Thursday, March 19, 2026

गर्मी में हाइपरटेंशन बन सकता है जानलेवा, इन बातों का रखें ध्यान?

हर बढ़ते दिन के साथ गर्मी का पारा ऊपर जाने लगा है। ऐसे में आने वाले दिनों में सेहत की चुनौतियां बढ़ेंगी, खासकर ब्लडप्रेशर को लेकर सतर्क रहने की जरूरत होगी। गर्मी के दिनों में रक्तचाप और हृदय से जुड़े किस तरह के हो सकते हैं जोखिम, बचाव के लिए किन बातों का रखना है ध्यान?


हृदय से जुड़ी समस्या अब हर उम्र में हो रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (2019-2021) के अनुसार भारत में 15 से 54 वर्ष के आयु वर्ग में हर पांच में से लगभग एक व्यक्ति को हाइपरटेंशन है। क्या आप जानते हैं कि बढ़ता तापमान न केवल जन-जीवन को अस्त-व्यस्त कर सकता है, बल्कि यह चुपके से हदय के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है? इसलिए आने वाले दिनों में पारा बढ़ने पर कैसी होनी चाहिए आपकी तैयारी, यही समय है कि हम यह अच्छी तरह समझ लें। हालांकि हमारा शरीर मौसम के अनुकूल स्वयं ही बदलाव करने में माहिर होता है, पर उचित सावधानी न रखी जाए तो बड़ी मुसीबत पी बन सकती है। 


वास्तव में पारा बढ़ने पर रक्तवाहिकाएं शरीर को ठंडा यानी सामान्य तापमान में लाने के प्रयास में जुट जाती हैं। इस प्रक्रिया में रक्तचाप में उत्तार-चढ़ाव होता है और शरीर से पसीना भी अधिक निकलता है। यही वह चीज है, जिसका गर्मी के मौसम में सर्वाधिक ध्यान रखना चाहिए। दरअसल, पसीना निकलने से शरीर में पानी की कमी या डिहाइड्रेशन का खतरा रहता है, जिससे बचना है। अन्यथा रक्तचाप सामान्य से बहुत कम होने से नसों में थक्के जमने की आशंका रहती है। हृदय को रक्त पंप करने में समस्या आती है, उस पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जो आपतकालको स्थिति यानी हार्ट अटैक या स्ट्रोक की स्थिति भी उत्पन्न कर सकता है।


गर्मी में हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) के मरीजों को डिहाइड्रेशन, चक्कर आना, कमजोरी, और हीट स्ट्रोक का अधिक खतरा होता है। अत्यधिक गर्मी के कारण रक्त वाहिकाएं फैलने से बीपी में अचानक गिरावट या वृद्धि हो सकती है, जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और दिल का दौरा या किडनी की समस्या का जोखिम बढ़ जाता है।


एसी के बिना रहने की आदत डालें

गर्मी शुरू होते ही घर से लेकर दफ्तर तक सब जगह एसी चलाया जाने लगता है। कुछ लोग एसी का मान बहुत कम रखना पसंद करते हैं। अगर रक्तचाप की समस्या है तो ऐसा करने से बचना चाहिए। अगर लंबे समय तक एयरकंडीशनर में काम-काज करना पड़े तो प्रयास करें कि इसे एक सामान्य तापमान 24 डिग्री सेल्सियस पर ही सेंट करें। बता दें कि अधिक कूलिंग रखने से आपको प्यास कम लग सकती है। इससे डिहाइड्रेशन का खतरा रहता है। शरीर का पसीना बाहर नहीं निकालने से शरीर में सोडियम यानी नमक बना रहता है। यह हृदयरोगियों के लिए काफी जोखिम भरा हो सकता है। एसी में निरंतर रहने के आदी होने से आप शारीरिक गतिविधि भी कम करने लगते हैं या इससे बचना चाहते हैं। साथ ही यह गर्मी सहने की क्षमता को कम करने के साथ हृदय की सेहत को भी नुकसान पहुंचा सकता है।


गर्मी में हाइपरटेंशन मरीजों के लिए प्रमुख जोखिम 

  • डिहाइड्रेशन और बीपी का उतार-चढ़ाव: पसीने के माध्यम से शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है, जो रक्तचाप (BP) को अस्थिर कर सकता है।
  • हृदय पर अतिरिक्त बोझ: शरीर को ठंडा रखने के लिए हृदय को सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जो दिल का दौरा या अनियमित धड़कन का कारण बन सकता है।
  • दवाओं का प्रभाव: उच्च रक्तचाप की कुछ दवाएं (जैसे मूत्रवर्धक या डाययुरेटिक्स) गर्मी में निर्जलीकरण (dehydration) के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।


उच्च रक्तचाप और हाइपरटेंशन

सामान्य रक्तचाप 120/80 होना चाहिए पर हाइपरटेंशन है तो यह 140/90 के आसपास रहता है। एक रीडिंग में उच्च रक्तचाप है तो यह हाइपरटेंशन हो आवश्यक नहीं। सात दिन लगातार मापने के बाद यदि तीन दिन या इससे अधिक समय तक उच्च रक्तचाप रहे तो आप इसकी चपेट में हो सकते हैं। 


