरचना विकास की दिशा में प्रदेश को 'इलेक्ट्रिक व्हीकल हब' के रूप में स्थापित करने के लिये राज्य सरकार द्वारा सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन अथवा चार्जरों की स्थापना पर लगभग 30 प्रतिशत तक के अनुदान (सब्सिडी) का प्रावधान किया गया है। इस दूरगामी कदम से प्रदेश भर में चार्जिंग स्टेशनों के व्यापक तंत्र का विस्तार होगा, जिससे नागरिकों को वाहन को सुगम एवं निर्बाध यात्रा का अनुभव प्राप्त हो सकेगा।


"ईव्ही तरंग पोर्टल" के माध्यम से योजनाओं का सुगम लाभ


EV वाहनों पर प्रोत्साहनों के लाभ वितरण की प्रक्रिया को अत्यंत सरल, पारदर्शी एवं तकनीक-आधारित बनाने के उद्देश्य से शासन द्वारा "ईव्ही तरंग पोर्टल" का संचालन किया जा रहा है। इस डिजिटल अधिष्ठान के माध्यम से पात्र हितग्राही विभिन्न सब्सिडी एवं अन्य लाभों के लिए घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। राज्य शासन ने समस्त प्रदेशवासियों से आह्वान किया है कि वे इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देकर 'स्वच्छ एवं हरित मध्यप्रदेश' के संकल्प को साकार करने में अपनी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें।

कैसा हो एआई युग का रेज्यूमे ? ऐसे प्रोजेक्ट्स चुनें जिन्हें मशीन रिप्लेस न कर सके

New York | एआई की वजह से नौकरियां जाने का डर अभी सभी को सता रहा है, खास तौर पर युवा वर्ग ज्यादा परेशान नजर आ रहा है। लेकिन प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर फर्म  के CEO  कहते हैं कि घबराने की जरूरत नहीं, बस रणनीति बदलनी होगी। जो कई बड़ी  दिग्गज कंपनियों में काम कर चुके हैं। उनका कहना है कि सिलिकॉन वैली में नौकरी पाना पहले भी आसान नहीं था। 


खुद इंग्लैंड के छोटे शहर से निकले जो ने कभी सीधे किसी बड़ी कंपनी में एंट्री नहीं ली। उनकी सलाह यह है कि ऐसा रेज्यूमे बनाएं जिसे नजरअंदाज करना नामुमकिन हो। किसी स्टंट से नहीं, बल्कि ऐसे प्रोजेक्ट और टेक्निकल स्किल से जो एआई आसानी से नहीं कर सकता। छोटी कंपनी, अलग शहर या थोड़े अलग क्षेत्र में काम करना कमजोरी नहीं, बल्कि आपकी सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।

सीए इंटरमीडिएट एवं सीए फाउंडेशन परीक्षा जनवरी 2026 के परिणाम घोषित

भोपाल: द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) द्वारा आयोजित सीए इंटरमीडिएट एवं सीए फाउंडेशन परीक्षा जनवरी 2026 के परिणाम घोषित कर दिए गए है। इस अवसर पर आईसीएआई की भोपाल शाखा (सीआईआरसी) ने सफल विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार भोपाल केंद्र पर कुल 981 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए, जिनमें से 158 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए। इस प्रकार कुल 16.11 प्रतिशत परिणाम रहा। ग्रुप - 1 में 470 अभ्यर्थी उपस्थित हुए, जिनमें से 56 उत्तीर्ण हुए (11.91%), जबकि ग्रुप-2 में 196 अभ्यर्थियों में से 42 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए (21.43%)। दोनों ग्रुप एक साथ 29 अभ्यर्थियों ने उत्तीर्ण किए, जो 9.21 प्रतिशत रहा। ऑल इंडिया स्तर पर 2,16,801 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए, जिनमें से 29,455 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए और कुल परिणाम 13.59 प्रतिशत रहा। भोपाल केंद्र पर मुस्कान डांगी ने 447 अंक (74.50%) के साथ पहला, श्रष्ठी धाकड़ ने 382 अंक (63.67%) के साथ दूसरा और राशि चौरिवार ने 366 अंक (61.00%) प्राप्त कर तीसरा स्थान पाया।


