शहर की भीड़भाड़ से दूर प्रकृति के करीब रहवास के लिए आरंभकी गई होम स्टे की सुविधा अब शहरों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह न सिर्फ पर्यटन बल्कि विभिन्न कार्यों से शहर आने वाले लोग भी इनमें ठहर रहे हैं। यही वजह है कि पूरे प्रदेश के पर्यटन स्थलों के साथ ही भोपाल-इंदौर जैसे शहरों में भी होम स्टे की संख्या अब तेजी से बढ़ रही हैं।
होम स्टे के माध्यम से सैलानियों को स्थानीय कला-संस्कृति के बारे में जानने का मौका मिल रहा है। यही वजह है कि वे किसी होटल या लाज के बजाय यहां रुकना पसंद कर रहे हैं। भोपाल की बात करें तो भोपाल (सीहोर भी शामिल) में करीब 40 होम स्टे संचालित हैं। शहर के भीतर बावड़िया कला, रायसेन रोड, चूना भट्टी, नेहरू नगर, पिपलानी और दस नंबर पर होम स्टे संचालित हैं। बाहरी क्षेत्र केरवा, कलियासोत, बिशनखेड़ी जैसी जगहों पर भी होम स्टे चल रहे हैं। इनके बारे में बुकिंग और सुविधाओं आदि की जानकारी एमपी टूरिज्म के पोर्टल (https://www.mptourism.com/homestays/index.php?route=hotel/home) पर उपलब्ध है।
यहां पर्यटकों को रीति-रिवाजो संस्कृति और जीवनशैली समझने का मिल रहा अवसर
मप्र पर्यटन के सहयोग से आरंभ की गई होम स्टे की योजना से जहां लोगों को रोजगार मिल रहा है। वहीं देश-विदेश के सैलानी भारत की आत्मा के बारे में जान पा रहे हैं। होम स्टे वास्तव में आवासीय संपत्ति मालिकों के लिए पर्यटन और आतिथ्य व्यवसाय का हिस्सा बनने का अवसर है। यह योजना उन सभी आवास और काटेज मालिकों के लिए है, जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आवास और भोजन की सुविधा प्रदान कर सकते हैं। यह योजना भारत के मूल दर्शन और परंपरा, वसुधैव कुटुम्बकम् पर आधारित है। यह मध्य प्रदेश की संस्कृति, भोजन, रीति-रिवाजों और जीवन शैली से पर्यटकों को परिचित कराने में सक्षम बना रही है। मप्र पर्यटन ने एक अप्रैल 2010 से बिस्तर और नाश्ता (बीएंडबी) योजना के तहत होम स्टे शुरू किया था। बाद में वर्ष 2018 में बकायदा नीति बनाई गई।
मप्र में करीब 400 होम स्टे संचालित हैं, जिसमें सबसे ज्यादा 85 उज्जैन में हैं। इसके बाद दूसरे नंबर पर इंदौर है, जहां 40 से अधिक होम स्टे हैं। बड़े शहरों में पर्यटकों से ज्यादा अन्य कार्यों से आने वाले लोग ठहरते हैं। वहीं, पर्यटन स्थलों पर सिर्फ पर्यटक ही आ रहे हैं। होम स्टे योजना तो अच्छी है पर अभी प्रचार-प्रसार की जरूरत है। होटल और लाज के मकाबले होम स्टे की अवधारणा बहुत उपयुक्त है। मप्र के नर्मदा तटीय क्षेत्रों में होम स्टे का संचालन किया जा रहा है। यहां बड़ी संख्या में नर्मदा के किनारों पर स्थित पर्यटन स्थलों के सैलानी पहुंचते हैं।
