Thursday, January 1, 2026

Health news: वात-पित्त-कफ दोषों को कैसे करें संतुलित

आज का विषय बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका सीधा संबंध हमारी पाचन क्रिया (डाइजेशन) से है। पाचन अच्छा रहेगा तभी शरीर बीमारियों से बचेगा और हम लंबे समय तक स्वस्थ रहेंगे। आयुर्वेद में भोजन को औषधि माना गया है और सही तरीके से पकाया गया भोजन ही शरीर को बल देता है।


आयुर्वेद का पहला नियम है- शांत और प्रसन्न मन से खाना बनाना, गुस्से, तनाव या उदासी में बनाया गया भोजन शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। जब आपका मन उदास है चिड़चिड़ापन या गुस्सा आया है तो थोड़ा सा रुक जाए मन को शांत होने दे फिर खाना बनाए खाना बनाते समय भी आप भजन लगा सकते हैं या फिर कोई मंत्र ओंकार जंप आप सुन सकते हैं ताकि आपका मन शांत रहे खाना बनाते समय भजन, मंत्र या ओंकार का जप मन को शांत करता है।


देशसात्म्य का पालन करें- जिस क्षेत्र में रहते हैं, वहीं का स्थानीय भोजन सबसे उपयुक्त होता है। हम जिस देश में जिस प्रदेश में रहते हैं वहां का जो लोकल फूड है वो हमारे लिए बेस्ट है इसी को आयुर्वेद में देश सात में कहा जाता है इसको एक उदाहरण लेके समझते हैं अगर आप नॉर्थ में रहते हैं तो वहां पे सरसों की उपज होती है आपके लिए सरसों का तेल बेस्ट रहेगा क्योंकि इसकी तासीर गर्म है और वहां का वेदर ठंडा है जो लोग साउथ में रहते हैं वहां का वेदर गरम है इसलिए नारियल का तेल यूज किया जाता है जिसकी तासीर ठंडी है लेकिन अगर हम इन सभी तेलों को छोड़ के कोई ऑलिव ऑयल जैसे तेल यूज करें जो हमारे लिए बने ही नहीं है हमारे आसपास उसकी उपज ही नहीं है तो यह हमारे लिए सही नहीं है इसी तरह से अनाज दाले सब्जियां फल इन सभी का चयन आपको करना है।


पारंपरिक भोजन अपनाएं- हर परिवार की अपनी भोजन परंपरा होती है, जो पीढ़ियों से शरीर को सूट करती आई है। सोशल मीडिया ट्रेंड या अचानक डाइट बदलाव से बचना चाहिए, फूड ज्यादा हेल्दी बनाने के लिए  न्यूट्रिशस बनाने के लिए अगर आप बहुत सारी चीजों का कॉमिनेशन कर रहे हैं जैसे फिर मल्टीग्रेन आटे की रोटी मिक्स दाले मिक्स सब्जियां सुबह-सुबह बहुत सारे सीड साथ में मिला के अगर आप खा रहे हैं तो इसमें देखिए हर एक चीज अच्छी है पर हर एक की अपनी एक प्रकृति होती है।


अनावश्यक मिश्रण से बचें- बहुत ज्यादा अनाज, दालें या बीज मिलाकर खाना पाचन को कमजोर करता है। एक समय में एक अनाज और एक दाल लेना बेहतर है।


कच्चा भोजन सीमित रखें- सलाद और अंकुरित अनाज सीमित मात्रा में ठीक हैं, लेकिन लंबे समय तक कच्चा भोजन वात दोष बढ़ा सकता है, हल्का पकाया हुआ भोजन अधिक पाचक होता है।  


छह रसों वाला आहार लें- भोजन में मीठा, खट्टा, नमकीन, तीखा, कड़वा और कसेला ये छह स्वाद शामिल होने चाहिए, इससे वात-पित्त-कफ का संतुलन बना रहता है।


दाल पकाने का सही तरीका- दाल को भिगोकर, घी या तेल का छौंक लगाकर मसालों के साथ पकाएं, एक समय में एक ही दाल खाएं, दालों को मिलाने से बचें। 

Disclaimer : All rights including copyright belong to the original owner and we do not claim ownership of the content.