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Monday, April 6, 2026

जेम ने रचा नया कीर्तिमान, 18.4 लाख करोड़ रुपये का जीएमवी पार

गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (जेम) ने सार्वजनिक खरीद के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए कुल 18.4 लाख करोड़ रुपये का सकल व्यापार मूल्य (जीएमवी) पार कर लिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में ही 5 लाख करोड़ रुपये का जीएमवी दर्ज किया गया, जो इसकी तेज़ी से बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। जेम एक पारदर्शी, कुशल और समावेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में उभरा है, जो सरकारी खरीद प्रक्रियाओं को सरल बनाते हुए विभिन्न उद्यमों को सरकारी मांग से जोड़ता है। यह सार्वजनिक व्यय में पारदर्शिता और आर्थिक समावेशन को बढ़ावा दे रहा है।


प्लेटफॉर्म पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसई) की भागीदारी उल्लेखनीय रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल ऑर्डरों का 68% एमएसई द्वारा पूरा किया गया, जो कुल जीएमवी का 47.1% है। जेम पर 2.1 लाख से अधिक महिला-नेतृत्व वाले एमएसई पंजीकृत हैं, जिन्हें 28,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर मिले हैं। वहीं, अनुसूचित जाति और जनजाति के उद्यमों को 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। स्टार्टअप उद्यमों ने भी इस प्लेटफॉर्म पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। वित्त वर्ष 2025-26 में इन्हें 19,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर मिले, जो 36% से अधिक की वृद्धि दर्शाते हैं। जेम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल) और उन्नत विश्लेषण का उपयोग किया जा रहा है। इससे खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है और अनियमितताओं की पहचान आसान हुई है। केंद्रीय मंत्रालयों और सार्वजनिक उपक्रमों के साथ-साथ अब राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी भी तेजी से बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में राज्यों द्वारा की गई खरीद में 38.3% की वृद्धि दर्ज की गई है। जेम के सीईओ मिहिर कुमार ने कहा कि 18.4 लाख करोड़ रुपये का जीएमवी पार करना इस प्लेटफॉर्म में खरीदारों और विक्रेताओं के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है।


गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (GeM) भारत सरकार का एक राष्ट्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल है, जिसे 9 अगस्त 2016 को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा लॉन्च किया गया था। इसे सरकारी विभागों, मंत्रालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) द्वारा वस्तुओं और सेवाओं की ऑनलाइन खरीद के लिए "वन-स्टॉप शॉप" के रूप में बनाया गया है।


GeM की मुख्य विशेषताएं और लाभ

  • पारदर्शिता और दक्षता: यह पूरी प्रक्रिया को पेपरलेस, संपर्क रहित और कैशलेस बनाता है, जिससे भ्रष्टाचार कम होता है।
  • समावेशिता: यह MSMEs (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों), स्टार्टअप्स और महिला उद्यमियों को सरकारी खरीद में भाग लेने का सीधा अवसर देता है।
  • अनिवार्य खरीद: जनरल फाइनेंशियल रूल्स (GFR) के नियम 149 के अनुसार, यदि कोई वस्तु GeM पर उपलब्ध है, तो सरकारी विभागों के लिए उसे वहीं से खरीदना अनिवार्य है।
  • व्यापक रेंज: पोर्टल पर 11,000 से अधिक उत्पाद श्रेणियां और 300 से अधिक सेवा श्रेणियां उपलब्ध हैं।


कौन उपयोग कर सकता है?

  • खरीदार (Buyers): केवल केंद्र और राज्य सरकार के विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयाँ, स्वायत्त निकाय और स्थानीय निकाय।
  • विक्रेता (Sellers): कोई भी व्यक्ति या फर्म (निर्माता, पुनर्विक्रेता या सेवा प्रदाता) जो सरकारी निविदाओं में भाग लेना चाहता है। विक्रेताओं के लिए GeM पंजीकरण पूर्णतः निःशुल्क है।


महत्वपूर्ण आंकड़े और नेतृत्व (अप्रैल 2026 के अनुसार)

Gross Merchandise Value (GMV): GeM ने अब तक कुल ₹18.4 लाख करोड़ का कारोबार पार कर लिया है। मुख्य नेतृत्व: गुजरात कैडर के IAS अधिकारी अजय भादू को GeM का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है (कार्यकाल 3 मार्च 2025 से प्रभावी)। 


