Saturday, April 18, 2026

PM News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण बिल पर जताया गहरा दुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शनिवार, 18 अप्रैल 2026 को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में महिला आरक्षण बिल (संविधान 131वां संशोधन विधेयक) के लोकसभा में पारित न होने पर गहरा दुख व्यक्त किया। रात 8:30 बजे शुरू हुए इस संबोधन में उन्होंने देश की महिलाओं से माफी मांगी और विपक्ष पर तीखा प्रहार किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे लिए देशहित सर्वोपरि है। लेकिन कांग्रेस, DMK, TMC और समाजवादी जैसी पार्टियों की स्वार्थी राजनीति का नुकसान देश की नारी शक्ति को उठाना पड़ा है। 


संबोधन की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

  • देश की महिलाओं से क्षमा: पीएम मोदी ने कहा कि सरकार के भरसक प्रयासों के बावजूद 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में संशोधन नहीं हो पाया, इसके लिए वे देश की माताओं और बहनों से क्षमा प्रार्थी हैं।
  • विपक्ष पर तीखा हमला: उन्होंने कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी और डीएमके जैसे दलों को इस विधेयक के गिरने के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने विपक्षी दलों के व्यवहार को "नारी शक्ति की भ्रूण हत्या" करार दिया और कहा कि उन्होंने अपने स्वार्थ के लिए महिलाओं के सपनों को कुचला है।
  • परिसीमन पर स्पष्टीकरण: प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार ने पहले दिन से साफ कर दिया था कि परिसीमन से किसी राज्य की भागीदारी कम नहीं होगी और सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में बढ़ेंगी, लेकिन विपक्ष ने इसे स्वीकार नहीं किया।
  • अजेय संकल्प: उन्होंने जोर देकर कहा कि महिला आरक्षण को लेकर उनका आत्मबल अजेय है और यह प्रयास रुकेगा नहीं। उन्होंने विश्वास जताया कि देश की महिलाएं इस मानसिकता का करारा जवाब देंगी। 


यह संबोधन शुक्रवार (17 अप्रैल) को लोकसभा में विधेयक के बहुमत न मिलने (352 वोटों की जरूरत के मुकाबले केवल 298 पक्ष में) के कारण विफल होने के बाद दिया गया है।

Wednesday, April 8, 2026

हर विधानसभा में एक खेल परिसर का निर्माण हमारा लक्ष्य : मंत्री श्री सारंग

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने बुधवार, अप्रैल 8, 2026  को भोपाल के टीटी नगर स्टेडियम में विभाग की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने आगामी समर कैंप में नवाचार, खेल अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, खिलाड़ी कल्याण समिति को सशक्त बनाने और ओलम्पिक स्तर की सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए।


सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने बुधवार को टी.टी. नगर स्टेडियम, भोपाल स्थित मेजर ध्यानचंद हॉल में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विभागीय समीक्षा बैठक ली। मंत्री श्री सारंग ने विभागीय योजनाओं, वर्तमान कार्यों की प्रगति तथा आगामी कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मंत्री श्री सारंग ने निर्देश दिए कि प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा में एक आधुनिक खेल परिसर के निर्माण के लक्ष्य को प्राथमिकता के साथ शीघ्र पूर्ण करने की दिशा में विशेष ध्यान दें। इसके लिए पृथक एवं प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि खेल अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को निखारने का आधार बनेगा।


मंत्री श्री सारंग ने निर्देश दिए कि इस वर्ष समर कैंप को विशेष एवं नवाचारपूर्ण रूप दिया जाए। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में अधिक से अधिक नए बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए तथा उनके अभिभावकों को भी खेल गतिविधियों में शामिल करने की योजना बनाई जाए। इससे समाज में खेल के प्रति सकारात्मक वातावरण का निर्माण होगा तथा परिवार स्तर पर खेल संस्कृति को प्रोत्साहन मिलेगा।


मंत्री श्री सारंग ने प्रदेश में पूर्व से निर्मित खेल परिसरों के उन्नयन (अपग्रेडेशन) पर विशेष ध्यान देने के निर्देश देते हुए कहा कि इन परिसरों में युवा केंद्रित गतिविधियों को भी जोड़ा जाए जिससे अधिक से अधिक युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित हो सके और खेल के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास को भी बढ़ावा मिल सके।