सीए फाउंडेशन परीक्षा परिणाम भी जारी

भोपाल केंद्र पर 976 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए, जिनमें से 191 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए और कुल परिणाम 19.57 प्रतिशत रहा। ऑल इंडिया स्तर पर 1,09,694 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए, जिनमें से 21,099 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए, जिससे कुल परिणाम 19.23 प्रतिशत रहा। इनमें 57,238 पुरुष अभ्यर्थियों में से 11,523 (20.13%) तथा 52,456 महिला अभ्यर्थियों में से 9,576 (18.26%) अभ्यर्थी सफल रहे। ऑल इंडिया स्तर पर लोगाप्रिया पी.पी. ने 366 इसमें सफलता के लिए निरंतर अंक, खुशी सिकरिया ने 365 अंक तथा हिबा पी., सुमन कार्की और राघव नरेश गुप्ता ने 361 अंक प्राप्त कर शीर्ष स्थान हासिल किए। भोपाल केंद्र पर स्वास्तिक गुप्ता ने 330 अंक (82.50%) के साथ पहला, माही गुप्ता ने 325 अंक (81.25%) के साथ दूसरा और नयन जैन ने 322 अंक (80.50%) के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया। भोपाल शाखा के अध्यक्ष सीए आदित्य पी. श्रीवास्तव ने सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई देते देश हुए कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंसी के सबसे प्रतिष्ठित पेशेवर देश के मा में से एक है और मेहनत व समर्पण आवश्यक है।

Sunday, March 8, 2026

'क्वींस आन द व्हील्स' को सीएम ने दिखाई हरी झंडी, 1400 किमी की बाइक यात्रा पर निकलीं 25 महिला राइडर्स

सीएम डॉ. मोहन यादव ने महिला बाइक रैली को झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली 1400 किलोमीटर की यात्रा तय करेगी। रैली में शामिल महिलाएं प्रदेश के पर्यटन स्थलों के बारे में लोगों को बताएंगी। मुंबई की 62 साल की नीता खांडेकर की अगुवाई में रैली 13 मार्च को भोपाल में समाप्त होगी।

भोपाल। प्रदेश के समृद्ध व ऐतिहासिक पर्यटन गंतव्यों को देश-दुनिया में प्रचारित करने के उद्देश्य से 25 महिला सुपर बाइकर्स प्रदेश की यात्रा पर निकली हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास से 'क्वींस ऑन द व्हील्स' के तीसरे संस्करण को फ्लैग ऑफ किया। पिछले दो संस्करण की सफलता के बाद, महिला सशक्तिकरण, स्वतंत्रता एवं विरासत का यह 7 दिवसीय आयोजन भोपाल से खजुराहो तक लगभग 1,400 किलोमीटर लंबी बाइक ट्रेल को पूरा करेगा।    


विश्व महिला दिवस पर मप्र की धरती से महिला साहस औरआत्मविश्वास की एक अनोखी मिसाल देखने को मिली।  मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित महिला बाइकिंग इवेंट 'क्वीन्स ऑन द व्हील' के तृतीय संस्करण का शुभारंभ शनिवार को मुख्यमंत्री निवास से किया गया। सुबह 10 बजे मुख्यमंत्री ने इस रैली को फ्लैग-ऑफ कर रवाना किया। इस बाइक रैली में देशभर से आई 25 महिला बाइक राइडर्स मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों को एक्सप्लोर करते हुए करीब 1400 किलोमीटर का रोमांचक सफर तय करेंगी। इस रैली में भोपाल, नागपुर, मुंबई, पुणे, संभाजीनगर, पश्चिम बंगाल और दिल्ली सहित कई शहरों की महिला राइडर्स शामिल हुई हैं। इस मौके पर सीएम ने कहा कि यह टूर मात्र बाइक रैली नहीं बल्कि नारी सशक्तिकरण, साहस और पर्यटन के माध्यम से मप्र की पहचान को दुनिया तक पहुंचाने का एक अनूठा अभियान है। यह यात्रा प्रदेश के पर्यटन के साथ महिला सुरक्षा की एक मिसाल है, यह बदलते समाज की तस्वीर है। देश के साथ म.प्र. निरंतर आगे बढ़ रहा है और पूरी तरह से सुरक्षित भी है। उन्होंने कहा कि म.प्र. में महिला सुरक्षा की गारंटी के रूप में यह टूर प्रारंभ किया जा रहा है।


