सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा हाल ही में जारी किए गए 'मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम, 2026' के नए मसौदे (ड्राफ्ट) में इस पाबंदी को दोबारा शामिल किया गया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस प्रारूप पर कड़ा संज्ञान लेते हुए इसे तुरंत निरस्त करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही इस विवादित प्रावधान वाले ड्राफ्ट को सरकारी पोर्टल से भी तत्काल प्रभाव से विलोपित (हटा) कर दिया गया है।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा तैयार किए गए मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम 2026 के प्रारंभिक ड्राफ्ट में यह शर्त रखी गई थी कि 26 जनवरी 2001 के बाद दो से अधिक जीवित संतान होने पर उम्मीदवार शासकीय सेवा के लिए अयोग्य होंगे। इस नियम के सार्वजनिक होते ही इसका विरोध शुरू हो गया था, क्योंकि सरकार पूर्व में इस पाबंदी को हटाने की सैद्धांतिक सहमति दे चुकी थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हस्तक्षेप के बाद अब इस पाबंदी वाले प्रावधान को हटाकर एक नया और संशोधित प्रारूप विधिवत तैयार किया जाएगा।
मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम पड़ोसी राज्यों के समान ही है। इससे पहले राजस्थान और छत्तीसगढ़ की सरकारें भी अपने यहाँ सरकारी नौकरियों से दो बच्चों की इस अनिवार्य पाबंदी को पूरी तरह समाप्त कर चुकी हैं। मुख्यमंत्री के इस संवेदनशील निर्णय से अब राज्य में सभी उम्मीदवारों को बिना किसी संतान-संख्या की बाध्यता के रोजगार और पदोन्नति के समान अवसर प्राप्त हो सकेंगे।

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