नई दिल्ली- देश के करोड़ों निवेशकों के लिए साल 2026 की शुरुआत कुछ बदलावों के साथ हो सकती है। केंद्र सरकार जनवरी-मार्च 2026 तिमाही के लिए स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरों की समीक्षा करने वाली है। जानकारों का मानना है कि इस बार पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ), सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाय) और सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (एससीएसएस) जैसी स्कीम्स की ब्याज दरों में कटौती की जा सकती है। वित्त मंत्रालय इस संबंध में आधिकारिक घोषणा कर सकता है। स्मॉल सेविंग्स स्कीम की ब्याज दरें तय करने के लिए सरकार 'श्यामला गोपीनाथ कमेटी' के फॉर्मूले का इस्तेमाल करती है। इसके तहत इन योजनाओं की दरें सरकारी बॉन्ड (जी-एसईसी) के यील्ड पर आधारित होती हैं। पिछले कुछ महीनों में 10 साल के सरकारी बॉन्ड की वील्ड में गिरावट देखी गई है।
सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच यह औसतन 6.54 फीसदी के करीब रही है। फॉर्मूले के हिसाब से इसमें 0.25 फीसदी का स्प्रेड जोड़ने पर पीपीएफ की दर करीब 6.80 फीसदी होनी चाहिए, जबकि अभी यह 7.1 फीसदी मिल रही है। यही अंतर कटौती की संभावना को बढ़ा रहा है। सरकार ने स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरों में आखिरी बार अप्रैल 2024 में बदलाव किए थे, तब से ये स्थिर बनी हुई हैं।
फिलहाल किस पर कितना ब्याज ?
- 8.2 फीसदी सीनियर सिटिजन सेविंग
- 8.2 फीसदी सुकन्या समृद्धि स्कीम
- 7.7 फीसदी एनएससी
- 7.5 फीसदी किसान विकास पत्र
- 7.5 फीसदी 5 साल की एफडी
- 7.4 फीसदी मंथली इनकम स्कीम
- 7.1 फीसदी पीपीएफ
- 7.1 फीसदी 3 साल की एफडी
- 7.0 फीसदी 2 साल की एफही
- 6.9 फीसदी 1 साल की एफडी
- 6.7 फीसदी 5 साल की आरडी
- 4.0 फीसदी सेविंग डिपॉजिट
रेपो रेट कट का भी दिखा असर- 2025 के दौरान रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने रेपो रेट में करीब 1.25 फीसदी तक की कटौती की है। इसके बाद बैंकों ने भी अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) दरों को कम करना शुरू कर दिया है। रिटेल महंगाई दर में आई कमी भी सरकार की ब्याज दरें घटाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। आमतौर पर जब बाजार में ब्याज दरें गिरती है, तो सरकार भी डाकघर की योजनाओं पर बोझ कम करने के लिए दरों में संशोधन करती है।
मध्य वर्ग, बुजुर्गों पर होगा असर- देश में बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित निवेश के लिए डाकघर की योजनाओं पर निर्भर हैं। खासकर सीनियर सिटीजन अपनी नियमित आय के लिए एससीएसारस (अभी 8.2 फीसदी ब्याज) का सहारा लेते हैं। वहीं, बेटियों के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना (8.2 फीसदी) सबसे लोकप्रिय है। अगर सरकार ब्याज दरों में कटौती करती है, तो मध्य वर्गीय परिवारों और पेंशनभोगियों की मासिक कमाई पर सीधा असर पड़ेगा।
एक्सपर्ट्स की राय- फाइनेशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि भले ही फॉर्मूला दरें घटाने की ओर इशारा कर रहा है, लेकिन सरकार इसे टाल भी सकती है। वित्त मंत्रालय अक्सर छोटे निवेशकों के हितों और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फॉर्मूले से हटकर फैसले लेता है। पिछले कई मौकों पर बॉन्ड यील्ड गिरने के बावजूद दरों को नहीं बदला गया था ताकि आम जनता को बचत पर नुकसान न हो।
