हार्ट की बीमारी से बचने के लिए लाखों लोग रोज एस्पिरिन दवा की डोज लेते हैं। लेकिन कई क्लिनिकल ट्रायल से पता चलता है कि यह आदत सभी के लिए सही नहीं है।
रोज एस्पिरिन लेना लाभप्रद है?
नहीं, अमेरिका के प्रिवेंटिव सर्विसेज टास्क फोर्स के अनुसार 60 साल या उससे अधिक उम्र के ऐसे वयस्कों में, जिन्हें कभी दिल का दौरा या स्ट्रोक नहीं हुआ, पहली बार दिल की बीमारी से बचाव के लिए लो-डोज एस्पिरिन शुरू करने की सलाह नहीं दी जाती। 40-59 साल की उम्र में भी केवल उन्हीं लोगों के लिए इस पर विचार करने को कहा गया है, जिनका अगले 10 साल में हार्ट डिजीज का रिस्क 10% से ज्यादा हो लेकिन डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
किन्हें रोज एस्पिरिन जरूरी है?
हार्ट अटैक, इस्केमिक स्ट्रोक और कार्डियोवेस्कुलर डिजीज के मरीजों के लिए रोजाना एस्पिरिन बीमारी के घातक होने से बचाने में कारगर है। ट्रायल में पाया गया कि ऐसे मरीजों के लिए 81 मिलीग्राम रोजाना की कम खुराक 325 मिलीग्राम की ऊंची खुराक का असर एक समान है।
रोज एस्पिरिन के खतरे क्या हैं?
एस्पिरिन प्लेटलेट्स को चिपकने से रोकती है, जिससे खून के थक्के कम बनते हैं। इससे हार्ट अटैक का जोखिम कम हो सकता है, लेकिन यही असर गंभीर ब्लीडिंग का खतरा भी बढ़ा देता है। बुजुर्गों पर अध्ययनों में पाया गया कि एस्पिरिन सेट-आंत और अन्य ब्लीडिंग की संभावना बढ़ती है। स्त्रोत- अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन, न्यूयॉर्क टाइम्स ।
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