Wednesday, December 31, 2025

Health news: ऋतु अनुसार करें रसों का संतुलित सेवन, तभी बढ़ेगा शरीर में बल-पोषण

आयुर्वेद के अनुसार भोजन का प्रभाव केवल पेट भरने तक सीमित नहीं होता बल्कि वह शरीर की शक्ति दोषों के संतुलन और मन की स्थिति को भी प्रभावित करता है। आयुर्वेद में छह प्रकार के रस बताए गए हैं, मधुर, अम्ल, लवण, कटु तिक्त और कषाय। इन सभी रसों का संतुलित सेवन ही पूर्ण पोषण और बल प्रदान करता है। जानते हैं इनके बारे में


मधुर रसः (तृप्ति और बल का आधार)

मधुर रस स्वभाव से स्निग्ध और शीतल माना गया है। दूध, दूध. घी, गंन्ना, शहद, चावल, गेहूं, अंगूर, सेब और अनार जैसे पदार्थ मधुर रस प्रदान करते हैं। यह रस शरीर को तृप्ति देता है बल और ओज बढ़ाता है तथा थकान दूर करता है। अधिक मात्रा में सेवन करने पर कफ की वृद्धि, मोटापा और मधुमेह जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।


कटु रसः (शोधन और जागरण का रस)

तीखा स्वाद देने वाले पदार्थ जैसे लाल मिर्च, कालीमिर्च, अदरक, लहसुन और लौंग कटु रस प्रदान करते हैं। यह कफ को कम करता है अग्नि को तीव्र करता है और शरीर की शुद्धि में सहायक होता है। आम व्यक्ति इसे मुंह में जलन और तीखेपन से पहचान सकता है। अधिक सेवन से वान और पित्त दोष बढ़ सकते हैं।


अम्ल रसः (रुचि-पाचन जाग्रत करने वाला)

अम्ल रस खट्टे स्वाद सें पहचानी जाता है। नींबू, इमली, दही, छाछ, कच्चा आम, करौंदा और खमीर उठे पदार्थ अम्ल रस वाले होते हैं। यह रस अग्नि को बढ़ा भोजन के प्रति रुचि बढ़ाता है। उचित मात्रा में यह पाचन को सुदृढ़ करता है किंतु अधिक सेवन से जलन सूजन और एसिडिटी बढ़ा सकता है।


तिक्त रसः (शुद्धि-हल्केपन का अनुभव)

कड़वे स्वाद वाले पदार्थों को तिक्त रस की श्रेणी में शामिल किया गया है। इसमें करेला नीम, चिरायता और कुटकी जैसे पदार्थों को शामिल "किया गया है। यह शरीर की अशुद्धियों को दूर करता है * कफ कम करता है और त्वचा के लिए लाभकारी माना गया है। यह रस मुंह में लेते ही कड़वाहट से पहचाना जाता है।


लवण रसः (स्वाद और संतुलन का माध्यम)

नमकीन स्वाद वाला लवण रस समुदी नमक सेंधा नमक और काला नमक से प्राप्त होता है। यह लार स्त्राव बढ़ाता है। भोजन को स्वादिष्ट बनाता है और पाचन में सहायता करता है। अधिक मात्रा में लेने पर यह पित्त और कफ को बढ़ा सकता है तथा जलधारण की समस्या उत्पन्न कर सकता है। इसे नमकीन स्वाद से पहचाना जाता है।


कषाय रसः (संकोचन-स्थिरता देने वाला)

कषाय रस कसैला होता है और मुंह में सूखापन लाता है। आम की गुठली, अर्जुन की छाल, बहेड़ा और हरड़ इसके उदाहरण हैं। यह स्राव को रोकता है तथा कफ और पित्त को संतुलित करता है। इसलिए मौसम के अनुसार अपनी थाली में सभी रसों को संतुलित मात्रा में शामिल करें।


रसायन का सेवन करने से पहले ध्यान दें

  • रसायन का सेवन करते समय खट्टी चीजों से परहेज करना चाहिए। 
  • च्यवनप्राश, शिलाजीत, अवश्गंधा, आंवला और गिलोय जैसी अन्य रसायन औषधियों भी हैं जिनका उपयोग सामान्य स्वास्थ्य के लिए किया जाता है। 
  • रसायन का प्रयोग सुबह खाली पेट या बीमारी के अनुसार भोजन से पहले, बीच में या बाद में लें। 
  • शहद, घी, दूध या पानी के साथ लें, हमेशा विषम मात्रा में लें जैसे एक चम्मच शहद और दो चम्मच घी। 
  • उम्र और बीमारी के अनुसार आमतौर पर रसायन 3-5 ग्राम यानी आधा चम्मच से शुरू करें।


अवधिः- रसायन सेवन का लाभ तभी मिलेगा जब उसका चिकित्सक की सलाह अनुसार कम से कम तीन महीने तक सेवन किया जाए।


सामान्य रसायन चूर्ण का प्रयोग ऐसे करें:-  सामान्य रसायन चूर्ण जैसे गिलोय, गोखरू, आंवला का प्रयोग सुबह खाली पेट करना चाहिए। शुरुआत 5 ग्राम से करें, धीरे-धीरे 20 ग्राम तक मात्रा बढ़ा दें। इस 20 ग्राम चूर्ण में 20 ग्राम देसी गाय का घी और पुराने शहद में अच्छी तरह मिलाएं। ध्यान रखें कि शहद और घी की मात्रा आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह से दोष के अनुसार हो। मिश्रण को चाटकर खाएं, ऊपर से गुनगुना पानी पीएं। इसे खाने के बाद 2-3 घंटे कुछ न खाएं।

Disclaimer : All rights including copyright belong to the original owner and we do not claim ownership of the content.