खरीद के नियम (GFR 149)

खरीद की सीमा के आधार पर प्रक्रिया इस प्रकार है: 

  • ₹25,000 तक: सीधे किसी भी उपलब्ध विक्रेता से खरीद सकते हैं।
  • ₹25,001 से ₹5,00,000 तक: कम से कम तीन अलग-अलग निर्माताओं के बीच तुलना करके सबसे कम कीमत वाले (L1) विक्रेता से।
  • ₹5,00,000 से अधिक: ऑनलाइन बोली (Bidding) या रिवर्स ऑक्शन के माध्यम से अनिवार्य रूप से L1 विक्रेता से।


GeM पर विक्रेता (Seller) के रूप में पंजीकरण

GeM (Government e-Marketplace) पर विक्रेता के रूप में पंजीकरण के लिए, आधिकारिक वेबसाइट gem.gov.in पर जाएं, 'Sign Up' > 'Seller' चुनें, और आधार-लिंक मोबाइल नंबर का उपयोग करके साइन-अप करें। पैन, जीएसटी, उद्यम (MSME) और बैंक विवरण के साथ अपनी व्यावसायिक इकाई (Proprietorship/Company) को पंजीकृत करें, फिर नियम व शर्तें स्वीकार कर क्रेडेंशियल सत्यापित करें।


GeM विक्रेता पंजीकरण प्रक्रिया (चरण-दर-चरण):

  • वेबसाइट पर जाएं: GeM पोर्टल खोलें और 'Sign Up' बटन पर क्लिक करके 'Seller' (विक्रेता) चुनें।
  • प्राथमिक उपयोगकर्ता साइन-अप (Primary User Sign-up):
  • व्यवसाय इकाई का प्रकार चुनें (Proprietorship, Partnership, Private Limited, आदि)।
  • अपने आधार नंबर और आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर का उपयोग करके स्वयं को सत्यापित करें (यह व्यक्ति व्यवसाय का प्रमुख/अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता होना चाहिए)।
  • आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर प्राप्त OTP को दर्ज करें।


व्यापार विवरण (Business Details):

  • अपना PAN नंबर और संगठन का नाम दर्ज करें।
  • GSTIN (यदि लागू हो) और Udyam/MSME विवरण अपडेट करें।
  • लॉगिन क्रेडेंशियल बनाएं: एक वैध ईमेल आईडी और पासवर्ड बनाएं, फिर सेलर डेस्क में लॉग इन करें।


प्रोफाइल अपडेट करें:

  • कंपनी की जानकारी, पता, बैंक खाता विवरण और कर-सम्बन्धी विवरण भरें।
  • अपनी कैटेगरी (उत्पाद या सेवाएं) चुनें।
  • अनुपालन (Compliance): कुछ श्रेणियों के लिए, QCI विक्रेता मूल्यांकन (Vendor Assessment) या उत्पाद परीक्षण रिपोर्ट (Test Reports) की आवश्यकता हो सकती है। 


पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज:

  • आधार कार्ड (मोबाइल से लिंक)
  • PAN कार्ड (कंपनी/प्रोपराइटर का)
  • GSTIN (जीएसटी संख्या)
  • UDYAM/MSME प्रमाण पत्र (यदि हो)
  • बैंक खाता विवरण (कैंसिल्ड चेक के साथ)
  • ईमेल आईडी 


ध्यान दें: पंजीकरण प्रक्रिया को पूरा करने के लिए वेबसाइट के 'Sign Up' > 'Seller' के बाद 'Review Terms and Conditions' को ध्यान से पढ़ें और स्वीकार करें।

Saturday, April 4, 2026

जनजातीय क्षेत्रों में होम-स्टे बने आय का साधन, घर बैठे अच्छी कमाई कर रहे हैं होम-स्टे संचालक

मध्यप्रदेश की ग्रामीण संस्कृति के इन्द्रधनुषी रंगों को करीब से देखना और ज्यादा आनंददायी और रोमांचक हो गया है। बड़ी संख्या में बन रहे होम-स्टे में आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रदेश में हाई-वे और प्राकृतिक स्थानों के आस-पास के तथा जनजातीय क्षेत्रों में अब बड़ी संख्या में होम-स्टे नजर आ जाते हैं।


