Monday, April 6, 2026

पशुओं को खुरपका-मुंहपका रोग से बचाने के लिए किया गया टीकाकरण

वेटरनरी विभाग द्वारा जिले के ग्राम नीमटोन में पशुओं को खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) रोग से सुरक्षित रखने के लिए पशुओं का एफएमडी टीकाकरण किया गया तथा रोग की निगरानी के उद्देश्य से प्री-वैक्सीनेशन सैंपल भी एकत्रित किए गए। विभागीय टीम ने पशुपालकों को पशुओं के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और समय-समय पर टीकाकरण कराने की सलाह दी।


 क्या है खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) रोग

खुरपका-मुंहपका (FMD) पशुओं में होने वाला एक अत्यधिक संक्रामक और घातक विषाणु (वायरल) रोग है, जो मुख्य रूप से दो खुर वाले पशुओं जैसे गाय, भैंस, भेड़, बकरी और सूअर को प्रभावित करता है। यह 'पिकोरना' परिवार के 'एफथोनस' (Aphthovirus) विषाणु के कारण होता है।


प्रमुख लक्षण (Symptoms)

संक्रमित पशु में निम्न लक्षण दिखाई देते हैं:

  • तेज बुखार: पशु को 104°F से 106°F तक बुखार रहता है।
  • मुंह में छाले: जीभ, मसूड़ों और होठों पर फफोले या छाले पड़ जाते हैं, जिससे पशु को खाने-पीने में बहुत दर्द होता है।
  • लार टपकना: मुंह से लगातार अत्यधिक लार गिरती रहती है।
  • खुरों में घाव: खुरों के बीच में सूजन और घाव हो जाते हैं, जिससे पशु लंगड़ाकर चलने लगता है।
  • उत्पादन में कमी: दूध देने वाले पशुओं के दूध उत्पादन में भारी गिरावट आती है।
  • अन्य: थनों में सूजन, भूख न लगना, सुस्ती और गाभिन पशुओं में गर्भपात की स्थिति बन सकती है।


रोग फैलने के कारण (Causes of Spread)

यह बीमारी बहुत तेजी से फैलती है और इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • संक्रमित पशु के सीधे संपर्क में आने से।
  • दूषित चारा और पानी के सेवन से।
  • हवा के जरिए भी यह विषाणु फैल सकता है।
  • पशुओं के परिवहन वाहनों और उपकरणों के माध्यम से।


बचाव और नियंत्रण (Prevention & Control)

  • टीकाकरण (Vaccination): एफएमडी वैक्सीनेशन इस रोग से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है, जिससे पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और संक्रमण फैलने का खतरा कम होता है। बचाव का सबसे प्रभावी तरीका नियमित टीकाकरण है। सरकार द्वारा साल में दो बार (छह-छह महीने के अंतराल पर) टीकाकरण अभियान चलाया जाता है।
  • अलगाव (Isolation): बीमार पशु को तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग कर देना चाहिए।
  • साफ-सफाई: पशुशाला में फिनाइल या डेटोल से सफाई करनी चाहिए और प्रभावित क्षेत्र में लोगों की आवाजाही कम रखनी चाहिए।
  • घरेलू उपचार: प्रभावित हिस्सों (मुंह और खुर) को लाल दवा (पोटेशियम परमैंगनेट) या नीम के काढ़े से धोना फायदेमंद होता है।


यह रोग इंसानों के स्वास्थ्य के लिए खतरा नहीं है, लेकिन यह पशुपालन अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाता है।

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