हाइपरटेंशन है छिपा हुआ खतरा 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के ग्लोबल रिपोर्ट आन हाइपरटेंशन 2025 के अनुसार, वैश्विक आबादी का तकरीबन 34 प्रतिशत हिस्सा हाइपरटेंशन से पीड़ित है। भारत में 21 करोड़ से ज्यादा वयस्क हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं। इनमें से 17 करोड़ का रक्तचाप अनियंत्रित रहता है।


डिहाइड्रेशन से बचें

शरीर के तापमान को स्थिर बनाने के लिए पानी जरूरी है। इससे हार्ट को काम करने में आसानी होती है। गर्मी के दिनों में खूब पसीना निकलता है। इसे संतुलित रखने के लिए नींबू पानी, पुदीने और खीरे के पानी का उपयोग भी कर सकते हैं। ओआरएस का घोल भी ले सकते हैं।


रक्तचाप की जांच: बचाव का बेहतर उपाय

सर्दी में हृदयरोगियों को सावधानी बरतनी होती है तो गर्मी में भी अलग तरह की दिक्कत होती है। इसमें सबसे आम है रक्तचाप का कम होना। इसके लिए आपको पानी खूब पीना चाहिए। शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। नियमित रक्तचाप जांच कराएं ताकि उसे नियंत्रण में रखने में आसानी हो। यदि हाइपरटेंशन है तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह एक छुपा हुआ जोखिम है, जो लापरवाही से आपको गंभीर हृदयरोग की स्थिति में पहुंचा सकता है।


डाक्टर की सलाह से ही दवाइयां कम करें

गर्मी में ऐसी जगहों पर जाने से परहेज करें जहां अधिक गर्मी और घुटन हो या पसीना आने के साथ लंबे समय तक खड़े रहना पड़े। अक्‍सर देखा गया है कि ऐसे में बीपी Low हो जाता है और लोग बेहोश हो जाते हैं। वहीं, यदि आप हृदयरोग से जुड़ी समस्याओं की दवाइयां ले रहे हैं तो यह भी रक्तचाप को कम कर सकती हैं। दरअसल, इन दवाइयों का काम ही होता है आपके शरीर के अतिरिक्त द्रव को निकालना या रक्तचाप कम करना, लेकिन स्वयं से दवाइयां कम न करें। चिकित्सक से ही पता चलेगा कि आपकी वास्तविक स्थिति क्या है और कौन सी व कितनी दवा कम करनी है।


खानपान में रखें ध्यान

  • सोडियम की मात्रा, अम्ल और क्षार का संतुलन और कोशिकाओं के सामान्य कार्य के लिए जरूरी है, लेकिन इसकी अधिकता रक्तचाप बढ़ा सकती है।
  • फलों व सब्जियों में पोटेशियम पर्याप्त होता है, हृदय की सेहत के लिए यह जरूरी है।
  • ताजे फल व सब्जियों का सेवन करें। साबुत अनाज और फलियों का सेवन अच्छा है।
  • मोटें अनाज जो इस मौसम के अनुकूल है, जैसे जौ, रागी आदि का सेवन करें।
  • अधिक ठंडे खाद्य पदार्थ के सेवन से परेशानी महसूस कर सकते हैं, उसे सामान्य करें।
  • घी, सरसों तेल अच्छे माने गए है, पर इनका सेवन भी सीमित करना चाहिए।
  • जंक व मसालेदार खाने को ना कहे। डिब्बाबंद खाना भी आपके लिए सही नहीं है।
  • वजन कम करने के लिए खाना छोडने जैसे अचानक बदलाव घातक प्रभाव डाल सकते है।


गर्मी में हाइपरटेंशन मरीजों के लिए प्रमुख सावधानियां

  • भरपूर पानी पिएं: शरीर में पानी की कमी न होने दें, भले ही प्यास न लगे।
  • धूप से बचें: अत्यधिक गर्मी या बढ़े हुए तापमान में बाहर जाने से बचें। सुबह 11 बजे से दोपहर 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें। 
  • बीपी चेक करें: अपना ब्लड प्रेशर नियमित रूप से मॉनिटर करते रहें।
  • खान-पान: कैफीन, शराब और मीठे पेय पदार्थों से बचें।
  • हल्के कपड़े पहनें: सूती और ढीले कपड़े पहनें। सूती व आरामदायक वस्त्र का चयन करे ताकि शरीर को ठंडा रहने में मदद मिले।
  • शारीरिक गतिविधि: कसरत व शारीरिक गतिविधि करते रहे। स्वस्थ तनाव प्रबंधन के तरीके जानें।


इनका भी रहे ध्यान

यदि चक्कर आना, सिरदर्द, या जी मिचलाने जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत किसी ठंडी जगह पर जाएं और डॉक्टर से सलाह लें। 


Note: इसका मकसद सिर्फ़ जानकारी देना है। स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह या जांच के लिए, किसी पेशेवर डॉक्टर से बात करें।

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