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्रामीण उदयमिता को बढ़ावा देते हुए ग्रामीण पर्यटन की असीम संभावनाओं का दोहन करने की नीति बनाई है। पिछले दो सालों में इससे ग्रामीण अंचलों में रोजगार के बड़े अवसर निर्मित हुए हैं। होम-स्टे से देशी-विदेशी पर्यटकों को ग्रामीण संस्कृति के दर्शन अब सहजता से सुलभ हो गया है।


प्रदेश में 98 चुने गांवों में 346 होम-स्टे ग्रामीणों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं, जबकि 642 होम-स्टे निर्माणाधीन हैं, जो जल्दी ही पर्यटकों के आतिथ्य के लिए तैयार हो जायेंगे। अब तक लगभग 34 हजार देशी-विदेशी पर्यटकों ने होम-स्टे कर ग्रामीण जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव लिया। सुखद आवास सुविधा, परम्परागत व्यंजनों का स्वाद, स्थानीय लोक-कला, नृत्य-संगीत, हस्त-कला, हस्त-शिल्प से होम-स्टे संचालक परिवारों को ₹6.76 करोड़ की आय प्राप्त हुई। उन्हें आय का एक गरिमापूर्ण साधन मिल गया। पर्यटकों को खुशियां देने के साथ उनके परिवारों में भी खुशियां आ गईं।


होम-स्टे योजना

पर्यटन विभाग अंतर्गत मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा संचालित ग्रामीण पर्यटन कार्यक्रम एक बहुआयामी योजना है। इसका उददेश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव लाना, गांवों में ही रोजगार के अवसरों का निर्माण करना और ग्रामीण संस्कृति बचाये रखना है। प्रदेश के सांस्कृतिक क्षेत्रों बुन्देलखण्ड, बघेलखण्ड, निमाड़, मालवा, महाकौशल एवं चम्बल की ग्रामीण सांस्कृतिक विरासतों का दर्शन करा रही है। होम-स्टे गांवों में रची-बसी संस्कृति, ग्रामीण आवास विन्यास, परम्परागत व्यंजन, नृत्य संगीत, लोक-कला, हस्त-शिल्प से पर्यटकों को सुखद अनुभव प्रदान करते हैं।


पर्यटन स्थलों से लगे ग्रामों के साथ ही प्राकृतिक, नैसर्गिक सुन्दरता से परिपूर्ण एवं जनजातीय सांस्कृतिक पहचान वाले गावों का चयन कर उन्हें गामीण पर्यटन से जोड़ा गया है। होम-स्टे शहरी पर्यटकों को कम बजट में गांव के शांत और सुरम्य वातावरण में सुखद स्मृतियों से सराबोर करने का काम कर रहे हैं।


मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा होम-स्टे एवं पर्यटन ग्रामों के समेकित विकास एवं विस्तार की दिशा में समय-समय पर हॉस्पिटैलिटी, साफ-सफाई एवं कौशल विकास के तकनीकी प्रशिक्षणों के माध्यम से ग्रामीणों के कौशल उन्नयन में सहयोग दिया जा रहा है। होम-स्टे के प्रचार-प्रसार में डिजिटल एवं आईटी, सोशल मीडिया के उपयोग की दिशा में भी समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाकर क्षमतावर्धन एवं सामुदायिक संगठन में नेतृत्व विकास का कार्य किया गया है। इसका परिणाम है कि पर्यटन ग्रामों के होम-स्टे को ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों से बुकिंग मिल रही है।


सीहोर का ग्राम खारी बना मॉडल पर्यटन ग्राम

भोपाल से लगे सीहोर जिले का ग्राम खारी ने मॉडल पर्यटन ग्राम के रूप में अपनी पहचान बनाई है। यहां लगभग 209 राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय सरकारी एवं गैर-सरकारी प्रतिनिधियों द्वारा समुदाय आधारित ग्रामीण अर्थव्यव्या में पर्यटन ग्रामों के योगदान का अध्ययन किया गया है।