मंत्री श्री सारंग ने खिलाड़ी प्रशिक्षण कल्याण समिति का पुनरावलोकन कर उसमें आवश्यक संशोधन करते हुए उसे और अधिक प्रभावी एवं सशक्त बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समिति की कार्यप्रणाली ऐसी होनी चाहिए जिससे खिलाड़ियों को अधिकतम लाभ मिल सके और उनके प्रशिक्षण एवं कल्याण से संबंधित आवश्यकताओं की समय पर पूर्ति सुनिश्चित हो सके।


बैठक के प्रमुख बिंदु:

  • समर कैंप और नई प्रतिभाएं: इस वर्ष समर कैंप को विशेष व नवाचारपूर्ण बनाने के निर्देश, ताकि अधिक से अधिक बच्चों और उनके अभिभावकों को खेल गतिविधियों से जोड़ा जा सके।
  • खेल अधोसंरचना का उन्नयन (Upgradation): प्रदेश के मौजूदा खेल परिसरों को अपग्रेड करने और उनमें युवा-केंद्रित गतिविधियां बढ़ाने पर जोर।
  • खिलाड़ी कल्याण: खिलाड़ी प्रशिक्षण कल्याण समिति की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और सशक्त बनाने के निर्देश।
  • भविष्य की योजना (ओलम्पिक फोकस): नाथू बरखेड़ा स्टेडियम के लिए 10 साल बाद की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, ओलम्पिक स्तर की सुविधाओं (वाटर ट्रीटमेंट, वाई-फाई, ईवी चार्जिंग आदि) के साथ मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश।
  • एशियन गेम्स की तैयारी: खिलाड़ियों के बेहतर प्रदर्शन के लिए विशेष प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश।


बैठक में खेल एवं युवा कल्याण के प्रमुख सचिव श्री मनीष सिंह, उप सचिव श्री अजय श्रीवास्तव, संचालक श्री अंशुमान यादव, संयुक्त संचालक श्री बी.एस. यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

सलूम्बर में फैली अज्ञात बीमारी पर बड़ा एक्शन, घर-घर सर्वे शुरू

राजस्थान के सलूम्बर जिले के लसाड़िया ब्लॉक के घाटा और लालपुरा गांवों में फैली अज्ञात बीमारी के कारण अब तक 7 बच्चों की मौत हो चुकी है। इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने "हाई अलर्ट" मोड पर बड़े पैमाने पर एक्शन शुरू कर दिया है। राजस्थान के सलूम्बर जिले में बच्चों की मौत के मामलों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर स्वास्थ्य अभियान शुरू किया है। इस मामले में अज्ञात बीमारी की जांच के लिए तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं।


मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के निर्देश पर उदयपुर संभाग के सभी सात जिलों में निगरानी और रोकथाम अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर भी स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। सरकार ने विशेषज्ञ टीमों का गठन किया है, जो बीमारी के कारणों की जांच कर रही हैं। साथ ही RNT Medical College की टीम और राज्य स्तरीय दल ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर इलाज और जांच व्यवस्था का आकलन किया।


स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 3,690 टीमों ने घर-घर जाकर सर्वे किया है और 52,000 से अधिक घरों को कवर किया गया है। इस दौरान 275 लोगों में बीमारी के लक्षण पाए गए, जिनमें से 25 को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पतालों में भेजा गया। इसके अलावा 13,000 से अधिक स्थानों पर जागरूकता अभियान भी चलाया गया, ताकि लोग सावधानी बरत सकें। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सलूम्बर के सेमारी गांव में 4 साल के एक बच्चे की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं, 651 मरीजों को मौके पर ही इलाज दिया गया।


बीमारी को फैलने से रोकने के लिए मच्छरजनित रोगों के खिलाफ भी अभियान चलाया गया, जिसमें 2,557 स्थानों पर एंटी-लार्वा गतिविधियां की गईं। जांच के लिए 1,796 ब्लड स्लाइड तैयार किए गए और 94 सैंपल लैब में भेजे गए हैं। सरकार ने लोगों से अपील की है कि अगर किसी को बुखार या अन्य लक्षण दिखें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें और सभी स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का पालन करें।