यह आयोजन मप्र पर्यटन विकास निगम की पहल पर किया गया। पिछले दो संस्करण की सफलता के बाद, महिला सशक्तीकरण, स्वतंत्रता एवं विरासत का यह सात दिवसीय आयोजन भोपाल से खजुराहों तक 1,400 किमी बाइक यात्रा को पूरा करेगा। एमपी टूरिज्म बोर्ड की पहल क्वींस आन द व्हील्स केवल एक बाइक राइड नहीं, बल्कि महिला सशक्तीकरण, साहस और मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक एवं पर्यटन धरोहर का उत्सव है। भोपाल से शुरू होकर यह सात दिन की यात्रा सांची, उदयगिरि, चंदेरी, शिवपुरी, कूनो, ग्वालियर, दतिया, ओरछा और खजुराहो से होते वापस भोपाल में 13 मार्च को समाप्त होगी।


पर्यटन स्थलों का अनुभव करेंगी 

राइड में देश के कई राज्यों की 25 राइडर्स शामिल हुई हैं। मध्य प्रदेश टूरिच्म बोर्ड के एमडी डॉ. इलैया राजा टी ने बताया कि एमपी दूरिच्म बोर्ड की यह पहल केवल एक बाइक राइड नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, साहस और मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक एवं पर्यटन धरोहर का उत्सव है। मध्यप्रदेश दूरिच्म बोर्ड का उद्देश्य ऐसे नवाचारपूर्ण आयोजनों के माध्यम से प्रदेश को एक सुरक्षित, रोमांचक और विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।


13 मार्च को भोपाल में होगा समापन

भोपाल से शुरू होकर यह 7 दिन की यात्रा सांची, उदयगिरि, चंदेरी, शिवपुरी, कूनो, ग्वालियर, दतिया, ओरछा और खजुराहो से होते वापस भोपाल में 13 मार्च को समाप्त होगी।


ये राइडर्स शामिल

महाराष्ट्र की कविता जाधव, डॉ. प्रियंका, हेतल उपाध्याय, रुकमणी, माधुरी नायक, मधु हेलचेल, कल्याणी पोटकर, डॉ. नीता, तनुप्रिया, रिद्धी, रुचिका मेघे, मैथीली सिंह, एकता खाटे, पल्लवी देशमुख, उत्तरप्रदेश से डॉ. सुमित, मध्यप्रदेश की राज नंदनी, दिव्या रमन, मयूरी सोनी, दीक्षा राकेसिया, उन्नति चौरसिया, सेजल कुशवाहा, महक बाथम, शबनम बानो, सारा खान, कर्नाटक की सोना प्रियदर्शनी, पश्चिम बंगाल की शांति घोस ।                                                        

मैनिट में आठवां जन औषधि दिवस कार्यक्रम का आयोजन, पांच केंद्रों को किया सम्मानित


भोपाल स्थित मैनिट (मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) में 7 मार्च 2026 को 8वां जन औषधि दिवस उत्साह के साथ मनाया गया। मध्य प्रदेश के सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने इसमें सहभागिता की। इस अवसर पर जनऔषधि केंद्र संचालकों को सम्मानित किया गया और सस्ती जेनेरिक दवाओं के महत्व को रेखांकित किया गया। 


Bhopal: मैनिट परिसर में शनिवार को आठवां जन औषधि दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम में सहकारिता एवं खेल मंत्री विश्वास कैलाश सारंग शामिल हुए। कार्यक्रम में फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष संजय जैन तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से डा. प्रभाकर तिवारी मौजूद थे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के महत्व पर प्रकाश डाला गया। देशभर में 18 हजार से अधिक जन औषधि केंद्र संचालित हो रहे हैं, जहां बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण दवाइयां और अन्य स्वास्थ्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।


आम नागरिकों के बीच इस योजना को लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से हर वर्ष सात मार्च को जन औषधि दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के पांच उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जन औषधि केंद्रों को सम्मानित किया गया। विश्वास सारंग ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में संचालित PM भारतीय जन औषधि परियोजना के माध्यम से देशभर में जरूरतमंद नागरिकों को किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएँ उपलब्ध हो रही हैं। यह योजना आम लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराकर स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बना रही है।


अतिथियों ने योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार और जनजागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, स्वास्थ्य विशेषज्ञ और नागरिक उपस्थित थे। 

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