बैतूल जिले के घोड़ा डोंगरी तहसील के "बाचा'' गांव में गणेश उइके एक-डेढ़ साल से ताप्ती विहार होम-स्टे चला रहे हैं। उन्हें ₹2 लाख रूपये का शुद्ध मुनाफा हुआ है। होम-स्टे चलाने का उन्हें अच्छा अनुभव हो गया है। देखते ही देखते "बाचा'' गांव में 8 होम-स्टे खुल गये हैं। सभी में स्थानीय पर्यटकों के अलावा विदेशी पर्यटक भी आने लगे हैं। ग्रामीण संस्कृति के दर्शन करते हुए आराम से रहना और देशी खाना पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण होता है। ज्वार-बाजरे की रोटियां, टमाटर की चटनी, भटे का भरता, देशी सब्जियों के व्यंजन, कोदो-कुटकी की खीर जैसा ग्रामीण खाना, भजन व नृत्य मंडलियों के साथ सहभागिता करना, गायों को चारा खिलाना, दूध दुहना, कुएं से पानी भरना, बैलगाड़ी हांकना जैसी ग्रामीण गतिविधियां पर्यटकों को बहुत लुभाती हैं और हमेशा के लिए सुखदायी स्मृतियां बन जाती हैं।


"बाचा'' के श्री गणेश उइके बताते हैं कि अब तक 500 से ज्यादा परिवार होम-स्टे के लिये आ चुके हैं। इनमें 5 दुबई से आये विदेशी मेहमान भी थे। "बाचा'' की आदर्श पर्यटक समिति के अध्यक्ष श्री अनिल धुर्वे ने बताया कि "बाचा'' गांव नागपुर हाइ-वे से लगा है। यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। हम चाहते हैं कि हमारा स्वागत सत्कार का व्यवसाय और आगे बढ़े।


मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सोच की तारीफ करते हुए श्री धुर्वे बताते हैं कि इससे हमारी रोजगार की समस्या हल हो रही है। आदर्श पर्यटक समिति के अन्य सदस्यों के भी अपने होम-स्टे हैं। जैसे श्री रामदास उइके शिवगंगा होम-स्टे, श्री अंकित का गुलमोहन होम-स्टे, श्री राजेश कुमरे का जयसेवा होम-स्टे, श्री सुधीर ठाकरे का सतपुड़ा होम-स्टे और सुश्री मीनाक्षी धुर्वे का आशीर्वाद होम-स्टे है। सभी में पर्यटकों का आगमन हो रहा है। एक ही गांव में इतने सारे होम-स्टे शायद "बाचा'' में ही हैं। भोपाल से नागपुर हाइ-वे पर होने से यहां पहुंचना आसान है। ऐतिहासिक देवगढ़ का किला है। यहां श्री कैलाश सरके 2023 होम-स्टे चला रहे हैं। अब तक करीब 100 परिवार आ चुके हैं। इनमें फ्रांस के पर्यटक भी शामिल हैं। होटल और बाचा बैतूल बस स्टेंड और रेल्वे स्टेशन से 25 किमी, और भोपाल से 165 किमी है। इसी प्रकार छिंदवाड़ा में नागपुर रोड में उमरानाला से 25 दूर गोंड राजाओं का होम-स्टे का फर्क समझाते हुए श्री कैलाश बताते हैं कि एकमात्र फर्क है वातावरण का। होटल की सुविधाओं का हम मुकाबला नहीं कर सकते लेकिन देशी खाना, व्यंजन, गांव का शांत माहौल, सूर्यादय, सूर्यास्त दर्शन, पक्षियों का कलरव होम-स्टे में मन को खुश करने वाला होती हैं। ऐसी योजना बनाने के लिए हम मुख्यमंत्री डॉ. यादव को धन्यवाद देते हैं। घर बैठे आमदनी का जरिया मिल गया है। होम-स्टे चलाने के लिए हम और भी काम करते हैं। अच्छी बागवानी कर रहे हैं, जिससे ताजा सब्जी मिलती रहे। खेतों को संवार रहे हैं। गांव को स्वच्छ रखने में कोई कसर नहीं छोड़ते। उन्होंने बताया कि हाल में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह जिले के दौरे पर थे और यहां हमारे गाँवों में भी आये थे। होम-स्टे पर रूके और इसके संचालन और प्रबंधन संबंधी जानकारी ली। उन्होने चाय पी और देवगढ़ का किला देखा। होम-स्टे चलाने की बधाई दी और किसी प्रकार की परेशानी होने पर बेझिझक बताने को भी कहा।


