कटनी/जबलपुर: मध्यप्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) ने दुर्लभ और संकटग्रस्त वन्यजीव पैंगोलिन के अवयवों की तस्करी के एक बड़े मामले का भंडाफोड़ किया है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) के निर्देशों और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो से मिली सटीक सूचना के आधार पर एसटीएसएफ की क्षेत्रीय इकाई जबलपुर ने 8 जून 2026 को कटनी जिले के झिन्ना पिपरिया-खमतरा-ढीमरखेड़ा रोड पर घेराबंदी कर चार शातिर तस्करों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
लाखों की शल्क और वाहन जब्त
पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से एसटीएसएफ ने लगभग 5 किलोग्राम पैंगोलिन की शल्क (स्केल) बरामद की है। इसके साथ ही तस्करी में इस्तेमाल की जा रही एक मोटरसाइकिल और एक चार पहिया वाहन भी जब्त किया गया है। इस पूरे मामले में वन अपराध प्रकरण क्रमांक 237/24 दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
अलग-अलग जिलों के रहने वाले हैं आरोपी
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान देवीदीन विश्वकर्मा (निवासी डिंडोरी), कृपाल सिंह मरकाम (निवासी उमरिया), मुकेश कुमार विश्वकर्मा (निवासी उमरिया) और विजय कुमार ग्राय (निवासी जबलपुर) के रूप में हुई है। ये आरोपी क्षेत्र में दुर्लभ वन्यजीवों के अंगों की अवैध खरीद-फरोख्त के नेटवर्क में सक्रिय थे।
रिमांड पर लेकर पूछताछ जारी
आरोपियों को एसटीएसएफ के लिए अधिकृत विशेष न्यायालय, जबलपुर के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से कोर्ट ने उन्हें वन रिमांड पर भेज दिया है। एसटीएसएफ अब आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि इस अवैध व्यापार से जुड़े मुख्य सरगना और अंतरराष्ट्रीय कड़ियों का पता लगाया जा सके।
गैर-जमानती अपराध और सख्त सजा
बता दें कि पैंगोलिन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (संशोधित 2022) की अनुसूची-1 के तहत सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त संकटग्रस्त जीव है। पारिस्थितिक तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण इस जीव का अवैध शिकार और व्यापार एक गंभीर, संज्ञेय एवं गैर-जमानती अपराध है। इस कानून के तहत दोषियों को न्यूनतम 3 वर्ष से लेकर अधिकतम 7 वर्ष तक के कठोर कारावास और कम से कम 25 हजार रुपये के जुर्माने की सजा हो सकती है।

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