स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन और घर-घर सर्वे:

  • 3,690 टीमें तैनात: सरकार ने पूरे संभाग में 3,600 से अधिक टीमें तैनात की हैं।
  • 52,000 घरों का सर्वे: इन टीमों ने अब तक 52,000 से अधिक घरों का दरवाजा खटखटाकर स्वास्थ्य जांच की है।
  • 275 संदिग्ध मरीज मिले: सर्वे के दौरान बीमारी के लक्षण वाले 275 लोगों की पहचान की गई, जिनमें से 25 को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पतालों में भेजा गया है।
  • विशेषज्ञों की निगरानी: मुख्यमंत्री के निर्देश पर जयपुर और उदयपुर के विशेष डॉक्टरों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में डेरा डाले हुए हैं। 


बीमारी के मुख्य लक्षण और वर्तमान स्थिति:

  • लक्षण: प्रभावित बच्चों में तेज बुखार, उल्टी, पेट दर्द, दस्त और शरीर में ऐंठन जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। बीमारी इतनी गंभीर है कि कुछ मामलों में 24 घंटे के भीतर ही बच्चे दम तोड़ रहे हैं।
  • प्रभावित आयु वर्ग: मरने वाले सभी बच्चों की उम्र मुख्य रूप से 2 से 4 वर्ष के बीच है।
  • जांच: शुरुआती सैंपल्स में कुछ सामान्य वायरस की रिपोर्ट नेगेटिव आई है, इसलिए बीमारी का सटीक कारण अभी भी "अज्ञात" बना हुआ है।
  • निवारक उपाय: प्रशासन द्वारा गांवों में फोगिंग, एंटी-लार्वा छिड़काव और लोगों को उबला हुआ पानी पीने की सलाह दी जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाने कलेक्टर आदेश जारी, वर्षभर होंगे आयोजन

सोमनाथ मंदिर पर 1026 ईस्वी में हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में, संस्कृति संचालनालय, भोपाल के निर्देशों के तहत 11 जनवरी 2026 से 11 जनवरी 2027 तक देशभर में "सोमनाथ स्वाभिमान पर्व - 1000 साल की अटूट आस्था" के तहत वर्षभर राष्ट्रीय स्मरणोत्सव मनाया जाएगा। इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए जिला स्तर पर नोडल अधिकारी (विदिशा में सहायक संचालक प्रियांश शर्मा) नियुक्त किए गए हैं, जो वर्षभर सांस्कृतिक, शैक्षणिक और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेंगे।


मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति संचालनालय, भोपाल के निर्देशानुसार सोमनाथ मंदिर पर हुए प्रथम अभिलिखित आक्रमण के 1000 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 11 जनवरी 2026 से 11 जनवरी 2027 तक “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” के रूप में वर्षभर राष्ट्रीय स्मरणोत्सव मनाने का निर्णय लिया गया है।


इसी क्रम में कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता द्वारा जिले में आदेश जारी कर उक्त अवधि में विभिन्न गतिविधियों एवं आयोजनों के सफल क्रियान्वयन हेतु शिक्षा विभाग के सहायक संचालक श्री प्रियांश शर्मा को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्हें कार्यक्रमों के समन्वय, संचालन एवं मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


जारी आदेश के अनुसार, वर्षभर जिले में विभिन्न शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं जागरूकता आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य ऐतिहासिक विरासत के प्रति जनमानस में जागरूकता एवं स्वाभिमान की भावना को सुदृढ़ करना है।


प्रशासन ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया है कि वे आपसी समन्वय के साथ निर्धारित गतिविधियों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें, ताकि यह राष्ट्रीय स्मरणोत्सव सार्थक रूप से संपन्न हो सके।


मुख्य बिंदु:

  • उद्देश्य: 1000 वर्षों के सभ्यतागत गौरव, अटूट आस्था और सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की कहानी को रेखांकित करना।
  • अवधि: यह आयोजन 11 जनवरी 2026 से शुरू होकर पूरे एक साल यानी 11 जनवरी 2027 तक चलेगा।
  • आयोजन: वर्षभर विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जागरूकता फैलाई जाएगी।
  • नोडल अधिकारी: स्थानीय प्रशासन द्वारा जिला स्तरीय नोडल अधिकारियों को इन कार्यक्रमों की सफलता और मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


यह पर्व सोमनाथ की जीवटता और सनातन संस्कृति के पुनर्उत्थान का स्मरणोत्सव है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जा रहा है।

राज्य स्तरीय वार्षिक जैव-विविधता पुरस्कार-2025 के आवेदन की अंतिम तिथि 20 अप्रैल

मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा 'राज्य स्तरीय वार्षिक जैव विविधता पुरस्कार-2025' (पुरस्कार वर्ष 2024 के कार्यों हेतु) के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित की गई हैं, जिसकी अंतिम तिथि 20 अप्रैल 2026 है। यह पुरस्कार वन, कृषि, मत्स्य पालन, पंचायत स्तर की समितियों और व्यक्तिगत/संस्थागत श्रेणियों में जैव विविधता संरक्षण के उत्कृष्ट कार्यों के लिए दिया जाता है।


प्रदेश में जैव-विविधता संरक्षण को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा राज्य स्तरीय वार्षिक जैव विविधता पुरस्कार-2025 के लिये प्रविष्टियाँ 20 अप्रैल 2026 तक आमंत्रित की गई हैं। विभिन्न श्रेणियों में जैव-विविधता पुरस्कार के लिये जैव-विविधता स्वामित्व रखने वाले वन, कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मछली पालन, जल संसाधन विभाग और जैव-विविधता प्रबंधन समिति ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, नगर पंचायत, नगर पालिका तथा नगर निगम स्तर पर गठित जैव-विविधता प्रबंधन समितियाँ। संस्थागत (अशासकीय), व्यक्तिगत (अशासकीय), व्यक्तिगत (शासकीय) पहुंच एवं लाभ प्रभाजन के अधिकतम अनुबंध पहुंच एवं लाभ प्रभाजन की अधिकतम राशि श्रेष्ठ वनमंडल एवं श्रेष्ठ वनवृत्त के अंतर्गत विशिष्ट कार्य करने वाले अपनी प्रविष्टियाँ जमा कर सकते हैं।


प्रविष्टियों का निर्धारित प्रारूप एवं अन्य जानकारियॉ बोर्ड की वेबसाईट www-mpforest.gov.in/mpsbb से डाउन लोड करें। जिन संस्था द्वारा राज्य स्तरीय वार्षिक जैव-विविधता पुरस्कार-2024 के लिये प्रविष्टियाँ प्रेषित की गई हैं, वो प्रविष्टि प्रेषित ना करें।


मुख्य विवरण:

  • उद्देश्य: जैव विविधता के संरक्षण, प्रबंधन और जागरूकता को बढ़ावा देना।
  • पात्रता (श्रेणियाँ): जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ (BMC), वन/कृषि/उद्यानिकी/पशुपालन विभाग, अशासकीय संस्थाएँ (NGO), और व्यक्तिगत स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति।
  • आवेदन प्रक्रिया: प्रविष्टियाँ निर्धारित प्रारूप में MP Forest Website से डाउनलोड करके भेजी जा सकती हैं।
  • नियम: वे संस्थाएँ आवेदन न करें जिन्होंने 2024 के पुरस्कार के लिए पहले ही प्रविष्टियाँ भेज दी हैं।


पुरस्कार के बारे में अधिक जानकारी और आवेदन फॉर्म वेबसाइट www-mpforest.gov.in/mpsbb से प्राप्त किए जा सकते हैं।

Tuesday, April 7, 2026

महिला नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में बढ़ रहा भारत, प्रधानमंत्री ने साझा किया लेख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज, 7 अप्रैल 2026 को, केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी द्वारा लिखित एक लेख साझा किया है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला नेतृत्व वाली शासन व्यवस्था को लेकर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी द्वारा लिखित एक लेख साझा किया है। इस लेख में भारत में महिलाओं की भागीदारी को और सशक्त बनाने के लिए एक स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।