छिन्दवाड़ा जिले में ही तामिया में मनोहारी पातालकोट के पास चिमटीपुर में श्री रूपलाल पंदाराम आंवला होम-स्टे चला रहे हैं। उनके 2 भाई भी दूधीमाता और बाबामड होम-स्टे चला रहे हैं। श्री पंदाराम बताते हैं कि 2 साल पहले वर्ष 2024 से अब तक 100 से ज्यादा पर्यटक यहां आ चुके हैं। इनमें से कुछ पर्यटक कनाडा से भी आये थे। होम-स्टे के पास पातालकोट में बहने वाली दूधी नदी का उदगम और यहां मिलने वाली दुर्लभ जड़ी बूटियों के दर्शन रोमांचकारी अनुभव देते हैं। अब तक करीब ₹3 लाख तक की शुद्ध आय हो चुकी है। इसके अतिरिक्त स्थानीय जनजातीय नर्तक दलों के कलाकारों की भी कमाई हो जाती है। वे गैंडी और सैताम नृत्य करते हैं। खाने में महुआ खीर, महुआ लडडू, कोदो खीर और मक्का और स्थानीय सब्जियां पसंद करते हैं। पर्यटकों की बुकिंग "मेक माय ट्रिप'' के माध्यम से हो जाती है।


इसी प्रकार खरगौन के कसरावद के नावड़ा टौड़ी गांव में नर्मदा तट से लगे कीर्ति केवट होम-स्टे की विशेषता है कि यहां से नर्मदा मैया के दर्शन हो जाते हैं। होम-स्टे की संचालक श्रीमती चंदा बाई केवट बताती हैं कि हर महीने 15 से 20 बुकिंग हो जाती है। अब तक 150 पर्यटक आ चुके हैं जबकि अभी शुरूआत की है। करीब ₹2.50 लाख तक शुद्ध आय हो चुकी है।


होमस्टे पंजीकरण – प्रक्रिया, दस्तावेज़, शुल्क

होम-स्टे (Homestay) योजना भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा शुरू की गई एक पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय समुदायों को रोजगार देना और पर्यटकों को सस्ती व पारिवारिक आवास सुविधा उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत मकान मालिक अपने घर के अतिरिक्त कमरों को पर्यटकों को किराए पर दे सकते हैं, जिससे उन्हें आय का एक अतिरिक्त स्रोत मिलता है।


प्रमुख सरकारी पहल और श्रेणियां

पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार अपनी 'इन्क्रेडिबल इंडिया होम-स्टे' योजना के तहत आवास इकाइयों को दो श्रेणियों में वर्गीकृत करता है:

  • सिल्वर (Silver): बुनियादी सुविधाओं वाली मानक श्रेणी।
  • गोल्ड (Gold): उच्च गुणवत्ता वाली सुविधाओं और बेहतर सेवाओं वाली श्रेणी। 


राज्यों की प्रमुख योजनाएं

विभिन्न राज्यों ने अपनी भौगोलिक और सांस्कृतिक विशिष्टताओं के आधार पर विशिष्ट योजनाएं शुरू की हैं:

  • उत्तराखंड: यहाँ दीनदयाल उपाध्याय होम-स्टे योजना काफी लोकप्रिय है। इस योजना के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में नए होम-स्टे बनाने या पुराने घरों के नवीनीकरण के लिए 50% तक की सब्सिडी (अधिकतम ₹15 लाख) और ऋण पर ब्याज अनुदान दिया जाता है। अधिक जानकारी के लिए यहां जाएं-https://homestay.uttarakhandtourism.gov.in/homestay-policy
  • मध्य प्रदेश: "द रियल इंडिया होम स्टे" योजना के माध्यम से पर्यटकों को ग्रामीण संस्कृति से जोड़ने पर जोर दिया जाता है। यहाँ मकान मालिकों को पंजीकरण के बाद आतिथ्य सत्कार के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाता है। अधिक जानकारी के लिए यहां जाएं- www.mptourism.com
  • हिमाचल प्रदेश: राज्य सरकार ने पंजीकरण के लिए नई वेबसाइट homestay.hp.gov.in लॉन्च की है ताकि प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाया जा सके।
  • उत्तर प्रदेश: हाल ही में 'गंगा ग्रामीण होमस्टे योजना' शुरू की गई है, जो गंगा के किनारे बसे गांवों में पर्यटन को बढ़ावा देती है। यूपी पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट up-tourismportal.in पर ऑनलाइन आवेदन करें।


