Bhopal: बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में सोमवार को हुई मोहन सरकार की पहली डेस्टिनेशन कृषि कैबिनेट को लेकर कांग्रेस ने कई सवाल उठाए। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि किसानों को उपज के उचित दाम और खाद-बीज नहीं मिल रहा। किसान की औसत मासिक आय केवल 8,339 है, जो राष्ट्रीय औसत से लगभग दो हजार रुपये कम है। आदिवासी पलायन को मजबूर हैं। प्रदेश में सर्वाधिक अत्याचार आदिवासियों पर ही हो रहे हैं।
प्रदेश कांग्रेस के दोनों वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि सरकार किसानों को केवल वोटबैंक के रूप में देखती है। चुनाव के समय गेहूं, सोयाबीन और धान का समर्थन मूल्य बढ़ाने का वादा किया गया था लेकिन यह घोषणा से अधिक कुछ साबित नहीं हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी दबाव में ट्रेड डील की, जिससे सस्ते कृषि उत्पाद देश में आएंगे और प्रदेश के किसानों को नुकसान होगा। प्राकृतिक आपदाओं, ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को फसल बीमा और मुआवजे का भुगतान समय पर नहीं हो रहा है। खाद, बीज, डीजल और बिजली महंगी हो चुकी है, जिससे लागत बढ़ रही है। बड़वानी
की मुख्य फसलें कपास, सोयाबीन, मक्का, केला और पपीता हैं। यदि इनसे जुड़े उद्योग लगाए जाते, तो आदिवासी किसानों को लाभ मिलता लेकिन जिले में कपास उद्योग को लगभग समाप्त किया गया। अत्याधिक मंडी टैक्स और अन्य कारणों से व्यापार महाराष्ट्र और गुजरात चला गया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ सीजन 2025 में बड़वानी जिले के 30,324 किसानों ने नामांकन किया और कंपनियों को लगभग 52 करोड़ रुपये प्रीमियम मिला लेकिन सिर्फ 22 किसानों को दो लाख का क्लेम देकर मामला खत्म कर दिया गया।
सिंघार ने सवाल उठाया कि नागलवाड़ी को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने धार्मिक पर्यटक स्थल बनाने की नहीं हुई। प्रदेश से दो लाख घोषणा की थी, जो आज तक पूरी बच्चियां लापता बताई जा रही हैं, इनमें 50-58 हजार संख्या आदिवासी बच्चियों की है? सरकारी नौकरियों में आदिवासी वर्ग के पद खाली हैं। छात्रवृत्ति का समय पर भुगतान नहीं हो रहा। सरकार इन सब स्थितियों पर श्वेत पत्र जारी करे।