यह लेख भारत में महिला नेतृत्व वाली शासन व्यवस्था (Women-led Governance) को मजबूत करने के सरकार के दृष्टिकोण पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री ने इस लेख के माध्यम से निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं को रेखांकित किया: 


  • महिला नेतृत्व को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रतिनिधित्व को वास्तविक प्रभाव में बदलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने हमेशा नारी शक्ति को प्राथमिकता दी है और इसी सोच के तहत महिला-नेतृत्व वाली शासन व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम का जिक्र- प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत को महिला-नेतृत्व वाली शासन व्यवस्था की ओर ले जा रही है, जो विकसित भारत के निर्माण का एक प्रमुख स्तंभ बनेगी।
  • लेख में भविष्य की कार्ययोजना- केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी के इस लेख में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका मजबूत करने और शासन में उनकी प्रभावी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आगे की रणनीति का विस्तार से उल्लेख किया गया है।
  • महिला सशक्तिकरण पर बढ़ता फोकस- सरकार की ओर से महिला सशक्तिकरण को लेकर लगातार पहल की जा रही है, जिसमें शिक्षा, रोजगार, राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि महिला नेतृत्व को मजबूत करने से देश के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी।

योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, ग्रेटर नोएडा में ‘मेट्रो विश्वविद्यालय’ को मंजूरी

उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 7 अप्रैल 2026 को हुई बैठक में ग्रेटर नोएडा में एक नए निजी विश्वविद्यालय, ‘मेट्रो विश्वविद्यालय’ (Metro University), की स्थापना को मंजूरी दे दी है।


योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में उच्च शिक्षा से जुड़े अहम प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत ग्रेटर नोएडा में निजी क्षेत्र के अंतर्गत ‘मेट्रो विश्वविद्यालय’ की स्थापना को स्वीकृति दी गई है। इसे प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि यह निर्णय उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के तहत लिया गया है। इस अधिनियम के माध्यम से निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, विनियमन और संचालन की स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।


मंत्री ने बताया कि प्रायोजक संस्था सनहिल हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से आवंटित 26.1 एकड़ भूमि पर ‘मेट्रो विश्वविद्यालय’ स्थापित करने का प्रस्ताव दिया गया था। विधिक परीक्षण के बाद इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके लिए ‘उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ लागू करने और संस्था को संचालन प्राधिकार-पत्र जारी करने का भी निर्णय लिया गया है।


सरकार का मानना है कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना से प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा के नए अवसर सृजित होंगे। इससे युवाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास के बेहतर मौके मिलेंगे, जिससे उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी।


योगी सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने पर जोर दे रही है। नए विश्वविद्यालयों की स्थापना से न केवल शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।


इसके अलावा कैबिनेट ने शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में भी बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। शिक्षामित्रों का मानदेय 10,000 रुपए से बढ़ाकर 18,000 रुपए प्रतिमाह कर दिया गया है, जिससे प्रदेश के लाखों शिक्षा कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा।


इस परियोजना के मुख्य विवरण निम्नलिखित हैं:

  • क्षेत्रफल और स्थान: यह विश्वविद्यालय ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा आवंटित 26.1 एकड़ भूमि पर बनाया जाएगा।
  • प्रस्तावक संस्था: इस विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव सनहिल हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड (Sunhill Healthcare Pvt Ltd) द्वारा दिया गया था।
  • कानूनी ढांचा: इसकी स्थापना 'उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019' के प्रावधानों के तहत की जाएगी. इसके लिए जल्द ही एक अध्यादेश (Ordinance) लाया जाएगा।


मुख्य उद्देश्य:

  • राज्य में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना और छात्रों को आधुनिक शिक्षा प्रदान करना।
  • उद्योग की जरूरतों के अनुसार कौशल-आधारित और रोजगारपरक पाठ्यक्रम (Job-oriented courses) उपलब्ध कराना।
  • स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर और निवेश को प्रोत्साहित करना।


उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के अनुसार, यह कदम उत्तर प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने और युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय है।

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