योजना के मुख्य लाभ

  • आर्थिक लाभ: मकान मालिकों को अपने खाली कमरों से नियमित आय होती है।
  • सब्सिडी और ऋण: कई राज्यों में निर्माण और नवीनीकरण के लिए वित्तीय सहायता और मुद्रा लोन (Mudra Loans) की सुविधा दी जाती है।
  • करों में छूट: कुछ राज्यों (जैसे दिल्ली और गोवा) में होम-स्टे को आवासीय श्रेणी में रखा जाता है, जिससे बिजली, पानी और संपत्ति कर व्यावसायिक दरों के बजाय घरेलू दरों पर देना होता है।
  • सांस्कृतिक विनिमय: यह योजना पर्यटकों को स्थानीय भोजन, परंपराओं और जीवनशैली का प्रत्यक्ष अनुभव लेने का मौका देती है।


पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज (सामान्य सूची)

पंजीकरण प्रक्रिया अब अधिकांश राज्यों में NIDHI+ पोर्टल या संबंधित राज्य पर्यटन की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन होती है। सामान्य तौर पर निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:

  • आधार कार्ड / पैन कार्ड।
  • घर/भूमि के स्वामित्व के कागजात (खतौनी/रजिस्ट्री)।
  • घर के कमरों, रसोई और शौचालय की तस्वीरें।
  • चरित्र प्रमाण पत्र।
  • अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) या अग्निशामक यंत्र का बिल।

Monday, March 30, 2026

इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग इकोसिस्टम को बढ़ावा देने ‘लीफ’ लॉन्च

केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के चार्जिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। भारी उद्योग मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने सोमवार को ‘लीफ’ यानी ‘लाइट इलेक्ट्रिक-व्हीकल एक्सेलेरेशन फोरम (एलईएएफ)’ लॉन्च किया, जो एक इंडस्ट्री-नेतृत्व वाला मंच है। 


यह फोरम एक निष्पक्ष प्लेटफॉर्म

यह फोरम एक निष्पक्ष प्लेटफॉर्म के रूप में बनाया गया है, जहां लाइट इलेक्ट्रिक वाहन (एलईवी) सेक्टर से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स, जैसे वाहन निर्माता (ओईएम), चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेटर, कंपोनेंट निर्माता और टेक्नोलॉजी प्रदाता, एक साथ काम कर सकें।


देश में इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों को अपनाने में लाएगा तेजी 

यह फोरम सरकार, रेगुलेटरी संस्थाओं और इंडस्ट्री संगठनों के साथ मिलकर ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को बढ़ावा देगा और देश में इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों को अपनाने में तेजी लाएगा।


यह पहल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विकास को करेगी तेज 

मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि यह पहल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विकास को तेज करेगी और बेहतर इंटरऑपरेबिलिटी, भरोसेमंद सिस्टम और विस्तृत चार्जिंग नेटवर्क के जरिए ईवी इकोसिस्टम को मजबूत बनाएगी।


यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन के अनुरूप

उन्होंने कहा कि यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन के अनुरूप है और इससे सतत (सस्टेनेबल) मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद मिलेगी। कुमारस्वामी ने यह भी कहा कि एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी ईवी इकोसिस्टम बनाने के लिए सरकार और उद्योग के बीच बेहतर सहयोग बेहद जरूरी है।


इस पहल का मकसद 

इस पहल का मकसद चार्जिंग नेटवर्क के बीच बेहतर तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी) बनाना, सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ाना और यूजर्स को एक समान अनुभव देना है, साथ ही सार्वजनिक चार्जिंग सुविधाओं का विस्तार करना भी है।


यह सिस्टम यूनिफाइड कनेक्टर के जरिए स्लो और फास्ट दोनों तरह की चार्जिंग को करेगा सपोर्ट 

इसके तहत ‘लाइट इलेक्ट्रिक कंबाइंड चार्जिंग सिस्टम (एलईसीसीएस)’ जैसे कदम उठाए जा रहे हैं, जिसे भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने मंजूरी दी है। यह सिस्टम एक यूनिफाइड कनेक्टर के जरिए स्लो और फास्ट दोनों तरह की चार्जिंग को सपोर्ट करेगा।


