Monday, February 9, 2026

योगी सरकार का मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस, घटा आमजन का स्वास्थ्य खर्च

उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सोमवार को विधानसभा के बजट सत्र में वर्ष 2025-26 की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी। रिपोर्ट में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए किए गए प्रयासों और उपलब्धियों का विस्तृत ब्योरा दिया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, प्रदेश सरकार चिकित्सा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण के विस्तार और आमजन को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।


स्वास्थ्य क्षेत्र को अब तक का सबसे बड़ा बजट आवंटन- वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुल 46,728.48 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है, जो अब तक का सर्वाधिक आवंटन है। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश सरकार ने चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। बजट में अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, चिकित्सा शिक्षा संस्थानों, स्वास्थ्य अवसंरचना और जनकल्याणकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त धनराशि सुनिश्चित की गई है।


राष्ट्रीय औसत से अधिक स्वास्थ्य बजट- आर्थिक सर्वेक्षण में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ‘स्टेट फाइनेंस: ए स्टडी ऑफ बजट ऑफ 2025-26’ रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य बजट कुल बजट का 6.1% रहा, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। यह दर्शाता है कि प्रदेश सरकार अन्य राज्यों की तुलना में स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक निवेश कर रही है। साथ ही, सरकार द्वारा वहन किए जाने वाले स्वास्थ्य व्यय में निरंतर वृद्धि हुई है, जबकि आम लोगों के आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंडिचर में कमी दर्ज की गई है।


सरकारी निवेश बढ़ा, आमजन पर बोझ घटा- आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार अस्पतालों, क्लीनिकों, टीकाकरण, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों और स्वास्थ्य अवसंरचना में अधिक बजट आवंटन से सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में सुधार हुआ है। इसका सीधा लाभ आम नागरिकों को मिला है और स्वास्थ्य संबंधी खर्च का बोझ कम हुआ है।


संस्थागत प्रसव में उल्लेखनीय वृद्धि- रिपोर्ट में बताया गया है कि जननी सुरक्षा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसी योजनाओं के प्रभाव से प्रदेश में संस्थागत प्रसव में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2021-22 में 34.74 लाख संस्थागत प्रसव हुए थे, जो वर्ष 2024-25 में 18.02% की वृद्धि के साथ बढ़कर 41 लाख हो गए। वर्ष 2024-25 में कुल प्रसव का 96.12% संस्थागत रहा। इसके विपरीत, गैर-संस्थागत प्रसव वर्ष 2021-22 में 3.35 लाख से घटकर वर्ष 2024-25 में 50.44% की कमी के साथ 1.66 लाख रह गए।


टीकाकरण में भी बड़ी उपलब्धि- आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार प्रदेश के सभी जनपदों में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को 12 जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए निःशुल्क टीकाकरण किया जा रहा है। नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत वर्ष 2024-25 में 100% बच्चों का पूर्ण टीकाकरण किया गया। वहीं, वर्ष 2025-26 में सितंबर 2025 तक 28.62 लाख बच्चे, यानी लगभग 98%, पूर्ण रूप से प्रतिरक्षित किए जा चुके हैं।


मातृ एवं शिशु मृत्यु दर घटाने पर जोर- आर्थिक सर्वेक्षण में नवजात, शिशु और बाल मृत्यु दर कम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू), न्यूट्रीशन रिहैबिलिटेशन सेंटर, गृह आधारित नवजात शिशु देखभाल कार्यक्रम (एचबीएनसी) और कंगारू मदर केयर (केएमसी) जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन पहलों से कमजोर और कुपोषित बच्चों को विशेष देखभाल मिल रही है, जिससे प्रदेश के स्वास्थ्य संकेतकों में लगातार सुधार हो रहा है।

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