उत्तर प्रदेश के बदायूं के पिपरील गांव में तेहरवीं कार्यक्रम में जिस भैंस के दूध से रायता बनाया गया था, वह तेहरवीं के बाद मर गई। लागों को जब पता चला कि भैंस को कुछ दिन पहले कुत्ते ने काट लिया था और वह रैबीज से संक्रमित हो गई थी, फिर तो तेहरवीं में आए करीब 200 लोग रैबीज होने के डर से इंजेक्शन लगवाने स्वास्थ्य केंद्र पहुंच गए।
बताया जा रहा हे कि कुछ दिन पहले भैंस को एक पागल कुत्त ने काट लिया था। जिन लोगों ने रायता पिया था उनमें दहशत फैल गई। बीमार होने के डर से वह स्थानीय सीएचसी में रेबीज की वैक्सीन लगवाने पहुंच गए।
इस संबंध में विशेषज्ञों का कहना है कि रेबीज का वायरस गर्मी के प्रति संवेदनशील होता है। रायता बनाने की प्रक्रिया में दूध को उबाला गया है, इसलिए संक्रमण का खतरा नहीं है। रैबीज मुख्यरूप से संक्रमित की लार से फैलता है, दूध या रक्त से नहीं।
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