ईवी सेक्टर की 20 से ज्यादा कंपनियों को जोड़ चुका है यह फोरम

यह फोरम अब तक ईवी सेक्टर की 20 से ज्यादा कंपनियों को जोड़ चुका है, जिनमें वाहन निर्माता, चार्जिंग ऑपरेटर, सप्लायर्स और सॉफ्टवेयर कंपनियां शामिल हैं। आने वाले समय में इसमें और संगठनों के जुड़ने की उम्मीद है।


इंडस्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि देश में ईवी अपनाने की रफ्तार बढ़ रही है, ऐसे में चार्जिंग नेटवर्क की असमानता और यूजर अनुभव में अंतर जैसी चुनौतियों को दूर करना जरूरी होगा। उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर इंटरऑपरेबिलिटी और मजबूत सार्वजनिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर ही देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।

Friday, March 13, 2026

जानिए कम बजट में स्टार्टअप शुरू करने का बूटस्ट्रैपिंग कॉन्सेप्ट

स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं और हाथों में करोड़ों की पूंजी नहीं है। इसे पॉपुलर बनाने का प्लान रेडी करने की शुरुआत कर रहे हैं, तो बूटस्ट्रैपिंग का कॉन्सेप्ट समझने की जरूरत है।  खास बात है कि दुनिया की दिग्गज कंपनियों जैसे अमेजॉन, गोप्रो और फेसबुक ने भी यही कॉन्सेप्ट अपनाया और सफलता का रास्ता तय किया। जानिए क्या है बूटस्ट्रैपिंग और कैसे इसका फायदा उठाया जा सकता है।


क्या है बूटस्ट्रैपिंग ?

बूटस्ट्रैपिंग का मतलब है बिना किसी बाहरी फंडिंग के स्टार्टअप की शुरुआत करना। इस पूरी प्रक्रिया में किसी बिजनेस को खुद के दम पर तैयार करना होता है। इस तरह बूटस्ट्रैपिंग वो प्रक्रिया है जब बिजनेस की शुरुआत जीरो से होती है बिना किसी मदद के। इसके लिए आप खुद की सेविंग का इस्तेमाल करते हैं। आमतौर इसकी शुरुआत छोटे स्तर से होती है, लेकिन इसका दायरा धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है। जैसे-जैसे इसका दायरा बढ़‌ता है और बेहतर रणनीति लागू करते हैं, यह आगे बढ़ता है।


इतनी सारी चुनौतियां भी ऐसे समझें

बूटस्ट्रैपिंग वो प्रक्रिया है जब बिजनेस की शुरुआत जीरो से होती है बिना किसी बाहरी मदद के। इसके लिए आप खुद की सेविंग का इस्तेमाल करते हैं।

मान लीजिए आप किसी वेबसाइट की शुरुआत करना चाहते हैं और उससे कमाई करने का प्लान बनाया है। इसमें 10 हजार रुपए सेविंग लगाई। फिर इस वेबसाइट के जरिए प्रोडक्ट सेल किए। कमाई से हुए प्रॉफिट की मदद से सोशल मीडिया पर विज्ञापन चलाए। इस तरह बिजनेस को बढ़ाते हैं।

चुनौतियां-

  • पैसों की लिमिट: कई बार पैसों की कमी के कारण ओनर स्टार्टअप का दायरा नहीं बढ़ा पाते।
  • स्लो ग्रोथः ऐसे स्टार्टअप की ग्रोथ स्लो होती है क्योंकि ये धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं। बढ़ोतरी होने या पिछड़ने के लिए आप ही जिम्मेदार होते हैं।
  • रिस्क आपकाः साझेदारी की स्थिति में रिस्क बंटने पर बोझ आधा हो जाता हैं, लेकिन इसमें ऐसा नहीं होता।

ये स्टार्टअप धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं और कई मामलों में बेहतर साबित होते हैं।


क्या हैं इसके फायदे ?

