स्वास्थ्य मंत्रालय ने बच्चों में टाइप 1 मधुमेह (Diabetes) के शुरुआती निदान और मुफ्त इलाज के लिए व्यापक दिशानिर्देश (Guidance Document) जारी किए हैं। इसके तहत 0-18 वर्ष तक के बच्चों की स्कूलों/सामुदायिक केंद्रों पर स्क्रीनिंग, निशुल्क इंसुलिन, ग्लूकोमीटर, स्ट्रिप्स और जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ उपचार सुनिश्चित किया जाएगा।
बाल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में संपन्न सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण में सर्वोत्तम प्रथाओं पर राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में बच्चों में मधुमेह पर मार्गदर्शन दस्तावेज जारी किया। इस दस्तावेज का उद्देश्य शौचालय (Toilet), प्यास (Thirsty), थकान (Tired), और पतलापन (Thinner) जैसे लक्षणों के प्रति जागरूकता, लाइफटाइम इंसुलिन, ग्लूकोमीटर और नियमित फॉलो-अप मुफ्त, जन्म से 18 साल तक के बच्चों के लिए स्कूलों और सामुदायिक केंद्रों पर नियमित जांच, परिवार और शिक्षकों को इंसुलिन और आपातकालीन प्रबंधन का प्रशिक्षण शामिल हैं। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य वित्तीय बोझ को कम करना और मधुमेह से पीड़ित बच्चों के लिए निर्बाध उपचार सुनिश्चित करना है।
यह कदम बच्चों में मधुमेह की समय पर पहचान और प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा प्रदान करता है।