  • फुल कंट्रोलः आपके स्टार्टअप में कोई साझेदार नहीं होता। यानी व्यापार में प्रॉफिट का हिस्सा किसी को नहीं देना पड़ता। इस तरह पूरे कारोबार का आपका कंट्रोल रहता है। आप किसी भी तरह का फैसला लेने के लिए स्वतंत्र रहते हैं।
  • प्रेशर कमः बूटस्ट्रैपिंग के मामले में दबाव कम होता है। स्टार्टअप ओनर हालात के मुताबिक रणनीति बना सकता है। इसके लिए किसी की अनुमति या सलाह देने की बाध्यता नहीं होती है। किसी भी फैसले को लेने के लिए पार्टनर से न पूछना पड़ता है या उसे बताने की जरूरत महसूस होती है।
  • लाभ पर फोकसः स्टार्टअप ओनर अपने फायदे पर फोकस करते हैं। कम पूंजी के साथ स्टार्टअप का दायरा बढ़ाते हुए वे आगे बढ़ते हैं। जो भी फायदा होता है उसका कुछ हिस्सा स्टार्टअप को फायदा पहुंचाने वाली नीतियों को लागू करने में किया जाता है।
  • किफायती सोचः स्टार्टअप ओनर जो भी रणनीति बनाते हैं वो इस सोच के साथ बनाते हैं कि जिनके लिए फंडिंग की बाध्यता न हो। इस तरह वो धीरे-धीरे ही सही आगे बढ़ते रहते हैं।

Tuesday, March 10, 2026

मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2025: नवीन इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीयन शुल्क (Registration Fee) एवं मोटरयान कर (Road Tax) में विशेष छूट

नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा प्रदेश में स्वच्छ, सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल परिवहन तंत्र को सुदृढ़ करने और कार्बन उत्सर्जन के न्यूनीकरण के उद्देश्य से "मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2025" का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। यह दूरदर्शी नीति 27 मार्च 2025 से संपूर्ण प्रदेश में प्रभावशील हो चुकी है, जिसमें पर्यावरण संवर्धन के लिये इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के क्रय एवं उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए नागरिकों को व्यापक स्तर पर विभिन्न वित्तीय रियायतें एवं विशिष्ट प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। शासन की इस पहल का मुख्य ध्येय पारंपरिक ईंधन आधारित वाहनों के स्थान पर आधुनिक एवं प्रदूषण मुक्त आवागमन के साधनों को जन-सामान्य के लिए सुलभ बनाना है।


राज्य शासन की इस अभिनव नीति में नवीन इलेक्ट्रिक वाहनों के क्रय पर उपभोक्ताओं को पंजीयन शुल्क (Registration Fee) एवं मोटरयान कर (Road Tax) में विशेष छूट प्रदान की जा रही है। यह निर्णय न केवल नागरिकों को आर्थिक संबल प्रदान कर रहा है, अपितु उन्हें भविष्योन्मुखी परिवहन व्यवस्था से जुड़ने के लिये प्रेरित भी कर रहा है। इसके अतिरिक्त, धारणीय विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये पेट्रोल, डीजल एवं सीएनजी संचालित पारंपरिक वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित (रेट्रोफिट) करने की तकनीक को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके लिए नियमानुसार समुचित वित्तीय सहायता सुलभ कराई जा रही है।


चार्जिंग अधोसंरचना विकास के लिये 30 प्रतिशत तक का अनुदान


अधोसंरचना विकास की दिशा में प्रदेश को 'इलेक्ट्रिक व्हीकल हब' के रूप में स्थापित करने के लिये राज्य सरकार द्वारा सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन अथवा चार्जरों की स्थापना पर लगभग 30 प्रतिशत तक के अनुदान (सब्सिडी) का प्रावधान किया गया है। इस दूरगामी कदम से प्रदेश भर में चार्जिंग स्टेशनों के व्यापक तंत्र का विस्तार होगा, जिससे नागरिकों को वाहन को सुगम एवं निर्बाध यात्रा का अनुभव प्राप्त हो सकेगा।


"ईव्ही तरंग पोर्टल" के माध्यम से योजनाओं का सुगम लाभ


EV वाहनों पर प्रोत्साहनों के लाभ वितरण की प्रक्रिया को अत्यंत सरल, पारदर्शी एवं तकनीक-आधारित बनाने के उद्देश्य से शासन द्वारा "ईव्ही तरंग पोर्टल" का संचालन किया जा रहा है। इस डिजिटल अधिष्ठान के माध्यम से पात्र हितग्राही विभिन्न सब्सिडी एवं अन्य लाभों के लिए घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। राज्य शासन ने समस्त प्रदेशवासियों से आह्वान किया है कि वे इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देकर 'स्वच्छ एवं हरित मध्यप्रदेश' के संकल्प को साकार करने में अपनी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें।

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